" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.
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Jan 21, 2014

केजरीवाल का कुचक्र , लुटिया डुबोने पर उतारू !

लगता है दिल्ली की राजनीती में जैसे कबड्डी मैच चल रही हो ! एक तरफ टीम केजरीवाल जो आम आदमी पार्टी के संस्थापक और वर्त्तमान मुख्य मंत्री जी है और सामने प्रतिद्विंदी दिल्ली की पुलिस है और रेफरी यहाँ के केंद्रीय गृह मंत्री सुशिल कुमार शिंदे है ! मैच का परिणाम चाहे जो भी हो जनता की हार हर हाल में सुनिश्चित नजर आ रही है ! जनता अब क्या करें? कहाँ जाएँ ? अपनी दुखड़ा किसके पास लेकर जाये? क्योंकि केजरीवाल जी भूल चुके है की वही यहाँ के मुख्यमंत्री है ! परन्तु व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर अनायास आन्दोलन की कोई खास जरुरत यहाँ नजर नहीं आ रही है ? पहले यहाँ के जनता से किये हुए वायदे को पूरा कर लेते इसके बाद जो आन्दोलन का कीड़ा उनके अंदर है वो भी पूरा कर लेते ! इन सब आपाधापी में जनता बिचारी अपनी भाग्य को कोश रही है की क्या हमने इन्हे सिर्फ रोड छाप राजनीती करने के लिए वोट दिया है या सचिवालय में बैठ कर भी कोई नेक काम जो जनता के हक़ में हो उसकी लड़ाई लड़ी जा सकती है ?

दिल्ली की नव निर्वाचित सरकार जिस प्रकार अपना सचिवालय चौराहे पर लगा रखी है यहाँ तक की कुछ जरुरी कागजाते भी वहीँ पर हस्ताक्षरित किये जाते नजर आ रहे थे ! उससे दिल्ली कि अंतराष्ट्रीय पटल पर केजरीवाल साहेब क्या सन्देश देना चाहती है ? क्या यह देश और सचिवालय जैसे प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा के साथ छेड़छाड़ नहीं है ? और तो और आजकल उनकी भाषा भी अनपढ़ और सामयवादी लम्पटवाद जैसे हो रही है ! मानसिक स्थिति जैसे असंतुलित हो गया हो, कुछ भी बोल रहे है ? मुख्यमंत्री जी शिंदे को नहीं पहचानते, और वो कहते है कौन होता है शिंदे मुझे बताने वाले कि मैं कहाँ धरना पर बैठूं , मैं दिल्ली का मुख्यमंत्री हूँ मेरी मर्जी कहीं भी बैठ सकता हूँ , मैं बता सकता हु कि शिंदे को कहाँ बैठना है ? अब यह कितना मर्यादित और संयमित भाषा है हमारे आम आदमी पार्टी की आप ही निष्कर्ष निकाले !

केजरीवाल साहेब को एक बात और मान लेनी चाहिए की "काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ा सकते है " और हाँ महोदय जनता बिलकुल जागरूक है जैसा कि आप जानते है ! आप के लाइट एक्सन और मिडिया प्रेम भी अच्छी तरह से समझने लगे है ! अगर अपनी औकात में समय से पहले आ जाये तो बेहतर होगा वर्ना आम आदमी की ताकत भला आप से अच्छा और कौन जान सकता है ? वो जब सर आँखों बिठा सकता है तो जमीं पर पटकने में भी उन्हें जायदा वक्त नहीं लगेगा !

आम आदमी पार्टी अब आम आदमी के लिए अभिशाप साबित होने लगा है ! आज के तारीख में दिल्ली वासियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत अगर कोई है तो वो है आम आदमी पार्टी और उनके मुखिया अरविन्द केजरीवाल, जो अनरगल कार्यों और अपने आप को मीडियामय करने के लिए तरह तरह के ड्रामा करने में लगे रहते है !

अपने घरों में खुद आग लगाकर हाथ सेक रहे है और दूसरे लोगों के बारे में बड़ी बड़ी बाते कर रहे है ! जब घर मुखिया को कोई फिर्क नहीं हो तो दूसरा कोई क्यों चिंता करने लगे ?मुख्यमंत्री जी दिल्ली की महिला सुरक्षा को लेकर इतना सख्त है ये पता नहीं था ? जहाँ उनकी रिहायश है, जो उत्तरप्रदेश मे है क्या वो महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से बिलकुल सुरक्षित है ? धरना अब उत्तरप्रदेश में भी तयारी करनी चाहिए ! " करना न धरना , सिर्फ करते रहो धरना "

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Oct 28, 2012

चाइनीज खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक !!!

अजीनोमोटो (धीमा जहर) ::

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में यह धीमा जहर खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है। जान लें कि कैसे-

* सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।

* इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

* इसका ज्यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।

* पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।

* अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।

* उच्च रक्तचाप की समस्या से घिरे लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।

* व्यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।

* अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।

*अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है।

इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए। इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है। छिपा हो सकता है अजीनोमोटो अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है Hydrolyzed groundnut protein और स्वाद वर्धक 635 Disodium ribonucleotides यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है। जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

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May 6, 2012

उच्च रक्त चाप यानि साइलेंट किलर का इलाज जड़ी बूटी से ! आइये पढ़े !

इक्कीसवीं सदी के साइलेंट किलर का ख़िताब जिस बिमारी को जाता है वो है उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर | ब्लड प्रेशर व्यक्ति के जीवन के लिए वैसे ही जरुरी है जैसे किसी शहर को चलाने के लिए पानी का पाइप लाइन में प्रेशर | आपने सुना होगा कि अमुक व्यक्ति बहुत ज्यादा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है और उसका ब्लड प्रेशर बहुत कम हो गया है इसलिए बचने की उम्मीद कम है | यानि ब्लड प्रेशर कम हो जाना बेहद खतरनाक है | लेकिन हम बात कर रहे है हाई बीपी की | तो सबसे पहले जानते है की ब्लड प्रेशर है क्या ? रक्त जब धमनियों में प्रवाहित होता है तो धमनियों की दीवारों पर उसके घर्षण से जो दबाव उत्पन्न होता है उसे ब्लड प्रेशर कहते है | यानि बीपी नामक कोई बीमारी नहीं होती है बल्कि आम बोलचाल की भाषा में लोग हाई बीपी को 'बीपी' हो गया कहने लगते है | सामान्य बीपी :- व्यस्को में सिस्टोलिक बीपी 120 या उससे कम और डायस्टोलिक बीपी 80 या उससे कम सामान्य बीपी होता है | आजकल कई बार लोगों से सुनने को मिलता है कि ज्यादा उम्र में बीपी अपने आप ही बढ़ा हुआ रहने लगता है , परन्तु यह एक प्रकार कि भ्रान्ति है | यदि बीपी सिस्टोलिक 130 -140 या डायस्टोलिक 80 -90 की रेंज में आ जाए तो उसे प्रीहाइपरटेंसन कहते है | यानि बीपी सिस्टोलिक 140 से ज्यादा हो या डायस्टोलिक 90 से ज्यादा हो दोनो ही अवस्था में हाई कहलाएगा | खतरा .......यदि बीपी ज्यादा समय तक बढ़ा रहे और अनियंत्रित रहे तो धीरे-धीरे शरीर के अंगो को क्षति पहुँचने लगती है | इसका सबसे अधिक घातक असर होता है ह्रदय पर | ह्रदय की धमनियों को यदि लम्बे समय तक हाई-बीपी झेलना पड़े तो हृदयघात यानि हार्ट अटैक की आशंका कई गुना बढ़ जाती | इसी तरह लकवा होने की आशंका भी बहुत बढ़ जाती है | समय के साथ गुर्दों का फेल होने का डर भी रहता है जो की एक जानलेवा होती है | आँखों के पर्दे पर रक्त स्त्राव या सुजन हो सकती है | यानि शरीर के चार विशिष्ट अंगो को खतरा पैदा हो जाता है | कारण ........... कुछ ऐसी बीमारियाँ है जिससे बीपी बढ़ने का कारण आसानी से मालुम पड़ जाता है जैसे की गुर्दों में पथरी होना , गुर्दों फेल हो जाना या पेशाब की नली में रूकावट होना | थायराइड की बीमारी से भी बीपी बढ़ सकता है | लेकिन इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण है भोजन में नामक की अधिकता व तेल घी का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल और मोटापा, ये सभी बीपी को बढ़ जाने में छुपे हुए कारण है | लक्ष्ण.......... जैसा की शुरू में बताया गया है की यह एक साइलेंट किलर है , यानि हाई बीपी का अपना कोई विशेष लक्ष्ण नहीं होता है | कुछ मरीज सर-दर्द, थकन, सांस फूलने की शिकायत करता है लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की जब सर-दर्द हो तो मान ले की बीपी बढ़ गया होगा और बस तभी दबा खा ले | कई मरीज तो 240 -120 होने पर भी आराम से घूमते रहते है | लेकिन यह बेहद खतरनाक होती है | क्या कोई स्थाई इलाज़ है ........अधिकतर मरीजों में ऐसी कोई एक बिमारी या कारण पकड़ में नहीं आता जिसका इलाज होने से उच्च रक्त चाप की समस्या स्थाई रूप से ठीक हो जाय | एलोपेथ में उच्च रक्त चाप का कोई स्थाई इलाज नहीं होता है | अगर कोई इलाज है तो वो है वैकल्पिक चिकत्सा जिसमे पक्का इलाज संभव है | आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों जैसे फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट्स का विश्वशनीय उत्पाद का इस्तेमाल अगर कोई व्यक्ति चार से छे महीने तक करता है तो उन्हें है बीपी जैसे जानलेवा रोग से मुक्ति मिल सकती है | इसके लिए जरुरी है विश्वास व लगातार उत्पाद को लेने की ,फोरेवर लिविंग प्रोडक्ट्स के उत्पाद से न सिर्फ हाई- बीपी उसके साथ-साथ सम्बंधित सम्पूर्ण रोग से मुक्ति मिल सकेगी| निम्नलिखित उत्पाद इस रोग के लिए आप ले सकते है : - ALOEVERA GEL, ARCTIC SEA OMEGA 3, GARLIC THYME, ABSORBENT साथ में अगर गुर्दों सम्बंधित समस्या है तो LYCIUM PLUS
!!! अतः उच्च रक्त चाप एक आम और खतरनाक बीमारी है | कारण अपने लक्ष्ण लम्बे समय तक पता नहीं लग पाता है और दिमाग के साथ-साथ शरीर के कई अंगो को खोखला करती रहती है | जीवन शैली व आहार , रहन -सहन ऐसे रखे की तकलीफ आये ही नहीं बीपी बढ़ने की दशा में चिकित्सक का सलाह जरुर ले और आयुर्वेदिक उपचार जो की प्रार्थमिक उपचार के रूप में अपने और बिना किसी दुष्प्रभाव के निरोगी जीवन जिए !!!
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Feb 4, 2012

कैंसर इसका कारण और निदान !!


कैंसर का खतरा जिस तेजी से आजकल बढ़ रही है इसका सर्व प्रमुख कारण आहार विहार का प्रदुषण, भोजन में अम्ल और मधुर रसो का अति सेवन है ! दूसरी ओर धुम्रपान व गुटखा पण मशाला का सेवन फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण है और मौतों का सबसे बड़ा कारण है ! वैसे तो कैंसर के बहुतेरे कारण है ! अब कुछ कारण आपके समक्ष रख रहे है जैसे की सूर्य के प्रकाश में अधिक देर तक रहने से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है ! एस्बेस्टस का काम करने वाले मजदूरों में फेफड़े के एक अजीब प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है , जिसे "मिजोथिलिओमा" कहते है !

विकिरनें, चारकोल, खाने से बसा की अत्यधिक मात्रा, सेक्रिन तथा कीटनाशक दबाईयां व रासायनिक ( हर्बीसाइड व पेस्टीसाइड ) में पाए जाने वाले रासायनों या ऐसी चीजें जिनसे हममे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, इसे कर्सिनोजन कहा जाता है !

एक रिपोर्ट के अनुसार चिमनी से निकलने वाले धुंए से अंडकोष के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है , हम पार्यावरण से और अधिक डरने लगे है ! जैसा की हम सब जानते है की हमारा शरीर पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक रासायनों का सामना कर रहा है !

और यही वर्तमान में सबसे अधिक कैंसर से मौत का कारण है ! कैंसर से लड़ने के लिए आयुर्वेदिक इलाज सबसे बेहतर विकल्प , जिसका किसी भी प्रकार को शरीर पर दुष्प्रभाव नहीं होता है ! व्यक्ति के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देता है जो किसी भी प्रकार के रोग से लड़ने में समर्थ होता है ! और रोगियों के हालात में निरंतर सुधार होता रहता है ! अतः एलोवेरा व पौष्टिक पूरक का नियमित सेवन से कैंसर जैसे असाध्य रोग पर नियन्त्र कर सकते है ! कैंसर जो साक्षात् मौत है उस पर हम विजय पा सकते है !

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कैंसर को दे मात एलोवेरा व पौष्टिक पूरक से !!


कल यानि 4 फरबरी विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाये जाते है ! यह एक ऐसा शब्द है जिसका नाम सुनते है पीड़ित व्यक्ति व उनके परिजन के होश उड़ जाते है ! वर्तमान में दुनिया में होने वाली मौतों का दूसरा प्रमुख कारण कैंसर है ! यह आज दुनिया भर में सबसे बड़ी स्वास्थ्य की समस्या बन चूका है ! तक़रीबन 10 लाख कैंसर के मामले प्रत्येक साल भारत में आते है ! देश में महिलाओं में गर्भाशय के मुख ( सर्विक्स ), स्तन व डिम्बग्रन्थि के कैंसर के सर्बाधिक मामले सामने आते है ! वहीँ पुरुषों में मुंह, गर्दन व फेफड़े व भोजन नली के कैंसर के मामले सबसे ज्यादा होते है !

शरीर के किसी भी भाग में , उस भाग की कोशिकाओं ( सेल्स ) में असमान्य रूप से वृद्धि होने की प्रक्रिया को कैंसर कहा जाता है ! यह असमान्य वृद्धि शरीर के किसी भी भाग में गांठ व घाव के रूप में हो सकती है ! आइये कुछ प्रकार के कैंसर के बारे में चर्चा करते है और लोगों में जागरूक बनाए :-

मुख कैंसर ( माउथ कैंसर ) :- वर्तमान में मुख कैंसर के मामले सबसे ज्यादा भारत में पाए जाते है ! तक़रीबन 50 फीसदी से भी ज्यादा मामले भारत में सामने आते है !
अपने देश में मुख कैंसर ज्यादा होने के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है गुटखा पान मशाला व तम्बाकू के उत्पादों का सेवन ! आजकल युवक व युवती गुटखा पान माशाला का सेवन अपनी शान की बात समझते है !

यही वजह है अब युवावस्था में ही तमाम लोग इस कैंसर के गिरफ्त में आ रहे है ! इसके अलावा धुम्रपान व शराब का नित्य सेवन भी मुख कैंसर के जोखिम को बढ़ता है ! शुराती अवस्था में यह छोटा घाव ( अल्सर ) के रूप में विकसित होता है ! दर्द नहीं होने के कारण लोग इसे अनदेखी कर देते है ! लेकिन जबतक समझे में आता तबतक गर्दन की ग्रन्थियों तक या फिर शरीर में अन्य भागों तक फैलने की आशंकाए बढ़ जाती है !

अमाशय ( स्टमक ) कैंसर :- स्टमक कैंसर पाचन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करता ! इसके कारण पाचन तंत्र की कार्य प्रणाली बंद हो जाती है ! शुरुआती दौर में इस रोग को पहचानना बिलकुल संभव नहीं चुकी इसका विशेस लक्ष्ण नहीं होता जिससे स्पष्ट हो सके की यह अमाशय कैंसर के रूप है ! वैसे अगर पेट दर्द, पेट का फूलना, जी मिचलाना या उलटी होना, मल त्याग की आदतों में बदलाव और वजन कम होना आदि ऐसे ही लक्ष्ण है जो सामान्यतः अनेक रोगों में प्रकट हो सकते है !
जब मरीज बदहजमी, पेट में अल्सर या साधारण वाइरल से पीड़ित होता है !धुम्रपान और बहुत अधिक मात्रा में शराब पीना अमाशय कैंसर का एक कारण हो सकता है!

आयुर्वेद के अनुसार किसी भी रोग की चिकत्सा के लिए रोग के मूल कारणों को जानना अनिवार्य है ! आयुर्वेद के मुताबिक कैंसर का मूल कारण शरीर में विकारयुक्त पदार्थों का संचित होना है ! और यदि यह ज्यादा समय तक शरीर में संचित रहे तो मानव कोशिकाओं के विभाजन को प्रभावित कर उन्हें दूषित कर देते है ! और यही एक कैंसर का रूप ले लेते है !

स्तन कैंसर :- विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्वानुमान के अनुसार 2020 तक भारत में सात में से एक महिला स्तन ( ब्रेस्ट ) कैंसर से पीड़ित होगी ! वैसे देश में आजकल ब्रेस्ट कैंसर के मामले का गुणात्मक रूप से वृद्धि हो रही है ! महिलाये तब तक इस रोग की ओर ध्यान नहीं देती जबतक उनकी गाँठ में दर्द शुरू नहीं हो जाता है ! कई बार छोटी सी दर्दविहीन गांठ आगे चलकर स्तन कैंसर का कारण बन जाता है ! अतः इस जोखिम को न अपनाए , ऐसा समझ आये तो तुरंत चिक्स्त्क के पास जाए और अपना सफल इलाज करबाए ! स्तन कैंसर धीरे-धीरे पनपता है ! कैंसर की गांठ 1 सेमी. तक बनाने में कई बार 10 साल तक लग जाते है !

कैंसर के उपचार में आयुर्वेदिक व प्रकृतिक चिकत्सा एलो वेरा जेल व पौष्टिक पूरक से नतीजे बहुत ज्यादा सकारात्मक रहते है ! एलोवेरा जूस का नियमित सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है ! एलोपैथी चिकत्सा में रेडियो थेरेपी व किमो थेरोपी के दुष्प्रभाव भी होते है तो साथ में आयुर्वेद चिकत्सा से इन दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है !
एलोवेरा जेल व पौष्टिक पूरक निम्नलिखित है :-
1. Aloe Vera Gel 2. Garlic Thyme 3.Artic Sea 4. Pomestin Power 5. Bee Propolis 6. Gin Chia.Fields OF Green ETC.

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Jan 30, 2012

सर्दियों की खुबसूरत सौगात है शहद व उनके खास पौष्टिक पूरक !


आज एक बार चर्चा करते है मधुमक्खियाँ से बना हुआ उत्पाद और उनके फायदे ! शुरुआत करने से पहले आइये जानते है वो अपना छत्ता किस प्रकार से बनाती है ! अक्सर आपने देखा होगा की वो अपना छत्ता किसी ऊँची चट्टानी दरार या पेड़ की ऊँची डाली पर बनाती है ! ऐसे जगह से शहद लाना जोखिम भरा होता है और जरुरी नहीं है कि हर बार शहद मनचाही मात्रा में मिलेगा ही ! इसलिए आजकल व्यवसाय करने वाले लोग अपने फार्म हाउस या घरों में पालतू बनाकर शहद पाने का इन्तेजाम कर लेते है !

चुकी मधुमक्खी एक सामाजिक किस्म का कीट है और यह अपने समूह में रहना पसंद करती है ! इनकी सामाजिक व्यवस्था में एक रानी मक्खी और शेष उसके साथ रहने वाली श्रमिक मधुमक्खियाँ होती है ! रानी मधुमक्खी जहाँ कहीं भी बसेरा बनाती है, सारे मधुमक्खियाँ उसी जगह छत्ता बना लेती है ! इसी वजह से मधुमक्खी पालक रानी मधुमक्खियों को लकड़ी के आरामदेह छत्तेनुमा डिब्बा में रख देते है और कुछ ही समय में यह डिब्बे शहद इकट्ठे करने वाले श्रमिक मधुमखियों से भर जाते है !

हमारी कम्पनी यानि फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट्स के पास हजारों एकड़ प्रदूषित रहित जमीन पर दबाई वाली पौधों को लगाकर मधुमक्खियाँ को पालन का काम किया जाता है ! इसलिए आज हम दुनिया का सबसे बड़ा वितरक है दोनों ही एलोवेरा व मधुमक्खियो के उत्पाद में !!

मधुमक्खियों की पिछली टांगो पर डलिया और बाकि टांगो पर रोयों की ब्रशनुमा संरचना होती है ! जब मधुमक्खी किसी फूल पर बैठती है, तब यह ब्रश से झाड कर इसके परागकण अपने डलिया में भर लेती है ! परागकण का उपयोग मधुमक्खी अपनी छत्ते में पल रहे शिशु के लिए करती है, यह एक विशेष प्रकार की बेबी फ़ूड है !

इसमें मौजूद 22 प्रकार के पौषक तत्व है,जो एक संतुलित स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है ! 35 ग्राम परागकण प्रतिदिन लेने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा पूर्ति हो जाती है ! 28 प्रकार के मिनरल्स शारीर में पाए जाते है जिसमे 14 जरुरी माना जाता है परन्तु ( pollen ) में 28 के 28 सभी मिनरल्स पाए जाते है इसलिए इसे मानव जाती के लिए सम्पूर्ण आहार माना गया है !


रानी मधुमक्खी केवल शहद बनाने वाली श्रमिक मधुमक्खियों का नेतृत्व ही नहीं करती बल्कि छत्ते की आबादी भी बढ़ाती है ! यह लगभग 3500 अंडे प्रतिदिन देती है और एक बार शुरू हो गया तो लगातार कई सप्ताहों तक जारी रहती है ! इन्हीं अन्डो से नई श्रमिक मधुमक्खियाँ तैयार होती रहती है ! इस तरह से जहाँ श्रमिक मधुमक्खियाँ 7 सप्ताह में मर जाती है वहीँ रानी मधुमक्खियाँ की उम्र लगभग डेढ़ से 2 साल तक की होती है !
श्रमिक मधुमक्खियाँ अपनी लाये गए परागकण में एक एंजाइम मिलाकर खास प्रकार की गोली तैयार करती है जो रानी मधुमक्खियों की आहार होती है जिसे हम रोयाल जेली ( Royal Gelly ) कहते है ! इसे खाकर रानी मधुमक्खियाँ की अंडे देने की क्षमता बढ़ जाती है !

अतः इसका इस्तेमाल शारीरक व मानसिक कमजोरी , सेक्सुअल कमजोरी लोगो व स्किन के समस्या , बालों की समस्या, घुटने की दर्द, ट्यूमर, कोलेस्ट्रोल, अस्थमा,और खिलाडियों के लिए बहुत ही बेहतरीन उत्पाद है !



छत्ते में जो उजला गोंद के तरह होता है वह बहुत ही खास प्रकार के तत्व है ! एक शोध से पता चला है की अगर माँ के गर्भ के बाद कोई सबसे ज्यादा सुरक्षित स्थान है तो वह है मधुमक्खी का छत्ता जहाँ किसी भी प्रकार का कोई फंगस, या किसी भी प्रकार का कोई घुसपैठ नहीं हो सकता है ! छते के चारों ओर एक विशेष प्रकार का उजला गाढ़ा आवरण चढ़ा होता है जो एंटी बायोटिक, एंटी फंगल, और उसमे कई प्रकार की एंटी प्रोपर्टी पाए जाते है !

अतः मानव जाती के लिए एक बहुत बेहतरीन प्राकृतिक एंटी बायोटिक के रूप में इसे यानि बी प्रोपोलिस ( Bee Propolis ) को लिया जाता है ! यह एक ऐसा एंटी बायोटिक है जिसे सालों साल लिया जा सकता है जिसका सिर्फ और सिर्फ फायदा ही होगा बिना किसी साइड इफेक्ट के ! तो आइये हमारे साथ और सर्दी का आनंद लीजिये मधुमक्खियों से बनी उत्पाद का हिस्सा बनकर !


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Oct 17, 2011

फील्ड्स ऑफ़ ग्रीन्स ( पौष्टिकता से भरपूर )

दादी माँ के स्वास्थ्य सम्बंधित नुस्खे गलत नहीं हो सकते | वे हमेशा कहती थी की अच्छे स्वास्थ्य के लिए हरी-पत्तेदार सब्जियां खाना जरुरी है |और अब आहार सम्बंधित जानकारी रखने वाले इस बात की पुष्टि भी करते है - हरी-पत्तेदार सब्जियां बहुत से बेशकीमती तथा आवश्यक पोषक तत्वों का स्त्रोत है |

चाहे आप बढ़ते हुए वजन से परेशान है, उसे आप नियंत्रण करना चाहते है, या ह्रदय सम्बंधित समस्या से जूझ रहे है , हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अति-उत्तम है क्योंकि इनमे पोषक तंतु, फौलिक एसिड,विटामिन-सी,पोटाशियम, मैग्नेशियम अत्यधिक होने के साथ-साथ प्रचुर मात्र में फाइटोकैमिकल, जैसे की ल्यूटिन, जिजेंथिन तथा बीटा-कैरोटिन ( ये तीनों मैक्यूलर हेल्थ के लिए लाभदायक है ) होते है | इनमे चर्बी और कैलोरीज कम होती है और अधिक मात्र में मैग्नेशियम तत्व तथा नीची ग्लाइसिमिक इंडेक्स होने से उन लोगों के लिए भी उत्तम आहार है जो मधुमेह ( डाईबेटिज ) से पीड़ित है |


वर्तमान समय में ज्यादातर आहारों में भरपूर मात्रा में कीटनाशक, कृमिनाशक, एडेटिब्स, स्वाद बढ़ाने वाले रसायन मिलाये जाते है जिससे हम आशवस्त नहीं हो पाते है की क्या हमें पर्याप्त मात्र में एंटीओक्सिडेंट तथा क्लोरोफिल मिल रहे है, जिसके सेवन से हम चिंतामुक्त हो सकते ? अब आपको इधर-उधर भागने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स आपके लिए प्रस्तुत करते है " फील्ड्स ऑफ़ ग्रीन्स" जो सुखमय भोजन का सुगम उपाय है |

विशेषरूप से यह उत्पाद पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से ही बनाया गया है | " फील्ड्स ऑफ़ ग्रीन्स" में मिश्रित है यंग बार्ली,वीट ग्रास,अल्फ़ा-अल्फ़ा तथा काइन पैपर ( young barley grass, wheat grass, alfaalfa and cayenne pepper) और यह स्वास्थ्य तथा शक्ति बढ़ाएं इसलिए इसे शहद से मजबूत किया गया है |

बार्ली ग्रास( BARLEY GRASS )- ऐसा कहा गया है-बार्ली ग्रास में गाय के दूध के मुकाबले तिस गुना बी-1 तथा 11 गुना कैल्शियम होता है | इसमें प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक एंजायम होता है जो शरीर को विधिवत रखने के लिए आवश्यक है | एक और अद्धभुत पोषक तत्व है 'क्लोरोफिल' जो एक प्राकृतिक तरीके से आँतों में जमे विषैले तत्वों से छुटकारा दिलाता है | मानव शरीर के लिए खून की महत्व है वैसे ही पेड़-पौधों के लिए क्लोरोफिल आवश्यक है | बार्ली ग्रास में मौजूद बहुत अधिक घुलनशील व अघुलनशील फाइबर के कारण अनचाहे तत्वों को शरीर से बाहर कर सकता है |

वीट ग्रास ( WHEAT GRASS )- बार्ली ग्रास की तरह इसमें भी प्राकृतिक पोषक तत्वों का सर्वशक्तिशाली स्त्रोत है और इसमें भरपूर मात्रा में क्लोरोफिल पाए जाते है | वीट ग्रास के रस को सम्पूर्ण भोजन माना गया है | इसमें भोजन पचाने की क्षमता है और यह मेटाबोलिज्म को बढाता है और इसमें समाहित एंटी-ओक्सिडेंट ख़राब हुई कोशिकाओं की मरम्मत कर मुरझाई हुई त्वचा को नवजीवन प्रदान करती है |

अल्फाल्फा (ALFALFA)- जिसका अर्थ है "सभी भोजनों का पितामह" | अल्फाल्फा की खोज कई हजार वर्ष पहले अरब लोगों ने की | उन्होंने शरुआत में अपने घोड़ो को सेवन कराया तो पाया की पहले से तेज व मजबूत बन गए फिर अपने भोजन में भी इस ग्रास को सम्मलित किया और शारीरिक पौष्ट्ता में अंतर पाया | इस ग्रास के गुणों व शारीरिक फायदा देखकर ही इनका नाम अल्फाल्फा रखा |

अल्फ़ाअल्फ़ा के फायदे क्या है? इसमें आठ जरुरी अमीनो एसिड है जो प्रोटीन्स की आधारशिला है | इसमें बड़ी मात्र में खनिज,जैसे की कैल्शियम,मैग्नेशियम,पोटाशियम,लोह तथा जिंक है | और इन सबसे ऊपर यह क्लोरोफिल का एक अच्छा स्त्रोत है |जड़ी-बूटी विशेषग्य इसे अच्छे टॉनिक की संज्ञा देते है | जिसमे समाहित है विटामिन, खनिज तथा प्रोटीन्स | ऐसा जाना गया है की अल्फाल्फा की जड़ें जमीं में 130 फुट तक जाती है तथा जमीन में मौजूद सर्वोत्तम खनिजों की खोज-बिन करती है |


काइन पैपर ( CAYENNE PAPPER )- ( तेज लाल मिर्च ) - हमारी रक्त प्रवाह की क्रिया के लिए यह जड़ी-बूटी उत्तम आहार का काम करती है और यह जाना गया है की यह धमनी, नसों तथा कोशिकाओं की बनावट में आवश्यक योगदान देती है | काइन में गर्मी पैदा करने वाले तत्व शरीर में प्राकृतिक ताप पैदा करते है और आत्मसात, तथा मल बाहर निकालने के साथ-साथ आँतों की क्रिया में भी सहायक होते है | काइन पैपर सभी जड़ी-बूटियों के लिए उत्प्रेरक के रूप में भी जाना जाता है |

इन चार आधारभूत तत्वों का मिश्रण "फील्ड्स ऑफ़ ग्रीन्स" को बाजार में सबसे प्रचलित न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट बनाता है | तो हमें दिन में कितनी लेनी चाहिए ? इनकी कोई मात्र निश्चित नहीं है और यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितना फायदा चाहते है | हाँ , एक व्यस्क के लिए हम दो से तिन गोलियां रोज खाने की सलाह देते है |


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Oct 11, 2011

जापानी बुखार का आतंक - इनसेफेलाईटीस !!


वर्तमान परिदृश्य में यह बुखार बच्चों के लिए साक्षात् काल के सामान है | ज्यादातर यह बीमारी गाँव के बच्चों को संक्रमित कर रही है | जहाँ जनसुविधा का आभाव है | जहाँ तहां पानी के बहाव है | बच्चे को कीचड़ और पानी के साथ खेलना अच्छा लगता है | गंदगी और जमा हुआ पानी में मच्छरों के जमाबरा होता है | और उसी में आतंकी मच्छर कभी किसी बच्चों को अपना शिकार बना लेती है |

आजकल उत्तर प्रदेश के कई जिला इस बिमारी के प्रकोप से त्रस्त है | गोरखपुर, कुशीनगर,देवरिया,संत कबीर, बस्ती,सिद्धार्थ नगर इत्यादि ज्यादा प्रभावित है | 1978 से शुरू हुई यह बीमारी, करीब 33 साल होने जा रही है और अनुमानतः अपने देश के कई राज्य में बच्चों के लिए यमराज के रूप में आती है और अपने साथ इलाका के इलाका उठा ले जाती है | एक अनुमान के अनुसार आजतक करीब 50,000 बच्चों की जान ले चुकी है |

यह इतना खतरनाक है की 30 प्रतिशत बच्चे ही इस बीमारी से बच पा रहे है , और जो अगर बच भी जाते है तो इसे अपाहिज बना दिया जाता है | मतलब साफ़ है की अगर कोई बच्चा इस बीमारी के चपेट में आता है , फिर या तो काल के ग्रास बन जाते है नहीं तो जीवन भर बिकलांग बन कर जीते है | पिछले कुछ दिन समाचार में सुनने आया की यह बुखार दिल्ली में भी दस्तक दे दी है और कुछ बच्चे यहाँ भी मारे जा चुके है |

देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी जापानी बिमारी का कोई ठोस इलाज़ आजतक नहीं है | जिस बिमारी से लोग 33 साल से जूझ रही है , प्रत्येक साल यह कहीं न कहीं अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती है और गाँव के गाँव अपने आगोश में लेकर चली जाती है - क्या इसके बारे में हम , आप और हमारी सरकार को सोचने की जरुरत नहीं है ?

हम अक्सर कैंसर, सुगर हार्ट प्रॉब्लम पर बड़ी बड़ी बाते और दावे करते रहते है | क्या यह किसी कैंसर से कम है ? हमें जागने की जरुरत है और सरकार को भी इस बीमारी को रोकने के लिए समुचित प्रयास करनी चाहिए |

जापान, ताइवान, चीन,हांगकांग और सिंगापूर में यह बीमारी बरी तेजी के साथ फैली थी परन्तु वहां की सरकार और चिकिस्तक के सार्थक प्रयास से इस पर काबू कर लिया गया है |

एक बार यहाँ तक की जापान से इसका वेक्सिन मंगवाया गया था | परन्तु जानकर बड़ा दुःख होगा की कोई सात लाख वेक्सिन में से पाँच लाख ख़राब पाए गए थे | मतलब उसकी एक्सपाइरी डेट खत्म हो गई थी | यह है सरकार की व्यवस्था ! इस बारे में कोई ठोस कदम उठाने की जरुरत है |
बच्चे हमारे देश के भविष्य है - जरुर ख्याल रखें !!!

एक बार जरुर कहना चाहूँगा - एलोवेरा का उत्पाद जरुर बच्चों को दे ताकि ऐसे वैसे बीमारी की ऐसी तैसी | आपके बच्चे की इम्यून सिस्टम हमेशा दुरुस्त रहेगी कोई भी बीमारी उसे छूने से पहले ही भाग जाएगी | एलोवेरा का बिट'स न पिचेज हमेशा अपने घर में रखे | यह आपके घर का वैद्य के रूप में काम करेगा |


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Mar 19, 2011

एलोवेरा जूस क्यों जरुरी है ?

एलो मात्र एक पौधा नहीं है, मानो कुदरत ने मानव शरीर के कल्याण के लिए विशेष तौर पर इसे धरती पर लाया हो | जितने गुण एलो वेरा में है ,शायद ही किसी और जड़ी-बूटी में एक साथ पाए जाते है | इसलिए इसे औषधियों का महाराजा माना गया है | कई नाम से इसे लोग पुकारते है , कुछ लोग इसे संजीवनी बूटी तो कुछ लोग इसे साइलेंट हीलर, चमत्कारी औषधि आदि भी कहते है |

एलोवेरा का 5000 साल पुराना इतिहास है | पुराने समय में लोग इससे औषधि के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे है | पवित्र ग्रन्थ रामायण, बाइबल और वेदों में भी इस पौधे की उपयोगिता के बारे में चर्चा की गई है | मिस्त्र की महारानी क्लीवपेट्रा से लेकर महात्मा गाँधी तक इसका इस्तेमाल करके फायदा उठा चुके है | वर्तमान में एलो वेरा का उपयोग अनेक प्रकार के आयुर्वेदिक औषधीय में बहुतायत से हो रहा है | कोई भी वैद्य,चिकित्सक, व हाकिम इनके गुणों को नकार नहीं सकता | इसे कई नाम से जाना जाता है , जैसे हिंदी में ग्वारपाठा, क्वारगंदल,घृतकुमारी, कुमारी या फिर घी-ग्वार भी कहते है |



वर्षों के शोध के बाद पता चला की एलोवेरा के 300 प्रकार के होते है | इसमें 284 किस्म के एलो वेरा में 0 से 15 प्रतिशत औषधि गुण होते है |11 प्रकार के पौधे जहरीले होते है बाकि बचे 5 विशेष प्रकार में से एक पौधा है जिसका नाम एलो बारबाडेन्सिस मिलर है जिसमे 100 प्रतिशत औषधि व दवाई दोनों के गुण पाए गए है |

जिस तरह हमारे यहाँ (AIIMS DELHI ) एम्स दिल्ली को सब जानते है ठीक वैसे ही अमेरिका में लाइंस पौलिंग इंस्टीच्युट ऑफ़ साइंस एंड मेडिसिन न केवल अमेरिका में बल्कि सारे संसार में परिचित है | डॉ. लाइंस पौलिंग जिन्हें दो बार नोबिल पुरुस्कार से से नाबजा गया था |



कई वर्षों के शोध के बाद पता लगाया इस विशेष प्रकार के एलो बारबाडेन्सिस में समाहित गुणों के बारे में | फिर फॉर एवर लीविंग प्रोडक्ट्स इंटरनेशनल के चेयरमान रेक्स मॉन जो की अमेरिकन है उनके सहयोग से एलो वेरा जेल और साथ में कुछ उत्पाद को बाजार में उतारे जो को मानव जाती के लिए चमत्कारी सिद्ध हुए |

एलोवेरा की खास बात यह है की यह अपना आहार वातावरण से लेता है | आज के वातावरण में प्रदुषण ज्यादा है, और एलोवेरा के पत्ते उसे अपने अन्दर सोंख लेता है | पहले के एलो वेरा कुछ हद तक ठीक था क्योंकि पहले हमारे आसपास इतना प्रदुषण नहीं होता था | आसपास इतना प्रदुषण है की हमारे यहाँ के एलोवेरा जेल को पीना स्वस्थ्य के दृष्टीकोण से ठीक नहीं हो सकता है |


ऍफ़.एल.पी 7500 एकड़ जमीन में बिलकुल प्रदूषित रहित तरीके से खेती करके एलो पौधों की फसल तैयार करती है | यहाँ प्रदुषण का इतना ख्याल रखा जाता है की 200 किलोमीटर तक के आसपास के क्षेत्र में कोई पेट्रौल, डीजल वाली गाडी मोटर नहीं चलती और यहाँ तक वहां अन्दर भी जो गाडी वगैरह चलती है, वो बैटरी से चलती है | इस तरह प्रदुषण का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं होता है |

ऍफ़.एल.पी एलोवेरा को ( IASC ) इंटरनेसनल एलो साइंस काउन्सिल से मान्यता प्राप्त सील उत्पाद की शुद्धता और गुणवता को दर्शाती है | 25 -09 -2005 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक आलेख भी छपा था जिसमे एलोवेरा के शुद्धता के लिए सील को अवश्य देख ले | ऐसा एलोवेरा के सम्बन्ध लिखा लेख में लिखा गया था |

इस पौधे की विशेषता यह है की पत्ते को तोड़ने के ठीक तीन घंटे के अन्दर उपयोग कर लेना चाहिए नहीं तो उनमे विद्यमान औषधि + पौष्टिकता के गुण धीरे-धीरे नष्ट हो जाते है | ऍफ़.एल.पी में वैज्ञानिकों की शोध करके इस पौधे के जूस को कुछ जड़ी-बूटी की मदद से इसके जीवन को दो- तिन घंटे से बढाकर चार साल के लिए सुरक्षित कर दिया है |

एलोवेरा जूस कैसे काम करता है ?
एलोवेरा जेल कम से कम 90 -से 120 दिनों के नियमित सेवन से असाध्य कहे जाने वाली बीमारियाँ में लाभ पा सकते है - जैसे Arthritis, Asthma, Diabeties,Heart Problem, High/Low Blood Pressure,Gastric Problem, Constipation, Obesity, Ulcer, Lack of Energy, Thyroid, Kidney Problem, Back Pains, Survical Problem, Parkinson, Colitis, Amoebas, Stress, Tension, Depression, Cholestrol, Pimples, Ladies Problem during pregnancy, Plus all A to Z Problems और तो और Cancer जैसी खतरनाक बीमारी में भी एलो जेल राहत देती है यानि इसके नियमित सेवन से आप हमेशा के लिए तंदुरुस्त रख सकते है |

आप हैरान होंगे की एक एलोवेरा से करीब 220 प्रकार के बीमारियाँ कैसे ठीक हो जाती है ? इससे पहले हम यह जान ले की हमें बीमारियाँ होती क्यों है ? दरअसल हमें जीवित रहने के लिए हवा, पानी और भोजन की आवश्यकत होती है, पहले के समय इसी के सहारे लोग सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहता था क्योंकि पहले वातावरण स्वच्छ था लेकिन आज के वातावरण को देखे तो यह तीनो ही चीजें हमें अशुद्ध मिल रही है |

दूसरा आज का खान-पान,हमारी जीवन शैली ,आधुनिकता की दौड़ में इतनी बदल चुकी है की हमें अपने लिए ही वक्त नहीं होता |आज समोसा, पिज्जा ,बर्गर,पेप्सी,चाउमीन मतलब फास्ट फ़ूड हमारे आहार में शामिल हो चूका है तथा नियमित व्यायाम करने का समय भी नहीं बचा है तो यही सब कारण मिलकर मनुष्य को अस्वस्थता की ओर ले जाते है |

चुकी हमारी 90 प्रतिशत बीमारियाँ पेट से उत्पन्न होती है और इन सब बिमारियों का कारण है - हमारी आंते साफ़ ना होना और एलोवेरा में मौजूद सापोनिन और लिग्निन आँतों में जमे मैल को साफ़ करके इनको पौष्टिकता प्रदान करता है | शरीर में किसी भी प्रकार के रोग का होना अन्दुरुनी सिस्टम में गरबरियाँ को दर्शाती है |


एलो मानव शरीर में डोमेक्स का काम करता है , जैसे किचन की नाली जब जाम हो जाती है तो हम नाली में डोमेक्स डालते है और नाली साफ़ हो जाती है और उसी तरह एलो मानव शरीर के अन्दर जाते है आंतो को साफ़ करने का काम शुरू कर देता है | और जैसे जैसे हमारी आंते साफ़ होती है वैसे -वैसे हमें आराम मिलना शुरू हो जाता है | जैसे सूर्य के तेज को हम नाकर नहीं सकते उसी तरह एलो जूस मानव शरीर के अन्दर जाते ही उसे आराम मिले बिना नहीं रह सकता |

इसके नियमित सेवन से आँखों की रौशनी बढती है घुटनों के दर्द , खून साफ़ करने में हकलाने में , दांतों की बिमारियों में पेट की सभी बिमारियों में बालों के झरने में , यादास्त बढ़ाने में वजन कम करने में या बढ़ाने में बहुत फायदा देता है | इसे किसी भी दावा के साथ लिया जा सकता है | इसका किसी भी प्रकार कोई दुष्प्रभाव नहीं है | बच्चे, जवान, बुजुर्ग ( स्त्री-पुरुष) सभी ले सकते है |

अतः एलोवेरा हमें नियमित लेना चाहिए | यह हमारे घर के वैद्य है | अगर कोई बीमार पिएगा तो उसे स्वस्थ्य होने में मदद मिलेगा और कोई स्वस्थ्य व्यक्ति पिएगा तो बीमार ही नहीं होगा |

हजारों लाखों रुपये बीमारी के इलाज में खर्च करने से कई गुना बेहतर है की बीमारी होने के कारण को ही शरीर से बहार निकालने का प्रयास किया जाये | घर बैठे , खाते-पिटे, हँसते-खेलते, बिना कोई ओपरेसन के अपनी व अपने परिजन की समस्त बीमारी के कारणों को आप स्वयं ही समूल नष्ट कर सकते है |

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Mar 11, 2011

अपेंडिक्स है - एलोवेरा जेल लें ओपरेशन से बचें !


अपेंडिक्स क्या है ? यह छोटी आँतों और बड़ी आँतों के बिच की कड़ी है | इसमें एक छोटी से थैलिनुमा जो शेह्तुत के आकर की होती है जो आँतों से बाहर की ओर निकली रहती है | इसी को अपेंडिक्स कहते है | दरअसल पहले इसके कार्य प्रणाली के बारे में नहीं मालुम था की क्या मनुष्य के लिए अपेंडिक्स जुरुरी है या नहीं | अक्सर चिकित्सक अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे , इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है, मतलब यह एक आँतों के बिच में गैरजरूरी चीज समझा जाता था |

परन्तु चिकित्सक ने अपेंडिक्स पर शोध के बाद पाया की यह स्वस्थ्य शरीर के लिए जरुरी भी है | इससे मनुष्य के पाचन प्रणाली के लिए अच्छे वाले बैक्टेरिया को जमा करके रखने वाली थैली है जिससे कारण जब लम्बे समय से रोगों के वजह से जब शरीर के बैक्टेरिया में कमी हो जाती है तो अपेंडिक्स का काम पाचन प्रणाली को सुदृढ़ रखना होता है |


दरअसल अपेंडिक्स की थैली एक ओर से खुली और दुसरे ओर से बंद होती है | छोटी आँतों से बचा हुआ कण अगर उसमे जाकर फंस जाता है और ज्यादा दिनों तक एकत्रित होकर सड़ने-गलने लगते है फिर सुजन हो जाता है जिसके कारण जबरदस्त दर्द मध्य रात्रि के आसपास शुरू होता है जो की कभी तेज कभी धीमा परन्तु लगातार करीब चार घंटे तक होता रहता है |

इसके मुख्य कारण होता है लम्बे समय तक कब्ज़ का रहना , पेट में पलने वाला परजीवी व आँतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाता है |

भोजन में रेशे का न होना या कमी भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार होता है | जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सुजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है |


इसके लक्षण पेट के दाहिने भाग के निचे अचानक तेज दर्द का होना , उलटी आना, जी मचलाना , जीभ के ऊपर सफ़ेद आवरण का होना , हलकी बुखार का होना | शुरू में अपेंडिक्स का दर्द नाभि के निचे से उठता है और बाद में दाहिने टांग के ऊपर पेट में होता है |

दर्द बहुत बढ़ जाने पर ओपरेशन आवश्यक हो जाता है | यदि यह शुरूआती अवस्था में हो या ऐसे लम्बे अरसे है जिसके दौरान दर्द उठता है फिर चला जाता है, तो पोषक तत्वों व जड़ी बूटी से रोगी को काफी मदद मिल सकती है |

एलो वेरा आधारित जड़ी बूटी के माध्यम से रोगी का इलाज संभव है जो की निचे दी जा रही है :-
1 Aloevera Gel - भोजन के कणों को हटता है और निर्वाशिकरण करके शरीर के पाचन प्रणाली व पौष्टिकता प्रदान करता है !
2 Pomesteen Power - सुजन विरोधी, पीड़ा निवारक है !
3 Bee Propolis - प्राकृतिक एंटी बायोटिक ,
4 Garlic Thyme - एंटी-बायोटिक, मांसपेशी को रहत पहुंचाती है |

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Mar 10, 2011

एलोवेरा जूस शरीर के लिए अमृत तुल्य - आइये जानते है क्यों ?



आज आपके साथ चर्चा करते है एलो वेरा जूस में समाहित विशिष्ट तत्व जिसके सेवन से मनुष्य के शरीर निरोग रहता है | सुन्दर,चुस्त व दुरुस्त सेहत के लिए मनुष्य अपने दैनिक आहार में इस जूस को शामिल करें | आखिर क्या गुण है एलो वेरा जूस में जो मानव जाती के लिए आज के युग का अमृत तुल्य माना गया है ?

लिग्निन :- एक गुदे जैसा पदार्थ जो एलो वेरा की पत्तियों की जेली में शामिल सेलुलोज के साथ पाया जाता है | इसकी उपस्थिति इस बात का सूचक है की यह मनुष्य की त्वचा में गहराई तक जाने की अत्यधिक क्षमता रखता है |

सैपोनिंस :- इसकी खोज 1951 में एक घटक के रूप में की गई जिसमे एलोवेरा लीफ जूस की मात्रा 2 .91 प्रतिशत शामिल थी | सैपोनिंस ग्लाइकोसाइड्स है जिनमे न केवल आँतों की सफाई करने की क्षमता है बल्कि शैम्पू जैसे कास्मेटिक्स में प्राकृतिक झाग पैदा करने वाले उच्चकोटि के प्राकृतिक साबुन एजेंट भी है |

एन्थ्राक्विनोंस :- अलोइन-कैथोटिक और एमिटिक , बारबैलोइन -एंटीबायोटिक और कैथोरटिक , आइसोबारबैलोइन-एनालजेसीक और एंटीबायोटिक , अन्थ्रानाल , अन्थ्रासिं, अलोईटिक एसिड - एंटीबायोटिक, अलो अमोडीन-बैकटीरिसाइड और लक्झेटिव, सिनैमिक एसिड- जर्मीसाइड और फंगीसाइड, इस्टर ऑफ़ सिनैमिक एसिड- एनालजेसीक और अन अस्थेटिक, इस्टीरियोल आयल - ट्रेकुलाईजिंग , क्रिसोफेनिक एसिड - स्किन फंगस , अलो अल्सिन-गैस्ट्रिक सीक्रेशन रोकता है , रेजिस्टनाल |

मोनो और पॉली सैकेराईड्स :- एल्ड़ोनेन्टोज, सेलुलोज, ग्लूकोज, एल रैमनोज, मैनोज !

अमीनो एसिड :-
आवश्यक अमीनो एसिड - आइसोल्युसिन, ल्युसिन, लाइसिन, मैथीओनिन, फेनिल लोनीन,थियोंइम, वैलिन

सेकेंडरी :- एलोनिं, आज़िरनीन,एस्पार्टिक एसिड, ग्लुटामिक एसिड , ग्लिसरीन, हिस्टीडाइन, हाइड्रोक्सीप्रोलाइन्स, प्रोलाइन , प्रोलाइन, सेरिन, टाइरोसीन !
इनआर्गनिक / इन्ग्रेडिएन्ट्स/मिनरल्स :- कैल्सियम, फास्फोरस,पोटैशियम,आयरन,सोडियम,क्लोरिन,मैंगनीज, मैंग्नेशियम,कापर, क्रोमियम, जिंक !

विटामिन्स :- विटा ए-कैरोटिन , विटा बी-उत्तकों में वृद्धि, रक्त और उर्जा उत्पन्न करता है ! विटा सी- कीटाणुओं को रोकने, घाव भरने और स्वस्थ्य त्वचा के निर्माण में सहायक होता है ! विटा एम्- रक्त निर्माण में सहायक , नियान्सिमेंनाइड- मेटाबोलिज्म का नियंत्रक ! कोलाइन - मेटाबोलिज्म में सहायक !

एन्जाइम :- फास्फेट - एमाइलेज, ब्रैडीकाइनेज- इम्यून बिल्डिंग , कैटालेज - तंत्र में पानी संग्रह की सुरक्षा , सेलुलोज - सेलुलोज डाइजेशन, क्रिएटिव फास्फो काइनेज - मस्कुलर एन्जाइम , लाइपेज- पाचन, न्युक्लियोटाईडेज, अल्केलाइन फोस्फेट, प्रोटिएज- प्रोटीन को उनके संघटक तत्वों में हाइड्रोलाइज करता है !

अतः इन्हीं सब उपरोक्त विशिस्ट गुणों के कारण एलो वेरा जूस वर्तमान में तहलका मचा दिया है | वह चाहे किसी भी प्रकार के रोग हो उसमे अचूक साबित हो रही है | यहाँ तक की प्राकृतिक चिकित्सा में एलो वेरा जूस कब्ज़ से लेकर कैंसर तक के मरीजों के लिए एक अत्यंत लाभकारी औषधि है | नित्य नियमित एलो वेरा जूस का सेवन मनुष्य जीवन के लिए काया कल्प कर देती है |

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Feb 14, 2011

स्वस्थ्य जीवन के लिए जीवन शैली में परिवर्तन करें |

आज भी बिमारी मनुष्य के सामने ठीक उसी प्रकार के है जैसे की प्राचीन काल में थे, पर बिमारियों का स्वरूप बदल गया है |बाहरी तौर पर हम अच्छे खासे हष्ट-पुष्ट नजर आते है , तब मालूम पड़ता है बहुत खुशहाल है |परन्तु अन्दुरुनी हालात बहुत कुछ ठीक नहीं होता है | भिन्न-भिन्न प्रकार के बिमारियों से ग्रसित होते है | आज कल का जीवन शैली लोगो को घुट-घट कर मरने के सिवा और कुछ नहीं दे सकता है |

आदते इतनी वाहियात हो गई है कि उसने अपने कुल्हारी से अपनी ही टांगे काट डाला है | उसने अपनी सेहत को इतनी बुरी तरह से तबाह कर डाला है, जैसे की दुनिया में आज से पहले इतनी बुरी सेहत हुई नहीं थी | बीमारियाँ इस कदर दुनिया में फैली हुई है , उतनी बीमारियाँ तो दुनिया के मानचित्र पर , जबसे मनुष्य इस धरती पर पैदा हुआ है, तब से लेकर आजतक नहीं थी | आदमी वर्तमान में इतना कमजोर,बीमार,दुर्बल, रोगी और खोखला हो गया है की इतिहास में ऐसा कभी नहीं था | क्या यह सब मानव सभ्यता के विकाश के कारण है या उनकी बेअक्क्ली ? जरा सोंचे !

मानव शारीर प्रकृति कि एक अनमोल संरचना है | शरीर का विज्ञानं इतना जटिल है, जिस पर सदियों से सम्पूर्ण दुनिया के चिकित्सक शोध कर रहे है | इन्सान चाँद पर तो पैर रख दिए है लेकिन शरीर के विज्ञानं के विषय में केवल कुछ अंश भी समझ पाया है | शरीर की तंदुरुस्ती व आयु से जुड़े विज्ञानं को हम आयुर्विज्ञान अर्थात आयुर्वेद कहते है तथा इससे बने इलाज को आज दुनिया के तमाम बड़े-बड़े देश अपना रहे है |


इन्सान की जिन बिमारियों का इलाज आज की आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा में नहीं हो पता, उन्ही लाइलाज बिमारियों का पक्का इलाज आयुर्वेदिक नुस्खों वाली दवाइयों से हो जाता है , जिसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव यानि की side effect भीं नहीं होता, जबकि आज की आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा से मनुष्य के रोग थोड़े समय के लिए दब जरुर जाते है लेकिन उसके साथ कई और समस्याएं पैदा हो जाती है | आयुर्वेदिक इलाज में ऐसा नहीं होता क्यूंकि यह इलाज रोग व कमजोरियों को हमेशा के लिए जड़ से खत्म कर देता है |

डायबिटीज को ही अगर लेते है तो वो डॉक्टर जो मरीजों को डायबिटीज के बारे में सलाह देते है , कई खुद रोगी होते है | ऐसा एक डॉक्टर से मैं मिल भी चूका हूँ | करीब पाँच साल से वो टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित है | ऐसा नहीं है की उन्होंने अपना इलाज नहीं कर रहा है परन्तु डायबिटीज की गोलिया बढ़ रही है और ज्यादा कुछ फायदा नहीं हो रहा है |


इस तरह के बिमारियों से बचने के लिए सिर्फ जीवन शैली में परिवर्तन की जरुरत है | अपने शिक्षक स्वयं बने | बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी अर्जित करें जो हमेशा ही फायदेमंद साबित होगा | एक जागरूक मरीज ही अपना इलाज पूरी तरह से करबायेगा या हिम्मत अंत तक बनाए रखे |

इस तरह से लाइलाज समझे जाने वाली बीमारियाँ के लिए कारगर औषधियों पर कई शोध हो चुके है | कुछ आयुर्वेदिक वनौषधियों का नाम प्रयोग करके यह देखा गया है की लाइलाज बिमारियों पर इस प्रयोग करने से बहुत ही फायदेमंद हुआ है | ऐसे ही वनौषधियों में से एक है ' एलोवेरा " | यह शरीर के लिए अमृत तुल्य है | हरेक तरह के बीमारियों में इसका प्रयोग फायदेमंद होता है |


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Feb 6, 2011

नजरिया को बदले - नज़ारे बदल जायेंगे ! जुड़ें एफएलपी के साथ


फरबरी महीने की पहले दिन हिमगिरी एक्स्रेस हादसा बहुत ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण था | किस तरह ट्रेन के ऊपर बैठे लोगों के जिस्म मुली, गाजर के तरह चीथड़े-चीथड़े हो गए | चश्मदीद के अनुसार करीब 35 से 40 लोग काल के ग्रास में समा गए | आखिर क्या है उनके अकाल मृत्यु के कारण ? कौन जिम्मेदार है ? विचार करने योग्य प्रश्न है |

सरकारी तंत्र की लापवाही का आलम तो देखिये सैकड़ों लोग ट्रेन के छत पर बैठ गए | रेलवे पुलिश क्या वहां ट्रेन के छत पर बैठे लोगों के तमाशा देख रहे थे | क्या रेलवे पुलिश ट्रेन में बैठे लोगों को परेशान करने के लिए भर्ती हुई है ? जहाँ सरीफ लोग मिले नहीं की टिकट के नाम पर वसूली चालू करते नजर आते है | खचाखच भड़ी बोगी व छत पर बैठे लोगों को नियंत्रण किया जा सकता था लेकिन उनके बाप का क्या गया ? न जाने कितने घरो के चिराग बुझ गए परन्तु हमारे नेता लोग इस हादसे पर भी अपनी राजनीती स्वार्थ सिद्धि के अलावा कुछ नहीं किया ?

इस घटना से एक और बात उजागर हुआ है बेरोजगारी | बेरोजगारी का आलम यह है की आईटीबीपी में ट्रेडमैन की भर्ती के लिए जहाँ लाखों लोगों ने आवेदन किये थे,जबकि सिर्फ सैकड़ों लोगों को भर्ती करना था | यह बहुत ही विकट समस्या है |

सरकारी नौकरियां के ग्राफ दिन व दिन घटता ही जा रहा है | यही वजह है लोग आजकल किसी राज्य सरकार में चपरासी और माली की पद पर भर्ती के लिए भी लम्बी कतार लग जाती है | सवाल यह नहीं की सरकारी नौकरियों के लिए लम्बी कतार लगाकर लोग खरे हो जाते है इसमें अहम् बात यह है की इस तरह के पद के लिए भी उम्मीदवारों में ढेर सारे एमबीए और एमसीए होते है |


यक़ीनन बढती हुई आवादी इसके प्रमुख कारण में से एक है, परन्तु हालत इतनी ख़राब नहीं हुई है की माली व चपरासी के लिए इंजीनियर्स या मेनेजर्स आवेदन करें |वैसे भी हमारे मन में हमेशा से सरकारी नौकरियों के प्रति अलग भाव रहा है | सरकारी नौकरी के लिए कुछ भी कर गुजरने की प्रयास हमारी मानसिकता है | यहाँ तक की लोग यह भी भूल जाते है की शिक्षा के अनुसार जिसके लिए वो पढ़ाई की है उस तरह के पद के लिए ही आवेदन करें |

इसके अलावा उनके गार्जियन इस तरह के उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए मोटी मोटी फ़ीस भरी थी | प्रतियोगिता से भरे आज के दौर में आने वाली कठिनाइयों को सब बखूबी जानते है | एक ओर जहाँ उच्च शिक्षा प्राप्त करने के वाबजूद उनके पसंद के मुताबिक नौकरी नहीं मिल पाती है ,दूसरी ओर एमबीए पास आउट विद्यार्थी प्राईवेट बैंक में क्रेडिट कार्ड बनाते नजर आते है | बेरोजगारी की बेबसी को तो हमसब जानते है , लेकिन क्या ऐसा नहीं हो सकता की हमसब सरकारी नौकरी का कोई विकल्प को तलाशे ?

सरकारी नौकरी को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी न समझे न ही इसे लौटरी के रूप में देखें | क्यों नहीं हम सेल्फ इम्प्लोय्मेंट की बात सोचते है ? शायद हम खुद के काम को किसी हारे हुए खिलाडी की मज़बूरी की तरह देखते है | ऐसा बिलकुल भी नहीं है , खुद का काम किसी भी तरह से कमतर नहीं है | यह आपकी आत्म संतुष्टि की पहचान है |


जरुरत है पुराने मानसिकता में परिवर्तन की -------- आइये आप फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट्स में हमारे साथ जुड़ें और जिन्दगी के सारे सपने को साकार करे | यहाँ आप वो सबकुछ पा सकते है जिसकी आपको तलाश है | सिर्फ कुछ महीनो में अपनी कीमती समय को लगाकर , मेहनत और इमानदारी के साथ जीवन को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना सकते है |

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Feb 2, 2011

दिल को रखें दुरुस्त - एलोवेरा जेल से !


आज एक बार फिर से आइये चर्चा करते है ह्रदय सम्बंधित समस्याएं और निदान ? दुनिया भर ह्रदय रोगियों की संख्या गुणात्मक रूप से वृद्धि हो रही है | चिंता की बात यह है की ह्रदय घात यानि दिल का दौरा का औसतन आयु सिमट कर 40 और 30 के बिच हो गई है | जिस रफ़्तार से यह घटती जा रही है न जाने आगे क्या होगा ? कहना बहुत ही मुश्किल है परन्तु यह बहुत ही भयावह तस्वीर बनती जा रही है |

भारतीय युवाओं में खासकर यह बिमारी दुनिया के देशों से दोगुनी है | विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में वर्तमान में ह्रदय रोगीओं की संख्या लगभग पाँच करोड़ है और यह आंकड़ा दोगुना हो जायगा जब दुनिया के साठ प्रतिशत ह्रदय रोगी भारतीय होंगे |


युवाओं में यह बीमारियाँ बढ़ने के प्रमुख कारण आज का जीवनशैली को जाता है | भागमभाग व तनाव ग्रस्त जीवन जीने को मजबूर है | प्रतिस्पर्धा के दौर में युवाओं का ध्यान अपनी सेहत पर कम और कमाने पर ज्यदा होता है |

ख़राब दिनचर्या, खानपान में समुचित मात्रा में पोषक तत्व की कमी भी प्रमुख कारन है | रही सही कसर पश्चात् शैली के खान-पान जैसे पिज्जा,बर्गर,नुडल, पेस्ट्री,डिब्बा बंद खाना, कोल्ड ड्रिंक, ज्यूस इत्यादि पूरा कर देती है | सोने व जागने का समय बिलकुल ठीक नहीं है लोग सोने के समय पर जागते है और जागने के समय पर सोते है जिससे शरीर में कई प्रकार की समस्याएं आ जाती है |

लेकिन ह्रदय रोग लाइलाज समस्या बिलकुल भी नहीं है | परन्तु अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह यदि रोगी को यह प्रारम्भिक अवस्था में पता चल जाय तो इससे मुक्ति पाने में आसानी हो जाता है | अतः ह्रदय सम्बंधित रोग के बारे में जांच कर उचित इलाज जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए |

आप सब जानते है की ह्रदय रोग का प्रमुख कारण है "कोलेस्ट्रोल" | परन्तु सच तो यह है की कोलेस्ट्रोल नहीं है ,बल्कि मुख्य कारण है रक्त नलिकाओं की सूजन ( inlflammation of blood vessels ) है | अतः हमें कोलेस्ट्रोल के वजाय धमनियों की सूजन के कारण को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरुरत है |

सभी कोलेस्ट्रोल ख़राब नहीं होते है | HDL ( high density lipoproteins ) कोलेस्ट्रोल फायदेमंद होता है और इसकी अधिक मात्रा हमारे लिए फायदेमंद होता है, लेकिन LDL ( low density lipoproteins ) कोलेस्ट्रोल हमारे लिए हानिकारक होता है | LDL कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवार की भीतरी सतह पर जमा होकर प्लाक ( plaque ) बनाता है और उन्हें संकरा कर देता है | इसके साथ आने वाला HDL कोलेस्ट्रोल तो वास्तव में धमनियों में सफाई का काम करता है |


रक्त नलिकाओं के सूजन के लिए सिर्फ LDL कोलेस्ट्रोल ही जिम्मेदार नहीं होता है | इसके लिए होमोसिस्टीन तथा धुम्रपान, उच्च रक्त चाप , वसायुक्त भोजन और डायबिटिज से उत्पन्न होने वाले स्वतंत्र तत्व ( free radicals ) भी जिम्मेदार होते है |

अतः स्वतंत्र तत्व को प्रभाव को समाप्त करने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा एंटी ओक्सिडेंट का सेवन करें | जिससे की शारीर में अनचाहे मेहमान जो की free radicals के रूप में है वह सब समाप्त हो जायेगा | और आपका धमनी बिलकुल दुरुस्त हो जायेगा |

जीवन शैली में परिवर्तन लाकर इन जोखिम को कम किया जा सकता है | हरी सब्जियां व फल का ज्यादा से ज्यादा अपने आहार में शामिल करें जिसमे विटामिन बी-6 ,सी, मग्नेशियम व भरपूर मात्रा में एंटी ओक्सिडेंट फ्लेवोनायडस और कैरोटेनायड्स हो |


ह्रदय रोगी को अक्सर कम वसा, कम कार्बोहायड्रेट और कम प्रोटीन का आहार लेना फायदेमंद होगा | सेब,अनार का जूस, आंवले का मुरब्बा ह्रदय को ताकत देता है और ये ह्रदय को सुचारू रूप से काम करने में मदद करते है |
प्याज और लहसुन से कोलेस्ट्रोल का स्तर घटते है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करते है |

कैरोटेनायड्स एंटी ओक्सिडेंट के लिए टमाटर का सेवन करें जिसमे लायकोपिन का भंडार होता है | जो की दिल को सही से चलाने में सहायता करता है |

करौंदा में पॉलीफेनोलिक एंटी ओक्सिडेंट होते है जो रक्त संचार को सुचारू करते है | अनाज, अखरोट, अलसी के बिज, बादाम, सोयाबीन ये सब कोलेस्ट्रोल के अलावा ट्रीग्लिसेरायड्स स्तर को भी घटते है | इसमें रक्त के थक्के जमने की आशंका काफी कम हो जाती है |


इन प्रकृति उपचार के अलावा सेहतमंद जीवन जीने के लिए नियमित परहेज से रहना, नियमित शारीरिक व्यायाम करना और डॉक्टरों से नियमित पूर्वक जांच भी कराते रहना चाहिए |

वैसे फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट के पास इसमें अचूक उत्पाद है जिसके माध्यम से ह्रदय सम्बंधित किसी भी परेशानी से मुक्त हो सकते है जो की निचे दी जा रही है
Aloe Vera Gel , Garlic Thyme , Artic Sea Omega - 3 , Pomesteen Power इत्यादि इसका सेवन चार से छह महीने करने के बाद किसी भी प्रकार के धमनियों का सूजन पर नियंत्रिती की जा सकती है | अतः ह्रदय रोग से मुक्त पाने के लिए उपरोक्त एलोवेरा के उत्पाद अपने जीवन में शामिल अवश्य करें और जीवन को खुशहाल बनाए |

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Jan 30, 2011

शराब से करें तोबा- खुशहाल जीवन के लिए !


शराब अपनी जड़ें बट वृक्षों के भांति जमा रखी है | ऐसा प्रतीत होता है की इनके सेवन से होने वाले दूषपरिणाम से बिलकुल अनभिग्य है | जबकि इसके भयकर परिणाम की गाथा से सड़क,गलियारे,सिनेमा हौल,चौराहे आदि पटे हुए होते है | मिडिया भी इससे होने वाले दुष्परिणाम से बराबर अवगत कराता रहता है |

इस प्रकार स्पष्ट हो जाता है की शराब की सेवन से लाभ कुछ नहीं, हानी ही हानी है | उससे थकान मिटने और स्फूर्ति मिलने की बात सिर्फ कोरी बकबास के अलावा और कुछ भी नहीं है |
अक्सर इसकी शुरुआत बड़े ही शौकिया ढंग से होती है परन्तु बाद में वह मज़बूरी बन जाती है | शराब की हानियों के देखने के लिए दैनिक जीवन में शराब पिने वालों की दुर्दशा देखना ही पर्याप्त होता है | शराबियों की बुद्धि व स्मृति दोनों ही अस्त-व्यस्त हो जाती है |


मद्यपान से कई भयंकर रोग होने की संभावनाएं निश्चित तौर पर हो जाती है :-

"कोसिकोफ़" नामक मानसिक रोग होने की अधिकांस संभावना रहती है | इस रोग से व्यक्ति की स्मरण शक्त कमजोर पड़ते पड़ते वस्तुतः क्षीण हो जाती है |

आँखों में एक तरह का रोग भी होने का भय रहता है, जिसमे एक वस्तु की दो वस्तुएं दिखाई पड़ने लगती है |

ह्रदय रोग विशेषग्य के अनुसार प्रायः सभी शराबियों का ह्रदय अपने सामान्य आकार से कुछ बड़ा हो जाता है और इस कारण उसे साँस लेने में कठिनाई होने लगती है |

मद्यपान पेट और आंत की झिल्लियों को भी सीधा क्षति ग्रस्त करता है | तेजाब की मात्रा बढ़ जाने से अल्सर की शिकायत होने का डर रहता है | बहुत अधिक पिने के कारण कभी-कभी खून की उल्टियाँ भी होने लगती है |

बदहजमी और अपच की शिकायत रहना तो जैसे शराबियों के लिए आम बात है और इस कारण उसका वजन तेजी से घटने लगता है | इससे पैंक्रियाज ग्रन्थि और पेट को जोड़ने वाली नलिका कभी कभी सूजन के कारण बंद हो जाती है | ऐसी स्थिति में उदर में भंयकर शूल उठता है |


रक्तचाप तेजी से गिरने लगता है | अगर तुरंत उपचार न हो तो यह स्थिति जीवन संकट भी उपस्थिति कर देती है |

पैंक्रियाज ग्रन्थि का यह रोग बराबर बना रहता है और शराब के कारण ख़राब हो जाने से बहुत कम मात्र में इंसुलिन बनाती है | इस कारण मधुमेह रोग होने की संभावना भी रहती है |

मद्यपान के कारण जिगर को होने वाली सिरोसिस बिमारी इतनी भानकर है की 6 महीने तक रोगी को बुरी तरह तडपा-तडपा कर प्राण हरण कर लेती है |

इसके अलावा ह्रदय की भांति ही जिगर का आकार भी फैलने लगता है | मरने वाले शराबियों में 90 प्रतिशत प्रायः जिगर के रोगों से मरते है, क्योंकि इस विषैले तत्व को परास्त करने और उससे संघर्ष करने में शराब को ही अधिक मेहनत करनी पड़ती है |

इन्हीं सब कारणों है मद्यपान करने वाले व्यक्ति कई प्रकार के रोगों से ग्रस्त होने लगते है क्योंकि उनकी जीवनी शक्ति, जो शरीर के क्रियाकलापों का संचालन और नियमन करती है वह शराब के माध्यम से आए अतिरिक्त अल्कोहल को पचाने में नष्ट हो जाती है और सामान्य रोगों का आक्रमण रोकने की शक्ति भी शरीर को नहीं रह जाती है |


इससे बचने के लिए इक्षा शक्ति होनी चाहिए, साथ में पौष्टिक पूरक और एलो वेरा जेल का नियमित सेवन करें जिससे की शराब के कारण शरीर में हुए क्षति को दुरुस्त किया जा सके | एलो वेरा जेल, बी प्रोपोलिस tablet , पोमेस्टीन पॉवर आदि का सेवन करें और अपने जीवन की कायाकल्प करें |
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Jan 28, 2011

सर्दियों में भी रखें त्वचा जवाँ - एलोवेरा युक्त उत्पाद से !


मौसम में परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारी त्वचा और स्वास्थ्य पर पड़ता है | सर्दियों में विशेषकर सर्द हवाएं त्वचा की नमी को सोंख लेती है | ऐसे में हमें त्वचा को विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है | परन्तु इस कंपकंपाती सर्द मौसम में अगर आप खिली खिली त्वचा के साथ स्वाथ्य रहना चाहते है तो कुछ बाते आपको ध्यान में रखनी चाहिए जिससे आप अपने आपको स्वस्थ्य और सुंदर रख सकें |

> अगर आपकी त्वचा बेजान या रुखी है तो बाजार का साबुन का प्रयोग बिलकुल न करें | बल्कि आप फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट का एलो एवाकाडो साबुन/ एलो लिकुइड सोप का प्रयोग करें जो त्वचा के सफाई के साथ-साथ मोस्चरैजर भी प्रदान करती है | जिसका किसी भी प्रकार से त्वचा पर दुष्प्रभाव नहीं होगी |

> नहाने के पानी में अगर आप फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट का एलो बाथ जेली का प्रयोग करें तो इससे रुखी त्वचा में पोषण आने लगती है और इसके प्रयोग के कुछ दिनों के बाद ही त्वचा कोमल और चिकनी हो जाती है | एलो बाथ जेली इस मौसम में विशेषकर प्रयोग करना चाहिए क्यूंकि सर्दियों में अधिकतर लोग हलके गर्म पानी से नहाते है जिसके कारण त्वचा की नमी समाप्त होने लगता है अतः त्वचा के पोषण के लिए इस से नहाना बहुत ही फायदेमंद होगा |
इसमें प्राकृतिक रूप से एक तेल भी होता है ताकि जब बहार निकले तो आपके त्वचा दिन भर सर्द हवा व प्रदुषण का सामना कर सकें | नहाने के बाद एलो बॉडी केयर का इस्तेमाल जरुर करें ताकि आपके त्वचा में तेल और नमी का संतुलन बना रहें |

इस मौसम में आपकी त्वचा को अतिरिक्त मोस्चरैजर की आवश्यकता होती है | इसलिए ज्यादा से ज्यादा मोस्चारैजर क्रीम का प्रयोग करें | इसके लिए आप ऍफ़.एल.पी एलो मोस्चाराइजर क्रीम का इस्तेमाल करें जिसमे एलो वेरा का विशेष गुण होता है जो आपके त्वचा के लिए गुणकारी होता है |


> आजकल के सर्द हवाओं के प्रभाव से होंठ फटने जैसे बात तो आम लगते है | कभी कभी रूखेपन के कारण होंठ पर पपड़ी जैसी पड़ जाती है | इसके लिए आप ऍफ़.एल.पी एलो लिप्स का इस्तेमाल करें जिसे होंठों की नमी बनी रहेगी और फटने व पपड़ी पड़ने जैसी समस्या दूर हो जायगी | ऐसे में बेहतर होगा की लिपस्टिक का प्रयोग न करें | सर्दियों में लिप गार्ड के लिए एलो लिप्स बेहतर उत्पाद है |

सर्दियों में शुष्क हवाओं के लगातार सम्पर्क में रहने से सर्दी,जुकाम,मौसमी फ्लू के कारण बाल रूखे, बेजान व कमजोर हो जाते है | इसके लिए आप ऍफ़.एल.पी एलो जोजोबा सेम्पू का इस्तेमाल करें | इसके बाद सर की त्वचा व बालों में हलके हाथो से एलो स्टायलिश जेल का भी प्रयोग कर सकते है जिससे बाल चमकते व खिले-खिले नजर आयेंगे |


>जब भी बहार निकले तो ध्यान रखें की बाल बिलकुल सुखा हो | इन दिनों तरह-तरह के आकर्षक वाले स्कार्फ बाजार में उपलब्ध है | यह आपके खूबसूरती में चार चाँद भी लगायेंगे और साथ ही बालों के देखभाल के लिए भी बहुत बेहतर साबित होगा | मतलब सर्द हवा से आपके बालों की रक्षा तो करेंगे इसके साथ आपके सौन्दर्य को भी आकर्षक प्रदान करेंगे |

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Dec 15, 2010

दमा ( Asthma ) आयुर्वेदिक समाधान !


जैसे जैसे मौसम का मिजाज बदल रहा है वैसे ही लोगो में परेशानियाँ शुरू होने लगी है | एक तो ठंढ वैसे भी अपने साथ बहुत सारी समस्याएं लेकर आती है जैसे सर्दी-जुकाम,एलर्जी आदि और सबसे बड़ी समस्या उनके साथ होती है जो की साँस की बिमारी से ग्रसित होते है | उनके लिए ये मौसम बहुत ही कष्टदायक होता है | दर्द चाहे नए हो या पुराने इस मौसम में और भी ज्यादा उभर आती है | आज चर्चा करते है दमा के बारे में जो खासकर कड़ाके की ठंढ में बहुत ही ज्यादा घातक सिद्ध होता है |

दमा ( Asthma ) एक साँस की बिमारी है | इस बिमारी में श्वसन नलिका संकुचित हो जाती है जिससे प्रभावित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है | यह सांस की नली व फेफड़ों में संक्रमण के कारण होता है | साँस की नलियां आगे जाकर पतली हो जाती है इसके अन्दर कार्बन जमा हो जाता है तथा वह अपनी लचक खो देती है |

तरल द्रव फेफड़ों में इकठ्ठा हो जाता है और श्वसन नलिका की श्लेष्मा झिल्ली उद्दीप्त हो जाती है |
इसके कारण फेफड़ों में सुजन भी आ जाती है | यह भी कह सकते है की फेफड़ों में बलगम जम जाता है |
सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती परन्तु साँस छोड़ते समय दम सा घुटने लगता है | छाती में तकलीफ रहती है |

कारण कुछ भी हो सकता है , जैसे किसी कारण एलर्जी, वायु प्रदुषण, कुछ तरह के भोजन आदि से प्रतिक्रियास्वरूप यह दशा भड़क सकती है | दबाब-तनाव, तापमान में परिवर्तन, चिंता और ब्रोंकाइटिस आदि अन्य कारण भी हो सकते है | धुम्रपान, गलत जीवन शैली या विपरीत परिश्थितियों में रहने से भी अस्थमा हो सकता है |

जड़ी बूटी सम्बंधित उपचार आप कर सकते है :-
एलो वेरा जेल / एलो बेरी नेक्टर
जिन्क्गो पलुस
गार्लिक थाइम
बी प्रोपोलिस
इसके साथ हल्का व्यायाम से फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ने में फायदेमंद हो सकता है |
सुकन पाने के लिए योग करना अच्छा है | रात को भरी खाना न खाएं | फल और सब्जियां काफी मात्र में ले |
चिकन सूप लाभदायक है | मशरूम, चीज, सोया सॉस और भोजन में सिंथेटिक सामग्री का इस्तेमाल न करें |
चाय या कॉफ़ी का एक प्याला कभी-कभार पिने से दमे का हल्का हमला रोका जा सकता है |

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Dec 6, 2010

एलोवेरा (ग्वार पाठा) का साय्ड इफेक्ट ? अवश्य पढ़ें !


रामायण में एक अंश मुझे याद आ रहा है जब सुखेन वैद्य ने लक्ष्मण जी का प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने को कहा - जिससे प्रभु लक्ष्मण का प्राण बचाया गया था | वैसे तो संजीवनी बूटी का नाम सिर्फ सुना ही है किसीने शायद ही देखा हो | चुकी संजीवनी बूटी लाने के समय में स्वयं हनुमान जी भी दुबिधा में पड़ गए थे | जैसा की वैद्य ने कहा था की जिस बूटी के निचे दीपक जल रहा होगा वही असल में संजीवनी बूटी होगा | परन्तु जब हनुमान जी धवलागिरी पर्वत पर गए तो वो आश्चर्यचकित हो गए | उन्होंने देखा यहाँ तो प्रत्येक बूटी के पास दीपक जल रहे है |फिर उन्होंने सम्पूर्ण पहाड़ ही उठा लाये थे |मतलब संजीवनी बूटी को पहचानने में हनुमान जी भी दुबिधा में थे |

अगर वर्तमान समय की संजीवनी बूटी पर चर्चा करें तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी की एलो वेरा के पौधे में वो सारे गुण समाहित है जिसे आप संजीवनी बूटी कह सकते है ! एफ.एल.पी के एलो वेरा जेल ने ऐसे कई तरह के चमत्कार कर चुके है जिससे की लोग इसे जड़ी बूटी के श्रृंखला में सर्वोच्च स्थान पर रखते है !

अक्सर लोग मेरे पास सारे इलाज से थके हुए रोगी ही मिलते है,वे अपना कीमती वक्त व धन गवाँ कर जीवन को जैसे तैसे जीने को मजबूर होते है | इतने हताश और परेशान होते है की जब हम किसी और आयुर्वेदिक दवाइयां या पौष्टिक पूरक की बात करते है तो वो सिरे से नकार देते है,यह कहकर की बहुत देख ली साहेब कोई फायदा नहीं होता है बस लोग बेबकूफ बनाते है और अपनी जेब भरते हमारी समस्या वहीं के वहीँ है | इसीलिए कृपया हमें हमारी हाल पर छोड़ दें |

इसमें इसकी क्या गलती ? यहाँ हर गली, चौराहे पर इस तरह के झोला छाप डॉक्टर अपना दुकान खोले बैठे नजर आते है | जहाँ हर तरह के बिमारी का शर्तिया इलाज होता है | बस स्टेंड हो या शौचालय, बड़े-बड़े बैनर -पोस्टर से पटे हुए होते है | कोई न कोई व्यक्ति अक्सर ऐसे निम्-हकीम, वैद्य, बाबाओं के चक्कर में फंसते रहते है | जिसके कारण रोगी के रोग में लाभ होने के वजाय वो और भी अस्वस्थ्य होते चले जाते है |ऐसे हकीमों को कोई फर्क नहीं पड़ता, दुकान यहाँ नहीं चली तो कहीं और खोल देंगे ?


वैसे तो हमारे से भी अक्सर लोग पूछते है सर क्या इस उत्पाद की कोई साय्ड इफेक्ट भी हो सकता है ? यह बात पहले बताइये , आपने तो सारी खूबियाँ गिनती करवा दी हमें इसके दूसरी पहलु के बारे में भी कृपया बताएं ? सवाल इस तरह का आना लाजिमी है क्युकी कई सालों से इलाज का तजुर्बा होता है, कई दवाइयां एक साथ लेना होता है फिर कुछ दिनों के बाद इसी के कारण कोई और परशानियाँ आ जाते है | मैंने कहा - साय्ड इफेक्ट ( दुष्परिणाम) तो बहुत है , सबसे बड़ा साय्ड इफेक्ट एलो वेरा उत्पाद से होता है की आप ठीक हो जायेंगे | और एक दिन आप बिलकुल स्वस्थ्य और खुशहाल जीवन जियेंगे, यही है इसका साय्ड इफेक्ट |

कब्ज़ से लेकर कैंसर तक के मरीजों को एलो वेरा के चमत्कारिक गुणों से फायदा होता रहा है और भविष्य में भी कोई भी असाध्य रोगी अगर इन उत्पादों का प्रयोग श्रधा और विश्वास के साथ सेवन करेगा तो निश्चित ही लाभ मिलेगा |

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Nov 27, 2010

असाध्य रोग- घरेलु सरल उपचार !

आजकल यह कहना अतिशयोक्ति होगी की आयु पर हम विजय पा सकते है | प्राणी की कब मृत्यु हो जाय, कुछ कहा नहीं जा सकता है | हर क्षण मृत्यु के करीब जा रहे प्राणी की आयु शरद ऋतु के बादल के सामान स्वल्प है, यह तो बुझते हुए लौ की दीपक के समान चंचल है, जो गई हुई देखी जाती है |

सबाल यह नहीं है की आपकी कितनी आयु है पर जितनी भी आयु आप जिए वह सुखकर हो, दिन-हिन् और रोगी बनकर जीना बहुत ही कष्ट देता है | मृत्यु के श्रीजन्हार असंख्य रोगों को शरीर में समा देते है और उसे कष्ट दे-देकर मारने की जुगत में लगे रहते है |


ज्यादातर रोग हमारी खुद की गलतियों के परिणाम होते है | स्वास्थ्य का महत्व भी उस समय ज्ञात होता है जब व्यक्ति बीमार होता है | रोग कोई भी हो - कब्ज़ या कैंसर, सभी रोग ख़राब और आयु का क्षीण करने वाले होते है | जो दूरदर्शी लोग होते है वह हर समय सेहत की अहमियत को ध्यान में रखते है और ऐसे कार्य से बचते है जो अंततः रोगकारक बनें |

रोग अपनी शुरुआती दौर में प्रायः घातक नही होते लेकिन बाद में वे जटिल बनते चले जाते है | कब्ज़ जैसा मामूली सा रोग भी हमारी लापरवाही का परिणाम होता है | वैसे कब्ज़ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में बिना नुक्सान पहुंचाए सामान्य उपचारों से मिट जाता है लेकिन यदि लापरवाही बरती जाए तब धीरे-धीरे यह अन्य रोगों का कारण भी बन जाता है |

वर्तमान में कैंसर का भी प्रसार बहुत है | सामान्य विकार बिगरते-बिगरते कैंसर में परिवर्तित हो जाते है | इसे मौत का दूसरा नाम भी कह दिया जाता है | कैंसर के मरीज को देखकर एक स्वस्थ्य व्यक्ति के अंदर से यही शब्द निकलते है " हे भगवान मुझे इस बीमारी से बचाए रखना" |



वैसे इश्वर ने हमें वे सुविधाए दे रखी है जिनसे हम रोगों से बचे भी रह सकते है, रोग निवारण भी कर सकते है और दीर्घायु को प्राप्त कर सकते है , लेकिन जानकारी के अभाव में अथवा लापरवाही वश हम इन सुविधाओं का लाभ न उठाकर विज्ञापनबाजी से प्रचारित उन चीजो का ज्यादा इस्तेमाल करते है जो अंततः स्वास्थ्य के लिए घातक ही सिद्ध होती है | कोल्ड्रिंक्स,वर्गर,पिज्जा इत्यादि अनेक उदाहरण आपके सामने है |

बहरहाल यहाँ उस 'कमाल के नुस्खे' को निचे दिया जा रहा है जो बहुत ही साधारण और घरेलु है | तो आपके लिए लीजिये प्रस्तुत है घरेलु परन्तु असरदार नुस्खा :-
तुलसी और पुदीना की सामान मात्रा को मिलकर बनाये गए चूर्ण का नित्य नियमपूर्वक 5 ग्राम मात्रा दिन में एक बार सेवन किया जाए तो कैंसर जैसे भयंकर बीमारी से सदैव बचा जा सकता है | यह नामुराद बिमारी आपसे दूर ही रहेगी |
अगले क्रम में आपसे इस बनौषधि दोनों के मिश्रण के बारे में विस्तृत जानकारी और शोध के विषय के साथ उपस्थित होंगे !

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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

Nov 11, 2010

मधुमेही और उनके आहार- जरुर पढ़ें |


आइये कल की चर्चा को एक बार फिर से आगे बढाते हुए, शुरुआत करते है मधुमेही का क्या आहार होना चाहिए और क्या नहीं ? चुकी एक ओर जहाँ दुनिया भर में इस रोग से करोड़ों लोग मुश्किल में फंसे हुए है तो दूसरी ओर इस रोग का स्थायी इलाज अभी तक नहीं मिल पाने के कारण दुनिया भर के चिकित्सा विशेषग्य हैरान परेशान है |

मधुमेह के नाम से मशहूर यह रोग वास्तव में 'मधुमेह' न होकर 'विपतियों का मेह' बना हुआ है | इस रोग से जुड़े हर पहलुओं पर चर्चा हमेशा किसी न किसी प्रकार से की जाती रही है | परन्तु आज उस पहलु पर चर्चा करने जा रहे है जिससे आम मधुमेही को विशेष जानकारी नहीं होती है यानि रोगीं को दैनिक उपयोग की वस्तुओं में किन-किन चीज का सेवन करना चाहिए तथा किसका नहीं !

तो आइये चर्चा करते है आहार सम्बंधित वस्तुए रोगी अपने दैनिक उपयोग में क्या अपनाए और क्या नहीं ?
1 . क्या मधुमेही चावल का सेवन कर सकता है ?

> चावल साधारण और जटिल कार्बोहाईड्रेट का मिश्रण है | अतः चावल-दाल के मिश्रण से बनी खिचड़ी खाई जा सकती है | मार्केट में अधिक रेशे वाले ब्राउन चावल भी मिलते है, इनका सेवन किया जा सकता है |
2 . क्या मधुमेही आलू का सेवन कर सकता है ?

>आलू भी चावल की तरह साधारण तथा जटिल कार्बोहाईड्रेट का मिश्रण है, फिर भी इसे सिमित मात्र में खाया जा सकता है | परन्तुं इसे अगर पत्तेदार और रेशेदार सब्जियों के साथ खाया जाये तो बेहतर होगा |
3 . क्या मधुमेही को पपीता खा सकता है ?

> अधपका पपीता खाना बेहतर है जो मीठा नहीं होता | पका पपीता से बचे क्यूंकि वह ज्यादा मीठा होता है |
4 . क्या मधुमेही जामुन खा सकता है ?

> हाईपोग्लाईसीमिक तत्व जामुन में पाया जाता है , जो अग्न्याशय और शर्करा स्तर को घटाता है, अतः जामुन का उपयोग मधुमेही के लिए बेहतर होगा | जामुन का गुठली का 3-3 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार लेने से रक्त शर्करा का स्तर घटता है |
5. क्या मधुमेही के लिए मेथी के बीज उपयोगी होते है ?

> मेथीबीज में हाईपोग्लाईसीमिक तत्व रक्त शर्करा को कम करते है, अतः इनका सेवन उपयोगी है | इसका सेवन सूप,चटनी या सब्जी के रूप में किया जा सकता है | यदि नित्य 12 घंटे पानी में भीगे मेथीबीज का पेस्ट बनाकर दबाई के तौर पर लिया जाए तो शर्करा का स्तर नियंत्रित रखा जा सकता है | दिन भर में 200 ग्राम तक लिए जा सकते है |
6 . करेला मधुमेही के लिए कितना उपयोगी है ?

> मधुमेही के आलावा और भी कई रोगों में करेला उपयोगी है | इसमें पाया जाने वाला इंसुलिन रक्त और मूत्र की शर्करा का कम करता है | यदि प्रतिदिन सुबह खली पेट 125 से 140 मि.ली. करेले का जूस लिया जाये तो परिणाम बेहतर मिल सकता है | यह लीवर और पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है तथा रक्त को शुद्ध व त्वचा रोग में भी लाभ होने लगता है |
7 . नीम की कोपलें मधुमेही के लिए कितनी उपयुक्त है ?

> कोपलें ही नहीं बल्कि नीम की अन्तर्छाल भी रक्त शर्करा स्तर को कम करती है क्योंकि इसमें हाईपोग्लाईसीमिक तत्व होता है | नीम की पत्तियों और छाल का रस लेना बहुत ही फायदेमंद रहेगा | दोनों की बराबर मात्रा यानि 5 ग्राम को 300 ग्राम पानी में डालकर उबले | पानी जलकर एक चौथाई रह जाये तक छानकर पी लें | ध्यान रहें उपरोक्त रस का सेवन अधिक दिनों तक न करें क्योंकि नीम का ज्यादा सेवन से कामशक्ति प्रभावित हो सकती है |
8 . क्या अलसी का सेवन मधुमेही के लिए उपयोगी है ?

> जी हाँ, मधुमेही के लिए अलसी का सेवन उपयुक्त है | अलसी 25 ग्राम तक मिक्सी में पीसकर आटा में मिलकर इस आटे की रोटी खाई जा सकती है |अलसी का सेवन व्यंजन बनाकर भी किया जा सकता है |
9 . क्या दूध का सेवन मधुमेही को करना चाहिए ?

> यदि ह्रदय रोग की शिकायत न हो तब मधुमेही कम मात्रा में दूध का सेवन कर सकता है | स्किम्ड मिल्क की 500 मि.ली. मात्रा तथा टोंड मिल्क की 200 मि.ली. मात्रा का सेवन किया जा सकता है |
10 . मधुमेही को पनीर का सेवन करना चाहिए ?

> पनीर और छैना जो दूध के ही उत्पाद है, का सेवन मधुमेही कर सकते है, वशर्ते वह ह्रदय रोगी न हों |
11 . चाय-कॉफ़ी मधुमेही के लिए कितनी उपयुक्त है ?

> इन उत्तेजक पेयों में टैनिन और कैफीन नामक तत्व होता है, अतः इनका सेवन कम से कम करना चाहिए | दिन भर में 2 कप चाय या कॉफ़ी बिना चीनी यानि फीकी अथवा कृत्रिम मिठास डालकर ली जा सकती है |

13 . क्या नारियल का सेवन मधुमेही के लिए उपयुक्त है ?

> ह्रदय रोगी के लिए नारियल उपयुक्त नहीं है | यदि केवल मधुमेह है, तब इसका सेवन किया जा सकता है | नारियल का पानी भी दिनभर में दो कप तक पिया जा सकता है |
14 .क्या बादाम का सेवन कर सकते है ?

> केवल मधुमेह होने पर बादाम का सेवन किया जा सकता है | 100 ग्राम बादाम में 58.9 ग्राम वसा पायी जाती है जो 12 चम्मच तेल के बराबर है | अतः यदि ह्रदय रोग और उच्चरक्तचाप भी साथ में है, तब इसका सेवन न करें |
15 . मधुमेही को खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए |

> मधुमेही को खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए |
16 . क्या अखरोट का सेवन उपयुक्त हो सकता है ?

> मधुमेह में अखरोट का सेवन किया जा सकता है | इसकी 100 ग्राम मात्रा में 64.5 ग्राम वसा होती है जिनसे ट्राईग्लिसराइड की मात्रा बढती है अतः ह्रदय रोग अथवा उच्चरक्तचाप में इसका सेवन करना ठीक नहीं है |
17. डबल रोटी का सेवन कितना उपयुक्त हो सकता है ?

> डबल रोटी भी दो प्रकार की मिलती है, एक तो मैदे से बनी हुई सफ़ेद डबल रोटी, इसकी 100 ग्राम मात्रा में 0.2 ग्राम फाइबर होता है | दूसरी डबल रोटी भूरे रंग की होती है जो आटे की बनती है, इसकी 100 ग्राम मात्र में 1.2 ग्राम फाइबर होता है तथा 245 कैलोरी पायी जाती है | इसलिए सफ़ेद की बजाय भूरी डबल रोटी अधिक उपयुक्त है |

सबसे उपयुक्त होगा अगर आप अपने आहार में एलो वेरा जूस शामिल कर लें | एलो वेरा में मौजूद क्रोमियम,बिटासेल्स और विभिन्न प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स,खनिज जो शरीर के सेल स्तर पर काम करती है और आपके शरीर की जरूरतों को पूरा कर देती है जिससे आप रहते है हमेशा चुस्त और दुरुस्त |

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