विगत तिन दिन पहले यानि 12 अक्टूबर वर्ल्ड आर्थराइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है | आर्थराइटिस के नाम से मन में जोड़ों के दर्द के बारे में खौफनाक ख्याल उभरने लगते है | एक पुरानी कहावत के अनुसार आप दो चीजों पर पूरा भरोसा कर सकते है, ये आना लगभग तय है मतलब अवश्य आएँगी | एक जन्म और मृत्यु | पर वर्तमान मानसिक पटल पर एक और चीज चित्रित हो रही है जिन्हें अवश्य जोड़ देनी चाहिए जिसका नाम है "आर्थराइटिस" |
वर्तमान में छोटे उम्र यहाँ तक की बच्चों में यह बिमारी बड़े पैमाने पर अपना पैठ बना लिया है | जबकि कुछ दशक पहले यह सिर्फ 50 के बाद ही जोड़ों में दर्द की शिकायत मिला करता था | परन्तु अब तो यह 25 -30 साल में जैसे आम हो गया है |
एक सर्वे के अनुसार हमारे यहाँ भारत में हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी आयु वर्ग में आर्थराइटिस से पीड़ित है | और ऐसे में इस की भयावहता को लेकर चिंता करना की कहीं मैं भी इसका शिकार न बन जाऊं और आशंकित हो भी क्यूँ न? क्यूंकि सर्वे तो साफ़ साफ़ बता रहा है की हर पांच में से एक व्यक्ति पीड़ित हो सकता है |
सुबह उठने पर जोड़ों में दर्द, हलकी सुजन और अकड़न वर्तमान में यह सबसे ज्यादा मरीजों में पाई जाती है | इसका शिकार कोई भी हो सकता है, वो स्त्री हो या पुरुष , शरीर के किसी भी जोड़े में हो सकती है, यहाँ तक की गर्दन और कमर के निचले हिस्से में भी | यह बिमारी बढ़ जाने से काफी असहनीय तकलीफ , दर्द और यहाँ तक की विकलांग भी बना सकता है |
आर्थराइटिस
आमतौर पर जोड़ों के कार्टिलेज के क्षय की बिमारी है | पर यह जोड़ की उपरी सतह और हड्डी के अंदर भी असर दाल सकती है | इस बिमारी से कार्टिलेज घिसने लगता है और हड्डी पद दबाव पड़ने लगता है | हड्डी पर अतिरिक्त दबाव के कारण हड्डी का घनत्व बढ़ने लगती है |
अपने कभी सुना होगा की उसने घुटना बदलवाया है क्यूंकि उसकी हड्डी पर हड्डी आ गई है | इसी को वैज्ञनिक भाषा में जोड़ो में कार्टिलेज का एकदम खत्म हो गई है ऐसा माना जाता है | यह बिमारी आमतौर पर वजन उठाने वाले जोड़ों,घुटने और कुल्हे के जोड़ों में ज्यादा होती है और वजन बढ़ने , ज्यादा काम करने, चोट लगने के कारण बढती जाती है |
आर्थराइटिस का पारंपरिक उपचार :-
रोगीओं को आमतौर पर डाक्टर एस्प्रिन और बिना स्टीरियोइड की एंटी इन्फ्लेमेट्री दवाएं दे दी जाती है | ये दवाएं जोड़ों के दर्द और सुजन से तो कुछ देर के लिए राहत दिला देती है परन्तु इनके गंभीर दुष्परिणाम होते है |
पेट का अल्सर, और पाचन तंत्र में रक्त-स्त्राव इसी के दुष्प्रभाव का परिणाम है | सबसे बड़ी सम्स्य यह है की ये दवाएं सिर्फ कुछ समय के लिए दर्द कम करती है और बिमारी के मूल कारण को बिलकुल असर नहीं करती |
एलोवेरा और उसके कुछ विश्वसनीय उत्पाद है, जो जोड़ों के दर्द से बिलकुल छुटकारा दिला सकता है , जो की निचे दी जा रही है :-
1 . एलोवेरा जेल
2 . पोमेस्टीन पॉवर
3 . फोरेवर फ्रीडम
4 . गार्लिक थाइम
5 . हीट लोसन और एम्.एस.एम्जेल :- सुजन वाले स्थान पर दोनों को मिलाकर मालिश करना चाहिए |

अतः आर्थराइटिस दिवस के अवसर पर आइयें हम सब मिलकर इस खौफनाक रोगों से डटकर मुकाबला करें |
आहार विहार और नियमित घुटनों का व्यायाम करने से इस रोग से उत्पन्न दर्द को कम किया जा सकता है | परन्तु उपरोक्त उत्पाद के नियमित चार से छः महीने तक सेवन से इससे पूरी तरह से छुटकारा पाया जा सकता है |
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एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें
"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !
एलो वेरा नेक्टर में है हमारे एलो वेरा जेल में पाए जाने वाले सभी पोषक घटक साथ ही, इसमें है क्रेनबेरी और एपल के अतिरिक्त पोषक गुण क्रेनबैरिज इतनी गुणकारी क्यों है? अपने मीठे स्वाद और मूत्रमार्ग को साफ करने के अपने अनोखे गुण के अलावा, क्रेनबैरिज में है विटामिन सी, यह पिक्नोजिनाल का भी एक उत्तम प्राकृतिक स्त्रोत है, जो ऐसा शक्तिशाली एंटीओक्सीडेंट है , जिसे कोलाजेन बनाए में सहायता मिलती है |
कोलाजेन इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?
कोलाजेन का निर्माण शरीर के टिश्यु सैल्स, मसूड़ों,रक्तवाहिनियों,हड्डियों और दांतों के विकाश तथा मरम्मत के लिए अत्यावश्यक है | इतना ही नहीं, कोलाजेन एक ऐसा ग्लू है, जो वास्तव में पुरे शरीर को एक साथ जोड़े रखता है |
एलो बेरी नेक्टर:- इसमें क्रेनबेरी के जूस के अलावा एपल जूस भी मौजूद है | एपल जूस में मौजूद विटामिन ए और सी के अलावा पोटाशियम और पक्तिं भी होता है | यही नहीं, एपल्स में किसी भी अन्य फल या सब्जी के मुकाबले फास्फेट की मात्रा कहीं ज्यादा होती है |
आइये अब जानते है विटामिन सी इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?
सबसे पहले तो यह समझ ले की हमारा शरीर विटामिन सी को शरीर में संग्रह नहीं रख सकता, इसलिए आपको हर दिन 200 से 400 मी.ग्रा. विटामिन सी लेना बहुत जरुरी है | कुछ स्त्रोत के अनुसार हर दिन 500 मी.ग्रा.विटामिन सी लेने की सिफारिस की जाती है |
हमारी रोगप्रतिकारक प्रणाली को मजबूत बनाने, फ्री रेडिकल्स से लड़ने और
ह्रदय तथा आँखों के स्वास्थ्य के लिए हर दिन विटामिन सी लेना जरुरी है | यह कोई साधारण बात नहीं !
फास्फेट और विटामिन ए क्यों इतने आवश्यक है ?
लायनस पोलिन इंस्टीच्युट के अनुसार फॉस्फेट एक ऐसा अत्यावश्यक मिनरल है, जो शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली की हर कोशिका के लिए जरुरी है साथ ही, हमारी रोगप्रतिकारक प्रणाली के सामान्य रूप से काम करने के लिए भी विटामिन ए जरुरी है |
उप्रोत्क्त जानकारी के उपरांत ये बात तो आपको समझ में आ गई होगी की - क्यों एलो बेरी नेक्टर हर दिन लेना चाहिए ? हमें एलो बेरी नेक्टर पिने के असली कारणों को नहीं भूलना चाहिए ------ जो स्टेबीलाइज्ड एलो जेल है !
अब सबाल यह है की एलो वेरा जेल इतना क्यों महत्वपूर्ण है?
अपने प्राकृतिक रूप से तैयार होने वाले विटामिन्स और मिनरल्स एक साथ, एलो वेरा हमारी रोगप्रतिकारक प्रणाली और पाचन प्रणाली को प्राकृतिक रूप से सहायता करता है | एलो वेरा जेल में शामिल है :- विटामिन ए , बी 1 ,बी 2 ,बी 6 ,बी 12 , सी, ई, फालिक एसिड और निआसिन- ऐसे सभी विटामिन, जो हमारा शरीर तैयार नहीं कर सकता, तो एलो बेरी नेक्टर पीजिये और शरीर की रोगप्रतिकारक प्रणाली को शक्तिशाली बनाइये.... प्राकृतिक रूप से !
एलो बेरी नेक्टर कैल्सियम,सोडियम,आयरन, पोटाशियम,क्रोमियम,मैग्नेशियम,मेंग्निज,कॉपर,और जिंक भी उपलब्ध कराता है, है न मिनरल्स का खजाना ! शरीर को अपने सुडौल-स्वस्थ आकार में बनाए रखने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है? आपकी त्वचा इन पोषक तत्वों का भौपुर इस्तेमाल करेगी, जिनमे है भरपूर एंटीओक्सीडेंट क्षमता आपके शरीर को हर दिन पोषक तत्वों की जरुरत पड़ती है
आपके शरीर के टिश्यु,सैल्स,मसूड़े, रक्तवाहिनियाँ,हड्डियाँ और दांत भी आपका शुक्रिया अदा करेंगे | तो चलिए , इस पोषक तत्वों के एक ही खजाने से चुनिए अनेक फायदे के लिए !
उपयोग करने का निर्देश :-
हर दिन, दिन में एक या दो बार सुबह सबसे पहले और रात को सोने से पहले पीना न भूलें..... बशर्ते आप रात का खाना जल्द खा लेते हों, ग्लास में डालने से पहले इसे अच्छी तरह हिलाएं | एक बार सील तोड़ने के बाद हमेशा इसे रेफ्रिजरेटर में रखें | एक बिना खुला डिब्बा आप चार साल तक रख सकते है और खोलने के बाद रेफ्रिजरेटर में रखा डिब्बा आपको 3 महीने के भीतर इस्तेमाल करना होगा |
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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !
FREEDOM
-इसमे ८५% एलोवेरा है इसलिए एलोवेरा के तो सभी गुण इसमे है ही तथा रीढ की हड्डी व सरवाईकल के दर्द को हटाने मे बहुत मदद करता है ।
-यह गठिया बाय मे लाभदायक है ।
-इसमे ज्लूकोसमाईन कोन्ट्रोडाइन एवं एम . एस. सल्फ़ेट है जो हमारे जोडों मे ग्रीस का काम करता है ।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे
ज्ञान दर्पण ताऊ जी
ALOE BERRY NECTAR
एलो बेरी नेक्टर का सेवन करने के फायदे
-इसमे ८५% शुद्ध एलोवेरा जेल है और १५% क्रेनबेरी और सेब का रस है ।
-यह महिलाओं और बच्चो के लिये बहुत लाभदायक है इसमे जेल के सभी गुण तो है ही साथ ही प्राकृतिक विटामिन –सी भी मौजुद है ।
-पेशाब संबन्धी समस्याओं मे काफ़ी अच्छा होता है ।
-क्रेनबैरी गुर्दे के लिए बहुत फ़ायदेमन्द है ।
-यह अस्थमा ,एगजिमा मे बहुत फ़ायदेमंद है ।
-इसमे प्राकृतिक विटामिन सी है जिसका शुद्ध एलोवेरा के साथ मिश्रण बहुत सारी समस्याओं मे फ़ायदेमंद है ।
-इसको शुगर के रोगी को छोडकर किसी भी रोगी को दे सकते है ।
-महिलाओं मे लिकोरिया , माहवारी आदि बिमारियों मे काफ़ी लाभदायक है ।
-यह जोडों का दर्द व सरवाईकल मे काफ़ी लाभदायक है ।

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ज्ञान दर्पणताऊ जी
1.DETOXIFICATION ( निर्विकरण )
2.REPAIR ( HEALING ) ( मरम्मत )
Detoxification को समझने के लिए हमे पहले यह समझना जरुरी है कि टोक्सिन क्या होते है ।
आज हमारे समाज मे चारों तरफ़ बीमारियां बूरी तरह फ़ैल रही है । एक बार जो बिमारी शरीर मे लग जाती है ,वह जाने का नाम नही लेती है । बी.पी., शुगर ,माइग्रेन जैसी बीमारियां तो लाख दवाई खाने के बाद भी बढ जाती है तथा अन्त मे विकराल रुप धारण कर लेती है । यदि हम पेट मे तेजाब बनने ,गैस बनने या कब्ज रहने की बात करें तो यह भी ठीक नही होती है । हम जीवन भर डाक्टर बदलते रहते है लेकिन बीमारी स्थाई रुप से कभी ठीक नही होती है । कभी आपने सोचा है कि ये बीमारियां हमारे शरीर मे आई कहां से ? इन सभी बीमारियों का मूल कारण है टोक्सीन यानि “ जहर “ । लेकिन यह जहर हमारे शरीर मे आया कहां से ? हमने तो अपनी समझ से जहर कभी खाया ही नही । यह जहर हमारे शरीर मे हवा, पानी व खाना तीनों के साथ जा रहा है । तथा एक कारण हमारी जीवन शैली का विकृत होना भी है । और काफ़ी बडी संख्या उन लोगो की है , जो रात को जमकर खाना खाते है और सो जाते है । तथा खाते समय उनका ध्यान टी.वी. पर होता है , खाना जीभ के स्वाद के अनुसार खाते है । इसी कारण हम जो भी खाते है वह पूरी तरह पचता नही है और मल के रुप मे हमारी आंतो मे चिपक जाता है । यह इतना मजबूत होता है कि कोई मेडिसन इस पर असर नही करती है । इसी मल को टोक्सिन या जहर कहते है ।
ALOEVERA
इस जहर को पूरी तरह यहां से बाहर निकाल देता है और इस जहर के कारण जो हमारी कोशिकाएं खराब हो गई है उनकी मरम्मत करने मे मदद करता है । इसी तरह यह लगभग २०० बीमारियों मे चरम सीमा तक लाभ पहुंचाता है । यहां तक कि आज जो ३०-४० साल की उम्र मे लोगों को जोडों का दर्द हो रहा है , उसमे यह काफ़ी लाभ पहुंचाता है , जबकि जोडों के दर्द का दुनियां मे कोई ईलाज नही है ।
एलोवेरा के स्वास्थ्य वर्धक उत्पाद
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ग्वार पाठे की बारबडेनसिस जाति , जिसको ३ साल तक पोल्युशन रहित क्षेत्र मे उगाया जाता है
ग्वार पाठे के स्टैब्लाईजड एलो वेरा जेल मे निम्न तत्व पाए जाते है :-
1-लिगनिन :- शरीर के अन्दर बहुत तेजी से अन्दर तक चला जाता है ।
2-सेपोनिन :- वानस्पतिक साबुन है ( वेजिटेबल कटर ) सेपोनिन लिगनिन के साथ मिलकर टोक्सिन के नीचे तक चला जाता है तथा वहां से उन्हे साफ़ कर देता है ।
3-एन्थर्क्येनिनस:- यह आसानी से हमारे पाचन तन्त्र के द्वारा सोख लिया जाता है । यह हमारे पाचन तन्त्र मे जाकर अति सुक्ष्म कीटाणुओं व दर्द को खत्म करने मे मदद करता है । इनमे आलाहिन एवं इमोडिमो नामक तत्व होते है जो प्राकृतिक दर्द निवारक के रुप मे काम करते है , जो काफ़ि महत्त्वपूर्ण है । यह एन्टी बायटिक, एन्टी पियोरेटिक, एन्टि पायर्टिक , एन्टी एलर्जिक , एन्टी फ़न्गल ,एन्टी इन्फ़लेमेंट्री , एन्टी सेपटिक के रुप मे राहत पहुंचाते है । यह एक एन्जाइम्स का समूह है ।
4-विटामिन :- विटामिन हमारे पाचन के लिए अति आवश्यक तत्व है । यह हमारे मैटाबालिज्म को स्वस्थ रखने मे मदद करते है । एलोवेरा मे लगभग सभी विटामिन पाए जाते है । विटामिन ए (बीटाकेरोटिन) ,सी एवं ई के अलावा इसमे विटामिन बी१२ भी पाया जाता है । जो काफ़ी कम पौधो मे पाया जाता है । विटामिन-बी १२ शाकाहारियों के लिए अति आवश्यक है ।
5-एन्जाईम :- हमारे शरीर मे यह भी महत्त्वपूर्ण तत्व है जो हमारे शरीर की किसी भी क्रिया के लिए आवश्यक है । यह एक तत्व को एक जगह से दूसरी तक ले जाने का कर्य करते है । यह हमारे शरीर मे उत्प्रेरक का काम करते है । एलोवेरा मे नौ प्रकार के महत्त्वपूर्ण एन्जाईम होते है ।
6-मिनरल :- हमारे शरीर मे विटामिन के साथ मिलकर हमारे शरीर के विकास ,वृद्धि व उसको बनाए रखने मे अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है । मिनरल वह माहौल तैयार करते है जिनमे विटामिन बेहतर काम कर सके । एलो वेरा मे मुख्य रुप से कैल्शियम , फ़ास्फ़ोरस ,पोटेशियम ,आयरन ,सोडियम ,क्लोरिन , मैंग्नीज , मैग्नीशियम कोपर , क्रोमियम ,जिन्क आदि पाये जाते है ।
7-लिपिड :- इसमे मोनो व पोलीसेकाराईड पाई जाती है । यह हमारे शरीर के ईम्यून सिस्ट्म को ठीक रखने तथा निर्विषिकरण मे सहायक है । कुछ पोलीसेकराईड सेल के अन्दर एक लाइन बना लेती है तथा विजातीय तत्वों को आने से रोकने का काम करती है । इन्हें इम्यूनोडिलेटर भी कहते है ।
8-फ़ैटी एसिड :- एलोवेरा मे cholesterol, conpeteol ,B .sirostero और lupeol फ़ैटीएसिड पाये जाते है । यह एन्टी इन्फ़ेलेनेटरी एजेन्ट के रुप मे काम करते है ।
9-Salicyclic acid :- एलोवेरा मे पाया जाने वाला यह तत्त्व एस्प्रीन की तरह होता है । यह एन्टी इन्फ़ेलेमेटरी व एन्टी बैक्टीरियल होता है ।
10-अमिनो एसिड :- अमिनो एसिड हमारे शरीर मे बिल्डिन्ग ब्लोक की तरह काम करता है । हमारे शरीर की सभी कोशिकाएं प्रोटीन की बनी है तथा इसमे काफ़ी तरह का प्रोटीन लगा है । हमारे शरीर मे २२ तरह के अमिनो एसिड की आवश्यक्ता होती है जो कि नाना प्रकार के प्रोटीन बनाने मे सक्षम है । इन २२ अमिनो एसिड मे ८ जरुरी होते है तथा १४ गैर जरुरी होते है । एलोवेरा जेल मे लगभग सभी पाये जाते है । एलोवेरा जेल अपने आप मे एक चमत्कार है । यह एक एन्टी सेप्टिक ,एन्टी फ़न्गल, एन्टी बैक्टिरियल ,एन्टी वायरल है तथा एन्टी बायटिक है । यह कोशिकाओं की मरम्मत करने तथा उसको स्वस्थ रखने मे काफ़ी मदद करता है । डा. लाइनस पौलिंग इंस्टिट्यूट ओफ़ साइंस एण्ड मेडिसन – पोलो आलो यूनिवर्सिटी ओफ़ ओक्लाहोमा मे तथा ओक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ( डा.पीटर आथरटन) मे आज भी एलोवेरा पर रिसर्च हो रहा है ।हजारों यूनिवर्सिटीयों मे आज भी इस पर रिसर्च हो रही है ।
गवार पाठे से बने स्वास्थ्य वर्धक उत्पादों की ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ चटका लगाये |
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इसे घी ,कवार गन्दल, ग्वारपाठाद्ध , धृत कुमारी ,कुमारी ,मुसव्वर, केतकी व अन्य कई नामो से जाना जाता है ।
यह एक ऎसा पौधा है जो लगभग पुरे संसार मे पाया जाता है । संसार मे जितने भी धर्म ग्रन्थ है लगभग सभी मे इसका सम्मानपुर्वक उल्लेख है । हमारे विष्णु पुराण मे, महाभारत मे वेदों मे इसका धृत कुमारी के नाम से उल्लेख है । हमारे आर्युवेद मे इसे जडी बूटियों का महाराजा कहा जाता है ।
हम यदि अपने बुजुर्गों से बात करे तो हमें मालुम होगा कि वे इसे काफ़ी इस्तेमाल करते थे । कोइ इसके लड्डू खाता था तो कोइ इसका हल्वा बनाकर खाता था । हमारे यहां विषेश कर राजस्थान मे इसकी सब्जी आज भी बनाकर खाई जाती है । दुनियां के सभी देशों के पास इसका काफ़ी पुराना इतिहास है ।मिश्र मे ममी के इसका लेप लगाकर ही लम्बे समय तक सुरक्षित रखते थे । क्लयोपेट्रा जो दुनियां की सबसे सुन्दर महिला थी इसी का लेप लगाती थी । सिकन्दर ने एक लडाई केवल इसी के लिये लडी थी ।
महात्मा गांधी इसका अपने लम्बे उपवासों मे उपयोग करते थे । १८३५ से वैग्यानिक इसके उपर निरन्तर अनुसन्धान कर रहे है । अमेरिका के एक विख्यात अनुसंधान केन्द्र डा. लाईनस पोलिंग इंस्टीट्युट ने इस पौधे मे पर २६ साल रिसर्च किया । उन्होने इस पर रिसर्च इसलिए किया क्योंकि इस पौधे मे एक गुण यह भी है कि इसमे हर जगह अलग- अलग रोगो से लडने की क्षमता है । जो पौधे यू.पी. बिहार मे होते है उसमे जोडों का दर्द ठीक करने की ताकत होती है ,जो पौधे राजस्थान मे होते है उनमे दमे के रोग को जड से काटने की ताकत होती है । जो पौधा रुस मे होता है उसमे त्वचा के रोग
ठीक करने की ताकत होती है । उन्होने पुरी दुनियां मे ३०० प्रकार के पौधे ढूंढे । उनमे से २८५ पौधे ऎसे थे जिनमे ०- १५% दवाओं के गुण थे ११ पौधे ऎसे थे जिनमे जहर था । ४% पौधे ऎसे थे जिनमे ९०% से १००% दवाओं के गुण थे । इसमे एक ऎसा पौधा भी था जिसने १००% गुण थे । उसका वैग्यानिक नाम बारबडेसिस मिलर है । उस पौधे को यदि हम ३ साल तक बिना रासयनिक खाद व किटनाशक तथा पोल्युशन के उगाये तो इसमे दो गुण अपने आप आ जाते है ।
एलोवेरा के स्वास्थ्य वर्धक उत्पादों के बारे में जानने के लिए यहाँ चटका लगाएँ
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१- शरीर निर्माण के ब्लोक – एमिनो एसिड हमारे शरीर के निर्माणक ब्लोक है । इनमे आठ जो महत्त्वपूर्ण है और जिनका निर्माण शरीर द्वारा नही हो सकता , वे एलोवेरा के पौधे मे पाए जाते है । एलोवेरा जूस के रोजाना सेवन से इन महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिडों के कारण आपका शरीर दुरुस्त और सेहत बरकरार रहती है ।
२-जलन और सुजन रोधी गुण- एलोवेरा के १३ कुदरती तत्व जो किसी भी साइड इफ़ेक्ट के बगैर जलन अय्र सुजन को रोकते है । एलो जोडों और मांसपेशियों को गतिशील रखने मे भी सहायता कर सकता है ।
३- विटामिन की रोजाना खुराक – एलोवेरा मे विटामिन ए. बी१,बी६,बी१२, सी और फ़ोलिक एसिड तथा नियासिन पाये जाते है । शुद्ध एलोवेरा जेल से बने एलोवेरा जूस की रोज एक खुराक पीने से बेहतर और क्य ,जो इस कमी को पूरा करने के साथ –साथ ओक्सीकरण के तनाव का सामना करने के लिए शरीर के प्रतिरक्षण तन्त्र का निर्माण भी करता है ।
४- खनिज पदार्थों ( लवणों) की रोजाना खुराक - एलोवेरा जूस मे कैल्सियम ,सोडियम,आइरन,पोटैशियम , क्रोमियम , मैग्निशियम ,मैंगनीज , तांबा और जस्ता आदि खनिज लवण पाए जाते है । कुदरत का एक अनमोल खजाना ! एलोवेरा जेल शरीर की जरुरतॊं को पूरा करने वाला एक कुदरती और फ़ायदेमंद जरिया है ।
५- कोलोजेन और इलैस्टिन की मरम्मत- एलोवेरा शरीर के निर्माण ब्लोक के इस्तेमाल से , बढती उम्र के असर का सामना करने मे त्वचा इन पोषक तत्वो का लाभ उठा सकती है । शुद्ध एलोवेरा जेल से बने एलोवेरा जूस के रोजाना इस्तेमाल से आपकी त्वचा की जरुरते पुरी होती है ।
६- वजन और उर्जा स्तर पर नियंत्रण – हमारे भोजन मे बहुत सी गैर जरुरी चीजें भी होती है ,जिनकी वजह से हममे आलस और थकान आ सकती है । शुद्ध एलो जेल से बने एलोवेरा जूस रोजाना पीने से अन्दर से भरपूर तन्दुरुस्ती का अहसास होता है , उर्जा का उच्च स्तर मिलता है और वजन शरीर के अनुकूल रहता है ।
७- प्रतिरक्षण ( रोग रोधी) क्षमता और क्रिया मे सहायक – एलो वेरा प्रतिरक्षण तन्त्र को कुदरती तौर पर मदद पहुंचाता है । प्रतिरक्षण क्षमता बढाने वाले गुणो से लैस एलो वेरा शरीर को ग्रहण करने की अपार शक्ति देता है । रोजाना ३० से ५० एम एल जेल पीने से आपके प्रतिरक्षण तन्त्र की जरुरतें पूरी होंगी ।
८- हाजमे को दुरुस्त रखने मे मददगार – एलोवेरा जूस मे कुदरती विषैलेपन को दूर करने की क्षमता होती है । शुद्ध एलोजेल से बने एलोवेरा जूस रोज पीने से आंते दुरुस्त रहती है , प्रोटीन ग्रहण करने की क्षमता बढ्ती है तथा नुकसानदेह बैक्टीरिया कम होते है ।
९- जल्द फ़ायदा करे - एलोवेरा फ़ाइब्रोब्लास्ट की क्षमता को बढाता है । ये मामुली जलन ,घावॊं खरोंचो, धूप की जलन और खाज –खुजली को कम करने ( बचाव ) मे भी मदद करता है ।
१०- स्वस्थ और स्वच्छ दांत – एलोवेरा आपके मूंह और मसूढों के लिए बहुत फ़ायदेमंद है । इसे अपने दांत के डाक्टर के रुप मे अपनाएं ।
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