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Mar 16, 2014

केजरीवाल का काला सच ??

आम आदमी के संजोयक केजरीवाल आज ऐसे मेहमान ढूंढ रहे है जो इनके साथ बैठकर दस हजार, बीस हजार रुपैये का खाना खा सके ! इस राजनीती में आम आदमी कहाँ बचा है ? केजरीवाल के राजनीती का ये काला चेहरा है जो लोगों के सामने आ रहा है ! दिल्ली की चुनाव जितने के बाद केजरीवाल ने कहा जीत किसकी हुई है - यह आम आदमी की जीत है , जनता बिच में जायेंगे और उनकी सेवा करेंगे !

वो केजरीवाल कहाँ खो गया ? चुनाव से पहले नागपुर के चमचमाते होटल में जब हजारी प्लेट बिछाई जायेगी तो केजरीवाल का विश्वास उन पाखंड के सामने सर झुकाये खड़ा होगा ! आम आदमी की राजनीती जब रईस के रुपैया खरीद लेगा तो परिवर्तन कि बुनयाद हिल नहीं रही होगी ये सबाल परेशान तो करेगा ही ! क्या अरविन्द केजरीवाल दस रुपैये में मिटने वाली भूख पर प्रीमियम वसूलने का फैसल क्या है वो भी हजार से दो हजार गुना ? और जब ये फैसला कर लेते है तो वो यकीन अपनी मौत मर लेते है की आम आदमी की अठन्नीयाँ भी एक आदर्श राजनीती के रस्ते खोल सकते है ! दस हजार का रात्रिभोज उस रिक्से वाले का चंदा मिटा नहीं देगा ? क्या केजरीवाल इस बात का जबाब देंगे की करोड़पतियों की ये जमात बिना अपनी फायदे की उम्मीद के उनके साथ दस हजार का डिनर क्यों करेगी ?

क्या केजरीवाल को बताना नहीं चाहिए कि जब ताकत आम आदमी का है तो रुपैये खास आदमी का क्यों चाहिए ? क्या केजरीवाल ने अब स्वीकार कर लिया है की रुपैये के अम्बार के बिना राजनीती नहीं बदल सकती ? यह सबाल तो बनता है की जिस जनता ने केजरीवाल कि एक पुकार पर उनकी तिजौरी में इतना रुपैया भर दिया था की उन्हें मना करना पड़े , उसी जनता पर उन्होंने फिर से भरोसा क्यों नहीं किया ? क्या केजरीवाल को वाकई आम आदमी पर भरोसा नहीं रहा या फिर आम आदमी को केजरीवाल पर भरोसा नहीं रहा ?

क्या केजरीवाल को अपनी राजनीती से ज्यादा रईस लोगो पर भरोसा हो चला है ? या फिर उन्होंने मान लिया है की राजनीती में रुपैया नहीं तो कुछ भी नहीं ! अगर केजरीवाल को इसी तरह से रुपैये जुटाने थे तो सितारा होटल के कैंडल लाइट डिनर के वजाय शहर के मैदान में चटाई बिछाकर चुनाव का खर्च निकाल सकते थे ! अब यह सबाल तो बनता है की केजरीवाल ने आम आदमी के बीच पचास रुपैये की थाली क्यों नहीं बेचीं और क्या गारेंटी है की आज दस हजार की थाली बेचने बाल कल लाखो की थाली नहीं बेचेंगे और आगे करोड़ों की चन्दा नहीं लेंगे ?

पार्टी का जो मूल मुद्दा था वो कहीं ग़ुम सा हो गया है जैसे भ्रष्टाचार, सुराज्य सुशाशन ये सब कही गायब सा हो गया है ! वास्तव में केजरीवाल का सियासत बुनियादी विश्वास व सहयोग की राजनति थी परन्तु उनके डिनर ने उनकी सोच को भी संकीर्ण किया है ! और उनसे ज्यादा सिमटा हुआ है उनका आत्मविश्वास की सिर्फ सही होने के दम पर सियासत के सामानांतर लकीरे खिची जा सकती है क्योंकि रोटी के पहले कौर के साथ ही रईसों का यह गरूर सातवे आसमान पर पहुच चूका होगा कि राजनीती उनके रुपैये से चलती है ,जिसके खिलाप लड़ने के लिए चौराहो ने केजरीवाल को चमत्कार का सारथी बनाया था !

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Feb 21, 2014

"जान बचे तो लाख उपाय, लौट के झूठे घर को आय "

दरअसल आम आदमी पार्टी की राजनीतिक नीव ही झूठे व लोक लुभावने वायदे से हुई ,जो तर्कसंगत नहीं थे ! आम लोगों की धरना थी की टीम केजरीवाल अन्य पार्टी से अलग काम करेंगे ! जैसा की उन्होंने अपनी एजेण्डे में शामिल किया था ! आम आदमी पार्टी की उम्मीद से कहीं ज्यादा राज्य चुनाव में जीत हासिल की ,अप्रत्यासित जीत के बाबजूद उन्हें बहुमत नहीं मिली परन्तु बिना शर्त काँग्रेस ने समर्थन दिया , फिर रायसुमारी जनता के बिच और ना जाने क्या क्या ड्रामेबाजी किये गए अंततः केजरीवाल साहेब ने जनता पर अपना अहसान जताया और मुख्यमंत्री बनने पर राजी हो गए ! सरकार बनाने और चलाने के प्रति केजरीवाल साहेब शुरू से ही गम्भीर नहीं रहे ! सरकार बनाने का कार्य तो अनिशिचितता से हुई पर उनके काम करने का तौर तरीके से अंत जल्द होगी ये जरुर निश्चित थी !

उनकी छटपटाहट , हरबराहट में लिए गए तमाम फैसले केजरीवाल के मनसा पर प्रश्नचिन्ह उठ रही है ! क्या वो वाकई दिल्ली के लिए कुछ करना चाहते थे ? क्या वो कार्य पूरा कर लिए जिसके लिए आम जनता ने उन्हें हाथो-हाथ लिया था ? बिजली -पानी ,महिला सुरक्षा,शिक्षा ,रैनबसेरा इत्यादि अनेक प्रकार के समस्याएँ से जूझती दिल्ली को क्या निदान हो गया ?

>क्या वाकई लोकपाल ही दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या थी ? अरे केजरीवाल जी अगर भ्रष्टाचार के विषय से आप वाकई चिंतित थे तो सबसे पहले निचले स्तर से काम करते , जैसे राशन कार्ड जो दिल्ली वालो के लिए सबसे बड़ी समस्या है , राशन दुकान और राशन कार्ड के लिए कभी आप धरना पर बैठते तो शायद दिल्ली के लोगो को भी लगता की वाकई आप कुछ करना चाहते है ! निचले स्तर पर आज भी गरीब लोगो के लिए दो जून की रोटी पर भी मुसीबत हो रही है !

लेकिन आप की छटपटाहट तो शुरू से ही भागने के लिए था ! तंग मानसिकता के परिचायक तब बने जब दो पुलिस वाले को छूटी भेजने के लिए अपने दल बल के साथ धरना पर बैठ गए ! गणतंत्र दिवस पर आपकी टिपण्णी भी आपकी दिमागी दिबलियापन नहीं तो और क्या था ? डेढ़ महीने में आपने हमेशा लाइट कैमरा और एक्शन वाले काम किया है ! काम हो न हो ढोल पीटने वालों को साथ में पहले से लेकर चलते थे !

क्या टीम केजरीवाल बतायगा की सिमरत ली अमेरिकन ( CIA ) एजेंट अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के NGO कबीर में साल 2010 में 4 महीने के लिए काम किया था और उसी दौरान अमेरिका से 86 लाख रुपैये का अनुदान राशि भी मिली थी ! ऐसा क्या काम किया था जिसके बदले उन्होंने अमेरिका से इतनी बड़ी धन राशि मिली थी ! केंद्र सरकार ने कई बार चिट्ठी लिखी है पर ये लोग अभी तक जबाब नहीं दिया है ! आखिर माजरा क्या है ?

भ्रष्टाचार के खिलाप ढोल पीटने वाले ढोली अपनी करतूत क्यों नहीं साफ करती है ? अभी हाल ही हर्षवर्धन जी भी सबाल उठाये है फिर वो मौन क्यों है ? बस दुसरो के बारे में अनाप-सनाप बाते करना ही उनका एक मकसद है ! पर जब खुद ही भ्रष्टाचार के दल-दल में ऊपर से निचे तक फंसा हो तो औरो को भी ऐसा ही समझते है ! एक कहाबत है न " चोरक ध्यान मोटरिये पर " ! जो चोर होते है वो सबको चोर ही समझते है !

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Jan 21, 2014

केजरीवाल का कुचक्र , लुटिया डुबोने पर उतारू !

लगता है दिल्ली की राजनीती में जैसे कबड्डी मैच चल रही हो ! एक तरफ टीम केजरीवाल जो आम आदमी पार्टी के संस्थापक और वर्त्तमान मुख्य मंत्री जी है और सामने प्रतिद्विंदी दिल्ली की पुलिस है और रेफरी यहाँ के केंद्रीय गृह मंत्री सुशिल कुमार शिंदे है ! मैच का परिणाम चाहे जो भी हो जनता की हार हर हाल में सुनिश्चित नजर आ रही है ! जनता अब क्या करें? कहाँ जाएँ ? अपनी दुखड़ा किसके पास लेकर जाये? क्योंकि केजरीवाल जी भूल चुके है की वही यहाँ के मुख्यमंत्री है ! परन्तु व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर अनायास आन्दोलन की कोई खास जरुरत यहाँ नजर नहीं आ रही है ? पहले यहाँ के जनता से किये हुए वायदे को पूरा कर लेते इसके बाद जो आन्दोलन का कीड़ा उनके अंदर है वो भी पूरा कर लेते ! इन सब आपाधापी में जनता बिचारी अपनी भाग्य को कोश रही है की क्या हमने इन्हे सिर्फ रोड छाप राजनीती करने के लिए वोट दिया है या सचिवालय में बैठ कर भी कोई नेक काम जो जनता के हक़ में हो उसकी लड़ाई लड़ी जा सकती है ?

दिल्ली की नव निर्वाचित सरकार जिस प्रकार अपना सचिवालय चौराहे पर लगा रखी है यहाँ तक की कुछ जरुरी कागजाते भी वहीँ पर हस्ताक्षरित किये जाते नजर आ रहे थे ! उससे दिल्ली कि अंतराष्ट्रीय पटल पर केजरीवाल साहेब क्या सन्देश देना चाहती है ? क्या यह देश और सचिवालय जैसे प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा के साथ छेड़छाड़ नहीं है ? और तो और आजकल उनकी भाषा भी अनपढ़ और सामयवादी लम्पटवाद जैसे हो रही है ! मानसिक स्थिति जैसे असंतुलित हो गया हो, कुछ भी बोल रहे है ? मुख्यमंत्री जी शिंदे को नहीं पहचानते, और वो कहते है कौन होता है शिंदे मुझे बताने वाले कि मैं कहाँ धरना पर बैठूं , मैं दिल्ली का मुख्यमंत्री हूँ मेरी मर्जी कहीं भी बैठ सकता हूँ , मैं बता सकता हु कि शिंदे को कहाँ बैठना है ? अब यह कितना मर्यादित और संयमित भाषा है हमारे आम आदमी पार्टी की आप ही निष्कर्ष निकाले !

केजरीवाल साहेब को एक बात और मान लेनी चाहिए की "काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ा सकते है " और हाँ महोदय जनता बिलकुल जागरूक है जैसा कि आप जानते है ! आप के लाइट एक्सन और मिडिया प्रेम भी अच्छी तरह से समझने लगे है ! अगर अपनी औकात में समय से पहले आ जाये तो बेहतर होगा वर्ना आम आदमी की ताकत भला आप से अच्छा और कौन जान सकता है ? वो जब सर आँखों बिठा सकता है तो जमीं पर पटकने में भी उन्हें जायदा वक्त नहीं लगेगा !

आम आदमी पार्टी अब आम आदमी के लिए अभिशाप साबित होने लगा है ! आज के तारीख में दिल्ली वासियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत अगर कोई है तो वो है आम आदमी पार्टी और उनके मुखिया अरविन्द केजरीवाल, जो अनरगल कार्यों और अपने आप को मीडियामय करने के लिए तरह तरह के ड्रामा करने में लगे रहते है !

अपने घरों में खुद आग लगाकर हाथ सेक रहे है और दूसरे लोगों के बारे में बड़ी बड़ी बाते कर रहे है ! जब घर मुखिया को कोई फिर्क नहीं हो तो दूसरा कोई क्यों चिंता करने लगे ?मुख्यमंत्री जी दिल्ली की महिला सुरक्षा को लेकर इतना सख्त है ये पता नहीं था ? जहाँ उनकी रिहायश है, जो उत्तरप्रदेश मे है क्या वो महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से बिलकुल सुरक्षित है ? धरना अब उत्तरप्रदेश में भी तयारी करनी चाहिए ! " करना न धरना , सिर्फ करते रहो धरना "

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Dec 25, 2013

सकारात्मक व रचनात्मक राजनीति आम आदमी की प्राथमिकता हो तो बेहतर ?

तक़रीबन दो हप्ते से चल रही ड्रामा अब क्लाइमेक्स तक पहुँच चुकी है ! कल हाई वोल्टेज ड्रामा आम आदमी पार्टी के अंदर भी देखा गया ! दिल्ली की जनता को शायद इस तरह का ड्रामा कि उम्मीद कम से कम आम आदमी पार्टी के विधायक से नहीं थी ! परन्तु मंत्री पद नहीं मिलने के कारण विनोद कुमार बिन्नी ने जिस तरह से अपना तेवर दिखा कर मीटिंग से भागे बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण और आम आदमी पार्टी पर एक दाग जरुर लगा दिया ! अब चाहे इसके लिए AAP के लोग कोई भी सफाई दे परन्तु जो कुछ भी हुआ इससे यह साबित हो जाती है कि AAP के भी अंदर सबकुछ ठीक नहीं है !

ईमानदारी और नैतिकता की ढिंढोड़ा पीटने वाले AAP के विधायक की कलय खुल गई ! महत्तवकांक्षा व वर्चस्वता जीत कर आये हुए सभी विधायक में होगी ! "AAP" के विधायक भी इन्ही धरती पर पले बढे हुए है , इन्होने भी यही के वातावरण में साँस ली है ! तो वो यहाँ के आबोहवा से अछूता कहाँ रह पायेगा ! इनकी भी जरूरते है , खुद भी समस्या होगी और सबसे बड़ी बात है की जब तक खुद समस्या में घिरी होगी तबतक औरों को कहाँ से समस्या से मुक्त करने का सोचेगा ! AAP के लोग कोई देव लोक से धरती पर नहीं अवतरित हुए है ,जो लोभ , मोह,अर्थ,काम ,वासना इत्यादि से मुक्त हो !

एक लाइन मैंने कभी पढ़ा था , आज जरुर यहाँ रखना चाहूंगा :-

" मंच जबसे अर्थदायक बन गए है , तोतला भी गीत गायक बन गए है ! राजनीती इस कदर गिरने लगी है , जेबकतड़े भी विधायक बन गए है !"

मेरी "आप" के लोगों से गुजारिश होगी कि सरकार बनाने के बाद जो बुनियादी मसला है जैसे बिजली व पानी कि समस्या को प्राथमिकता दे फिर जो भी कानून बनाना चाहते है वो बनाये और जरुर लोगो को साफ सुथड़ी व भयमुक्त,भ्रष्टाचार मुक्त दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरा भारत को बनाये ! स्वागत योग्य होगा अगर आम आदमी पार्टी सकारात्मक व रचनात्मक तरीके से किये हुए वायदे को पूरा करती है ! AAP को सरकार बनाने के लिए बहुत बहुत बधाई !

प्रतिशोध की राजनीती फ़िलहाल AAP के लिए खाई खोदने के सामान होगा ! जिससे पार्टी कि छवि ख़राब होगी व लोगो में गलत सन्देश जायेगा कि वो अपने किये हुए वायदे पूरा नहीं कर पाते इसलिए इस तरह का ड्रामा किया है ! आम जनता यही सोचेगी कि बड़ी बड़ी किताबी बाते सुनने में बहुत अच्छी लगती है पर क्या वाकई इन बातों को अमल में लाना मुश्किल काम है ? आपकी राय जानना जरुर चाहुगा !

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Dec 21, 2013

"आम आदमी पार्टी " की वायदे और इरादे !

आम आदमी पार्टी की मनोदशा आज ठीक उस कहाबत को सपष्ट करती है जैसे " अधजल गगरी छलकत जाय" ! अरविन्द केजरीवाल और उनके टीम खुद के बनाये गए चक्रब्यूह में उलझते जा रहे है ! अमर्यादित भाषा का प्रयोग तो जैसे उनकी रोजमर्रा की बात हो गई है ! आम आदमी पार्टी के लोगों से दिल्ली की जनता कम से कम दूसरे नेता से जरुर अलग सोच रखते है ! लेकिन कुमार विस्वास जिस तरह से उजुल-फिजूल व्यानबाजी करते है उनसे तो यही लगता है कि "AAP" सरकार बनाने से बचना चाहते है !

क्यों नौटंकी करके आम जनता को बेबकूफ बनाना चाहती है ? केजरीवाल जी को समझना चाहिए कि वो वही जनता है जिन्होंने कोंग्रेस और भाजपा जैसे दोनों पार्टी से खपा होकर आपको बहुतमत के करीब लाया है और चाहती है कि सरकार बनाकर अपना दम दिखाए , फिर जो आपने लोगों को सपना दिखाए है उन्हें पूरा करें ! जब समय आ गया है तो कभी SMS-SMS का खेल खेल रहे है तो कभी नुक्कड़ नाटक का सहारा लेकर फैसला लेने का ढिंढोड़ा पिट कर अपनी राजनितिक अपरिपक्ता का परिचय देकर स्वयं को फजीहत करा रहे है !

श्री मान केजरीवाल जी जनता ने आपको अपना मत "आप" के पक्ष में दे दिया है ! आप को जनमत का सम्मान करते हुए अपने किये हुए वायदे अपनी मजबूत इरादे से करना चाहिए ! परन्तु रोज आप नए तरह फालतू नौटंकी से जनता को उलझाने व बेब्कुफ़ बनाने का प्रयास करते है !

अगर जनता "आप" जैसे नौसिखिये को सर आँखों पर बिठा सकती है तो धूल चटाने में भी जरा सा वक़्त नहीं लगेगा ! आज की परिस्थिति में सोचने के बदले "आप " लोकसभा चुनाव के बारे में सोच रहे है ! यही जनता तब भी होंगे श्री मान जी फिर आपकी मानसिकता को समझ चुके होंगे कि आप कितने अवसरवादी है ? और फिर क्या फर्क रहा "AAP", कोंग्रेस व बीजेपी में ? आपका भी नाम अवसरवादी के सूचि में हो जायेगा ! आप से लोगो से अपेक्षा यही है की नौटंकी ना करे और ध्यान अपने किये गए वायदे पर केंद्रित कर लोगों के उम्मीदों पर खरे उतरें !

अंत में एक बात और जरुर रखना चाहूंगा कि "जनमत संग्रह और लोगों कि रायसुमारी "पर ज्यादा उछलने का प्रयास ना करें ! कारण यह है कि अगर 80 प्रतिशत जनता का मत "आप" के यानि सरकार बनाने के पक्ष में है तो वो आपके विरोधी है और वो आपको जांचना व परखना चाहते है और असल में वो जनता आपका है या आपके साथ है जो सरकार नहीं बनाने के बारे में राय रखते है ! तो महाशय शुभचिंतक की संख्या धीरे धीरे आपके नौटंकी से खपा होकर दिनानुदिन घटती जा रही है ,इसके लिए आपको यानि कि टीम केजरीवाल को चिंता होनी चाहिए ! हमारी सहानुभूति आपके साथ रहेगी , ईशवर आपको सद्बुद्धि दे !

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Dec 15, 2013

ये पब्लिक है सब जानती है !

दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी की अप्रत्यासित परिणाम राजीनीति में नए आयाम लेकर आई है ! यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य है ! परन्तु समझना होगा कि यह साल भर पहले तैयार हुई नई पार्टी कि जीत नहीं है बल्कि अन्ना ने जो सामाजिक और संसदीय प्रणाली में परिवर्तन के लिए लगातार आंदोलन व अनशन करते रहे और आज भी वो डटे हुए है, उन्ही का नतीजा है ! दरअसल अण्णा के प्रति देश भर में लोगो का विश्वास बीते साल एक जनसैलाव के रूप में देखा गया !दिल्ली में आम आदमी पार्टी कि उम्मीद से ज्यादा परिणाम निश्चित रूप से अण्णा के प्रयास का ही फल है ! भ्रष्टाचार विरोधी कानून जन लोकपाल के लिए अनवरत कोशिस का परिणाम आज अरविन्द केजरीवाल को मिली है ! दिल्ली के जनता को इस बार आम आदमी पार्टी से बहुत ज्यादा अपेक्षा रखती है ! लोग चाहते है कि वो सरकार चलाये,अपनी काबिलियत साबित करके विरोधी पार्टी को जबाब दे , ताकि आने वाली लोक सभा में उन्हे देश भर में और ज्यादा से ज्यादा लोग AAP पर भरोसा कर सके ! पहली बार दिल्ली में देखा गया कि यहाँ विपक्ष में बैठने कि होड़ लगी हुई है ! पहले आप बनाये तो पहले आप बनाये ! दिल्ली के जनता से साथ ये मजाक नहीं तो और क्या कह सकते है ? पहले बड़ी बड़ी बाते करते रहे , हमारी सरकार आएगी तो दिल्ली कि दिशा और दशा सबकुछ बदल देंगे ! आखिरकार दिल्ली के जनता ने अवसर दे ही दिया और परिस्थिति भी अनुकूल है तो उन्हें सरकार का गठन करनी चाहिए परन्तु अरविन्द केजरीवाल अपनी जिम्मेदारी निभाने से भाग रही है ! उल्टा सबाल उनसे पूछ रहे है जिन्होंने बिना शर्त समर्थन की चिट्ठी राजयपाल महोदय को दे दी है ! मसलन पहले उनकी शर्ते मानी जाए , फिर दस दिन दिल्ली में नुक्कड़ नाटक करेंगे अरविन्द केजरीवाल और उनके नौटंकी टीम फिर जो परिणाम नौटंकी के बाद आएगा तो सरकार बना सकता है या नहीं ! मतलब स्वयं निर्णय लेने में असमर्थ है टीम केजरीवाल , उन्हें कुछ भी निर्णय लेने से पहले नुक्क्ड़ नाटक के जरिये जनता के पास जाकर समझेंगे फिर आगे कदम उठाएंगे ! ऐसे कमजोर नेता जिनके पास खुद निर्णय लेने कि क्षमता न हो दिल्ली के मुख्यमंत्री के लायक हो ही नहीं सकता ! अभी मौका मिली है केजरीवाल साहब , कुछ करो वर्ना आने वाले चुनाव में आपके साथ और ज्यादा अच्छा नहीं होने वाला है यह तो लगभग तय लग रहा है ! क्योंकि पब्लिक है सब जानती है !
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May 4, 2013

क्या हिंदुस्तान सिर्फ रुदालियों का देश है ? पाकिस्तान की जंगली कबीलाई सोच !

सरबजीत की साँसों की डोर टूट गई, उसकी धड़कन बंद हो गई ! छे दिन से पूरा हिंदुस्तान जो दुआ मांग रहा था दुआ अधूरी रह गई ! आधी रात के बाद जब देश गहरी नींद में था तभी पाकिस्तान से एक मनहूस खबर आई, खबर सरबजीत की मौत की ! लाहौर के जिन्ना हॉस्पिटल के डॉक्टरों के मुताबिक रात डेढ बजे दिल का दौरा पड़ने से सरबजीत की मौत हो गई ! जाहिर है मौत को कोई तो नाम देना था सो दे दिया दिल का दौरा और ये खुद पाकिस्तान भी जानता है की सरबजीत मरा नहीं बल्कि पाकिस्तान ने ही उन्हें मार डाला वो भी बेहद जालिमाना तरीके से ! पिछले ही हफ्ते 26 अप्रैल को लाहौर के कोर्ट में सरबजीत पर कैदियों ने पत्थडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया ! हमले के बाद सरबजीत जिन्ना अस्पताल में कौमा में थे ! हालत पहले दिन से ही नाजुक थी वेंटिलेटर पर उधार की साँसे लेकर पाकिस्तान उन्हें जिन्दा रखा हुआ था ताकि अपनी शर्मिंदगी छुपा सके !

और इक नया गम आया,इक नया जख्म आया, इक नया मातम आया,अब एक बार फिर हम सब उस गम को झेलेंगे, उस जख्म को सहेंगे और उस मातम को मनाएंगे, यानि गम देना पाकिस्तान की आदत सी पर गई है,और उसे सहने की हमारी सिद्धत सी बन गई है ! पता नहीं चलता गुस्सा पडोसी से करूँ या शिकायत अपनों से ! नफरत की बुनियाद पर खिची गई सरहद की लकीर के उस पार,आज भी तेरे कारखाने नफरत ही बनाते!

वाह रे पाकिस्तान मोहब्बत और हकीकत की चादर चढाने हिंदुस्तान आते हो, और पाकिस्तान जाकर बदले में कफ़न बांटते हो ! और वाह रे हमारे नेता और हुक्मरान कमबख्त मौत से पहले किसी के लिए इतनी मोहब्बत नहीं उपजती , सब अब सरबजीत-सरबजीत कर रहे है, संसद से सड़क तक श्रधांजलि दे रहे है तो संसद के बाहर कैमरे पर उसे शहीदों के दर्जे से नवाजा जा रहा है ! ये सब पक्के खिलाड़ी है , सबको पता है माहोल गर्म है, मौका है और दस्तूर भी ऐसे में अपनी अपनी रोटी सेक ले और पला झार ले !

अरे उन्हें चैन की सांस भी लेने नहीं दिया बल्कि उधार की सांसो के साथ छीन ली पाकिस्तान ने ! ये मौत सिर्फ सरबजीत की नहीं , ना ही एक आम हिंदुस्तानी की है बल्कि ये मौत एक कायर देश और कमजोर सरकार की है ! सरबजीत की मौत एक पाकिस्तानी सियासी मज़बूरी थी और सियासत से कोई इस तरह मजबूर हो सकता है इसका अंदाजा नहीं था !

अरे उसे मारना ही था तो उसके नाम का फांसी का फंदा पहना देता, कम से कम तुम्हारे मुल्क की कानून और अदालत की इज्जत तो बच जाती पर वाह रे पाकिस्तान सजा अदालत सुनाती है और जरदारी हिंदुस्तान के साथ सियासत-सियासत खेलते है , मोह्बात-मोहब्बत का खेल खेलते है और सरबजीत की मौत कैदियों के हाथों दिलवा देते है वो भी पथड़ मारकर , आखिर कब उबरेगी पाकिस्तान इस जंगली कबीलाई सोच और कानून से ,पर पाकिस्तान से सिर्फ शिकायत क्यों ?

वो तो पराया है,पडोसी है, हमारा अपना घर कहाँ दुरुस्त है ,हमारा घर का मुखिया भी कौन से ताकतवर है जो उनपर भरोसा करे, अरे जिस सख्स और सरदार के पास सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों की ताकत है वो इतना कमजोर कैसे हो सकत है ? ऐसे में भले ही थप्पड़ नहीं जरा जरा सकता पर बिना थप्पड़ जरे ही इस थप्पड़ की गूंज दुनिया को दहला सकता है पर क्या करे सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों को लीड करने वाला ही जब अपना मुह नहीं खोलेगा तो कौन डरेगा हमसे ?जरा सोचिये अगर सरबजीत के मसले पर पहले दिन से ही हम दहाड़े होते तो पाकिस्तान की ये हिम्मत होती की कोई सरबजीत को छू भी पाता , पर क्या करे ? कितना धिक्कारे पाकिस्तान को और उनके मुल्क को चलाने वाले को !

"परिंदों ने कभी रोका नहीं रास्ता परिंदों का,खुदा दुनिया में जाकर खुद कहा होता तो अच्छा था!" क्या कहूँ और किस से कहूँ ? पड़ोसी से शिकायत है पर खुद हमारे अपने कंधे भी तो इतने मजबूत नहीं की खुद हम किसी को सहारा दे सके ! मातम है तो मनाना होगा ,मौत पर रोने का दस्तूर है , रोने वाले तो रो लिया ! पर क्या पाकिस्तान से हमेशा तोहफे में हमें गम ही मिलेगा ? क्या हिंदुस्तान सिर्फ रुदालियों का देश है ? मुश्किल यह है की सवाल पूछे भी तो किस से ? क्योंकि सियासत के पगडंडियों पर कोहरा शरहद के उस पार भी है और शरहद के इस पार भी !

सरबजीत के परिवार लाहौर जिन्ना अस्पताल उनसे मिलने गया परन्तु हालात देख कर वो मंगलबार को ही वापस आ गया और वो सोनिया गाँधी व प्रधानमंत्री जी से मिलने गए परन्तु तबतक सरबजीत हमलोगों से बहुत दूर चला गया ! पर इस से पहले भारत सरकार मानवीय आधार पर सरबजीत का बेहतर इलाज के लिए भारत भेजने की पाकिस्तान सरकार से अपील की थी लेकिन पाकिस्तान ने अपील ठुकरा दी !

हां अब पाकिस्तान ने जरुर सरबजीत को लौटा दिया है पर उखड़ी सांसों के साथ मुर्दा क्योंकि जिन्दा सरबजीत पाकिस्तान के नाम का था ताकि पाकिस्तान उसपर जुल्म ढा सके अब लाश उनके लिए किस काम का ? लिहाजा बेरहम ने रहम के नाम पर लाश भारत को सौप दिया ताकि कहने में रहे की देखो हम इतने भी जल्लाद नहीं है !

और अपनी सरकार भी कम नहीं सोचा चलो इसी को हम अपनी जित मान लेते है ! लिहाजा एयर इंडिया की पूरी खाली विशेष विमान लाहौर भेजा और सरबजीत अमृतसर ले आया गया और इस तरह 23 लम्बे साल बाद सरबजीत अपने घर लौट आया अब जिन्दा या मुर्दा क्या फर्क पड़ता है वैसे भी हम लोग हर गम,हर जख्म , हर सरबजीत को भुलाते ही तो आये है ! तो इस सरबजीत को कबतक याद रखेंगे ? दो चार दिन और बस यही न !!!

राजनीति बचाने का सबाल इस समय नेताओं के लिए बहुत जरुरी होता है कितना अजीब इतेफाक है की एक कमजोर सरकार चलाने वाली पार्टी का उपाध्यक्ष शोक संतप्त परिवार के लोगों को मजबूती देने पहुंचे थे ! सलमान खुर्शीद साहेब देश की विदेश मंत्री जी कड़वा बोलने के लिए विख्यात है लेकिन अच्छा लगता कभी कुछ काम का भी बोलते थोडा और अच्छा लगता अगर काम करते हुए देश को नजर आते !

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में देश के प्रधानमंत्री बाजपेयी जी की सरकार थी और पार्टी के लौह पुरुष लाल कृष्ण आडवानी जी गृह मंत्री ,फिर क्या हुआ ? कुछ भी तो नहीं बदला ?इन 23 सालों में पाकिस्तान नहीं बदला, हम नहीं बदले हमारी सियासत नहीं बदली हमारी सोच नहीं बदली हमारा सच नहीं बदला , और जब कुछ नहीं बदला तो सरबजीत का मुकद्दर कैसे बदल जाता इसीलिए पाकिस्तान ने उस पर लिख दिया मौत !

तेईस साल से हर रात सरबजीत के लिए इन्तेजार की रात थी और सुबह की सूरज देखकर रोज ये सोचता की उनके लिए भी नया नूर लेकर आएगा लेकिन उन्हें नहीं पता था की दिल्ली में बैठे रौशनी के देवताओं की कलम की रोशनाई सुख चुकी है दर्द पर रोने का दस्तूर है सो रोने वाले रो रहे है इस मौके पर हमें ये पूछने का हक़ बनता है की क्या हिंदुस्तान रुदालियों का देश है परन्तु मुश्किल है की ये सवाल पूछे भी तो किस से क्योंकि सियासत के पगडंडियों पर कोहरा उधर भी है और इधर भी !

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Jan 30, 2013

पाकिस्तान की नापाक सोच !!

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो .........

पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मालिक का शाहरुख़ खान का सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर करने के पीछे उनका मकसद क्या है ? क्या नसीहत देना चाहते है रहमान मालिक ? नसीहत अगर देना ही तो वो अपने देश में पनाह दे रहे आतंकी संगठन पर दे, जिन्हें वो अपने सरजमीं पर हरेक नुकड़ व चौराहे पर दुकान की तरह चला रहे है ! पाकिस्तान की हालत दिन व दिन बद से बदतर होता चला जा रहा है , उन्हें सहारे की जरूरत है ! परन्तु वैशाखी के सहारे चलने वाले ये आतंकी देश क्या अपने देश के नागरिक को सहारा देगा ? लोगों को ऐसे ही बेबकूफी वयांवाजी कर उलझा कर अपनी राजनीती रोटी सकते है ! पाकिस्तान को किसी दुसरे मुल्क के बारे अपनी टांगे नहीं अड़ाना चाहिए ! पर बेअकल ये लोग अपनी बेबकूफी कहाँ वाज आते है!

दरअसल दुनिया जानती है हमारे देश में आज मुसलमान भाई जितना सुरक्षित है ,शायद ही किसी और देश ,खासकर पाकिस्तान में हो सकते है ! आज हमारे देश को सुरक्षा के मुद्दे पर नसीहत दे रहे है , अरे खुद अपनी गिरेवान में झांक कर देख सर से पाँव तक नफरत के दल-दल में फंसा हुआ है ! पडोसी देश के नाते उन्होंने अगर कोई काम किया है तो सिर्फ और सिर्फ नफरत, आतंक और देश में असिथिरता !आज शाहरुख़ के लिए भारत सरकार से सुरक्षा मांगने वाले रहमान मालिक को , अपने लोगों के लिए सुरक्षा की चिंता होनी चाहिए ! देश की चहुमुखी विकाश व उन्नति को शायद पाकिस्तान पचा नहीं पा रहे है, इसलिए वो अपनी मानसिक स्थित खो बैठे है !

"चोर के दाढ़ी में तिनका " आज गृह मंत्री भी वहां के आतंकी संगठन के मुखिया हाफिज सईद के साथ सुर में सुर मिलाया ! हम उन्हें बता देना चाहते है की भारत देश ही एक मात्र ऐसा देश है जहाँ प्रत्येक समुदाय के लोग चाहे वो हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिख हो या ईसाय , हर एक लोग साथ मिलकर सौहार्द पूर्वक रहते है और एक दुसरे को सांस्कृतिक व धार्मिक धरोहर को सम्मान करते है ! अनेकता में एकता हमारे देश ने एक मिशल कायम की है ! यही बाते इन आतंकी देश को गले नहीं उतरता है ! उनकी क्षुद्र मानसकिता नजर आती है ! हम चाहते है " जियो और जीने दो " ! धर्म के आधार पर बांटने का काम मत करो, और इस घटिया कोशिस के लिए रहमान मालिक को शर्म आनी चाहिए ! और इस तरह से दुसरे मुल्क के बारे में घटिया बयानबाजी के लिए माफ़ी मंगनी चाहिए !

अंत के एक बात कहना चाहूँगा की भारत को अगर खतरा है तो पाकिस्तान के हाफिज सईद से, आतंकवाद , रहमान के ISI agent से व खुद पाकिस्तान से न की अपने देश के लोगों से !

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Dec 31, 2011

उमीदों से भरा हुआ साल 2012



"इश्वर का दिया हुआ कभी "अल्प" नहीं होता
जो टूट जाये वो "संकल्प" नहीं होता
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना
क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता" !!

इन्हीं शब्दों के साथ आने वाले साल का स्वागत करते है और आप सब के लिए नए साल में नए उमंग, नए तरंग, सेहत व सुखमय रहे ! निरोग जीवन जिए व आर्थिक व शारीरिक रूप से हमेशा स्वस्थ्य रहे !! दुनिया के तमाम देश आज नए साल का जश्न जोश व खरोश के साथ मना रहे है ! उम्मीदों से भरा हुआ होगा ये साल 2012 !! स्वागत स्वागत और हार्दिक स्वागत !
एक बार फिर से आप सबका नए साल की हार्दिक बधाई !!!

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Dec 5, 2011

विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक झलक एहि ठाम देखू !!!




विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक किछु झलक हम अहाँ लोकनि के समक्ष प्रस्तुत करय जा रहल छि ! आई दिल्ली के जैतपुर गाँव के एन.टी.पी.सी. मैदान में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कयल गेल !

समारोह में उपस्थित मैथिलि संगीत के जानल मानल चर्चित चेहरा छल जाही में किछु गायक के हम चीन्हलौंह जेना की सोनी झा, अशोक चंचल,आमोद जी, मंडल जी अओर आकाशवाणी के किछु चर्चित नाम छल !

मैथिलि गीत सुनि कय हमरा लोकनि के मन गद-गद भय गेल ! किछु गीत जे सुन्लौह से अहि ठाम सुना रहल छि :- मिथिला के महिमा सुनावैत छि किये ता हम मैथिल छि -------आ ----- गे बहिना कोना का कटवय सावन राति अन्हरिया में पिया भेल नोकरिया में ना !! अहि तरहे कतेको रास गीत के मजा उठेलौह !

मंच के संचालन कर्ता छलाह बौआ जी, हुनकर जतेक प्रशंसा कयल जाय कम परत ! लोग के खूब गुदगुदेलाह अपन चुटकिला बात सँ ! जा धरि इ गीत संगीत के कार्यकर्म चलैति रहलई, बुझायल जेना गामहि में छि !


धन्यबादक पात्र छैथि विद्यापति स्मृति पर्व के आयोजन कयनिहार आ वो सभटा कार्यकर्त्ता लोकनि जिनकर प्रयास सार्थक भेल ! अहिना समय समय पर मैथिलि आ मिथिला के सबहक बिच में लाबक प्रयास करैत रहबाक चाहि ! एहन मिठ्गर भाषा आऔर कतौ नै ऐछि !


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Nov 30, 2011

लालच बुरी बला !!


प्रतिस्पर्धा के इस दौर में लोगों में जल्द से जल्द आगे निकल जाने की होड़ लगी हुई है ! वर्तमान युग में प्रत्येक व्यक्ति रातों-रात करोडपति बनने का छोटा सा रास्ता तलासते नजर आते है ! जिसके कारण जालसाज के गिरफ्त में फंस कर अपनी जिन्दगी भर की गाढ़ी कमाई को लालच में गँवा बैठते है !

अगर कोई आप से कहे की 50000 /- रूपया का निवेश करो और इसके बदले तिन साल में सौ गुना से भी ज्यादा मुनाफा देंगे, क्योंकि यह निवेश सोने के लिए हम दो लाख के लिए करेंगे ! तो क्या लगता है की वो जो बात कह रहे है ,उसपर विचार करने लायक है या नहीं ?

क्या कोई भी चिट फंड कम्पनी इतनी भारी मुनाफा दे सकता है ? आखिर कंपनी का भविष्य में योजना क्या है ? कोई कंपनी सौ गुना मुनाफा सिर्फ तिन साल में किस आधार पर बाँट रही है ? यह जरुर विचार योग्य प्रश्न है ! खुली आँख से निर्णय लेने का प्रश्न है !

कम्पनी कोई डाकू है,चोर है, या कोई स्मेक ,हिरोइन का व्यापारी तो नहीं फिर जरुर तस्कर हो सकते है ! और अगर ऐसा कुछ भी नहीं है तो हमें बेब्कुफ़ बना रहे है और ऐसे जालसाज से दूर ही बेहतर है |

जयपुर आजकल सुर्ख़ियों में है | एक नहीं दो नहीं कई कम्पनी लोगों के बिच में बड़े बड़े मुनाफा देने का वादा करके वहां से नेट्वोर्किंग के जरिये लाखों , करोड़ों नहीं अरबों रुपये लेकर फरार हो गई है | महज तीन साल में रकम को सौ गुना करने का लालच देकर गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी ने करीब डेढ़ लाख लोगों को करोड़ों की चपत लगाई।


बड़े-बड़े ख्वाब दिखाकर कंपनी के निदेशक आम निवेशकों के 3 अरब रुपये लेकर चंपत हो गए। गोल्ड सुख कंपनी की तरफ से एक स्कीम चलाई गई थी जिसमें एक रुपये की चीज को 27 गुना रिटर्न एक तय अवधि के अंदर देने का वादा किया था और इसके झांसे में आकर कई लोगों ने अपनी रकम जमा कराई।

जयपुर में ही एक और कंपनी का घोटाला का खुलासा हुआ ठीक गोल्ड सुख कंपनी के घोटाला के कुछ दिन बाद |
उसका भी नाम कुछ उनसे ही मिलता जुलता स्वर्णयुग कंपनी था जिसने 2.5 करोड़ ठगे, 1600 लोगों से लिए 15-15 हजार मोटा मुनाफा देने के नाम पर गोल्डयुग कंपनी ने सोलह सौ लोगों को ठगा। हर व्यक्ति से करीब पंद्रह हजार रूपए लिए गए और इन रूपयों के बदले सौ गुना से भी ज्यादा मुनाफा देने की बात कही गई लेकिन कंपनी ने बीच में अपने दफ्तर भी बदल लिए।

दोस्तों रातों रात करोडपति बनने वालो के लिए यह बहुत बड़ा सबक है ! सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं होता मतलब no short cut for success. अगर सफलतम व्यक्ति के श्रेणी में अपने आपको देखना चाहते है तो एक छोटे स्तर से शुरू करना होगा ! जमीनी हकीकत से रूबरू होना होगा, मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और सही समय पर सही दिशा में सही निर्णय लेने की कोशिस करनी होगी !


किसी भी कम्पनी में निवेश करने से पहले सोचे आखिर उनकी भविष्य योजना क्या है ? कम्पनी का पृष्ठभूमि और कितने साल से वो कार्यरत है ! आइये हमारे साथ वगैर कोई निवेश के जुड़े , आप पर निर्भर करता है की कितना कमाना चाहते है ? मात्र 25 /- रुपया में 15000 करोड़ के सालाना व्यवसाय करने वाली कम्पनी की हिस्सा बन सकते है !

फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट्स जो दुनिया में प्राकृतिक चित्क्त्सक उत्पाद के रूप में अपनी वर्चस्व कायम किये हुए है ! दुनिया में सर्वश्रेष्ठ एलोवेरा जेल के उत्पादक है ! इसके अलावा हमारे पास कब्ज़ से लेकर कैंसर तक के मरीजो के लिए जांचा परखा हुआ उत्पाद है ! जहाँ एलोपैथ काम नहीं करती वहां प्राकृतिक चिकत्सा बहुत ज्यादा प्रभावित करती है !
उज्जवल भविष्य, आर्थिक आजादी व निरोग जीवन जीने के लिए आइये जुड़े हमारे साथ !!

एक लाइन आप सब के लिए :-
" ना पूछो की मंजिल कहाँ है , अभी तो बस सफ़र का इरादा किया है !
ना हारेंगे हौसला उम्र भर, किसी और से नहीं ये खुद से वादा किया है"!!


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Feb 6, 2011

नजरिया को बदले - नज़ारे बदल जायेंगे ! जुड़ें एफएलपी के साथ


फरबरी महीने की पहले दिन हिमगिरी एक्स्रेस हादसा बहुत ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण था | किस तरह ट्रेन के ऊपर बैठे लोगों के जिस्म मुली, गाजर के तरह चीथड़े-चीथड़े हो गए | चश्मदीद के अनुसार करीब 35 से 40 लोग काल के ग्रास में समा गए | आखिर क्या है उनके अकाल मृत्यु के कारण ? कौन जिम्मेदार है ? विचार करने योग्य प्रश्न है |

सरकारी तंत्र की लापवाही का आलम तो देखिये सैकड़ों लोग ट्रेन के छत पर बैठ गए | रेलवे पुलिश क्या वहां ट्रेन के छत पर बैठे लोगों के तमाशा देख रहे थे | क्या रेलवे पुलिश ट्रेन में बैठे लोगों को परेशान करने के लिए भर्ती हुई है ? जहाँ सरीफ लोग मिले नहीं की टिकट के नाम पर वसूली चालू करते नजर आते है | खचाखच भड़ी बोगी व छत पर बैठे लोगों को नियंत्रण किया जा सकता था लेकिन उनके बाप का क्या गया ? न जाने कितने घरो के चिराग बुझ गए परन्तु हमारे नेता लोग इस हादसे पर भी अपनी राजनीती स्वार्थ सिद्धि के अलावा कुछ नहीं किया ?

इस घटना से एक और बात उजागर हुआ है बेरोजगारी | बेरोजगारी का आलम यह है की आईटीबीपी में ट्रेडमैन की भर्ती के लिए जहाँ लाखों लोगों ने आवेदन किये थे,जबकि सिर्फ सैकड़ों लोगों को भर्ती करना था | यह बहुत ही विकट समस्या है |

सरकारी नौकरियां के ग्राफ दिन व दिन घटता ही जा रहा है | यही वजह है लोग आजकल किसी राज्य सरकार में चपरासी और माली की पद पर भर्ती के लिए भी लम्बी कतार लग जाती है | सवाल यह नहीं की सरकारी नौकरियों के लिए लम्बी कतार लगाकर लोग खरे हो जाते है इसमें अहम् बात यह है की इस तरह के पद के लिए भी उम्मीदवारों में ढेर सारे एमबीए और एमसीए होते है |


यक़ीनन बढती हुई आवादी इसके प्रमुख कारण में से एक है, परन्तु हालत इतनी ख़राब नहीं हुई है की माली व चपरासी के लिए इंजीनियर्स या मेनेजर्स आवेदन करें |वैसे भी हमारे मन में हमेशा से सरकारी नौकरियों के प्रति अलग भाव रहा है | सरकारी नौकरी के लिए कुछ भी कर गुजरने की प्रयास हमारी मानसिकता है | यहाँ तक की लोग यह भी भूल जाते है की शिक्षा के अनुसार जिसके लिए वो पढ़ाई की है उस तरह के पद के लिए ही आवेदन करें |

इसके अलावा उनके गार्जियन इस तरह के उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए मोटी मोटी फ़ीस भरी थी | प्रतियोगिता से भरे आज के दौर में आने वाली कठिनाइयों को सब बखूबी जानते है | एक ओर जहाँ उच्च शिक्षा प्राप्त करने के वाबजूद उनके पसंद के मुताबिक नौकरी नहीं मिल पाती है ,दूसरी ओर एमबीए पास आउट विद्यार्थी प्राईवेट बैंक में क्रेडिट कार्ड बनाते नजर आते है | बेरोजगारी की बेबसी को तो हमसब जानते है , लेकिन क्या ऐसा नहीं हो सकता की हमसब सरकारी नौकरी का कोई विकल्प को तलाशे ?

सरकारी नौकरी को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी न समझे न ही इसे लौटरी के रूप में देखें | क्यों नहीं हम सेल्फ इम्प्लोय्मेंट की बात सोचते है ? शायद हम खुद के काम को किसी हारे हुए खिलाडी की मज़बूरी की तरह देखते है | ऐसा बिलकुल भी नहीं है , खुद का काम किसी भी तरह से कमतर नहीं है | यह आपकी आत्म संतुष्टि की पहचान है |


जरुरत है पुराने मानसिकता में परिवर्तन की -------- आइये आप फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट्स में हमारे साथ जुड़ें और जिन्दगी के सारे सपने को साकार करे | यहाँ आप वो सबकुछ पा सकते है जिसकी आपको तलाश है | सिर्फ कुछ महीनो में अपनी कीमती समय को लगाकर , मेहनत और इमानदारी के साथ जीवन को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना सकते है |

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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

Nov 17, 2010

अंतर व्यथा - इसे रक्षक कहें या भक्षक |


सच्ची बात तो यह है की अगर ये खाकी और खादी वर्दीधारी सुधर जाए तो देश स्वतः सुधर जाएगा | सोमबार रात की घटना जो दिल्ली वालों को दिल दहला दिया | बात लक्ष्मी नगर के पास ललीता पार्क की है | सोमबार रात के 8 बजे पाँच मंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गया ! कोई नहीं जानता की कब क्या हो जाए ? किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा की इस कदर ये पाँच मंजिला इमारत रेत की तरह भरभरा के गिर पड़ेंगे ? सरकारी आंकड़ा के अनुसार अब तक इस हादशा में करीब 70 व्यक्ति ने अपनी जान गवां दी है |

शक्तिशाली भारत को एक ओर जहाँ पड़ोसियों ने कमजोर करने की कोशिस किया, वहीँ हमारे अपने ही लोग भी इस कुकृतियों में शामिल रहे है, यह सौ फीसदी सत्य है ! स्वभाविमान राष्ट्र के लिए सबसे पहली आवश्यकता है, वहां के लोगों का नैतिक स्तर उच्च होना !

वर्तमान में हमारे देश में उच्च नैतिक स्तर वाले भी है लेकिन नैतिकता से गिरे लोगों की अपेक्षा कम है | आज हम किसी भी क्षेत्र की बात करें भ्रष्ट और बेईमान लोगों की कोई कमी नजर नहीं आएगी !राजनीती क्षेत्र की बात करें तो लगता है की पुरे 'कुए में ही भांग' मिली हुई है !चाहे सताधारी हो या विपक्ष, अधिकांश भ्रष्टाचार में लिप्त दिखाई देते है |


हमारा मकसद ऐसे भ्रष्ट आचरण वाले लोगों को सरेआम उजागर करना , जिनके कारण आज 70 बेगुनाहों की मौत हो गई है | प्रशाशन के कुछ भ्रष्ट आचरण वाले अधिकारी की पूरी जिम्मेदारी है जिन्होंने भवन निर्माण कार्य में पाँच मंजिल इमारत बनाने की इजाजत दी थी |साइलेंट किलर है यह खादी और खाकी के वर्दी में लिप्त कुछ भ्रष्ट अधकारी !

आज एक बार फिर से दिल्ली शर्मशार हो गई | ठीक उसी इलाके में अभी तक़रीबन चार या पाँच बिल्डिंग और भी जो कभी भी गिर सकती है परन्तु प्रशाशन की कान पर जूं नहीं रेंगता | उन्हें इसके बारे में ततकाल कदम उठाना चाहिए ! या फिर प्रशाशन दूसरी घटना का इन्तेजार करेगी | क्या आँखे खोलने के लिए इतना कुछ कम है ?


अरे कुम्भकरण भी छे महीने पश्चात् उठ जाया करता था परन्तु लगता है जैसे प्रशाशन सालों भर सोती रहती है और घटना उपरांत तुरंत नींद से जाग जाती है ! अपनी फायदों के लिए ऐसे खुनी खेल बंद करों ! आखिर कब तक लोगों को उनके ऊपर का आशियाना छिनते रहोगे ?

कई घरों के चिराग बुझ गए , कईयों ने अपने परिजनों को खो दिया ? कौन है इनके जिम्मेदार ? क्या उनके बिलखते हुए आत्मा उन्हें कभी माफ़ कर सकेगा ?

आज हम सभी जानते है की अनेकता में एकता राष्ट्र के रूप में विश्व विख्यात हमारा देश आज भ्रष्टाचार में नित नई ऊँचाइयों को छू रहा है | अगर देश का रक्षक ही भक्षक बनने को उतारू हो तो देश की हालात क्या हो सकता है ! भले ही ऐसा कुछ चंद लोग करते हों परन्तु बदनामी का दाग तो दूर-दूर तक अन्य लोगों को भी दागदार बना देता है |

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Mar 3, 2010

रेल यात्री की व्यथा |


चुकी मैं विहार का निवाशी हूँ ----- पूर्वोत्तर रेलवे जो विहार की ओर प्रस्थान करती है ------खासकर कोई पर्व के समय नयी देल्ली रेलवे स्टेसन का नज़ारा कुछ ऐसा ही प्रतीत होता ----जैसे की कुम्भ का मेला लगा हो | खचाखच यात्रियों से भरी होती है ------ पुलिस प्रशाशन का समुचित व्यवस्था किया जाता है ----ताकि यात्रिओं के साथ किसी भी प्रकार के कोई घटना या दुर्घटना न हो जाय | एक बार तो मुझे भी इस भीड़ का हिंस्सा बनना पडा था -----स्थान आरक्षित भी करवाया पर ऐसे बक्त पर कोई लाभ नहीं होता है ---कई ऐसे लोग मिले ,जिनके पास आरक्षित स्थान के बाबजूद उन्हें अपना स्थान नहीं मिल पाया था ------उनमें से एक मैं भी था |
दिल्ली से विहार की ओर जाने वालों के लिए त्यौहार के समय ये नज़ारा आम है | भाग्य आपका साथ दे दिया तो ही स्थान पर बैठने का अवसर मिल सकता वरना आपका कुछ नहीं हो सकता, ऊपर वाले ही कुछ करेंगे |

"रेलगाड़ी की जेनरल बोगी
पता नहीं आपने भोगी की नहीं भोगी
एक बार मुझे करनी पड़ी यात्रा
स्टेशन पर देखकर सवारियों की मात्रा
मुझे तो पसीने छूटने लगी |"


"इतने में एक कुली आया
और जोर से चिल्लाया
उसने पूछा---जाओगे
मैंने कहा --पहुँचाओगे
उसने कहा- बड़े बड़ों को पहुंचाया हूँ
आपको भी पहुंचा दूंगा
पर रुपैये पुरे पचास लूंगा"


"मैंने कहा पचास रुपैये
उसने कहा हाँ बाबूजी
बीस रूपैये आपके और
बाकी सामान के
मैंने कहा - भाई मेरे पास सामान नहीं है
उसने कहा - यही तो गम है-----
बाबूजी क्या आप किसी सामान से कम है ?
"

"देखो पहले आपको उठाना पडेगा
फिर कंधे पर चढ़ाना पडेगा
और उसके बाद
जोर से धक्का देकर
अन्दर को पहुंचाना पडेगा"


"मैंने कहा चलो ठीक है
उसने बिलकुल वैसा ही किया
और मुझे सामान और सूटकेस की तरह
ट्रेन के अन्दर फेक दिया |"




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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

Feb 28, 2010

बजट से निराश देश के किसान |

बजट महापर्व संसद के पटल पर रखा गया |
हमेशा की तरह इस बार भी नए लुभावने लोक कल्याणकारी योजनाएं लोगों के लिए पेश किये गये |
पर आम आदमी अब बजट के सुनहरे सपनो पर भरोसा नहीं करते |

चुकी सरकार बजट के नाम पर बड़ी बड़ी घोषणाएं करती है |
लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी जनता यदि पानी ,बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुबिधाएं से बंचित रहे तो सरकारी बजट पर घोषणाएं बैमानी और उसपर सवाल उठना स्वाभाविक है |

देश की 65 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर आश्रित है |
हमारी कृषि की सबसे बड़ी समस्या है ,किसानो को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाना |
खाद्यान्न पदार्थ की मूल्यों में वृद्धि भी किसानो के बजाय ये सटोरियों या ब्यापारी उठाते है |
गरीब किसानो के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं किया है ?


जहां पर किसानो के कंधे पर हमारी देश की १२० करोड़ लोगों को आहार पूर्ति करने की जिम्मेद्दारी है |
उनकी हालात सुधारें बिना सम्पूर्ण विकाश का सपना पूरा नहीं हो सकता है |
हमारे यहाँ आनाज लगभग 22 करोड़ टन उत्पादन होता है जबकि पडोसी देश चाइना में 55 करोड़ टन है |
कृषि की पैदावार बढाए बगैर हम विकाश की गति को तेजी नहीं ला सकते |

आर्थिक सुधार के जिन योजना के तहत सरकार समाज के मानवीय चेहरा दिखाना चाहती है उसके लिए वर्तमान नीतिओं में भारी फेर-बदल की गुंजाइश है |

अपितु वास्तविकता यह है की योजना आयोग ने कभी भी राष्ट्रिय आर्थिक विकास और विभिन्न वर्गों के आर्थिक विकाश को ध्यान में रखकर निति बनाई ही नहीं है |
इसीलिए यहाँ करोडपति की संख्या 70 हजार से भी ज्यादा है और अरबपति 311 है , जिनके पास कुल 3 लाख 64 हजार करोड़ की सम्पति है |

राजस्व संग्रह में भ्रष्टाचार को समाप्त किये बिना राजस्व घाटा कम नहीं होगा |
जो बिक्री या आय कर सरकारी राजकोष में जाना चाहिए वह भरष्ट बाबु की जेब में चला जाता है |

आज केवल 10 प्रतिशत वर्ग को ध्यान में रखकर बजट का रूप रेखा तैयार की जाती है |
120 करोड़ के इस देश में 3 लाख सालाना वेतन पाने वाले कितने लोग होंगे ?
जिनको आयकर में छुट मिलेगी |

पर रातों रात डीजल और पेट्रोल में दाम बढ़ाकर इस से ज्याद आम आदमी से वसूलने की तयारी कर ली है |
मजदुर ,आम आदमी ,छोटे किसान जो कमरतोड़ महगाई का सामना कर रहे थे |
उसके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया, उलटा लगता है डीजल और पेट्रोल की रातों रात दाम बढ़ाकर,खाद्यान्न पदार्थ के दामों में और भी वृद्धि होगी |
मतलब महगाई पर नकेल कसने की उम्मीद लगाईं जनता का आक्रोस और भी बढ़ा दिया है |
महगाई सुरसा जैसी राक्षसी की तरह अपना मुह फाड़े खड़ी है |
नित्य प्रतिदिन देश के गरीब जनता उनके शिकार हो रहे है |
सरकार पंगु की तरह मूक दर्शक है |

बेहाल लोगों की हाल पर सिर्फ और सिर्फ अपनी मजबूरी का रोना रोने का अलावा कुछ नहीं करते दिखाई दे रही है |
वो कहाबत है न "सर मुड़ाते ओले पड़े" ,बजट ने चरितार्थ कर दिखाया है |

"एक दिन हमारे आसू हमसे पूछ बैठे,हमे रोज़ -रोज़ क्यों बुलाते हो,
हमने कहा ---- -याद तो हम कभी नहीं करते ,पर बेबक्त तुम क्यों चले आते हो |"


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