कैंसर का खतरा जिस तेजी से आजकल बढ़ रही है इसका सर्व प्रमुख कारण आहार विहार का प्रदुषण, भोजन में अम्ल और मधुर रसो का अति सेवन है ! दूसरी ओर धुम्रपान व गुटखा पण मशाला का सेवन फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण है और मौतों का सबसे बड़ा कारण है ! वैसे तो कैंसर के बहुतेरे कारण है ! अब कुछ कारण आपके समक्ष रख रहे है जैसे की सूर्य के प्रकाश में अधिक देर तक रहने से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है ! एस्बेस्टस का काम करने वाले मजदूरों में फेफड़े के एक अजीब प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है , जिसे "मिजोथिलिओमा" कहते है !
विकिरनें, चारकोल, खाने से बसा की अत्यधिक मात्रा, सेक्रिन तथा कीटनाशक दबाईयां व रासायनिक ( हर्बीसाइड व पेस्टीसाइड ) में पाए जाने वाले रासायनों या ऐसी चीजें जिनसे हममे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, इसे कर्सिनोजन कहा जाता है !
एक रिपोर्ट के अनुसार चिमनी से निकलने वाले धुंए से अंडकोष के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है , हम पार्यावरण से और अधिक डरने लगे है ! जैसा की हम सब जानते है की हमारा शरीर पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक रासायनों का सामना कर रहा है !

और यही वर्तमान में सबसे अधिक कैंसर से मौत का कारण है ! कैंसर से लड़ने के लिए आयुर्वेदिक इलाज सबसे बेहतर विकल्प , जिसका किसी भी प्रकार को शरीर पर दुष्प्रभाव नहीं होता है ! व्यक्ति के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देता है जो किसी भी प्रकार के रोग से लड़ने में समर्थ होता है ! और रोगियों के हालात में निरंतर सुधार होता रहता है ! अतः एलोवेरा व पौष्टिक पूरक का नियमित सेवन से कैंसर जैसे असाध्य रोग पर नियन्त्र कर सकते है ! कैंसर जो साक्षात् मौत है उस पर हम विजय पा सकते है !
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"एलोवेरा " दिल को रखें दुरुस्त - एलोवेरा जेल से !
सर्दियों में भी रखें त्वचा जवाँ - एलोवेरा युक्त उत्पाद से ! !
शोधों से साफ़ पता चला है कि ताजे फल ,अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां ( सलाद ) एवं काष्ट्ज फल में विकाश ,वृद्धि एवं जीवन संचालन पूर्णता प्राप्त कर केवल रोग से ही रक्षा नहीं कि जा सकती बल्कि मन में प्रसन्नता, शरीर में शक्ति एवं आत्मा में आनन्द की अनुभूति के साथ यौन शक्ति उन्नत की जा सकती है !
ताजे फल यानि की अगर मौसमी फल का सेवन करें तो शरीर के लिए ज्यादा फायदा मिलता है !
काष्ट्ज फल यानि बादाम, काजू, मूंगफली इत्यादि किशमिश, अंजीर छुआरा भिगोकर ही सेवन करना चाहिए !
तांवे या चांदी के वर्तन में रात का रखा हुआ पानी चार गिलास तक प्रातः शौच जाने से पूर्व ही पीना चाहिए | इसका सेवन से व्यक्ति अनेकानेक रोगों से मुक्ति मिल सकता है ! तो वासी पानी तांवे के वर्तन के खूब पिए और जिन्दगी को रोगमुक्त करें ! इस तरह लगातार सेवन से आंतो की सफाई व कब्ज से छुटकारा मिलेगा ! मतलब उदर के किसी भी प्रकार के विकारों से स्थायी रूप से लाभ मिलेगा |
व्यायाम से शरीर में हलचल होती है जिससे ब्लड सुचारी रूप से पुरे शरीर दौड़ जाती है | व्यायाम हरेक प्रकार के शारीरिक समस्या में लाभदायक होता है | नियमित अभ्यास से शरीर की बेचैनी, अस्थिरता, आलस्य एवं मोटापा में कमी होती है |
विश्व में व्यायाम ही एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे अन्तः-स्त्रावी ग्रन्थियों या हार्मोन बनाने वाली ग्रन्थियों को प्रभावित करती है | इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता , शांति, आनन्द एवं दीर्घायु प्राप्त होती है | इससे स्नायु दुर्बलता दूर हो जाती है एवं याददाश्त बढ़ जाती है | दूरदर्शिता, रचनात्मक सोच एवं समस्याओं को हल करने की कुशलता आ जाती है !
वर्तमान परिवेश यानि भागती दौड़ती जिन्दगी में अगर कुछ है जिससे आप स्वस्थ्य जीवन को जी सकते है तो वो है "एलोवेरा जेल" ! जिसके नियमित सेवन से आँतों की सफाई, शरीर के अन्दर "toxin " को बाहर कर देता है | आँतों की सफाई तो ऐसे हो जाता है जैसे की दीपावली में घर की सफाई होती है | फिर उसमे समाहित गुणों के भंडार शरीर को संचालन के लिए बेहद जरुरी है !
अतः एलोवेरा अगर दैनिक भोजन के सूचि में है तो परेशान होने की जरुरत नहीं वो सब कुछ आपके शरीर को मिलेगा जो शरीर को चाहिए !
याद रखें :- प्राकृतिक चिकत्सा एवं व्यायाम एक ही गाडी के दो पहिये है इनको छोड़कर अन्य कोई भी चिकत्सा पद्धति पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान नहीं कर सकती !
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अगर आप बिमारी के वजह से निराश हो चुके है !
> अगर आपका रोग ठीक होने के वजाय बढ़ता जा रहा है !
> अगर आप दबाओं के साथ जीने को मजबूर है ! मतलब दबाये खा-खाकर तंग आ गए है !
> अगर ज्यादा दिनों से बीमारी के कारण निराशा बढ़ चुकी है !
तो आइये और तुरन्त प्राकृतिक चिकित्सा के साथ अपने जीवन को रोग मुक्त करें ! हमारे पास है दुनिया के प्रतिष्ठित एलोवेरा प्रोडक्ट्स जो ऐसी किसी भी प्रकार के बीमारी के लिए अचूक इलाज सवित हो रही है | ये आपके घर के लिए वैद्य की तरह काम करेगा | बस यूँ ही समझ लीजिये " एलोवेरा है जहाँ, तंदुरुस्ती है वहां " | पर एलोवेरा जेल भी ब्रांडेड ही होनी चाहिए न की कोई भी ले ले उसका कोई फायदा नहीं होगा |
बोतल पर जरुर देखें - सिल ऑफ़ अप्रूवल , जैसे international aloe science council ( IASC ) , Kosher Rating , Cruelty free, islamic seal of approval. आदि , ये सब प्रमाणिकता जेल के विश्वसनीयता को दर्शाती है |
मनुष्य प्राकृतिक चिकित्सा से स्वयं के डॉक्टर बन सकते है | छोटी छोटी बाते को अपने जीवन में अपनाकर जिन्दगी को सुखी बना सकते है |
प्राकृतिक चिकित्सा सिर्फ बीमार लोगों के लिए उपचार ही नहीं करती बल्कि जिन्दगी को सही मायने में जीने की कला भी सिखाती है |
इस चिकित्सा का फायदा यह भी है कि मनुष्य के रोग जड़ से समाप्त करता है और साथ में शरीर के अन्दर दुसरे विकार को भी पूरी तरह से निकाल देती है क्योंकि दबाएँ नहीं खानी पड़ती | प्राकृतिक चिकित्सा मनुष्य के लिए दोहरा कार्य करती है | पहला कार्य रोगी को जल्द से जल्द निरोग करता है, दूसरा कार्य भविष्य में रोग कि पुनरावृति न हो इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित भी करती है | असाध्य से असाध्य रोगी पर जहाँ दाबाईयां कोई सही असर नहीं कर रही हो, वहां प्राकृतिक चिकत्सा से इलाज सफल और संभव है |
जब सभी इलाज असफल हो जाते है तब भी प्राकृतिक चिकित्सा मनुष्य के प्राण व स्वास्थ्य बचा सकती है |
दबाईयां आखिरी इलाज होना चाहिए न की पहला | ( महात्मा गाँधी )
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जिसका मुझे था इंतज़ार, जिसके लिए दिल था बेकरार !!
वो घडी आ गई, आ गई , आ ...................................... !!!!
जी मैं आज कोई गाना नहीं गाने वाला हूँ | दरअसल बात ही कुछ ऐसी ही की बस गुनगुनाने का दिल कर रहा है | यह बहुत ही बड़ी खबर है | मेरे जैसे कई लोगों का यह बहुत बड़ा सौभाग्य की बात है | आज जब से नेट के माध्यम से पता चला की पटना में 11 Nov. दिन शुक्रवार को फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स का अपना प्रोडक्ट्स सेंटर खुलने जा रही है, मन के अन्दर खुशियाँ हिचकोले लेने लगे है | आज प्रतीत हो रहा है जैसे नए उर्जा का मन में संचार हो गया हो |
अब जो डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए दिल्ली के तरफ आने से परहेज करते थे दरअसल वो भी जम के खरीददारी कर पायेंगे | इस सन्दर्भ में अब तक कई लोगों से मेरी बात हो चुकी है, सब के सब बहुत ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे है |
उनके जुवान से बस एक ही शब्द निकलता है शुक्रगुजार है हम ऍफ़.एल.पी दिल्ली वालों का जिन्होंने हम लोगों पर भरोसा किया और अब हमारी वारी है उन्हें निराश तो बिलकुल नहीं करेंगे|पर उनके कसौटी पर जरुर खरा उतरने का प्रयास करेंगे |
दरअसल बिहार एक बहुत बड़ा राज्य है | लोग गाँव गाँव से यहाँ सेमिनार देखने के लिए आते थे | देखकर बहुत ज्यादा साकारात्मक सोच के साथ वो अपने अपने घर को जाते और सिर्फ वही सवाल होता की प्रोडक्ट्स हमें कहाँ और कितने दिनों में मिल जायेगा | जबाब में थोडा हम अटक जाते थे क्योंकि दिल्ली से प्रोडक्ट्स की खरीददारी फिर कोरियर या ट्रेन से भेजना न सिर्फ उनके लिए कई बार हमारे लिए भी कठिन लगता था | पर अब हम सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर ध्यान देंगे | जिससे की हमारी कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी | प्रयास में लगे हमारे बिहार के लीडर व ऍफ़.एल.पी स्टाफ को हार्दिक अभिनन्दन व धन्यबाद !
परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है | अतः हमें सिर्फ अपना कर्म करते रहना चाहिए बाकि परिणाम परिश्रम के मुताबिक अवश्य मिल जाएगी | विश्व प्रसिद्द एलोवेरा जेल जिसका कोई विकल्प बाजार में उपलब्ध नहीं है | सिर्फ हमारे पास है यानि की फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स के पास | अमृत तुल्य यह प्रोडक्ट्स आपके लिए वाकई अमृत है , बस इनके गुणों के बारे में बारीकी से समझने का प्रयास करे |
ऍफ़.एल.पी ने हमारे लिए पहले ही 85% काम कर दिया है , एक अतुल्य , उच्च गुणों वाली एलो वेरा जेल, मधुमक्खी के द्वारा व अलग अलग जड़ी बूटियों से तैयार किया गया उत्पाद के माध्यम से | बस हमें उनके बारे में ध्यान से समझना है, जो की मात्र 15% काम है |

अगर कोई व्यक्ति उस उत्पाद के बारे में जानकारी ले ले तो निश्चित ही वो जिन्दगी में कभी असफल नहीं हो सकते है | सेहत के साथ-साथ आर्थिक आजादी उन्हें जरुर मिलेगी |
बस लगातार प्रयासरत रहने की आवश्यकता है |
अंत में इसके लिए हम इश्वर का धन्यबाद करते है और साथ में धन्यबाद करते है फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स का जिन्होंने हमारी बात सुनी और बिहार राज्य के पटना में ऍफ़.एल.पी ऑफिस खोलने का निश्चय किया |
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वर्तमान परिदृश्य में यह बुखार बच्चों के लिए साक्षात् काल के सामान है | ज्यादातर यह बीमारी गाँव के बच्चों को संक्रमित कर रही है |
जहाँ जनसुविधा का आभाव है | जहाँ तहां पानी के बहाव है | बच्चे को कीचड़ और पानी के साथ खेलना अच्छा लगता है | गंदगी और जमा हुआ पानी में मच्छरों के जमाबरा होता है | और उसी में आतंकी मच्छर कभी किसी बच्चों को अपना शिकार बना लेती है |
आजकल उत्तर प्रदेश के कई जिला इस बिमारी के प्रकोप से त्रस्त है |
गोरखपुर, कुशीनगर,देवरिया,संत कबीर, बस्ती,सिद्धार्थ नगर इत्यादि ज्यादा प्रभावित है | 1978 से शुरू हुई यह बीमारी, करीब 33 साल होने जा रही है और अनुमानतः अपने देश के कई राज्य में बच्चों के लिए यमराज के रूप में आती है और अपने साथ इलाका के इलाका उठा ले जाती है | एक अनुमान के अनुसार आजतक
करीब 50,000 बच्चों की जान ले चुकी है |
यह इतना खतरनाक है की
30 प्रतिशत बच्चे ही इस बीमारी से बच पा रहे है , और जो अगर बच भी जाते है तो इसे अपाहिज बना दिया जाता है | मतलब साफ़ है की अगर कोई बच्चा इस बीमारी के चपेट में आता है , फिर या तो काल के ग्रास बन जाते है नहीं तो जीवन भर बिकलांग बन कर जीते है | पिछले कुछ दिन समाचार में सुनने आया की यह
बुखार दिल्ली में भी दस्तक दे दी है और कुछ बच्चे यहाँ भी मारे जा चुके है |
देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी जापानी बिमारी का कोई ठोस इलाज़ आजतक नहीं है | जिस बिमारी से लोग 33 साल से जूझ रही है , प्रत्येक साल यह कहीं न कहीं अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती है और गाँव के गाँव अपने आगोश में लेकर चली जाती है - क्या इसके बारे में हम , आप और हमारी सरकार को सोचने की जरुरत नहीं है ?हम अक्सर कैंसर, सुगर हार्ट प्रॉब्लम पर बड़ी बड़ी बाते और दावे करते रहते है | क्या यह किसी कैंसर से कम है ? हमें जागने की जरुरत है और सरकार को भी इस बीमारी को रोकने के लिए समुचित प्रयास करनी चाहिए |
जापान, ताइवान, चीन,हांगकांग और सिंगापूर में यह बीमारी बरी तेजी के साथ फैली थी परन्तु वहां की सरकार और चिकिस्तक के सार्थक प्रयास से इस पर काबू कर लिया गया है |
एक बार यहाँ तक की जापान से इसका वेक्सिन मंगवाया गया था | परन्तु जानकर बड़ा दुःख होगा की कोई सात लाख वेक्सिन में से पाँच लाख ख़राब पाए गए थे | मतलब उसकी एक्सपाइरी डेट खत्म हो गई थी | यह है सरकार की व्यवस्था ! इस बारे में कोई ठोस कदम उठाने की जरुरत है |
बच्चे हमारे देश के भविष्य है - जरुर ख्याल रखें !!!एक बार जरुर कहना चाहूँगा -
एलोवेरा का उत्पाद जरुर बच्चों को दे ताकि ऐसे वैसे बीमारी की ऐसी तैसी | आपके बच्चे की
इम्यून सिस्टम हमेशा दुरुस्त रहेगी कोई भी बीमारी उसे छूने से पहले ही भाग जाएगी |
एलोवेरा का बिट'स न पिचेज हमेशा अपने घर में रखे |
यह आपके घर का वैद्य के रूप में काम करेगा |
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नपुंसकता की समस्या आधुनिक युग में तेजी से वृद्धि हो रही है | इसका अर्थ है व्यक्ति सामान्य यौन सम्बन्ध नहीं बना पाना ,अगर बनाता भी है तो इतने अल्प समय के लिए की वह सम्भोग सम्पन्न नहीं कर सकता | समय से पहले स्खलन या स्खलन में असमर्थता भी इसके लक्ष्ण है | ऐसे पुरुष संतान उत्पति करने लायक नहीं होते है | यदि दम्पति संतान हीन हो तो, पति- पत्नी दोनों का ही जांच होना आवश्यक है | जिससे समस्या का पता लगने पर सही निदान किया जा सके | अक्सर संतान न होने का दोषारोपण ज्यादातर महिला पर ही लगाया जाता है, जबकि यह धारणा बिलकुल बेबुनियाद है इसके लिए पुरुष भी बराबर रूप से जिम्मेदार हो सकते है |
शोधों से पता चला है की लगभग 10 प्रतिशत दम्पति निःसंतान होते है | इनमे से तक़रीबन 50 प्रतिशत महिलाएं और 40 प्रतिशत पुरुष भी जिम्मेदार होते है | 10 प्रतिशत दोनों ही जिम्मेदार होते है | प्रत्येक दम्पति की चाहत देर सवेर संतान की होती है और इच्छा होती है उनके घर भी बच्चों की किलकारियों से गुंजायमान हो जाये | यदि संतान की चाहत रहने पर भी संतान नहीं हो तो वे दुखी व परेशान रहने लगते है | प्रन्तुं एक दुसरे पर दोषारोपण करने से कुछ समाधान नहीं निकलता है | उचित चिकित्सक से परामर्श लेकर जाँच परिक्षण के बाद इलाज करना चाहिए |
अक्सर लोग इस कारण ओझा, तांत्रिक व बाबाओं के चक्कर में पर जाते है जिससे निराशा के अलावा कुछ नहीं हाथ आता है | जबकि उचित इलाज से संतानहीन दम्पति के घर भी खुशियाँ आ सकती है | इसके समाधान से पहले आइये इसके कारण पर रौशनी डाल लेते है |
पिछले दशक में पुरुषों के प्रजनन क्षमता की प्रक्रिया के बारे में जानकारी में तेजी से विकाश हुआ है | आइये जानते है - पुरुषों में नपुंसकता के प्रमुख कारण :-
पुरुषों में नपुंसकता के कारण अनेक प्रकार के रोग भी हो सकते है | अन्तः-स्त्रावी ग्रन्थि से हार्मोन स्त्राव में बदलाव के कारण नपुंसकता हो सकती है | शरीर के स्वस्थ्य रखने, सामान्य प्रक्रियाओं और वीर्य एवं शुक्राणु की सामान्य संरचना और उनकी कार्यक्षमता के लिए अनेक प्रकार के हार्मोन का योगदान होता है |
पिट्यूटरी , थायराइड, एड्रिनल ग्रन्थि के हार्मोन स्त्राव में असंतुलन व मधुमेह रोगीओं, पुरुषत्व हार्मोन ( टेस्टस्टेरान ) के कम स्त्राव के कारण नापुन्क्सकता हो सकती है |
शुक्राशय पेट के अन्दर ही शुक्राणु का निर्माण ( टेस्टीज ) होता है और जन्म से कुछ समय पूर्व या एक वर्ष की आयु के लगभग यह पेट से निचे उतरता है | शुक्राणु के निर्मान के लिए कम तापमान की जरुरत होती है इसलिए यह अंडकोष में मौजूद होता है | वीर्य में शुक्राणु का का अंश लगभग 10 प्रतिशत होता है | शुक्राणु में फिर सहायक प्रजनन ग्रन्थि-प्रोस्टेट, सेमाइनल वेसिकल, कपूर ग्रन्थि के स्त्राव मिलकर वीर्य का निर्माण करते है | इन सहायक ग्रन्थि का स्वरूप और इसके स्त्राव का सामान्य होना भी जरुरी है, क्योंकि यह स्त्राव शुक्राणुओं को सक्रीय रखता है , पोषक तत्व प्रदान करता है , अन्डो के मिलन में सहायक सिद्ध होता है |
वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या तक़रीबन 10 से 20 करोड़ प्रति मिली. होती है | शुक्राणु की वीर्य में विशिष्ट चाल होती है | यदि वीर्य की संख्या सामान्य नहीं है तो भी नपुंसकता आ सकती है | वैसे तो वर्त्तमान में सेक्स के प्रति अरुचि और इसीसे बढ़ते नपुंसकता में जीवन शैली ही सबसे प्रमुख कारणों में से एक है | तनाव ग्रस्त जीवन- थकान, हताश, निराश , किसी अन्य कार्य में ध्यान , घबराहट या मनोवैज्ञानिक सदमा इत्यादि किसी न किसी रूप से व्यक्ति परेशान रहता है | सेक्स जीवन सबसे सुखद अनुभूति में से एक है | स्वस्थ्य जीवन के लिए सेक्स लाइफ स्वस्थ्य होना आवश्यक है | मानसिक परेशानी हो या शारीरिक परेशानी सेक्स जीवन अगर सुखी है तो बहुत कुछ अपने आप स्वस्थ्य हो जाता है |
आज के जीवन शैली का असर यह होता है की शरीर में फ्री रेडिकल का उत्पाद बहुत तेजी से होता है | यदि इनकी मात्रा शरीर में या शुक्राणुओं में बढ़ जाती है तो शुक्राणु क्षतिग्रस्त होने से नपुंसकता आ सकती है | फ्री रेडिकल की मात्रा को शरीर में नियंत्रित करने के लिए अनेक प्रक्रियाएं मौजूद होती है | इनको एंटी-ओक्सिडेंट कहा जाता है | इस प्रकार भोजन में अनेक एंटी-ओक्सिडेंट मौजूद होते है जैसे की विटामिन-'इ ',खनिज लावन इत्यादि | स्वस्थ्य जीवन के लिए फ्री रेडिकल और एंटी-ओक्सिडेंट में संतुलन होना चाहिए | एंटी-ओक्सिडेंट एंजायम की कमी के कारण शुक्राणु कमजोर हो जाते है |
आयुर्वेदिक उपचार व एंटी-ओक्सिडेंट औषधियों के द्वारा नपुंसक पुरुष को स्वस्थ्य किया जाता है |
जिस प्रकार मनुष्य में वीर्य होता है उसी प्रकार वृक्षों में भी उपस्थिति मिलती है | यह वीर्य 'गोंद' के रूप में होता है | जैसे- छुहारे का गोंद, कीकर का गोंद ,बरगद का गोंद इत्यादि | इनका प्रयोग कर शुक्राणु निर्माण एवं उनकी सक्रियता को बढाई जा सकती है | छुहारे का गोंद 10 ग्राम लेकर रात को पानी में भिंगोकर सुबह औटाये हुए गर्म मीठे दूध में मिलकर लगातार 40 दिनों तक सेवन से शुक्राणुओं का निर्माण, सबलता व सक्रियता बढ़ेगी |
कुछ उत्पाद निचे दिए जा रहे है जिसके मदद से शारीरिक शक्ति पुनः पा सकते है :-
1 Aoevera Gel
2Royal Jelly
3 Gin-Chia
4. Pomestin Power
5. Ginkgo Plus
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वर्तमान के भौतिकवादी युग में लोग प्रतिस्पर्धा में तमाम तरह के सुख-सुविधाओं को घर में जुटाने के कारण दिन रात भागते रहते है | ऐसे में एक अच्छी सुख भरी गहरी नींद लोगों से दूर होती चली जा रही है | आज कल लगभग एक चौथाई व्यस्क लोग अनिद्रा रोग से पीड़ित है | भागमभाग वाली जीवन शैली के कारण उनके खान-पान को भी प्रभावित करती है | यहाँ तक की सही तरह से समयानुसार आहार उन्हें नहीं मिल पाता है ,और ज्यादातर लोग फास्ट फ़ूड पर निर्भर रहते है | शारीरिक व मानसिक परेशानियाँ , हाई-ब्लड प्रेशर इत्यादि रोग भी इन्ही की देन है |
अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति रात भर बिस्तर पर करबटें बदलता रहता है | प्रायः ऐसे लोग रात भर गिनती गिनता है, तारे गिनता है , उठकर रात को भी चहलकदमी करता रहता है फिर भी उसे नींद नहीं आ पाती है | इतना कुछ करने के पश्चात् थक हार कर नींद लाने के प्रयास में नींद की गोलियां , शराब व अन्य प्रकार के घातक नशीले पदार्थ का सेवन कर उनके आदी सा हो जाता है | इन सारी स्थितियों के चुंगल में फँसकर व्यक्ति अपने जीवन को दुःख व बीमारियों के भंवर में डुबो लेता है|
नींद नहीं आने के पीछे कई कारण हो सकते है जैसे मानसिक कारणों में ज्यादा थकान, मन में निराशा, असंतुलित आहार, आशंका, डर आदि प्रमुख भूमिका माना जा सकता है | व्यक्ति वर्तमान में मशीनी मानव बन कर रह गया है | काम, काम बस काम , वो इस कदर इस बोझ के तले दबे जा रहे है जैसे कोई जानवर के पीछे उनके मालिक चाबुक लिए खड़े हों और वो बस भगाए जा रहा है | दिशाहीन,विचारशून्य होकर जीवन को एक बोझ जैसे बनाकर बस ढो रहे है |
टेंसन नींद ना आने का सबसे प्रमुख कारण है | शोर-शराबे वाली जीवन शैली, सोने के समय जागना व जागने के समय सोना, शारीरिक व्यायाम व मेहनत से बचना, ज्यादा शराब पीना आदि से भी नींद नहीं आती है |
अगर इस रोग से ज्यादा समय तक पीड़ित रहें तो इसके साथ अनेक प्रकार की बीमारियों का समूह घेर लेती है | तनाव भरी जीवन से शारीरिक व मानसिक परेशानियां बढ़ जाती है | साथ ही घातक बीमारियाँ जिसकी शुरुआत होती है कब्ज़ से और आगे बढ़ते बढ़ते वो डायबिटीज, डिप्रेसन, ब्लड प्रेशर, मोटापा, ह्रदय रोग आदि के रूप धारण कर व्यक्ति के जीवन को मुशीबत में डाल देती है | ऐसे मरीजों में मिर्गी के दौरे भी पड़ने शुरू हो जाते है | और तो और उसके मन में नाकारात्म सोच इस कदर घर कर लेती है की उन्हें आत्म हत्या करने की विचार भी आने लगते है |
रोगी के लक्ष्ण :-
रोगी को हमेशा सिर भारीपन की शिकायत रहने लगती है | लम्बे समय तक नींद सहीं ढंग से न आने के कारण व्यक्ति मानसिक रोगी होकर विक्षिप्त और पागल तक हो सकता है | कब्ज़ के कारण भी नींद नहीं आ सकती है | ऐसे रोगी में एकाग्रता की कमी होती है , स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है | हमेशा शरीर थका-थका, आलस्य, किसी भी काम में मन नहीं लगना आदि भी इनके प्रमुख कारण होते है |
घरेलु उपचार :-
>अनिद्रा रोगी को रात में सोने से पहले बादाम तेल से सिर में मालिश करनी चाहिए , तथा पैरों के दोनों घुटनों तक सरसों के तेल की मालिश अच्छी तरह से करनी चाहिए |
> एक गिलाश दूध में एक चम्मच घी डालकर रात को सोने से पहले पीना चाहिए | घी में सफ़ेद प्याज को भुनकर खाने से भी नींद अच्छी आती है |
> भाँग की हरी पत्तियों को पिस ले तथा इनकी मालिश पैर के तलवों पर करनी चाहिए |
> शाम के वक्त दही में सौंफ चीनी और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी नींद अच्छी आती है |
>सोने से पूर्व दोनों आँखों पर पानी के छींटे मारने चाहिए |
> आजकल की गर्मी के मौसम में शाम को जरुर नहायें और रोयेंदार तौलिये से शरीर को रगड़-रगड़ कर साफ़ करें |
> उबली हुई सब्जियां और फलों के अलावा एक सप्ताह तक कुछ भी न खाएं |
> शहद के साथ बाजरे की रोटी खाने से अच्छी नींद आती है |
औषधीय उपचार :-
Aloe Vera Gel :- इससे शरीर के अन्दर जिसे चिकित्सकीय भाषा में टोक्सिन ( जहर ) कहते है जो आँत के साथ वर्षों से चिपका रहता है जिसके कारण अनेक प्रकार की सम्सयाएं पैदा हो जाती है, सबसे पहले टोक्सिन को शरीर से बहार करेगा | फिर जेल में समाहित पोषक पदार्थ शरीर में कमी होगी उसकी भरपाई करेगी और व्यक्ति करीब करीब पूरी तरह से चुस्त और दुरुस्त हो सकेंगे मात्र कुछ ही महीनो मे !
Fields of Green :- यह गोली के रूप में होता है जिसका सेवन से शारीरिक व मानसिक थकावट दूर होती है | खून की कमी को पूरा करती है और तक़रीबन कई प्रकार के शाक-सब्जियों से मिलने वाली विटामिन इसके मात्र एक गोली से पूरा हो सकता है |
Royal Jelly :- यह भी गोली की तरह ही है जिसे जीभ के निचे रखा जाता है और तुरंत व्यक्ति उर्जायमान महसूस करने लगते है | इसे 'Fountain of Youth' भी कहा जाता है मतलब "जबानी का फब्बाड़ा " यह एक शक्ति शाली टॉनिक के साथ साथ शरीरिक व मानसिक परेशानी में एक अचूक औषधि के तरह काम करती है |
Artic Sea - Omega-3 - ब्लड सम्बंधित समस्या जैसे नस में ब्लड के सुचारू रूप से काम करना, ब्लड के थक्का सम्बंधित, तथा ह्रदय रोगी के लिए यह तो सबसे शक्तिशाली उत्पाद में से एक है | जेली रूप में यह एक कैप्सूल की तरह है जिसका सेवन से ब्लड में उपस्थित कोलेस्ट्रोल को निकाल बहार करता है | ह्रदय रोगी के लिए एक रामवाण औषधि माना गया है |
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एलो मात्र एक पौधा नहीं है, मानो कुदरत ने मानव शरीर के कल्याण के लिए विशेष तौर पर इसे धरती पर लाया हो | जितने गुण एलो वेरा में है ,शायद ही किसी और जड़ी-बूटी में एक साथ पाए जाते है | इसलिए इसे औषधियों का महाराजा माना गया है | कई नाम से इसे लोग पुकारते है , कुछ लोग इसे संजीवनी बूटी तो कुछ लोग इसे साइलेंट हीलर, चमत्कारी औषधि आदि भी कहते है |
एलोवेरा का 5000 साल पुराना इतिहास है | पुराने समय में लोग इससे औषधि के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे है | पवित्र ग्रन्थ रामायण, बाइबल और वेदों में भी इस पौधे की उपयोगिता के बारे में चर्चा की गई है | मिस्त्र की महारानी क्लीवपेट्रा से लेकर महात्मा गाँधी तक इसका इस्तेमाल करके फायदा उठा चुके है | वर्तमान में एलो वेरा का उपयोग अनेक प्रकार के आयुर्वेदिक औषधीय में बहुतायत से हो रहा है | कोई भी वैद्य,चिकित्सक, व हाकिम इनके गुणों को नकार नहीं सकता | इसे कई नाम से जाना जाता है , जैसे हिंदी में ग्वारपाठा, क्वारगंदल,घृतकुमारी, कुमारी या फिर घी-ग्वार भी कहते है |
वर्षों के शोध के बाद पता चला की एलोवेरा के 300 प्रकार के होते है | इसमें 284 किस्म के एलो वेरा में 0 से 15 प्रतिशत औषधि गुण होते है |11 प्रकार के पौधे जहरीले होते है बाकि बचे 5 विशेष प्रकार में से एक पौधा है जिसका नाम एलो बारबाडेन्सिस मिलर है जिसमे 100 प्रतिशत औषधि व दवाई दोनों के गुण पाए गए है |
जिस तरह हमारे यहाँ (AIIMS DELHI ) एम्स दिल्ली को सब जानते है ठीक वैसे ही अमेरिका में लाइंस पौलिंग इंस्टीच्युट ऑफ़ साइंस एंड मेडिसिन न केवल अमेरिका में बल्कि सारे संसार में परिचित है | डॉ. लाइंस पौलिंग जिन्हें दो बार नोबिल पुरुस्कार से से नाबजा गया था |
कई वर्षों के शोध के बाद पता लगाया इस विशेष प्रकार के एलो बारबाडेन्सिस में समाहित गुणों के बारे में | फिर फॉर एवर लीविंग प्रोडक्ट्स इंटरनेशनल के चेयरमान रेक्स मॉन जो की अमेरिकन है उनके सहयोग से एलो वेरा जेल और साथ में कुछ उत्पाद को बाजार में उतारे जो को मानव जाती के लिए चमत्कारी सिद्ध हुए |
एलोवेरा की खास बात यह है की यह अपना आहार वातावरण से लेता है | आज के वातावरण में प्रदुषण ज्यादा है, और एलोवेरा के पत्ते उसे अपने अन्दर सोंख लेता है | पहले के एलो वेरा कुछ हद तक ठीक था क्योंकि पहले हमारे आसपास इतना प्रदुषण नहीं होता था | आसपास इतना प्रदुषण है की हमारे यहाँ के एलोवेरा जेल को पीना स्वस्थ्य के दृष्टीकोण से ठीक नहीं हो सकता है |
ऍफ़.एल.पी 7500 एकड़ जमीन में बिलकुल प्रदूषित रहित तरीके से खेती करके एलो पौधों की फसल तैयार करती है | यहाँ प्रदुषण का इतना ख्याल रखा जाता है की 200 किलोमीटर तक के आसपास के क्षेत्र में कोई पेट्रौल, डीजल वाली गाडी मोटर नहीं चलती और यहाँ तक वहां अन्दर भी जो गाडी वगैरह चलती है, वो बैटरी से चलती है | इस तरह प्रदुषण का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं होता है |
ऍफ़.एल.पी एलोवेरा को ( IASC ) इंटरनेसनल एलो साइंस काउन्सिल से मान्यता प्राप्त सील उत्पाद की शुद्धता और गुणवता को दर्शाती है | 25 -09 -2005 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक आलेख भी छपा था जिसमे एलोवेरा के शुद्धता के लिए सील को अवश्य देख ले | ऐसा एलोवेरा के सम्बन्ध लिखा लेख में लिखा गया था |
इस पौधे की विशेषता यह है की पत्ते को तोड़ने के ठीक तीन घंटे के अन्दर उपयोग कर लेना चाहिए नहीं तो उनमे विद्यमान औषधि + पौष्टिकता के गुण धीरे-धीरे नष्ट हो जाते है | ऍफ़.एल.पी में वैज्ञानिकों की शोध करके इस पौधे के जूस को कुछ जड़ी-बूटी की मदद से इसके जीवन को दो- तिन घंटे से बढाकर चार साल के लिए सुरक्षित कर दिया है |
एलोवेरा जूस कैसे काम करता है ?
एलोवेरा जेल कम से कम 90 -से 120 दिनों के नियमित सेवन से असाध्य कहे जाने वाली बीमारियाँ में लाभ पा सकते है - जैसे Arthritis, Asthma, Diabeties,Heart Problem, High/Low Blood Pressure,Gastric Problem, Constipation, Obesity, Ulcer, Lack of Energy, Thyroid, Kidney Problem, Back Pains, Survical Problem, Parkinson, Colitis, Amoebas, Stress, Tension, Depression, Cholestrol, Pimples, Ladies Problem during pregnancy, Plus all A to Z Problems और तो और Cancer जैसी खतरनाक बीमारी में भी एलो जेल राहत देती है यानि इसके नियमित सेवन से आप हमेशा के लिए तंदुरुस्त रख सकते है |
आप हैरान होंगे की एक एलोवेरा से करीब 220 प्रकार के बीमारियाँ कैसे ठीक हो जाती है ? इससे पहले हम यह जान ले की हमें बीमारियाँ होती क्यों है ? दरअसल हमें जीवित रहने के लिए हवा, पानी और भोजन की आवश्यकत होती है, पहले के समय इसी के सहारे लोग सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहता था क्योंकि पहले वातावरण स्वच्छ था लेकिन आज के वातावरण को देखे तो यह तीनो ही चीजें हमें अशुद्ध मिल रही है |
दूसरा आज का खान-पान,हमारी जीवन शैली ,आधुनिकता की दौड़ में इतनी बदल चुकी है की हमें अपने लिए ही वक्त नहीं होता |आज समोसा, पिज्जा ,बर्गर,पेप्सी,चाउमीन मतलब फास्ट फ़ूड हमारे आहार में शामिल हो चूका है तथा नियमित व्यायाम करने का समय भी नहीं बचा है तो यही सब कारण मिलकर मनुष्य को अस्वस्थता की ओर ले जाते है |
चुकी हमारी 90 प्रतिशत बीमारियाँ पेट से उत्पन्न होती है और इन सब बिमारियों का कारण है - हमारी आंते साफ़ ना होना और एलोवेरा में मौजूद सापोनिन और लिग्निन आँतों में जमे मैल को साफ़ करके इनको पौष्टिकता प्रदान करता है | शरीर में किसी भी प्रकार के रोग का होना अन्दुरुनी सिस्टम में गरबरियाँ को दर्शाती है |
एलो मानव शरीर में डोमेक्स का काम करता है , जैसे किचन की नाली जब जाम हो जाती है तो हम नाली में डोमेक्स डालते है और नाली साफ़ हो जाती है और उसी तरह एलो मानव शरीर के अन्दर जाते है आंतो को साफ़ करने का काम शुरू कर देता है | और जैसे जैसे हमारी आंते साफ़ होती है वैसे -वैसे हमें आराम मिलना शुरू हो जाता है | जैसे सूर्य के तेज को हम नाकर नहीं सकते उसी तरह एलो जूस मानव शरीर के अन्दर जाते ही उसे आराम मिले बिना नहीं रह सकता |
इसके नियमित सेवन से आँखों की रौशनी बढती है घुटनों के दर्द , खून साफ़ करने में हकलाने में , दांतों की बिमारियों में पेट की सभी बिमारियों में बालों के झरने में , यादास्त बढ़ाने में वजन कम करने में या बढ़ाने में बहुत फायदा देता है | इसे किसी भी दावा के साथ लिया जा सकता है | इसका किसी भी प्रकार कोई दुष्प्रभाव नहीं है | बच्चे, जवान, बुजुर्ग ( स्त्री-पुरुष) सभी ले सकते है |
अतः एलोवेरा हमें नियमित लेना चाहिए | यह हमारे घर के वैद्य है | अगर कोई बीमार पिएगा तो उसे स्वस्थ्य होने में मदद मिलेगा और कोई स्वस्थ्य व्यक्ति पिएगा तो बीमार ही नहीं होगा |
हजारों लाखों रुपये बीमारी के इलाज में खर्च करने से कई गुना बेहतर है की बीमारी होने के कारण को ही शरीर से बहार निकालने का प्रयास किया जाये | घर बैठे , खाते-पिटे, हँसते-खेलते, बिना कोई ओपरेसन के अपनी व अपने परिजन की समस्त बीमारी के कारणों को आप स्वयं ही समूल नष्ट कर सकते है |
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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

आज आपके साथ चर्चा करते है एलो वेरा जूस में समाहित विशिष्ट तत्व जिसके सेवन से मनुष्य के शरीर निरोग रहता है | सुन्दर,चुस्त व दुरुस्त सेहत के लिए मनुष्य अपने दैनिक आहार में इस जूस को शामिल करें | आखिर क्या गुण है एलो वेरा जूस में जो मानव जाती के लिए आज के युग का अमृत तुल्य माना गया है ?
लिग्निन :- एक गुदे जैसा पदार्थ जो एलो वेरा की पत्तियों की जेली में शामिल सेलुलोज के साथ पाया जाता है | इसकी उपस्थिति इस बात का सूचक है की यह मनुष्य की त्वचा में गहराई तक जाने की अत्यधिक क्षमता रखता है |
सैपोनिंस :- इसकी खोज 1951 में एक घटक के रूप में की गई जिसमे एलोवेरा लीफ जूस की मात्रा 2 .91 प्रतिशत शामिल थी | सैपोनिंस ग्लाइकोसाइड्स है जिनमे न केवल आँतों की सफाई करने की क्षमता है बल्कि शैम्पू जैसे कास्मेटिक्स में प्राकृतिक झाग पैदा करने वाले उच्चकोटि के प्राकृतिक साबुन एजेंट भी है |
एन्थ्राक्विनोंस :- अलोइन-कैथोटिक और एमिटिक , बारबैलोइन -एंटीबायोटिक और कैथोरटिक , आइसोबारबैलोइन-एनालजेसीक और एंटीबायोटिक , अन्थ्रानाल , अन्थ्रासिं, अलोईटिक एसिड - एंटीबायोटिक, अलो अमोडीन-बैकटीरिसाइड और लक्झेटिव, सिनैमिक एसिड- जर्मीसाइड और फंगीसाइड, इस्टर ऑफ़ सिनैमिक एसिड- एनालजेसीक और अन अस्थेटिक, इस्टीरियोल आयल - ट्रेकुलाईजिंग , क्रिसोफेनिक एसिड - स्किन फंगस , अलो अल्सिन-गैस्ट्रिक सीक्रेशन रोकता है , रेजिस्टनाल |
मोनो और पॉली सैकेराईड्स :- एल्ड़ोनेन्टोज, सेलुलोज, ग्लूकोज, एल रैमनोज, मैनोज !
अमीनो एसिड :-
आवश्यक अमीनो एसिड - आइसोल्युसिन, ल्युसिन, लाइसिन, मैथीओनिन, फेनिल लोनीन,थियोंइम, वैलिन
सेकेंडरी :- एलोनिं, आज़िरनीन,एस्पार्टिक एसिड, ग्लुटामिक एसिड , ग्लिसरीन, हिस्टीडाइन, हाइड्रोक्सीप्रोलाइन्स, प्रोलाइन , प्रोलाइन, सेरिन, टाइरोसीन !
इनआर्गनिक / इन्ग्रेडिएन्ट्स/मिनरल्स :- कैल्सियम, फास्फोरस,पोटैशियम,आयरन,सोडियम,क्लोरिन,मैंगनीज, मैंग्नेशियम,कापर, क्रोमियम, जिंक !
विटामिन्स :- विटा ए-कैरोटिन , विटा बी-उत्तकों में वृद्धि, रक्त और उर्जा उत्पन्न करता है ! विटा सी- कीटाणुओं को रोकने, घाव भरने और स्वस्थ्य त्वचा के निर्माण में सहायक होता है ! विटा एम्- रक्त निर्माण में सहायक , नियान्सिमेंनाइड- मेटाबोलिज्म का नियंत्रक ! कोलाइन - मेटाबोलिज्म में सहायक !
एन्जाइम :- फास्फेट - एमाइलेज, ब्रैडीकाइनेज- इम्यून बिल्डिंग , कैटालेज - तंत्र में पानी संग्रह की सुरक्षा , सेलुलोज - सेलुलोज डाइजेशन, क्रिएटिव फास्फो काइनेज - मस्कुलर एन्जाइम , लाइपेज- पाचन, न्युक्लियोटाईडेज, अल्केलाइन फोस्फेट, प्रोटिएज- प्रोटीन को उनके संघटक तत्वों में हाइड्रोलाइज करता है !
अतः इन्हीं सब उपरोक्त विशिस्ट गुणों के कारण एलो वेरा जूस वर्तमान में तहलका मचा दिया है | वह चाहे किसी भी प्रकार के रोग हो उसमे अचूक साबित हो रही है | यहाँ तक की प्राकृतिक चिकित्सा में एलो वेरा जूस कब्ज़ से लेकर कैंसर तक के मरीजों के लिए एक अत्यंत लाभकारी औषधि है | नित्य नियमित एलो वेरा जूस का सेवन मनुष्य जीवन के लिए काया कल्प कर देती है |
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आइये एक बार फिर से मधुमेह से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में चर्चा करते है | वैसे तो कई तरह की समस्याएं होती है परन्तु चालीस से सत्तर प्रतिशत लोग अपनी टांगे कटवाने को मजबूर होते है | वर्तमान में ये आंकड़ा चौकाने वाली है की विश्व में प्रत्येक 30 सेकेण्ड में कोई न कोई मधुमेह का मरीज अपनी टाँगे गँवा बैठता है | गौरतलब है की डायबिटीज से 85 प्रतिशत अंगविच्छेदन पैरों में जख्म होने की वजह से ही होते है |
मधुमेह के मरीजों में टांग पर ही सबसे बड़ी खतरा रहता है | इसके तीन प्रमुख कारण है :-
1 . डायबिटीज न्यूरोपैथी की वजह से पैरों में संबेदन हीनता !
2 . पैरों में रक्त आपूर्ति घट जाना !
3 . डायबिटिक मरीजों के पैरों के जख्म व संक्रमण तेजी से ठीक नहीं होते कई अन्य जटिलताओं के कारण अधिकतर मरीजों को ऐसे जख्मों को तब तक पता नहीं लग पाता जब तक कि मामला गंभीर न हो जाए !
डायबिटिक फुट अल्सर का आसानी से पता नहीं लगता | बाहर से जख्म जैसा दिखाई देता है | वह तो मामले के एक छोटा हिस्सा होता है, जबकि भीतर संक्रमण कहीं अधिक गहरा होता है | पैरों के नाख़ून ब्लेड से काटना, नंगे पैर चलना,पैरों को काटने वाला जुटे पहनना | ये प्रमुख कारण है जिनसे पैरों में जख्म हो जाते है |
पैरों की साफ़ सफाई नियमित तौर पर नहीं करना भी एक अहम् वजह है | अगर पैरों में जरा सा भी खरोंच व असामान्यता दिखाई दे तो तुरंत उचित कदम उठाएं ! पैरों पर ज्यादा बोझ न पड़ने दे | ऐसा इसलिए कि मरीज को जख्म का एहसास नहीं होता, वह चलता रहता है |
यह स्थिति अक्सर मधुमेह कि दो जटिलताओं कि वजह से होती है |
1 . तंत्रिका क्षति 2 . कमजोर रक्त संचार |
तंत्रिका क्षति :- हाई ब्लडप्रेशर टांगों व पांवों की नसों को नुकसान पहुंचती है | क्षतिग्रस्त शिराओं की वजह रोगी की टांगो व पांवों में दर्द, गर्मी, ठंढ का एहसास नहीं होता | पैरों में सुजन व खरोंच बदतर हो जाती है , क्योंकि संबेदना जाती रहती है | इस अवस्था को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते है | छोटी सी समस्या बड़ी मुसीबत बन जाती है |
2 .ख़राब रक्त संचार :- मधुमेह प्रायः रक्त शिराओं को प्रभावित करता है | टांगो व पांवों में होने वाला रक्तसंचार घट जाता है | जिसमे सुजन या संक्रमण का ठीक होना मुश्किल हो जाता है | मधुमेह का रोगी धुम्रपान करता है तो रक्तसंचार की समस्या बिगड़ जाती है |
मस्तिस्क से सम्बंधित रोग :- 50 से 70 वर्ष की आयु में पक्षघात होने का खतरा आम आदमी से चार गुना अधिक मधुमेह के रोगियों को होता है |
गुर्दे सम्बंधित रोग :- मधुमेह में गुर्दे सम्बंधित रोग टाइप 1 मधुमेह टाइप 2 की तुलना में कहीं ज्यादा होता है | 20 वर्षों तक मधुमेह से पीड़ित रह चुकने के बाद जहाँ टाइप 2 मधुमेह में इस कुप्रभाव के होने की सम्भावना 16 प्रतिशत तक होती है , वहीँ टाइप 1 में सम्भावना 40 प्रतिशत तक रहती है | गुर्दे की पूर्णतया नष्ट हो जाने का मधुमेह दूसरा सबसे आम कारण होता है |
नेत्रों सम्बंधित रोग :- मधुमेह के रोगियों को अंधत्व का खतरा आम व्यक्ति की तुलना में 20 गुना ज्यादा होता है | कम आयु में मोतियाबिंद होने के कारण दृष्टिदोष होने पर मधुमेह सबसे प्रमुख कारण है |
कुछ टिप्स अपने दैनिक जीवन में उपयोग कर मधुमेह पर नियंत्रण की जा सकती है :-------
एलोवेरा जेल अपने दैनिक जीवन में नित्य सेवन करें ताकि इस तरह के रोग से आपके जीवन में घुसपैठ न कर सकें |इससे निदान के लिए और बहुत कुछ है जो हम अगले अंश में चर्चा करेंगे |
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आज भी बिमारी मनुष्य के सामने ठीक उसी प्रकार के है जैसे की प्राचीन काल में थे, पर बिमारियों का स्वरूप बदल गया है |बाहरी तौर पर हम अच्छे खासे हष्ट-पुष्ट नजर आते है , तब मालूम पड़ता है बहुत खुशहाल है |परन्तु अन्दुरुनी हालात बहुत कुछ ठीक नहीं होता है | भिन्न-भिन्न प्रकार के बिमारियों से ग्रसित होते है | आज कल का जीवन शैली लोगो को घुट-घट कर मरने के सिवा और कुछ नहीं दे सकता है |
आदते इतनी वाहियात हो गई है कि उसने अपने कुल्हारी से अपनी ही टांगे काट डाला है | उसने अपनी सेहत को इतनी बुरी तरह से तबाह कर डाला है, जैसे की दुनिया में आज से पहले इतनी बुरी सेहत हुई नहीं थी | बीमारियाँ इस कदर दुनिया में फैली हुई है , उतनी बीमारियाँ तो दुनिया के मानचित्र पर , जबसे मनुष्य इस धरती पर पैदा हुआ है, तब से लेकर आजतक नहीं थी | आदमी वर्तमान में इतना कमजोर,बीमार,दुर्बल, रोगी और खोखला हो गया है की इतिहास में ऐसा कभी नहीं था | क्या यह सब मानव सभ्यता के विकाश के कारण है या उनकी बेअक्क्ली ? जरा सोंचे !
मानव शारीर प्रकृति कि एक अनमोल संरचना है | शरीर का विज्ञानं इतना जटिल है, जिस पर सदियों से सम्पूर्ण दुनिया के चिकित्सक शोध कर रहे है | इन्सान चाँद पर तो पैर रख दिए है लेकिन शरीर के विज्ञानं के विषय में केवल कुछ अंश भी समझ पाया है | शरीर की तंदुरुस्ती व आयु से जुड़े विज्ञानं को हम आयुर्विज्ञान अर्थात आयुर्वेद कहते है तथा इससे बने इलाज को आज दुनिया के तमाम बड़े-बड़े देश अपना रहे है |
इन्सान की जिन बिमारियों का इलाज आज की आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा में नहीं हो पता, उन्ही लाइलाज बिमारियों का पक्का इलाज आयुर्वेदिक नुस्खों वाली दवाइयों से हो जाता है , जिसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव यानि की side effect भीं नहीं होता, जबकि आज की आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा से मनुष्य के रोग थोड़े समय के लिए दब जरुर जाते है लेकिन उसके साथ कई और समस्याएं पैदा हो जाती है | आयुर्वेदिक इलाज में ऐसा नहीं होता क्यूंकि यह इलाज रोग व कमजोरियों को हमेशा के लिए जड़ से खत्म कर देता है |
डायबिटीज को ही अगर लेते है तो वो डॉक्टर जो मरीजों को डायबिटीज के बारे में सलाह देते है , कई खुद रोगी होते है | ऐसा एक डॉक्टर से मैं मिल भी चूका हूँ | करीब पाँच साल से वो टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित है | ऐसा नहीं है की उन्होंने अपना इलाज नहीं कर रहा है परन्तु डायबिटीज की गोलिया बढ़ रही है और ज्यादा कुछ फायदा नहीं हो रहा है |
इस तरह के बिमारियों से बचने के लिए सिर्फ जीवन शैली में परिवर्तन की जरुरत है | अपने शिक्षक स्वयं बने | बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी अर्जित करें जो हमेशा ही फायदेमंद साबित होगा | एक जागरूक मरीज ही अपना इलाज पूरी तरह से करबायेगा या हिम्मत अंत तक बनाए रखे |
इस तरह से लाइलाज समझे जाने वाली बीमारियाँ के लिए कारगर औषधियों पर कई शोध हो चुके है | कुछ आयुर्वेदिक वनौषधियों का नाम प्रयोग करके यह देखा गया है की लाइलाज बिमारियों पर इस प्रयोग करने से बहुत ही फायदेमंद हुआ है | ऐसे ही वनौषधियों में से एक है ' एलोवेरा " | यह शरीर के लिए अमृत तुल्य है | हरेक तरह के बीमारियों में इसका प्रयोग फायदेमंद होता है |
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आज एक बार फिर से आइये चर्चा करते है ह्रदय सम्बंधित समस्याएं और निदान ? दुनिया भर ह्रदय रोगियों की संख्या गुणात्मक रूप से वृद्धि हो रही है | चिंता की बात यह है की ह्रदय घात यानि दिल का दौरा का औसतन आयु सिमट कर 40 और 30 के बिच हो गई है | जिस रफ़्तार से यह घटती जा रही है न जाने आगे क्या होगा ? कहना बहुत ही मुश्किल है परन्तु यह बहुत ही भयावह तस्वीर बनती जा रही है |
भारतीय युवाओं में खासकर यह बिमारी दुनिया के देशों से दोगुनी है | विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में वर्तमान में ह्रदय रोगीओं की संख्या लगभग पाँच करोड़ है और यह आंकड़ा दोगुना हो जायगा जब दुनिया के साठ प्रतिशत ह्रदय रोगी भारतीय होंगे |
युवाओं में यह बीमारियाँ बढ़ने के प्रमुख कारण आज का जीवनशैली को जाता है | भागमभाग व तनाव ग्रस्त जीवन जीने को मजबूर है | प्रतिस्पर्धा के दौर में युवाओं का ध्यान अपनी सेहत पर कम और कमाने पर ज्यदा होता है |
ख़राब दिनचर्या, खानपान में समुचित मात्रा में पोषक तत्व की कमी भी प्रमुख कारन है | रही सही कसर पश्चात् शैली के खान-पान जैसे पिज्जा,बर्गर,नुडल, पेस्ट्री,डिब्बा बंद खाना, कोल्ड ड्रिंक, ज्यूस इत्यादि पूरा कर देती है | सोने व जागने का समय बिलकुल ठीक नहीं है लोग सोने के समय पर जागते है और जागने के समय पर सोते है जिससे शरीर में कई प्रकार की समस्याएं आ जाती है |
लेकिन ह्रदय रोग लाइलाज समस्या बिलकुल भी नहीं है | परन्तु अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह यदि रोगी को यह प्रारम्भिक अवस्था में पता चल जाय तो इससे मुक्ति पाने में आसानी हो जाता है | अतः ह्रदय सम्बंधित रोग के बारे में जांच कर उचित इलाज जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए |
आप सब जानते है की ह्रदय रोग का प्रमुख कारण है "कोलेस्ट्रोल" | परन्तु सच तो यह है की कोलेस्ट्रोल नहीं है ,बल्कि मुख्य कारण है रक्त नलिकाओं की सूजन ( inlflammation of blood vessels ) है | अतः हमें कोलेस्ट्रोल के वजाय धमनियों की सूजन के कारण को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरुरत है |
सभी कोलेस्ट्रोल ख़राब नहीं होते है | HDL ( high density lipoproteins ) कोलेस्ट्रोल फायदेमंद होता है और इसकी अधिक मात्रा हमारे लिए फायदेमंद होता है, लेकिन LDL ( low density lipoproteins ) कोलेस्ट्रोल हमारे लिए हानिकारक होता है | LDL कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवार की भीतरी सतह पर जमा होकर प्लाक ( plaque ) बनाता है और उन्हें संकरा कर देता है | इसके साथ आने वाला HDL कोलेस्ट्रोल तो वास्तव में धमनियों में सफाई का काम करता है |
रक्त नलिकाओं के सूजन के लिए सिर्फ LDL कोलेस्ट्रोल ही जिम्मेदार नहीं होता है | इसके लिए होमोसिस्टीन तथा धुम्रपान, उच्च रक्त चाप , वसायुक्त भोजन और डायबिटिज से उत्पन्न होने वाले स्वतंत्र तत्व ( free radicals ) भी जिम्मेदार होते है |
अतः स्वतंत्र तत्व को प्रभाव को समाप्त करने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा एंटी ओक्सिडेंट का सेवन करें | जिससे की शारीर में अनचाहे मेहमान जो की free radicals के रूप में है वह सब समाप्त हो जायेगा | और आपका धमनी बिलकुल दुरुस्त हो जायेगा |
जीवन शैली में परिवर्तन लाकर इन जोखिम को कम किया जा सकता है | हरी सब्जियां व फल का ज्यादा से ज्यादा अपने आहार में शामिल करें जिसमे विटामिन बी-6 ,सी, मग्नेशियम व भरपूर मात्रा में एंटी ओक्सिडेंट फ्लेवोनायडस और कैरोटेनायड्स हो |
ह्रदय रोगी को अक्सर कम वसा, कम कार्बोहायड्रेट और कम प्रोटीन का आहार लेना फायदेमंद होगा | सेब,अनार का जूस, आंवले का मुरब्बा ह्रदय को ताकत देता है और ये ह्रदय को सुचारू रूप से काम करने में मदद करते है |
प्याज और लहसुन से कोलेस्ट्रोल का स्तर घटते है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करते है |
कैरोटेनायड्स एंटी ओक्सिडेंट के लिए टमाटर का सेवन करें जिसमे लायकोपिन का भंडार होता है | जो की दिल को सही से चलाने में सहायता करता है |
करौंदा में पॉलीफेनोलिक एंटी ओक्सिडेंट होते है जो रक्त संचार को सुचारू करते है | अनाज, अखरोट, अलसी के बिज, बादाम, सोयाबीन ये सब कोलेस्ट्रोल के अलावा ट्रीग्लिसेरायड्स स्तर को भी घटते है | इसमें रक्त के थक्के जमने की आशंका काफी कम हो जाती है |
इन प्रकृति उपचार के अलावा सेहतमंद जीवन जीने के लिए नियमित परहेज से रहना, नियमित शारीरिक व्यायाम करना और डॉक्टरों से नियमित पूर्वक जांच भी कराते रहना चाहिए |
वैसे फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट के पास इसमें अचूक उत्पाद है जिसके माध्यम से ह्रदय सम्बंधित किसी भी परेशानी से मुक्त हो सकते है जो की निचे दी जा रही है
Aloe Vera Gel , Garlic Thyme , Artic Sea Omega - 3 , Pomesteen Power इत्यादि इसका सेवन चार से छह महीने करने के बाद किसी भी प्रकार के धमनियों का सूजन पर नियंत्रिती की जा सकती है | अतः ह्रदय रोग से मुक्त पाने के लिए उपरोक्त एलोवेरा के उत्पाद अपने जीवन में शामिल अवश्य करें और जीवन को खुशहाल बनाए |
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शराब अपनी जड़ें बट वृक्षों के भांति जमा रखी है | ऐसा प्रतीत होता है की इनके सेवन से होने वाले दूषपरिणाम से बिलकुल अनभिग्य है | जबकि इसके भयकर परिणाम की गाथा से सड़क,गलियारे,सिनेमा हौल,चौराहे आदि पटे हुए होते है | मिडिया भी इससे होने वाले दुष्परिणाम से बराबर अवगत कराता रहता है |
इस प्रकार स्पष्ट हो जाता है की शराब की सेवन से लाभ कुछ नहीं, हानी ही हानी है | उससे थकान मिटने और स्फूर्ति मिलने की बात सिर्फ कोरी बकबास के अलावा और कुछ भी नहीं है |
अक्सर इसकी शुरुआत बड़े ही शौकिया ढंग से होती है परन्तु बाद में वह मज़बूरी बन जाती है | शराब की हानियों के देखने के लिए दैनिक जीवन में शराब पिने वालों की दुर्दशा देखना ही पर्याप्त होता है | शराबियों की बुद्धि व स्मृति दोनों ही अस्त-व्यस्त हो जाती है |
मद्यपान से कई भयंकर रोग होने की संभावनाएं निश्चित तौर पर हो जाती है :-
"कोसिकोफ़" नामक मानसिक रोग होने की अधिकांस संभावना रहती है | इस रोग से व्यक्ति की स्मरण शक्त कमजोर पड़ते पड़ते वस्तुतः क्षीण हो जाती है |
आँखों में एक तरह का रोग भी होने का भय रहता है, जिसमे एक वस्तु की दो वस्तुएं दिखाई पड़ने लगती है |
ह्रदय रोग विशेषग्य के अनुसार प्रायः सभी शराबियों का ह्रदय अपने सामान्य आकार से कुछ बड़ा हो जाता है और इस कारण उसे साँस लेने में कठिनाई होने लगती है |
मद्यपान पेट और आंत की झिल्लियों को भी सीधा क्षति ग्रस्त करता है | तेजाब की मात्रा बढ़ जाने से अल्सर की शिकायत होने का डर रहता है | बहुत अधिक पिने के कारण कभी-कभी खून की उल्टियाँ भी होने लगती है |
बदहजमी और अपच की शिकायत रहना तो जैसे शराबियों के लिए आम बात है और इस कारण उसका वजन तेजी से घटने लगता है | इससे पैंक्रियाज ग्रन्थि और पेट को जोड़ने वाली नलिका कभी कभी सूजन के कारण बंद हो जाती है | ऐसी स्थिति में उदर में भंयकर शूल उठता है |
रक्तचाप तेजी से गिरने लगता है | अगर तुरंत उपचार न हो तो यह स्थिति जीवन संकट भी उपस्थिति कर देती है |
पैंक्रियाज ग्रन्थि का यह रोग बराबर बना रहता है और शराब के कारण ख़राब हो जाने से बहुत कम मात्र में इंसुलिन बनाती है | इस कारण मधुमेह रोग होने की संभावना भी रहती है |
मद्यपान के कारण जिगर को होने वाली सिरोसिस बिमारी इतनी भानकर है की 6 महीने तक रोगी को बुरी तरह तडपा-तडपा कर प्राण हरण कर लेती है |
इसके अलावा ह्रदय की भांति ही जिगर का आकार भी फैलने लगता है | मरने वाले शराबियों में 90 प्रतिशत प्रायः जिगर के रोगों से मरते है, क्योंकि इस विषैले तत्व को परास्त करने और उससे संघर्ष करने में शराब को ही अधिक मेहनत करनी पड़ती है |
इन्हीं सब कारणों है मद्यपान करने वाले व्यक्ति कई प्रकार के रोगों से ग्रस्त होने लगते है क्योंकि उनकी जीवनी शक्ति, जो शरीर के क्रियाकलापों का संचालन और नियमन करती है वह शराब के माध्यम से आए अतिरिक्त अल्कोहल को पचाने में नष्ट हो जाती है और सामान्य रोगों का आक्रमण रोकने की शक्ति भी शरीर को नहीं रह जाती है |
इससे बचने के लिए इक्षा शक्ति होनी चाहिए, साथ में पौष्टिक पूरक और एलो वेरा जेल का नियमित सेवन करें जिससे की शराब के कारण शरीर में हुए क्षति को दुरुस्त किया जा सके | एलो वेरा जेल, बी प्रोपोलिस tablet , पोमेस्टीन पॉवर आदि का सेवन करें और अपने जीवन की कायाकल्प करें |
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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !
मौसम में परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारी त्वचा और स्वास्थ्य पर पड़ता है | सर्दियों में विशेषकर सर्द हवाएं त्वचा की नमी को सोंख लेती है | ऐसे में हमें त्वचा को विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है | परन्तु इस कंपकंपाती सर्द मौसम में अगर आप खिली खिली त्वचा के साथ स्वाथ्य रहना चाहते है तो कुछ बाते आपको ध्यान में रखनी चाहिए जिससे आप अपने आपको स्वस्थ्य और सुंदर रख सकें |
> अगर आपकी त्वचा बेजान या रुखी है तो बाजार का साबुन का प्रयोग बिलकुल न करें | बल्कि आप फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट का एलो एवाकाडो साबुन/ एलो लिकुइड सोप का प्रयोग करें जो त्वचा के सफाई के साथ-साथ मोस्चरैजर भी प्रदान करती है | जिसका किसी भी प्रकार से त्वचा पर दुष्प्रभाव नहीं होगी |
> नहाने के पानी में अगर आप फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट का एलो बाथ जेली का प्रयोग करें तो इससे रुखी त्वचा में पोषण आने लगती है और इसके प्रयोग के कुछ दिनों के बाद ही त्वचा कोमल और चिकनी हो जाती है |
एलो बाथ जेली इस मौसम में विशेषकर प्रयोग करना चाहिए क्यूंकि सर्दियों में अधिकतर लोग हलके गर्म पानी से नहाते है जिसके कारण त्वचा की नमी समाप्त होने लगता है अतः त्वचा के पोषण के लिए इस से नहाना बहुत ही फायदेमंद होगा |
इसमें प्राकृतिक रूप से एक तेल भी होता है ताकि जब बहार निकले तो आपके त्वचा दिन भर सर्द हवा व प्रदुषण का सामना कर सकें | नहाने के बाद एलो बॉडी केयर का इस्तेमाल जरुर करें ताकि आपके त्वचा में तेल और नमी का संतुलन बना रहें |
इस मौसम में आपकी त्वचा को अतिरिक्त मोस्चरैजर की आवश्यकता होती है | इसलिए ज्यादा से ज्यादा मोस्चारैजर क्रीम का प्रयोग करें | इसके लिए आप ऍफ़.एल.पी एलो मोस्चाराइजर क्रीम का इस्तेमाल करें जिसमे एलो वेरा का विशेष गुण होता है जो आपके त्वचा के लिए गुणकारी होता है |
> आजकल के सर्द हवाओं के प्रभाव से होंठ फटने जैसे बात तो आम लगते है | कभी कभी रूखेपन के कारण होंठ पर पपड़ी जैसी पड़ जाती है | इसके लिए आप ऍफ़.एल.पी एलो लिप्स का इस्तेमाल करें जिसे होंठों की नमी बनी रहेगी और फटने व पपड़ी पड़ने जैसी समस्या दूर हो जायगी | ऐसे में बेहतर होगा की लिपस्टिक का प्रयोग न करें | सर्दियों में लिप गार्ड के लिए एलो लिप्स बेहतर उत्पाद है |
सर्दियों में शुष्क हवाओं के लगातार सम्पर्क में रहने से सर्दी,जुकाम,मौसमी फ्लू के कारण बाल रूखे, बेजान व कमजोर हो जाते है | इसके लिए आप ऍफ़.एल.पी एलो जोजोबा सेम्पू का इस्तेमाल करें | इसके बाद सर की त्वचा व बालों में हलके हाथो से एलो स्टायलिश जेल का भी प्रयोग कर सकते है जिससे बाल चमकते व खिले-खिले नजर आयेंगे |
>जब भी बहार निकले तो ध्यान रखें की बाल बिलकुल सुखा हो | इन दिनों तरह-तरह के आकर्षक वाले स्कार्फ बाजार में उपलब्ध है | यह आपके खूबसूरती में चार चाँद भी लगायेंगे और साथ ही बालों के देखभाल के लिए भी बहुत बेहतर साबित होगा | मतलब सर्द हवा से आपके बालों की रक्षा तो करेंगे इसके साथ आपके सौन्दर्य को भी आकर्षक प्रदान करेंगे |
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जैसे जैसे मौसम का मिजाज बदल रहा है वैसे ही लोगो में परेशानियाँ शुरू होने लगी है | एक तो ठंढ वैसे भी अपने साथ बहुत सारी समस्याएं लेकर आती है जैसे सर्दी-जुकाम,एलर्जी आदि और सबसे बड़ी समस्या उनके साथ होती है जो की साँस की बिमारी से ग्रसित होते है | उनके लिए ये मौसम बहुत ही कष्टदायक होता है | दर्द चाहे नए हो या पुराने इस मौसम में और भी ज्यादा उभर आती है | आज चर्चा करते है दमा के बारे में जो खासकर कड़ाके की ठंढ में बहुत ही ज्यादा घातक सिद्ध होता है |
दमा ( Asthma ) एक साँस की बिमारी है | इस बिमारी में श्वसन नलिका संकुचित हो जाती है जिससे प्रभावित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है | यह सांस की नली व फेफड़ों में संक्रमण के कारण होता है | साँस की नलियां आगे जाकर पतली हो जाती है इसके अन्दर कार्बन जमा हो जाता है तथा वह अपनी लचक खो देती है |
तरल द्रव फेफड़ों में इकठ्ठा हो जाता है और श्वसन नलिका की श्लेष्मा झिल्ली उद्दीप्त हो जाती है |
इसके कारण फेफड़ों में सुजन भी आ जाती है | यह भी कह सकते है की फेफड़ों में बलगम जम जाता है |
सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती परन्तु साँस छोड़ते समय दम सा घुटने लगता है | छाती में तकलीफ रहती है |
कारण कुछ भी हो सकता है , जैसे किसी कारण एलर्जी, वायु प्रदुषण, कुछ तरह के भोजन आदि से प्रतिक्रियास्वरूप यह दशा भड़क सकती है | दबाब-तनाव, तापमान में परिवर्तन, चिंता और ब्रोंकाइटिस आदि अन्य कारण भी हो सकते है | धुम्रपान, गलत जीवन शैली या विपरीत परिश्थितियों में रहने से भी अस्थमा हो सकता है |
जड़ी बूटी सम्बंधित उपचार आप कर सकते है :-
एलो वेरा जेल / एलो बेरी नेक्टर
जिन्क्गो पलुस
गार्लिक थाइम
बी प्रोपोलिस
इसके साथ हल्का व्यायाम से फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ने में फायदेमंद हो सकता है |
सुकन पाने के लिए योग करना अच्छा है |
रात को भरी खाना न खाएं | फल और सब्जियां काफी मात्र में ले |
चिकन सूप लाभदायक है | मशरूम, चीज, सोया सॉस और भोजन में सिंथेटिक सामग्री का इस्तेमाल न करें |
चाय या कॉफ़ी का एक प्याला कभी-कभार पिने से दमे का हल्का हमला रोका जा सकता है |
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रामायण में एक अंश मुझे याद आ रहा है जब सुखेन वैद्य ने लक्ष्मण जी का प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने को कहा - जिससे प्रभु लक्ष्मण का प्राण बचाया गया था | वैसे तो संजीवनी बूटी का नाम सिर्फ सुना ही है किसीने शायद ही देखा हो | चुकी संजीवनी बूटी लाने के समय में स्वयं हनुमान जी भी दुबिधा में पड़ गए थे | जैसा की वैद्य ने कहा था की जिस बूटी के निचे दीपक जल रहा होगा वही असल में संजीवनी बूटी होगा | परन्तु जब हनुमान जी धवलागिरी पर्वत पर गए तो वो आश्चर्यचकित हो गए | उन्होंने देखा यहाँ तो प्रत्येक बूटी के पास दीपक जल रहे है |फिर उन्होंने सम्पूर्ण पहाड़ ही उठा लाये थे |मतलब संजीवनी बूटी को पहचानने में हनुमान जी भी दुबिधा में थे |
अगर वर्तमान समय की संजीवनी बूटी पर चर्चा करें तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी की एलो वेरा के पौधे में वो सारे गुण समाहित है जिसे आप संजीवनी बूटी कह सकते है ! एफ.एल.पी के एलो वेरा जेल ने ऐसे कई तरह के चमत्कार कर चुके है जिससे की लोग इसे जड़ी बूटी के श्रृंखला में सर्वोच्च स्थान पर रखते है !
अक्सर लोग मेरे पास सारे इलाज से थके हुए रोगी ही मिलते है,वे अपना कीमती वक्त व धन गवाँ कर जीवन को जैसे तैसे जीने को मजबूर होते है | इतने हताश और परेशान होते है की जब हम किसी और आयुर्वेदिक दवाइयां या पौष्टिक पूरक की बात करते है तो वो सिरे से नकार देते है,यह कहकर की बहुत देख ली साहेब कोई फायदा नहीं होता है बस लोग बेबकूफ बनाते है और अपनी जेब भरते हमारी समस्या वहीं के वहीँ है | इसीलिए कृपया हमें हमारी हाल पर छोड़ दें |
इसमें इसकी क्या गलती ? यहाँ हर गली, चौराहे पर इस तरह के झोला छाप डॉक्टर अपना दुकान खोले बैठे नजर आते है | जहाँ हर तरह के बिमारी का शर्तिया इलाज होता है | बस स्टेंड हो या शौचालय, बड़े-बड़े बैनर -पोस्टर से पटे हुए होते है | कोई न कोई व्यक्ति अक्सर ऐसे निम्-हकीम, वैद्य, बाबाओं के चक्कर में फंसते रहते है | जिसके कारण रोगी के रोग में लाभ होने के वजाय वो और भी अस्वस्थ्य होते चले जाते है |ऐसे हकीमों को कोई फर्क नहीं पड़ता, दुकान यहाँ नहीं चली तो कहीं और खोल देंगे ?
वैसे तो हमारे से भी अक्सर लोग पूछते है सर क्या इस उत्पाद की कोई साय्ड इफेक्ट भी हो सकता है ? यह बात पहले बताइये , आपने तो सारी खूबियाँ गिनती करवा दी हमें इसके दूसरी पहलु के बारे में भी कृपया बताएं ? सवाल इस तरह का आना लाजिमी है क्युकी कई सालों से इलाज का तजुर्बा होता है, कई दवाइयां एक साथ लेना होता है फिर कुछ दिनों के बाद इसी के कारण कोई और परशानियाँ आ जाते है | मैंने कहा - साय्ड इफेक्ट ( दुष्परिणाम) तो बहुत है , सबसे बड़ा साय्ड इफेक्ट एलो वेरा उत्पाद से होता है की आप ठीक हो जायेंगे | और एक दिन आप बिलकुल स्वस्थ्य और खुशहाल जीवन जियेंगे, यही है इसका साय्ड इफेक्ट |
कब्ज़ से लेकर कैंसर तक के मरीजों को एलो वेरा के चमत्कारिक गुणों से फायदा होता रहा है और भविष्य में भी कोई भी असाध्य रोगी अगर इन उत्पादों का प्रयोग श्रधा और विश्वास के साथ सेवन करेगा तो निश्चित ही लाभ मिलेगा |
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आजकल यह कहना अतिशयोक्ति होगी की आयु पर हम विजय पा सकते है | प्राणी की कब मृत्यु हो जाय, कुछ कहा नहीं जा सकता है | हर क्षण मृत्यु के करीब जा रहे प्राणी की आयु शरद ऋतु के बादल के सामान स्वल्प है, यह तो बुझते हुए लौ की दीपक के समान चंचल है, जो गई हुई देखी जाती है |
सबाल यह नहीं है की आपकी कितनी आयु है पर जितनी भी आयु आप जिए वह सुखकर हो, दिन-हिन् और रोगी बनकर जीना बहुत ही कष्ट देता है | मृत्यु के श्रीजन्हार असंख्य रोगों को शरीर में समा देते है और उसे कष्ट दे-देकर मारने की जुगत में लगे रहते है |
ज्यादातर रोग हमारी खुद की गलतियों के परिणाम होते है | स्वास्थ्य का महत्व भी उस समय ज्ञात होता है जब व्यक्ति बीमार होता है | रोग कोई भी हो - कब्ज़ या कैंसर, सभी रोग ख़राब और आयु का क्षीण करने वाले होते है | जो दूरदर्शी लोग होते है वह हर समय सेहत की अहमियत को ध्यान में रखते है और ऐसे कार्य से बचते है जो अंततः रोगकारक बनें |
रोग अपनी शुरुआती दौर में प्रायः घातक नही होते लेकिन बाद में वे जटिल बनते चले जाते है | कब्ज़ जैसा मामूली सा रोग भी हमारी लापरवाही का परिणाम होता है | वैसे कब्ज़ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में बिना नुक्सान पहुंचाए सामान्य उपचारों से मिट जाता है लेकिन यदि लापरवाही बरती जाए तब धीरे-धीरे यह अन्य रोगों का कारण भी बन जाता है |
वर्तमान में कैंसर का भी प्रसार बहुत है | सामान्य विकार बिगरते-बिगरते कैंसर में परिवर्तित हो जाते है | इसे मौत का दूसरा नाम भी कह दिया जाता है | कैंसर के मरीज को देखकर एक स्वस्थ्य व्यक्ति के अंदर से यही शब्द निकलते है " हे भगवान मुझे इस बीमारी से बचाए रखना" |
वैसे इश्वर ने हमें वे सुविधाए दे रखी है जिनसे हम रोगों से बचे भी रह सकते है, रोग निवारण भी कर सकते है और दीर्घायु को प्राप्त कर सकते है , लेकिन जानकारी के अभाव में अथवा लापरवाही वश हम इन सुविधाओं का लाभ न उठाकर विज्ञापनबाजी से प्रचारित उन चीजो का ज्यादा इस्तेमाल करते है जो अंततः स्वास्थ्य के लिए घातक ही सिद्ध होती है | कोल्ड्रिंक्स,वर्गर,पिज्जा इत्यादि अनेक उदाहरण आपके सामने है |
बहरहाल यहाँ उस 'कमाल के नुस्खे' को निचे दिया जा रहा है जो बहुत ही साधारण और घरेलु है | तो आपके लिए लीजिये प्रस्तुत है घरेलु परन्तु असरदार नुस्खा :-
तुलसी और पुदीना की सामान मात्रा को मिलकर बनाये गए चूर्ण का नित्य नियमपूर्वक 5 ग्राम मात्रा दिन में एक बार सेवन किया जाए तो कैंसर जैसे भयंकर बीमारी से सदैव बचा जा सकता है | यह नामुराद बिमारी आपसे दूर ही रहेगी |
अगले क्रम में आपसे इस बनौषधि दोनों के मिश्रण के बारे में विस्तृत जानकारी और शोध के विषय के साथ उपस्थित होंगे !
एलोवेरा जेल रोज पिए और स्वस्थ्य तन-मन के साथ सदैव जियें !
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आइये कल की चर्चा को एक बार फिर से आगे बढाते हुए, शुरुआत करते है मधुमेही का क्या आहार होना चाहिए और क्या नहीं ? चुकी एक ओर जहाँ दुनिया भर में इस रोग से करोड़ों लोग मुश्किल में फंसे हुए है तो दूसरी ओर इस रोग का स्थायी इलाज अभी तक नहीं मिल पाने के कारण दुनिया भर के चिकित्सा विशेषग्य हैरान परेशान है |
मधुमेह के नाम से मशहूर यह रोग वास्तव में 'मधुमेह' न होकर 'विपतियों का मेह' बना हुआ है | इस रोग से जुड़े हर पहलुओं पर चर्चा हमेशा किसी न किसी प्रकार से की जाती रही है | परन्तु आज उस पहलु पर चर्चा करने जा रहे है जिससे आम मधुमेही को विशेष जानकारी नहीं होती है यानि रोगीं को दैनिक उपयोग की वस्तुओं में किन-किन चीज का सेवन करना चाहिए तथा किसका नहीं !
तो आइये चर्चा करते है आहार सम्बंधित वस्तुए रोगी अपने दैनिक उपयोग में क्या अपनाए और क्या नहीं ?
1 . क्या मधुमेही चावल का सेवन कर सकता है ?
> चावल साधारण और जटिल कार्बोहाईड्रेट का मिश्रण है | अतः चावल-दाल के मिश्रण से बनी खिचड़ी खाई जा सकती है | मार्केट में अधिक रेशे वाले ब्राउन चावल भी मिलते है, इनका सेवन किया जा सकता है |
2 . क्या मधुमेही आलू का सेवन कर सकता है ?
>आलू भी चावल की तरह साधारण तथा जटिल कार्बोहाईड्रेट का मिश्रण है, फिर भी इसे सिमित मात्र में खाया जा सकता है | परन्तुं इसे अगर पत्तेदार और रेशेदार सब्जियों के साथ खाया जाये तो बेहतर होगा |
3 . क्या मधुमेही को पपीता खा सकता है ?
> अधपका पपीता खाना बेहतर है जो मीठा नहीं होता | पका पपीता से बचे क्यूंकि वह ज्यादा मीठा होता है |
4 . क्या मधुमेही जामुन खा सकता है ?
> हाईपोग्लाईसीमिक तत्व जामुन में पाया जाता है , जो अग्न्याशय और शर्करा स्तर को घटाता है, अतः जामुन का उपयोग मधुमेही के लिए बेहतर होगा | जामुन का गुठली का 3-3 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार लेने से रक्त शर्करा का स्तर घटता है |
5. क्या मधुमेही के लिए मेथी के बीज उपयोगी होते है ?
> मेथीबीज में हाईपोग्लाईसीमिक तत्व रक्त शर्करा को कम करते है, अतः इनका सेवन उपयोगी है | इसका सेवन सूप,चटनी या सब्जी के रूप में किया जा सकता है | यदि नित्य 12 घंटे पानी में भीगे मेथीबीज का पेस्ट बनाकर दबाई के तौर पर लिया जाए तो शर्करा का स्तर नियंत्रित रखा जा सकता है | दिन भर में 200 ग्राम तक लिए जा सकते है |
6 . करेला मधुमेही के लिए कितना उपयोगी है ?
> मधुमेही के आलावा और भी कई रोगों में करेला उपयोगी है | इसमें पाया जाने वाला इंसुलिन रक्त और मूत्र की शर्करा का कम करता है | यदि प्रतिदिन सुबह खली पेट 125 से 140 मि.ली. करेले का जूस लिया जाये तो परिणाम बेहतर मिल सकता है | यह लीवर और पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है तथा रक्त को शुद्ध व त्वचा रोग में भी लाभ होने लगता है |
7 . नीम की कोपलें मधुमेही के लिए कितनी उपयुक्त है ?
> कोपलें ही नहीं बल्कि नीम की अन्तर्छाल भी रक्त शर्करा स्तर को कम करती है क्योंकि इसमें हाईपोग्लाईसीमिक तत्व होता है | नीम की पत्तियों और छाल का रस लेना बहुत ही फायदेमंद रहेगा | दोनों की बराबर मात्रा यानि 5 ग्राम को 300 ग्राम पानी में डालकर उबले | पानी जलकर एक चौथाई रह जाये तक छानकर पी लें | ध्यान रहें उपरोक्त रस का सेवन अधिक दिनों तक न करें क्योंकि नीम का ज्यादा सेवन से कामशक्ति प्रभावित हो सकती है |
8 . क्या अलसी का सेवन मधुमेही के लिए उपयोगी है ?
> जी हाँ, मधुमेही के लिए अलसी का सेवन उपयुक्त है | अलसी 25 ग्राम तक मिक्सी में पीसकर आटा में मिलकर इस आटे की रोटी खाई जा सकती है |अलसी का सेवन व्यंजन बनाकर भी किया जा सकता है |
9 . क्या दूध का सेवन मधुमेही को करना चाहिए ?
> यदि ह्रदय रोग की शिकायत न हो तब मधुमेही कम मात्रा में दूध का सेवन कर सकता है | स्किम्ड मिल्क की 500 मि.ली. मात्रा तथा टोंड मिल्क की 200 मि.ली. मात्रा का सेवन किया जा सकता है |
10 . मधुमेही को पनीर का सेवन करना चाहिए ?
> पनीर और छैना जो दूध के ही उत्पाद है, का सेवन मधुमेही कर सकते है, वशर्ते वह ह्रदय रोगी न हों |
11 . चाय-कॉफ़ी मधुमेही के लिए कितनी उपयुक्त है ?
> इन उत्तेजक पेयों में टैनिन और कैफीन नामक तत्व होता है, अतः इनका सेवन कम से कम करना चाहिए | दिन भर में 2 कप चाय या कॉफ़ी बिना चीनी यानि फीकी अथवा कृत्रिम मिठास डालकर ली जा सकती है |
13 . क्या नारियल का सेवन मधुमेही के लिए उपयुक्त है ?
> ह्रदय रोगी के लिए नारियल उपयुक्त नहीं है | यदि केवल मधुमेह है, तब इसका सेवन किया जा सकता है | नारियल का पानी भी दिनभर में दो कप तक पिया जा सकता है |
14 .क्या बादाम का सेवन कर सकते है ?
> केवल मधुमेह होने पर बादाम का सेवन किया जा सकता है | 100 ग्राम बादाम में 58.9 ग्राम वसा पायी जाती है जो 12 चम्मच तेल के बराबर है | अतः यदि ह्रदय रोग और उच्चरक्तचाप भी साथ में है, तब इसका सेवन न करें |
15 . मधुमेही को खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए |
> मधुमेही को खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए |
16 . क्या अखरोट का सेवन उपयुक्त हो सकता है ?
> मधुमेह में अखरोट का सेवन किया जा सकता है | इसकी 100 ग्राम मात्रा में 64.5 ग्राम वसा होती है जिनसे ट्राईग्लिसराइड की मात्रा बढती है अतः ह्रदय रोग अथवा उच्चरक्तचाप में इसका सेवन करना ठीक नहीं है |
17. डबल रोटी का सेवन कितना उपयुक्त हो सकता है ?
> डबल रोटी भी दो प्रकार की मिलती है, एक तो मैदे से बनी हुई सफ़ेद डबल रोटी, इसकी 100 ग्राम मात्रा में 0.2 ग्राम फाइबर होता है | दूसरी डबल रोटी भूरे रंग की होती है जो आटे की बनती है, इसकी 100 ग्राम मात्र में 1.2 ग्राम फाइबर होता है तथा 245 कैलोरी पायी जाती है | इसलिए सफ़ेद की बजाय भूरी डबल रोटी अधिक उपयुक्त है |
सबसे उपयुक्त होगा अगर आप अपने आहार में एलो वेरा जूस शामिल कर लें | एलो वेरा में मौजूद क्रोमियम,बिटासेल्स और विभिन्न प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स,खनिज जो शरीर के सेल स्तर पर काम करती है और आपके शरीर की जरूरतों को पूरा कर देती है जिससे आप रहते है हमेशा चुस्त और दुरुस्त |
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