" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

May 8, 2011

नपुंसकता - ( समाधान एलोवेरा उत्पाद से )



नपुंसकता की समस्या आधुनिक युग में तेजी से वृद्धि हो रही है | इसका अर्थ है व्यक्ति सामान्य यौन सम्बन्ध नहीं बना पाना ,अगर बनाता भी है तो इतने अल्प समय के लिए की वह सम्भोग सम्पन्न नहीं कर सकता | समय से पहले स्खलन या स्खलन में असमर्थता भी इसके लक्ष्ण है | ऐसे पुरुष संतान उत्पति करने लायक नहीं होते है | यदि दम्पति संतान हीन हो तो, पति- पत्नी दोनों का ही जांच होना आवश्यक है | जिससे समस्या का पता लगने पर सही निदान किया जा सके | अक्सर संतान न होने का दोषारोपण ज्यादातर महिला पर ही लगाया जाता है, जबकि यह धारणा बिलकुल बेबुनियाद है इसके लिए पुरुष भी बराबर रूप से जिम्मेदार हो सकते है |

शोधों से पता चला है की लगभग 10 प्रतिशत दम्पति निःसंतान होते है | इनमे से तक़रीबन 50 प्रतिशत महिलाएं और 40 प्रतिशत पुरुष भी जिम्मेदार होते है | 10 प्रतिशत दोनों ही जिम्मेदार होते है | प्रत्येक दम्पति की चाहत देर सवेर संतान की होती है और इच्छा होती है उनके घर भी बच्चों की किलकारियों से गुंजायमान हो जाये | यदि संतान की चाहत रहने पर भी संतान नहीं हो तो वे दुखी व परेशान रहने लगते है | प्रन्तुं एक दुसरे पर दोषारोपण करने से कुछ समाधान नहीं निकलता है | उचित चिकित्सक से परामर्श लेकर जाँच परिक्षण के बाद इलाज करना चाहिए |

अक्सर लोग इस कारण ओझा, तांत्रिक व बाबाओं के चक्कर में पर जाते है जिससे निराशा के अलावा कुछ नहीं हाथ आता है | जबकि उचित इलाज से संतानहीन दम्पति के घर भी खुशियाँ आ सकती है | इसके समाधान से पहले आइये इसके कारण पर रौशनी डाल लेते है |

पिछले दशक में पुरुषों के प्रजनन क्षमता की प्रक्रिया के बारे में जानकारी में तेजी से विकाश हुआ है | आइये जानते है - पुरुषों में नपुंसकता के प्रमुख कारण :-
पुरुषों में नपुंसकता के कारण अनेक प्रकार के रोग भी हो सकते है | अन्तः-स्त्रावी ग्रन्थि से हार्मोन स्त्राव में बदलाव के कारण नपुंसकता हो सकती है | शरीर के स्वस्थ्य रखने, सामान्य प्रक्रियाओं और वीर्य एवं शुक्राणु की सामान्य संरचना और उनकी कार्यक्षमता के लिए अनेक प्रकार के हार्मोन का योगदान होता है |
पिट्यूटरी , थायराइड, एड्रिनल ग्रन्थि के हार्मोन स्त्राव में असंतुलन व मधुमेह रोगीओं, पुरुषत्व हार्मोन ( टेस्टस्टेरान ) के कम स्त्राव के कारण नापुन्क्सकता हो सकती है |

शुक्राशय पेट के अन्दर ही शुक्राणु का निर्माण ( टेस्टीज ) होता है और जन्म से कुछ समय पूर्व या एक वर्ष की आयु के लगभग यह पेट से निचे उतरता है | शुक्राणु के निर्मान के लिए कम तापमान की जरुरत होती है इसलिए यह अंडकोष में मौजूद होता है | वीर्य में शुक्राणु का का अंश लगभग 10 प्रतिशत होता है | शुक्राणु में फिर सहायक प्रजनन ग्रन्थि-प्रोस्टेट, सेमाइनल वेसिकल, कपूर ग्रन्थि के स्त्राव मिलकर वीर्य का निर्माण करते है | इन सहायक ग्रन्थि का स्वरूप और इसके स्त्राव का सामान्य होना भी जरुरी है, क्योंकि यह स्त्राव शुक्राणुओं को सक्रीय रखता है , पोषक तत्व प्रदान करता है , अन्डो के मिलन में सहायक सिद्ध होता है |

वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या तक़रीबन 10 से 20 करोड़ प्रति मिली. होती है | शुक्राणु की वीर्य में विशिष्ट चाल होती है | यदि वीर्य की संख्या सामान्य नहीं है तो भी नपुंसकता आ सकती है | वैसे तो वर्त्तमान में सेक्स के प्रति अरुचि और इसीसे बढ़ते नपुंसकता में जीवन शैली ही सबसे प्रमुख कारणों में से एक है | तनाव ग्रस्त जीवन- थकान, हताश, निराश , किसी अन्य कार्य में ध्यान , घबराहट या मनोवैज्ञानिक सदमा इत्यादि किसी न किसी रूप से व्यक्ति परेशान रहता है | सेक्स जीवन सबसे सुखद अनुभूति में से एक है | स्वस्थ्य जीवन के लिए सेक्स लाइफ स्वस्थ्य होना आवश्यक है | मानसिक परेशानी हो या शारीरिक परेशानी सेक्स जीवन अगर सुखी है तो बहुत कुछ अपने आप स्वस्थ्य हो जाता है |

आज के जीवन शैली का असर यह होता है की शरीर में फ्री रेडिकल का उत्पाद बहुत तेजी से होता है | यदि इनकी मात्रा शरीर में या शुक्राणुओं में बढ़ जाती है तो शुक्राणु क्षतिग्रस्त होने से नपुंसकता आ सकती है | फ्री रेडिकल की मात्रा को शरीर में नियंत्रित करने के लिए अनेक प्रक्रियाएं मौजूद होती है | इनको एंटी-ओक्सिडेंट कहा जाता है | इस प्रकार भोजन में अनेक एंटी-ओक्सिडेंट मौजूद होते है जैसे की विटामिन-'इ ',खनिज लावन इत्यादि | स्वस्थ्य जीवन के लिए फ्री रेडिकल और एंटी-ओक्सिडेंट में संतुलन होना चाहिए | एंटी-ओक्सिडेंट एंजायम की कमी के कारण शुक्राणु कमजोर हो जाते है |

आयुर्वेदिक उपचार व एंटी-ओक्सिडेंट औषधियों के द्वारा नपुंसक पुरुष को स्वस्थ्य किया जाता है |
जिस प्रकार मनुष्य में वीर्य होता है उसी प्रकार वृक्षों में भी उपस्थिति मिलती है | यह वीर्य 'गोंद' के रूप में होता है | जैसे- छुहारे का गोंद, कीकर का गोंद ,बरगद का गोंद इत्यादि | इनका प्रयोग कर शुक्राणु निर्माण एवं उनकी सक्रियता को बढाई जा सकती है | छुहारे का गोंद 10 ग्राम लेकर रात को पानी में भिंगोकर सुबह औटाये हुए गर्म मीठे दूध में मिलकर लगातार 40 दिनों तक सेवन से शुक्राणुओं का निर्माण, सबलता व सक्रियता बढ़ेगी |

कुछ उत्पाद निचे दिए जा रहे है जिसके मदद से शारीरिक शक्ति पुनः पा सकते है :-
1 Aoevera Gel
2Royal Jelly
3 Gin-Chia
4. Pomestin Power
5. Ginkgo Plus

For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " दिल को रखें दुरुस्त - एलोवेरा जेल से !
सर्दियों में भी रखें त्वचा जवाँ - एलोवेरा युक्त उत्पाद से ! !

May 1, 2011

शराब के आदि जीवन की बर्बादी !

नशा करने वाला अपनी आदत से मजबूर एक बीमार होता है , वह कोई अपराधी नहीं , एक मरीज है | शराब तो कोई विरले ही पीता है ज्यादातर लोगों को तो शराब ही पी जाती है | शराब पीना आदत नहीं, यह तो एक प्रकार की बीमारी है | शराब शरीर और आत्मा को अपने वश में करके इन्सान के दिलोदिमाग का संतुलन ख़राब कर देती है | उसमे पशुता की भावना आ जाती है इसके बाद कई बार तो ऐसा कदम उठा लेते है जो बाद में सिवाय पश्चाताप का कुछ भी नहीं मिलता |

शरीर में तरह-तरह की कमजोरियां एवं जानलेवा बीमारियाँ को घर कर सारी सेहत तंदुरुस्ती चौपट हो जाती है | उनके घर परिवार में रोजाना क्लेश , झगड़ा व लड़ाई
होता ही रहता है जिससे परिवार की सुख-शांति व समृद्धि दिनानुदिन खत्म होकर घर नर्क सामान बन जाता है | नशा करने वाले के शरीर में बिषैले कोशाणु तैयार हो जाते है जिनके ख़राब प्रभाव के कारण अनेकों बीमारियाँ हो जाती है |


"खूब जमेंगी रंग जब हम मिल बैठेंगे तिन यार मैं ,तुम और मेरा शराब " - ऐसा वो लोग प्रचार- प्रसार करते नजर आते है जो देश के चर्चित चेहरा है जिसे देखकर लोग अपने जीवन शैली बदलने का प्रयास करते है | चंद पैसों के लिए वो ईमान को बेच डाला है , अपनी जमीर बेच डाला है | उन्हें ऐसा कुछ खुलेआम लोगों को उकसाने के लिए जरा सी भी शर्म नहीं आती |

कुछ हद तक जिम्मेदार ऐसे सेलेब्रेटी तो है,जिन्हें नहीं मालूम की नशे के कारण कितने घरों की जेवर बिके, कितने घर एवं जमीन बिके,कितने घर उजड़े , कितने अपराध के दलदल में फंस गए और कितने ही असमय काल के ग्रास बन गए | इन सब का ठीक-ठीक से हिसाब लगाना लगभग कठिन है |

हमारे देश की कानून शराबी और नशाखोरों को कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती है | कोई ठोस कानून नहीं है ,कानून के रक्षक की बात करें तो वो खुद भी सूर्यास्त होते होते नशे में मस्त हो जाते है | इन कानून के रखवालों से किया उम्मीद की जा सकती है | जो खुद लड़खड़ा रही हो वो किसी और को क्या खाक संभालेगा | यहाँ बात की जाय शराब रोकने के लिए तो हमारे अपने प्रान्त बिहार में अब तो पंचायत स्तर पर शराब की दुकान की लाइसेंस खुद सरकार की ओर से दी जा रही है | हालात यह हो गया है की कम उम्र के ( नावालिक ) बच्चे भी अब सूरा पान करते चौक-चौराहे पर नजर आते है |

इसके पीछे सरकार की राजस्व के जरिये मोटी कमाई करने की मानसकिता है | परन्तु परिणाम से उन्हें कोई लेना देना नहीं है , क्या राजस्व के लिए सरकार गाँव गाँव में शराब के ठेके देकर गाँव वालों को भिखारी नहीं बना रही है | जिस उम्र में लोग अपने भविष्य के बारे में सोचते है , पढ़ाई-लिखाई के बारे में सोचते है आज वही नशे के हाल में सडक पर लुढके नजर आते है |


ऐसे में इस देश का भविष्य क्या होगा ? क्या इसी तरह से हम दुनिया के देशों में आर्थिक वर्चस्व कायम करेंगे ? भूख , गरीबी, लाचारी, बीमारी व अपराधी क्या घर बैठे रहेंगे | क्या वो हमारे देश की आने वाले सदी की शान होंगे ? जरा सोंचे !!!! नहीं तो बीमार लाचारी, और अपराधी किस्म के लोगों की तादाद इतनी हो जाएगी की देश को उन्हें फिर से सही रास्ते में लाने के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है |

अतः समय रहते सरकार को इसके लिए कोई ठोस कदम उठाने की जरुरत है | लेकिन इसके लिए हमें भी जागरूक होने की जरुरत है इसके बारे क्या गलत है , क्या सही इसकी जानकारी लोगों को देने की जरुरत है | अगर सार्थक प्रयास करते है तो निश्चित ही अपने मुल्क के सभी लोगों को नशा से मुक्ति दिलाकर उनको अच्छा स्वास्थ्य प्रदान किया जा सकता है |

हमारा सन्देश है नशे में डूबे हुए लोगों के लिए , समय रहते हुए सावधान हो जाये वर्ना गर्त में जाने से कोई नहीं बचा सकता है | मनुष्य जीवन एक अनमोल उपहार स्वरुप मिला है , उन्हें व्यर्थ में मत गंवाओ, जीवन के मूल्यों को समझों और तोबा करो नशे की कोई भी चीज से और अपने जीवन को खुशहाली के तरफ लाओ | इशवर की दी हुई तोहफा को बर्बाद मत करों उन्हें अच्छे कार्य में लगाओ और एक अच्छी सुखद जीवन जिओ |
यहीं मेरी शुभकामना होगी |


प्राकृतिक इलाज भी है अगर चाहे तो- इसके लिए इच्छा शक्ति की जरुरत है और साथ कुछ आयुर्वेदिक उत्पाद है जैसे एलो वेरा जेल, बी पोलेन , जिन चिया इत्यादि या संपर्क कर सकते है |

For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " दिल को रखें दुरुस्त - एलोवेरा जेल से !
सर्दियों में भी रखें त्वचा जवाँ - एलोवेरा युक्त उत्पाद से ! !

Apr 25, 2011

अनिद्रा- (Insomnia )कई रोगों को देता है निमंत्रण ! अवश्य पढ़ें !!!

वर्तमान के भौतिकवादी युग में लोग प्रतिस्पर्धा में तमाम तरह के सुख-सुविधाओं को घर में जुटाने के कारण दिन रात भागते रहते है | ऐसे में एक अच्छी सुख भरी गहरी नींद लोगों से दूर होती चली जा रही है | आज कल लगभग एक चौथाई व्यस्क लोग अनिद्रा रोग से पीड़ित है | भागमभाग वाली जीवन शैली के कारण उनके खान-पान को भी प्रभावित करती है | यहाँ तक की सही तरह से समयानुसार आहार उन्हें नहीं मिल पाता है ,और ज्यादातर लोग फास्ट फ़ूड पर निर्भर रहते है | शारीरिक व मानसिक परेशानियाँ , हाई-ब्लड प्रेशर इत्यादि रोग भी इन्ही की देन है |

अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति रात भर बिस्तर पर करबटें बदलता रहता है | प्रायः ऐसे लोग रात भर गिनती गिनता है, तारे गिनता है , उठकर रात को भी चहलकदमी करता रहता है फिर भी उसे नींद नहीं आ पाती है | इतना कुछ करने के पश्चात् थक हार कर नींद लाने के प्रयास में नींद की गोलियां , शराब व अन्य प्रकार के घातक नशीले पदार्थ का सेवन कर उनके आदी सा हो जाता है | इन सारी स्थितियों के चुंगल में फँसकर व्यक्ति अपने जीवन को दुःख व बीमारियों के भंवर में डुबो लेता है|


नींद नहीं आने के पीछे कई कारण हो सकते है जैसे मानसिक कारणों में ज्यादा थकान, मन में निराशा, असंतुलित आहार, आशंका, डर आदि प्रमुख भूमिका माना जा सकता है | व्यक्ति वर्तमान में मशीनी मानव बन कर रह गया है | काम, काम बस काम , वो इस कदर इस बोझ के तले दबे जा रहे है जैसे कोई जानवर के पीछे उनके मालिक चाबुक लिए खड़े हों और वो बस भगाए जा रहा है | दिशाहीन,विचारशून्य होकर जीवन को एक बोझ जैसे बनाकर बस ढो रहे है |

टेंसन नींद ना आने का सबसे प्रमुख कारण है | शोर-शराबे वाली जीवन शैली, सोने के समय जागना व जागने के समय सोना, शारीरिक व्यायाम व मेहनत से बचना, ज्यादा शराब पीना आदि से भी नींद नहीं आती है |

अगर इस रोग से ज्यादा समय तक पीड़ित रहें तो इसके साथ अनेक प्रकार की बीमारियों का समूह घेर लेती है | तनाव भरी जीवन से शारीरिक व मानसिक परेशानियां बढ़ जाती है | साथ ही घातक बीमारियाँ जिसकी शुरुआत होती है कब्ज़ से और आगे बढ़ते बढ़ते वो डायबिटीज, डिप्रेसन, ब्लड प्रेशर, मोटापा, ह्रदय रोग आदि के रूप धारण कर व्यक्ति के जीवन को मुशीबत में डाल देती है | ऐसे मरीजों में मिर्गी के दौरे भी पड़ने शुरू हो जाते है | और तो और उसके मन में नाकारात्म सोच इस कदर घर कर लेती है की उन्हें आत्म हत्या करने की विचार भी आने लगते है |

रोगी के लक्ष्ण :-
रोगी को हमेशा सिर भारीपन की शिकायत रहने लगती है | लम्बे समय तक नींद सहीं ढंग से न आने के कारण व्यक्ति मानसिक रोगी होकर विक्षिप्त और पागल तक हो सकता है | कब्ज़ के कारण भी नींद नहीं आ सकती है | ऐसे रोगी में एकाग्रता की कमी होती है , स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है | हमेशा शरीर थका-थका, आलस्य, किसी भी काम में मन नहीं लगना आदि भी इनके प्रमुख कारण होते है |

घरेलु उपचार :-
>अनिद्रा रोगी को रात में सोने से पहले बादाम तेल से सिर में मालिश करनी चाहिए , तथा पैरों के दोनों घुटनों तक सरसों के तेल की मालिश अच्छी तरह से करनी चाहिए |
> एक गिलाश दूध में एक चम्मच घी डालकर रात को सोने से पहले पीना चाहिए | घी में सफ़ेद प्याज को भुनकर खाने से भी नींद अच्छी आती है |
> भाँग की हरी पत्तियों को पिस ले तथा इनकी मालिश पैर के तलवों पर करनी चाहिए |
> शाम के वक्त दही में सौंफ चीनी और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी नींद अच्छी आती है |
>सोने से पूर्व दोनों आँखों पर पानी के छींटे मारने चाहिए |
> आजकल की गर्मी के मौसम में शाम को जरुर नहायें और रोयेंदार तौलिये से शरीर को रगड़-रगड़ कर साफ़ करें |
> उबली हुई सब्जियां और फलों के अलावा एक सप्ताह तक कुछ भी न खाएं |
> शहद के साथ बाजरे की रोटी खाने से अच्छी नींद आती है |

औषधीय उपचार :-
Aloe Vera Gel :- इससे शरीर के अन्दर जिसे चिकित्सकीय भाषा में टोक्सिन ( जहर ) कहते है जो आँत के साथ वर्षों से चिपका रहता है जिसके कारण अनेक प्रकार की सम्सयाएं पैदा हो जाती है, सबसे पहले टोक्सिन को शरीर से बहार करेगा | फिर जेल में समाहित पोषक पदार्थ शरीर में कमी होगी उसकी भरपाई करेगी और व्यक्ति करीब करीब पूरी तरह से चुस्त और दुरुस्त हो सकेंगे मात्र कुछ ही महीनो मे !

Fields of Green :- यह गोली के रूप में होता है जिसका सेवन से शारीरिक व मानसिक थकावट दूर होती है | खून की कमी को पूरा करती है और तक़रीबन कई प्रकार के शाक-सब्जियों से मिलने वाली विटामिन इसके मात्र एक गोली से पूरा हो सकता है |

Royal Jelly :- यह भी गोली की तरह ही है जिसे जीभ के निचे रखा जाता है और तुरंत व्यक्ति उर्जायमान महसूस करने लगते है | इसे 'Fountain of Youth' भी कहा जाता है मतलब "जबानी का फब्बाड़ा " यह एक शक्ति शाली टॉनिक के साथ साथ शरीरिक व मानसिक परेशानी में एक अचूक औषधि के तरह काम करती है |

Artic Sea - Omega-3 - ब्लड सम्बंधित समस्या जैसे नस में ब्लड के सुचारू रूप से काम करना, ब्लड के थक्का सम्बंधित, तथा ह्रदय रोगी के लिए यह तो सबसे शक्तिशाली उत्पाद में से एक है | जेली रूप में यह एक कैप्सूल की तरह है जिसका सेवन से ब्लड में उपस्थित कोलेस्ट्रोल को निकाल बहार करता है | ह्रदय रोगी के लिए एक रामवाण औषधि माना गया है |


For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " दिल को रखें दुरुस्त - एलोवेरा जेल से !
सर्दियों में भी रखें त्वचा जवाँ - एलोवेरा युक्त उत्पाद से ! !

Apr 18, 2011

स्वास्थ्यवर्धक फल, केला !!



केला एशिया का फल है और यह गर्म देशों में पैदा होता है | हमारे यहाँ तो पूजा अनुष्ठान में केला का फल रखा जाता है , इसीलिए उपयोगिता के अधर पर इसे देवफल भी कहा जाता है | केले के पते को बहुत ही पवित्र और लाभदायक माना जाता है | शायद यही कारण है जहाँ हमारे यह कई राज्यों में केले के पते पर रखकर भोजन खाने खिलने का प्रथा है | पकने पर इसमें मिठास आ जाती है परन्तु जल्दी से यह गल भी जाता है | पर इसकी विशेषता यह है की इसमें किसी भी प्रकार का कीड़ा नहीं लगता है | यह स्वयं में एक ऐसा फल है जो बंद और कीटाणु रहित होता है | पकने के बाद केले की उपरी मोटी छाल आसानी से उतर जाती है |

पौष्टिक पदार्थ :- केला वीर्यवर्धक, शुक्रवर्धक है ! नेत्र रोग में लाभदायक है , यह एक शक्तिदायक आहार है | इसे रोटी की जगह खाना चाहिए | केले में स्टार्च और शर्करा अधिक होती है | छोटे बच्चे को दूध में मिलकर दे सकते है | यह कफ व रक्त पित नाशक है |

केले में प्राकृतिक शर्करा, सुक्रोस, फ्रक्टोस, ग्लूकोस एवं रेशा होता है | इसके सेवन से तत्काल उर्जा प्रदान करता है | आधुनिक सहोद से सिद्ध हुआ है की कठोर व्यायाम से खर्च होने वाली उर्जा की पूर्ति दो केले खाकर कर सकते है | इसलिए धावकों की पहली पसंद के रूप में केला ही होती है | कई रोगों में तो इसे पथ्य के रूप में भी प्रयोग किया जाता है | एक केले में 27 ग्राम कार्बोहाईड्रेट मिलता है | एक अछे स्वस्थ्य के लिए नित्य 300 ग्राम कार्बोहाईड्रेट लेने चाहिए |


केले में मुख्यतः विटामिन-ए, विटामिन-सी,थायमिन, राइबो-फ्लेविन, नियासिन तथा अन्य खनिज तत्व होते है | इसमें जल का अंश 64.3 प्रतिशत ,प्रोटीन 1.3 प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट 24.7 प्रतिशत तथा चिकनाई 8.3 प्रतिशत है |

शक्तिवर्धक :- एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच घी, पिशी हुई इलाइची व शहद मिला कर केले खाने के साथ पीने से शरीर शुन्द्र और मोटा होगा | बल, वीर्य, शुक्राणु ,काम-शक्ति और मष्तिस्क शक्त बढ़ेगी | स्त्रियों का प्रदर रोग ठीक होगा | दही में केला और पीसी हुई मिश्री मिलकर खाने से भी मोटापा बढ़ता है |

बलवृद्धि के लिए व्यायाम तथा खेलकूद के बाद केले खाना चाहिए | केले में कार्बोहाईड्रेट प्रयाप्त मात्र में होता है जो सरलता से पाच जाता है , छोटे बच्चे को आसानी से दिया जा सकता है | यह बच्चों के लिए उतम आहार है | इसे मसलकर दूध में मिलकर खिलने से अधिक फायदा होता है | यह खून में वृद्धि करके शरीर की ताकत बढाता है | नित्य केला का सेवन अगर दूध के साथ किया जाय तो तो कुछ ही दिनों में स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है |

केले को पकाने के लिए इथियन एवं कैल्सियम कार्बाइड रसायन का पानी के घोल में डुबाया जाता है इससे केले पक जाते है | ये रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इनसे केले के पौष्टिक तत्व भी नष्ट हो जाते है इसलिए प्राकृतिक तरीके या वर्फ से पकाया ही खाना चाहिए | चितलीदार केला रसायनों से पकाया जाता है | अतः इसे नहीं खाना चाहिए | सदा धोकर ही फल खाना चाहिए, बिना धुले केला या अन्य कोई भी फल हानिकारक हो सकता है |


>पेट की सुजन में केला आसानी से पच जाता है जबकि दुसरे पदार्थ मुश्किल से पचते है |
> टायफाइड तथा अन्य ज्वरों में केले का पथ्य बहुत लाभ देता है |
> आँतों के अल्सर तथा दुसरे रोग हो जाने पर रोजाना 6 से 9 केले खिलाने से लाभ होता है |
> खून की कमी को दूर करता है तथा गले की सुजन में लाभकारी है |
> गाउट रोग में यह मूत्र की यूरिक अम्ल घुलाने की शक्ति बढ़ा देता है |
> केले के पेंड में एक सफ़ेद डंडा होता है | इस डंडे के रस गर्मी के रोग तथा मष्तिष्क - सम्बंधित रोग शांत होते है | कैंसर रोगी के लिए यह औषधि का कार्य करता है |

For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " दिल को रखें दुरुस्त - एलोवेरा जेल से !
सर्दियों में भी रखें त्वचा जवाँ - एलोवेरा युक्त उत्पाद से ! !

Mar 19, 2011

एलोवेरा जूस क्यों जरुरी है ?

एलो मात्र एक पौधा नहीं है, मानो कुदरत ने मानव शरीर के कल्याण के लिए विशेष तौर पर इसे धरती पर लाया हो | जितने गुण एलो वेरा में है ,शायद ही किसी और जड़ी-बूटी में एक साथ पाए जाते है | इसलिए इसे औषधियों का महाराजा माना गया है | कई नाम से इसे लोग पुकारते है , कुछ लोग इसे संजीवनी बूटी तो कुछ लोग इसे साइलेंट हीलर, चमत्कारी औषधि आदि भी कहते है |

एलोवेरा का 5000 साल पुराना इतिहास है | पुराने समय में लोग इससे औषधि के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे है | पवित्र ग्रन्थ रामायण, बाइबल और वेदों में भी इस पौधे की उपयोगिता के बारे में चर्चा की गई है | मिस्त्र की महारानी क्लीवपेट्रा से लेकर महात्मा गाँधी तक इसका इस्तेमाल करके फायदा उठा चुके है | वर्तमान में एलो वेरा का उपयोग अनेक प्रकार के आयुर्वेदिक औषधीय में बहुतायत से हो रहा है | कोई भी वैद्य,चिकित्सक, व हाकिम इनके गुणों को नकार नहीं सकता | इसे कई नाम से जाना जाता है , जैसे हिंदी में ग्वारपाठा, क्वारगंदल,घृतकुमारी, कुमारी या फिर घी-ग्वार भी कहते है |



वर्षों के शोध के बाद पता चला की एलोवेरा के 300 प्रकार के होते है | इसमें 284 किस्म के एलो वेरा में 0 से 15 प्रतिशत औषधि गुण होते है |11 प्रकार के पौधे जहरीले होते है बाकि बचे 5 विशेष प्रकार में से एक पौधा है जिसका नाम एलो बारबाडेन्सिस मिलर है जिसमे 100 प्रतिशत औषधि व दवाई दोनों के गुण पाए गए है |

जिस तरह हमारे यहाँ (AIIMS DELHI ) एम्स दिल्ली को सब जानते है ठीक वैसे ही अमेरिका में लाइंस पौलिंग इंस्टीच्युट ऑफ़ साइंस एंड मेडिसिन न केवल अमेरिका में बल्कि सारे संसार में परिचित है | डॉ. लाइंस पौलिंग जिन्हें दो बार नोबिल पुरुस्कार से से नाबजा गया था |



कई वर्षों के शोध के बाद पता लगाया इस विशेष प्रकार के एलो बारबाडेन्सिस में समाहित गुणों के बारे में | फिर फॉर एवर लीविंग प्रोडक्ट्स इंटरनेशनल के चेयरमान रेक्स मॉन जो की अमेरिकन है उनके सहयोग से एलो वेरा जेल और साथ में कुछ उत्पाद को बाजार में उतारे जो को मानव जाती के लिए चमत्कारी सिद्ध हुए |

एलोवेरा की खास बात यह है की यह अपना आहार वातावरण से लेता है | आज के वातावरण में प्रदुषण ज्यादा है, और एलोवेरा के पत्ते उसे अपने अन्दर सोंख लेता है | पहले के एलो वेरा कुछ हद तक ठीक था क्योंकि पहले हमारे आसपास इतना प्रदुषण नहीं होता था | आसपास इतना प्रदुषण है की हमारे यहाँ के एलोवेरा जेल को पीना स्वस्थ्य के दृष्टीकोण से ठीक नहीं हो सकता है |


ऍफ़.एल.पी 7500 एकड़ जमीन में बिलकुल प्रदूषित रहित तरीके से खेती करके एलो पौधों की फसल तैयार करती है | यहाँ प्रदुषण का इतना ख्याल रखा जाता है की 200 किलोमीटर तक के आसपास के क्षेत्र में कोई पेट्रौल, डीजल वाली गाडी मोटर नहीं चलती और यहाँ तक वहां अन्दर भी जो गाडी वगैरह चलती है, वो बैटरी से चलती है | इस तरह प्रदुषण का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं होता है |

ऍफ़.एल.पी एलोवेरा को ( IASC ) इंटरनेसनल एलो साइंस काउन्सिल से मान्यता प्राप्त सील उत्पाद की शुद्धता और गुणवता को दर्शाती है | 25 -09 -2005 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक आलेख भी छपा था जिसमे एलोवेरा के शुद्धता के लिए सील को अवश्य देख ले | ऐसा एलोवेरा के सम्बन्ध लिखा लेख में लिखा गया था |

इस पौधे की विशेषता यह है की पत्ते को तोड़ने के ठीक तीन घंटे के अन्दर उपयोग कर लेना चाहिए नहीं तो उनमे विद्यमान औषधि + पौष्टिकता के गुण धीरे-धीरे नष्ट हो जाते है | ऍफ़.एल.पी में वैज्ञानिकों की शोध करके इस पौधे के जूस को कुछ जड़ी-बूटी की मदद से इसके जीवन को दो- तिन घंटे से बढाकर चार साल के लिए सुरक्षित कर दिया है |

एलोवेरा जूस कैसे काम करता है ?
एलोवेरा जेल कम से कम 90 -से 120 दिनों के नियमित सेवन से असाध्य कहे जाने वाली बीमारियाँ में लाभ पा सकते है - जैसे Arthritis, Asthma, Diabeties,Heart Problem, High/Low Blood Pressure,Gastric Problem, Constipation, Obesity, Ulcer, Lack of Energy, Thyroid, Kidney Problem, Back Pains, Survical Problem, Parkinson, Colitis, Amoebas, Stress, Tension, Depression, Cholestrol, Pimples, Ladies Problem during pregnancy, Plus all A to Z Problems और तो और Cancer जैसी खतरनाक बीमारी में भी एलो जेल राहत देती है यानि इसके नियमित सेवन से आप हमेशा के लिए तंदुरुस्त रख सकते है |

आप हैरान होंगे की एक एलोवेरा से करीब 220 प्रकार के बीमारियाँ कैसे ठीक हो जाती है ? इससे पहले हम यह जान ले की हमें बीमारियाँ होती क्यों है ? दरअसल हमें जीवित रहने के लिए हवा, पानी और भोजन की आवश्यकत होती है, पहले के समय इसी के सहारे लोग सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहता था क्योंकि पहले वातावरण स्वच्छ था लेकिन आज के वातावरण को देखे तो यह तीनो ही चीजें हमें अशुद्ध मिल रही है |

दूसरा आज का खान-पान,हमारी जीवन शैली ,आधुनिकता की दौड़ में इतनी बदल चुकी है की हमें अपने लिए ही वक्त नहीं होता |आज समोसा, पिज्जा ,बर्गर,पेप्सी,चाउमीन मतलब फास्ट फ़ूड हमारे आहार में शामिल हो चूका है तथा नियमित व्यायाम करने का समय भी नहीं बचा है तो यही सब कारण मिलकर मनुष्य को अस्वस्थता की ओर ले जाते है |

चुकी हमारी 90 प्रतिशत बीमारियाँ पेट से उत्पन्न होती है और इन सब बिमारियों का कारण है - हमारी आंते साफ़ ना होना और एलोवेरा में मौजूद सापोनिन और लिग्निन आँतों में जमे मैल को साफ़ करके इनको पौष्टिकता प्रदान करता है | शरीर में किसी भी प्रकार के रोग का होना अन्दुरुनी सिस्टम में गरबरियाँ को दर्शाती है |


एलो मानव शरीर में डोमेक्स का काम करता है , जैसे किचन की नाली जब जाम हो जाती है तो हम नाली में डोमेक्स डालते है और नाली साफ़ हो जाती है और उसी तरह एलो मानव शरीर के अन्दर जाते है आंतो को साफ़ करने का काम शुरू कर देता है | और जैसे जैसे हमारी आंते साफ़ होती है वैसे -वैसे हमें आराम मिलना शुरू हो जाता है | जैसे सूर्य के तेज को हम नाकर नहीं सकते उसी तरह एलो जूस मानव शरीर के अन्दर जाते ही उसे आराम मिले बिना नहीं रह सकता |

इसके नियमित सेवन से आँखों की रौशनी बढती है घुटनों के दर्द , खून साफ़ करने में हकलाने में , दांतों की बिमारियों में पेट की सभी बिमारियों में बालों के झरने में , यादास्त बढ़ाने में वजन कम करने में या बढ़ाने में बहुत फायदा देता है | इसे किसी भी दावा के साथ लिया जा सकता है | इसका किसी भी प्रकार कोई दुष्प्रभाव नहीं है | बच्चे, जवान, बुजुर्ग ( स्त्री-पुरुष) सभी ले सकते है |

अतः एलोवेरा हमें नियमित लेना चाहिए | यह हमारे घर के वैद्य है | अगर कोई बीमार पिएगा तो उसे स्वस्थ्य होने में मदद मिलेगा और कोई स्वस्थ्य व्यक्ति पिएगा तो बीमार ही नहीं होगा |

हजारों लाखों रुपये बीमारी के इलाज में खर्च करने से कई गुना बेहतर है की बीमारी होने के कारण को ही शरीर से बहार निकालने का प्रयास किया जाये | घर बैठे , खाते-पिटे, हँसते-खेलते, बिना कोई ओपरेसन के अपनी व अपने परिजन की समस्त बीमारी के कारणों को आप स्वयं ही समूल नष्ट कर सकते है |

For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

आओ मिलकर होली खेलें- जीवन को खुशियों से भर लें !!

होली महोत्ष्व से पहले यानि की आज होलिका दहन होता होता है | प्रत्येक नगर-गाँव के प्रमुख चौराहों और अतिविशिष्ट स्थानों पर होलिका दहन हर्षो उल्लास से किया जाता है |लोग इसके लिए जलावन का सामग्री इकट्ठा कर शाम के समय उसमे आग लगा देते है और फिर वहां उपस्थिति लोग नाचते गाते हुए उसका परिक्रमा करते है |
होलिका दहन क्यों ?
एक पौराणिक कथा के अनुसार, हिरन्यकश्यप नामक एक राक्षस था | उसे सर्वत्र हिरन्य (कनक) यानि सुवर्ण ही दिखाई देता था | भोग विलास ही उसके जीवन का प्रमुख उद्देश्य था | राक्षस का अर्थ " खाओ, पीओ और मौज करो" वाली मानसिकता का मानव | भोग और स्वार्थ के सिवा उन्हें कुछ भी नहीं दिखाई देता है | स्वयं को भगवन समझने वाला दुसरे भगवन को कैसे स्वीकार करता ?

लेकिन वो कहावत है न - कीचड़ में ही कमल खिलता है और कमल की तरह उसके यहाँ प्रहलाद जैसे भक्त पुत्र का जन्म हुआ | प्रहलाद गर्भ में था तब उसकी माता नारद के आश्रम में रही थी , वहां के संस्कार का असर प्रहलाद पर पड़ा था | परन्तु राक्षसी प्रवृति का पिता यह बात सहन कैसे कर सकता ?

प्रहलाद को मार डालने के लिए अनेक प्रकार के प्रयास किये उनमे से एक प्रयास यह था की उसे जिन्दा जला दिया जाए | प्रहलाद अग्नि में उठकर भागे न इसके लिए उन्होंने बुआ जी के गोद में उसे बिठाया | हिरन्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान मिला था की अग्नि उसे जला नहीं सकेगी ? अपने भाई के आग्रह से होलिका ने प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का निश्चय किया, परिणाम हुआ की होलिका जलकर भष्म हो गई भक्त प्रहलाद हँसता खेलता बाहर आया | अतः यह हमारे लिए होली का एक अनोखा सन्देश देता है |

अगले दिन यानि की कल होली का त्यौहार जो की रंगों का त्यौहार होता है | रंगोत्सव ( धुलैंडी ) जिसमे लोग एक दुसरे के साथ रंग व अबीर लगाकर खुशियाँ मानते है | वैसे तो फाल्गुन का आना स्वतः मालूम हो जाता है जब प्रकृति में बदलाव होने लगते है | ठंढ कम हो जाता है | पेड़ों पर नए पत्ते आने लगते है | आम के वृक्ष मंजरने लगते है | भंवरों का मडराने जैसे प्रकृति में चारो और मादकता की अनुभूति होने लगता है | मनो जहाँ सारा वातावरण सुगन्धित हो गया हो |


कुल मिलकर कुदरत में भी रौनकता दिखाई देने लगती है , जिससे प्राणियों में भी एक अदृश्य शक्ति का संचार होने लगता है | नए जोश, उमंग के साथ प्राणी होली के महा उत्सव के लिए बिन पिए ही मदमस्त दिखाई देते है |अतः होली के रंग को लेकर कर आने वाला फाल्गुन हमें नवजीवन का सन्देश देता है !एक ओर जहाँ होली सद्विचार,सदमिलन,मित्रता, एकता,भाईचारा का पर्व है , दूसरी ओर इस दिन द्वेष -भाव त्याग कर सबसे सप्रेम मिलने का पर्व के रूप में मनाया जाता है |

आप सबको होली की अनंत शुभकामनाएं !!
For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

Mar 11, 2011

जापान में जलजला - ब्लैक फ्राइडे - सुनामी का तांडव


जापान में आये महाप्रलय में वहां के फ़्लाइओभर,बड़े बड़े जहाज , गारियाँ सबकुछ तेज लह्डों में तिनको की तरह बहते देखे जा रहे है | महाविनाश की यह लीला देखकर दिल दहल जाता है | सुनामी से उठी समंदर की ऊँची ऊँची लह्डों में वहां के बड़ी बड़ी बिल्डिंग भी बेबस नजर आ रही है | करीब 20-30 फिट ऊँची ऊँची लह्ड़े कई द्वीप का नामोनिशान मिटा सकती है |

इससे पहले जापान में अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किया गया परमाणु बम वाकई इंसानी रूप में सबसे बड़ी त्रासदी थी परन्तु कुदरत का यह महाविनाश उससे भी कई गुना ज्यादा विनाश लेकर आई है |जहाँ सबकुछ तबाह कर दिया है | सूत्रों के मुताबिक तबाही में नुकसान का अंदाजा लगाना अभी मुश्किल काम है |

अमरीकी भौगोलिक सर्वे के मुताबिक़ भूकंप की तीव्रता 8.9 थी और इसका केंद्र टोक्यो से 400 किलोमीटर दूर था | वैज्ञानिकों का कहना है की यह जापान के इतिहास में सबसे बड़ा भूकम्प में से एक है | उसके बाद ही समंदर में भी हलचल शुरू हुई और देखते ही देखते उत्तर पूर्वी जापान के दो शहरों को पूरी तरह से नस्त नाबुत कर दी है |


इस तबाही में मरने वालों की संख्या 1000 लोगों से भी ज्यादा होने की आशंका की जा रही है | टीवी फुटेज देखने के बाद कलेजा कांपने लगा है ! अगर ऐसा कुछ हमारे दिल्ली में आ जाय तो क्या यहाँ कुछ भी बच पायेगा |

सरकार को इस तरह की आपदा के लिए तैयार रहना चाहिए | मंजर इतना भयावह लगता है जिसे देखकर मतलब सोचकर ही कलेजा कांपने लगा है |

जापान जिसे उगते हुए सूरज का देश कहा जाता है , सुनामी का तबाही ने उसे अँधेरे में धकेल दिया है | जापान के कई शहर सुनामी का जलजला में समाते जा रहे थे | सुनामी के ऊँची ऊँची लहड़ के सामने वहां के बिल्डिंग बौने देखे जा रहे थे | सुनामी का सितम जापानी लोगों के लिए अब तक का सबसे बड़ी तबाही में से एक है |



For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

अपेंडिक्स है - एलोवेरा जेल लें ओपरेशन से बचें !


अपेंडिक्स क्या है ? यह छोटी आँतों और बड़ी आँतों के बिच की कड़ी है | इसमें एक छोटी से थैलिनुमा जो शेह्तुत के आकर की होती है जो आँतों से बाहर की ओर निकली रहती है | इसी को अपेंडिक्स कहते है | दरअसल पहले इसके कार्य प्रणाली के बारे में नहीं मालुम था की क्या मनुष्य के लिए अपेंडिक्स जुरुरी है या नहीं | अक्सर चिकित्सक अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे , इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है, मतलब यह एक आँतों के बिच में गैरजरूरी चीज समझा जाता था |

परन्तु चिकित्सक ने अपेंडिक्स पर शोध के बाद पाया की यह स्वस्थ्य शरीर के लिए जरुरी भी है | इससे मनुष्य के पाचन प्रणाली के लिए अच्छे वाले बैक्टेरिया को जमा करके रखने वाली थैली है जिससे कारण जब लम्बे समय से रोगों के वजह से जब शरीर के बैक्टेरिया में कमी हो जाती है तो अपेंडिक्स का काम पाचन प्रणाली को सुदृढ़ रखना होता है |


दरअसल अपेंडिक्स की थैली एक ओर से खुली और दुसरे ओर से बंद होती है | छोटी आँतों से बचा हुआ कण अगर उसमे जाकर फंस जाता है और ज्यादा दिनों तक एकत्रित होकर सड़ने-गलने लगते है फिर सुजन हो जाता है जिसके कारण जबरदस्त दर्द मध्य रात्रि के आसपास शुरू होता है जो की कभी तेज कभी धीमा परन्तु लगातार करीब चार घंटे तक होता रहता है |

इसके मुख्य कारण होता है लम्बे समय तक कब्ज़ का रहना , पेट में पलने वाला परजीवी व आँतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाता है |

भोजन में रेशे का न होना या कमी भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार होता है | जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सुजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है |


इसके लक्षण पेट के दाहिने भाग के निचे अचानक तेज दर्द का होना , उलटी आना, जी मचलाना , जीभ के ऊपर सफ़ेद आवरण का होना , हलकी बुखार का होना | शुरू में अपेंडिक्स का दर्द नाभि के निचे से उठता है और बाद में दाहिने टांग के ऊपर पेट में होता है |

दर्द बहुत बढ़ जाने पर ओपरेशन आवश्यक हो जाता है | यदि यह शुरूआती अवस्था में हो या ऐसे लम्बे अरसे है जिसके दौरान दर्द उठता है फिर चला जाता है, तो पोषक तत्वों व जड़ी बूटी से रोगी को काफी मदद मिल सकती है |

एलो वेरा आधारित जड़ी बूटी के माध्यम से रोगी का इलाज संभव है जो की निचे दी जा रही है :-
1 Aloevera Gel - भोजन के कणों को हटता है और निर्वाशिकरण करके शरीर के पाचन प्रणाली व पौष्टिकता प्रदान करता है !
2 Pomesteen Power - सुजन विरोधी, पीड़ा निवारक है !
3 Bee Propolis - प्राकृतिक एंटी बायोटिक ,
4 Garlic Thyme - एंटी-बायोटिक, मांसपेशी को रहत पहुंचाती है |

For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

Mar 10, 2011

एलोवेरा जूस शरीर के लिए अमृत तुल्य - आइये जानते है क्यों ?



आज आपके साथ चर्चा करते है एलो वेरा जूस में समाहित विशिष्ट तत्व जिसके सेवन से मनुष्य के शरीर निरोग रहता है | सुन्दर,चुस्त व दुरुस्त सेहत के लिए मनुष्य अपने दैनिक आहार में इस जूस को शामिल करें | आखिर क्या गुण है एलो वेरा जूस में जो मानव जाती के लिए आज के युग का अमृत तुल्य माना गया है ?

लिग्निन :- एक गुदे जैसा पदार्थ जो एलो वेरा की पत्तियों की जेली में शामिल सेलुलोज के साथ पाया जाता है | इसकी उपस्थिति इस बात का सूचक है की यह मनुष्य की त्वचा में गहराई तक जाने की अत्यधिक क्षमता रखता है |

सैपोनिंस :- इसकी खोज 1951 में एक घटक के रूप में की गई जिसमे एलोवेरा लीफ जूस की मात्रा 2 .91 प्रतिशत शामिल थी | सैपोनिंस ग्लाइकोसाइड्स है जिनमे न केवल आँतों की सफाई करने की क्षमता है बल्कि शैम्पू जैसे कास्मेटिक्स में प्राकृतिक झाग पैदा करने वाले उच्चकोटि के प्राकृतिक साबुन एजेंट भी है |

एन्थ्राक्विनोंस :- अलोइन-कैथोटिक और एमिटिक , बारबैलोइन -एंटीबायोटिक और कैथोरटिक , आइसोबारबैलोइन-एनालजेसीक और एंटीबायोटिक , अन्थ्रानाल , अन्थ्रासिं, अलोईटिक एसिड - एंटीबायोटिक, अलो अमोडीन-बैकटीरिसाइड और लक्झेटिव, सिनैमिक एसिड- जर्मीसाइड और फंगीसाइड, इस्टर ऑफ़ सिनैमिक एसिड- एनालजेसीक और अन अस्थेटिक, इस्टीरियोल आयल - ट्रेकुलाईजिंग , क्रिसोफेनिक एसिड - स्किन फंगस , अलो अल्सिन-गैस्ट्रिक सीक्रेशन रोकता है , रेजिस्टनाल |

मोनो और पॉली सैकेराईड्स :- एल्ड़ोनेन्टोज, सेलुलोज, ग्लूकोज, एल रैमनोज, मैनोज !

अमीनो एसिड :-
आवश्यक अमीनो एसिड - आइसोल्युसिन, ल्युसिन, लाइसिन, मैथीओनिन, फेनिल लोनीन,थियोंइम, वैलिन

सेकेंडरी :- एलोनिं, आज़िरनीन,एस्पार्टिक एसिड, ग्लुटामिक एसिड , ग्लिसरीन, हिस्टीडाइन, हाइड्रोक्सीप्रोलाइन्स, प्रोलाइन , प्रोलाइन, सेरिन, टाइरोसीन !
इनआर्गनिक / इन्ग्रेडिएन्ट्स/मिनरल्स :- कैल्सियम, फास्फोरस,पोटैशियम,आयरन,सोडियम,क्लोरिन,मैंगनीज, मैंग्नेशियम,कापर, क्रोमियम, जिंक !

विटामिन्स :- विटा ए-कैरोटिन , विटा बी-उत्तकों में वृद्धि, रक्त और उर्जा उत्पन्न करता है ! विटा सी- कीटाणुओं को रोकने, घाव भरने और स्वस्थ्य त्वचा के निर्माण में सहायक होता है ! विटा एम्- रक्त निर्माण में सहायक , नियान्सिमेंनाइड- मेटाबोलिज्म का नियंत्रक ! कोलाइन - मेटाबोलिज्म में सहायक !

एन्जाइम :- फास्फेट - एमाइलेज, ब्रैडीकाइनेज- इम्यून बिल्डिंग , कैटालेज - तंत्र में पानी संग्रह की सुरक्षा , सेलुलोज - सेलुलोज डाइजेशन, क्रिएटिव फास्फो काइनेज - मस्कुलर एन्जाइम , लाइपेज- पाचन, न्युक्लियोटाईडेज, अल्केलाइन फोस्फेट, प्रोटिएज- प्रोटीन को उनके संघटक तत्वों में हाइड्रोलाइज करता है !

अतः इन्हीं सब उपरोक्त विशिस्ट गुणों के कारण एलो वेरा जूस वर्तमान में तहलका मचा दिया है | वह चाहे किसी भी प्रकार के रोग हो उसमे अचूक साबित हो रही है | यहाँ तक की प्राकृतिक चिकित्सा में एलो वेरा जूस कब्ज़ से लेकर कैंसर तक के मरीजों के लिए एक अत्यंत लाभकारी औषधि है | नित्य नियमित एलो वेरा जूस का सेवन मनुष्य जीवन के लिए काया कल्प कर देती है |

For Aloe Vera products Join Forever Living Products for free as a Independent Distributor and get Aloe Vera products at wholesale rates! (BUY DIRECT AND SAVE UP TO 30%)To join FLP team you will need my Distributor ID (Sponsor ID) 910-001-720841.or contact us- admin@aloe-veragel.com
एलोवेरा के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप यहाँ यहाँ क्लिक करें

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !