" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Mar 25, 2010

फोरेवर के एलो जेल सेहत के लिए एंटी बायरस |

हर्षी दयानानद जी ने सत्य कहा है " शारीरिक और मानसिक विकास ,बिना ब्रह्मचर्य और ब्यायाम के असम्भव है |     किसी कवि ने भी इसका समर्थन इस रूप में किया है " A Sound Mind in a Sound Body अर्थात स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मस्तिस्क रहता है

शरीर का स्वस्थ्य रहना तीन बातों पर निर्भर करता है ------- आहार ,निद्रा और ब्रह्मचर्य | सूक्ष्म दृष्टि से देखा जाये तो इन तीनो में भी आहार की उपयोगिता सर्वोपरि है |             आहार शुद्ध होने पर मन की शुद्धि होती है और बुद्धि  के शुद्ध होने पर स्मृति बढती है | आहार के शुद्धि से तात्पर्य है की हम जो भी जीविका कर रहे है जो भी धनोपार्जन कर रहे है उससे किसी भी जिव के आयु और भोग में बिघ्न पैदा नहीं होना चाहिए | ब्रह्मचर्य और निद्रा का सम्बन्ध भोजन से ही है | इसलिए उत्तम स्वस्थ्य हेतु आहार का शुद्ध होना आवश्यक है |

                                          "प्रभु ने तुमको कर दान किए ,
                                              मन वांछित वस्तु विधान किए ,
                                               समझो न अलभ्य किसी धन को,
                                                    नर हो न निराश करों मन को" |  
                                                           (  राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त    ) 

              युवा वर्ग के लिए आज की प्रवृतियों में ज्यादा जरुरी हो गया है की उन्हें अपने शारीरिक,मानसिक व आत्मिक बल को बढ़ाना होगा | जहाँ तक मानव विकास की बात है तो     यह क्रमबद्ध रूप से होता हुआ आज समुन्नत अवस्था में पहुँच चूका है |

कुछ लोग कहते है की लाखों साल से चल  रहा मानव विकास का क्रम लगभग पूरा हो चूका है जबकि अनेक विद्वानों का मत इसके विपरीत है,इनके अनुसार विकास की यह प्रक्रिया अभी आगे भी जारी रहेगी और मानव,महामानव बनने के रास्ते पर चलता चला जाएगा | यह  अच्छा  ही होगा की आगामी पीढियां महामानव के रूप में अपनी पहचान बनाएं |

लेकिन यह तभी संभव होगा जब ब्यक्ति रोगों से पुर्णतः मुक्त होगा, रोग ,ब्याधि का भय मनुष्य को न  रहने पर आजीवन उत्साहपूर्वक कार्य करने के अवसर मिलते रहेंगे | इसीलिए आज के इतनी ब्यास्त्तापूर्ण जीवनशैली में आत्मिक,मानसिक बलवर्धन करना बेहद ही जरुरी है | हम अपना आत्मिक बल किस प्रकार बढाए इसके लिए हमें अपने विचारों,अपने संस्कारों,आचरण पर खास ध्यान देना होगा और साथ ही बेहद जरुरी है अपने खान-पान पर भी ध्यान देना | एक कहाबत है " जैसा खाए अन्न वैसा होय मन"

युवा वर्ग आज फास्टफूड ,नानवेज की  तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहा है ,जिससे हमारा शारीरिक स्तर तो निचे गिरता  ही है
हमारा आत्मिक बल ,हमारे आचरण व बिचारों में भी नास्तिकता आ रही है |
अतः हमें अपनी जीवन शैली को सात्विकता प्रदान करने के लिए सात्विक ,सुपाच्य आहार ही सेवन करने चाहिए
हमें समय पर दिनचर्या भी शुद्ध  होनी  चाहिए , हमें समय  पर जल्दी सोना व  जल्दी जागना और योग को जीवन में धारण करना चाहिए |
यदि दिनचर्या हमने अपना ली तो हमारा शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य सही रहेगा और आत्मिक बल भी बढेगा |

यदि वर्तमान पर नजर डालते है तो स्थिति उलटी ही दिखाई देती है | आज भले ही हम अपने को आधुनिक युग में जीवन ब्यतीत करने की बात करें लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती | कब्ज़ से लेकर कैंसर तक अनगिनत रोग ब्यक्ति से ऐसे लिपटे-छिपते है की उसे चैन से नहीं रहने दे रहे है | कई रोग तो ऐसे हठीले है कि आने के बाद जाने के सोचते ही नहीं |
शरीर में लग गए तो बस अगला सारा जीवन इन्ही के साथ गुजारने कि बाध्यता  बन जाती है | ऐसा ही एक रोग है ,मधुमेह  | यह उस बदमिजाज बिन बुलाए मेहमान की तरह है जो मेजबान से अपनी पूरी सेवा करवाना चाहता है और जरा सी लापरवाही पर अपने तेवर दिखाने लगता है,यदि उसके तेवरों पर ध्यान नहीं दिया जाए तो बाहर से बदमाशों को बुलाकर परेशान करने लगता है |
यही स्थिति मधुमेह  की है ,पथ्यपाथ्य ,आहार-विहार में थोड़ी सी लापरवाही होते ही शुगर स्तर बढ जाता है | यदि अनियंत्रित और बढ़ रही शुगर का ध्यान नहीं दिया जाए तो सिर से लेकर पाँव तक अनेकानेक रोग,(जिनमे हाइपर टेंसन,हार्ट डिजीज ,किडनी इन्फेक्सन,लीवर डिजीज शामिल है ) भी पनपने लगता है और रोगी का आगे का जीवन बेहद मुश्किलों से भर जाता है |

इस रोग से रोगियों के बढती संख्या तथा इस रोग की घातकता को ध्यान  में रखकर न सिर्फ मधुमेह रोगियों के लिए बल्कि जो मधुमेही नहीं है उनके लिए भी और साथ में चिकित्सको के लिए भी बेहद जरुरी है | मधुमेह एक ऐसा रोग है जो अपने साथ रोगों का गिरोह लेकर चलता है |
यदि आपने सम्यक औषधोपचार तथा खान-पान,जीवनचर्या का ध्यान रखा तब तो आप उस रोगों के गिरोह को रोक कर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते है |
लेकिन किसी भी प्रकार की लापरवाही आपके शेष जीवन को खासा दर्दीला बना सकने की ताकत रखते है और सेहत पर डाका डालते रहते है |

हमारे फोरेवेलिविंग प्रोडक्ट के साथ आप अपना इलाज करा सकते है | आज तक न जाने कितने लोग इसका फायदा उठा चुके है  और आगे का जीवन बिलकूल सामान्य रूप से जी रहे है | फोरेवर के उत्पाद को अपने जीवन में जरुर अपनाएँ वो आपके लिए एंटी  बायरस  की  तरह से आपके शरीर का रक्षा करेगा जैसे की हमलोग कंप्यूटर को बायरस से बचाने के लिए रखते है |

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Mar 24, 2010

स्वस्थ्य रखे तन और मन योग /ब्यायाम के संग

स्वस्थ्य exciseतन और yogप्र सन्न मन सौन्दर्य के लिए सोने पे सुहागा को प्रतीत करता है | टेलीविजन आज के युग का ऐसा सशक्त माध्यम बन चुका है ,जिससे हर परिवार कमोवेश प्रभावित होता  है

सही मायने में इसने हमारे शोचने ,समझने का नजरिया ही बदल दिया है | कई बुरी बातों का समाज में इससे प्रसार हुआ तो कई अच्छी -अच्छी जानकारियों भी इसने हम तक पहुचाई | कई लोग जिन्हें कसबे के लोग भी विशेष जानते नहीं थे ,इसके माध्यम से विख्यात हो गये | इसके माध्यम से भारत के संस्कृति पर भी चोट पहुंची और कई मायनों में प्रसार भी हुआ  | आज के टेलीविजन युग में अगर हम बात करें योग की तो देश में योग के प्रति जो आकर्षण दिखाई देता है ,उसके पीछे  इसी बुध्धू  बॉक्स यानि टेलीविजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही |

शारीरिक और मानसिक संतापों से त्रस्त मनुष्य अब योग को समझना और अपनाना चाहते है | लेकिन देखने में आता है कि सही तरह से योग सिखाने ,समझाने वाले हर जगह उपलब्ध नहीं है | टेलीविजन से योग सीखना उचित माध्यम नहीं कहा जा सकता है |

शारीरिक और मानसीक स्वास्थ्य का एक सर्वोत्तम साधन होने के बावजूद योग की अपनी कुछ सीमाएं भी है | अतः यदि कोई इसे हर रोग का इलाज मानकर इसके पीछे दौड़ेगा तो उसे अपनी गलती सुधर लेनी चाहिए | दरअसल योग से स्वस्थ्य को बनाये रखना तो आसान है लेकिन बिगड़े स्वास्थ्य को ठीक करना अपेक्षाकृत कठिन | इसलिए बहुत से  लोग आजकल रोग होने पर और दवाइयों से ठीक न होने पर ही योग सिखने का रास्ता चुनते है | ऐसे लोगों को योग - ब्यायाम सिखने में और उनके अभ्यास में अधिक सावधानी और सतर्कता रखनी चाहिए | कमजोर और लम्बी बिमारी से  अभी-अभी ठीक हुए लोगों को और अधिक सावधानी बरतनी होगी |

अमेरिका में डा . केनेथ कपूर  की पुस्तक 'द एंटी ओक्सिडेंट रिवोल्यूशन ' ने  खासी  लोकप्रियता हासिल  की | चुकी  डा. केनेथ एक एरोविक एक्सरसाइज़  के विशेषग्य थे, अतः पुस्तक में ब्यायाम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है | उन्होंने लिखा है ब्यायाम हर ब्यक्ति को karna चाहिए लेकिन ब्यायाम साधारण और नियमित ही हो, तभी फायदा होता है | जोश-जोश में अधिक ब्यायाम तो अंततः नुकसान ही पहुंचता है | वे लिखते है जब हम सामान्य से अधिक हम ब्यायाम करते है तो शरीर में रोग के कारक 'स्वतंत्र तत्त्व '(Free Redical)' की संख्या कुछ कम संख्या में बढती है  लेकिन अत्यधिक ब्यायाम से इसके उत्पादन का ग्राफ घत्कीय रूप से बढ़ने लगता है | और जब अत्यधिक ब्यायाम लम्बे समय तक चलता रहता है तब ब्यक्ति कई गंभीर रोगों से घिर सकता है |  

उनके शोधों से यह भी मालूम हुआ की ब्यायाम हमेशा लाभकारी नहीं होते ,विशेषकर तब जब उन्हें सामर्थ्य और शक्ति से ज्यादा किया जाये | यह जानकार आश्चर्य लगा की क्या ब्यायाम भी नुकशान पहुंचा  सकता है | डा. कपूर स्वयं इस तथ्य को सामने आने पर ताज्जुब करने लगे थे

भले ही आधुनिक काल में केनेथ कपूर के इस रहस्योद्घाटन को आश्चर्य के साथ समजा जाये लकिन इस तथ्य को हमारे ऋषि मुनि हजारों साल पहले ही स्पष्ट कर चुके है | चरक संहिता में वर्णित इन श्लोकों से याह बात बड़ी आसानी से समझी जा सकती है कि आयुर्वेद कितना विज्ञानं सम्मत  और गहराई तक कि खोजों से ओतप्रोत ज्ञान है |
बहरहाल यह एक ऐसा तथ्य था जिसे पाठको 'द एंटी ओक्सिडेंट रिवोल्यूशन' के पाठकों  को चौंका दिया , पर आयुर्वेद में रूचि रखने वालों के लिए यह कोई नै बात नहीं थी,वे इस बात को बखूबी समझते है कि अति किसी भी चीज कि ठीक नहीं होती है | इसिलए आप किसी भी प्रकार के ब्यायाम अनुभवी देख-रेख में ही करें |

                                सुख देने वाली चीजें पहले भी थीं और अब भी है |
                            फर्क यह है कि जो ब्यक्ति सुखों का मूल्य पहले चुकाते है
                     और उनके मजे बाद में लेते है ,उन्हें स्वाद अधिक मिलता है | 
             जिन्हें आराम आसानी से मिल जाता  है, उनके लिए आराम ही मौत है | 
                                                                                           रामधारी सिंह 'दिनकर '           

Mar 22, 2010

उच्च क्वालिटी का एलो वेरा जेल ही ख़रीदे |

आज बाजार में एलोवेरा उत्पाद  की भरमार है | समाचार पत्र ,दूरदर्शन पर इस उत्पाद के बारे में तरह तरह के कंपनी पूरी दम-ख़म   से प्रचार प्रसार करते नजर आती है | जिसके फलस्वरूप लोग इस उत्पाद को बड़े ही भरोसे से खरीद रहे है |

 

लेकिन क्या आप जानते है जो आप एलोवेरा वाले उत्पाद खरीद रहे है उनमे से कुछ उत्पाद में एलोवेरा की गलत मात्रा बता रहे हो सकते है ?आपको शायद यह जानकार हैरानी होगी की फ डी ए (यूनाइटेड स्टेट्स फ़ूड एंड ड्रग एड्मिनीस्ट्रेसन) के अनुसार ,कानूनी तौर पर निर्माता एक लीटर पानी में सिर्फ दो बड़े चम्मच एलो वेरा उपयोग कर सकता है और  फिर भी वे उसे 100% एलो वेरा जूस कहते है |

 

अगली बार जब भी "100%" एलो वेरा का दावा करने वाला जूस देखे, तो उसके लेबल को सावधानीपूर्वक जांच करें |

इसी वजह से ,एलो वेरा उत्पाद को  प्रमाणित करने के लिए एक संगठन बनाया गया, जो एलो  वेरा के असली मात्रा और सामग्री प्राकशित करते है | इस संगठन को द इंटरनेसनल एलो साइंस काउन्सिल या आई ए एस सी कहा जाता है |

 

आई ए एस सी की स्थापना 1980 की शुरुआत में हुई,उन्होंने उच्च मानकों को पूरा करने वाले सभी एलो वेरा उत्पादों को प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया विकसित की | सबसे पहले एलो वेरा उत्पाद बनाने वाली कंपनियों या एलो वेरा उगाने वाले किसानो को आई ए एस सी से प्रमाणित होने के लिए आवेदन देना पड़ता है | उसके बाद संगठन परीशां करता है | एलो वेरा उत्पादों,एलो वेरा फोर्मुलों ,और उपयोग किए गए असली एलो वेरा पौधे को औडिट करता है | अगर सब कुछ सही और अचूक है तो उन्हें प्रमाणीकरण की आई ए एस सी सील मिल जाती है |

 

आई ए एस सी का  प्रमाणीकरण पाने वाले हर उत्पाद यह पुष्टि और वादा करता है की एलो वेरा उत्पाद के लेबल पर अंकित तथ्य सही है और एलो वेरा की बताई गई मात्रा सही है | इसका यह भी मतलब है की एलो वेरा उत्पाद में आई ए एस सी के मानकों पर खरी उतरने वाली गुण का एलो है |

 

आप आई ए एस सी के वेबसाईट :- www.iasc.org पर प्रमाणीकरण प्राप्त एलो वेरा की सूचि देख सकते है | इस वेबसाईट में उन एलो वेरा उत्पादों की सूचि भी दी गई है जिनके पास अब  आई ए एस सी का प्रमाणीकरण नहीं है |

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हमारा सुझाव है की  उपरोक्त सील को जरुर देखें जब भी आप एलो वेरा उत्पाद खरीदें ,यह दर्शाती है की यह बिलकुल शुध्ध और बेहतरीन गुणवता वाला उत्पाद है |
जो  आपके स्वास्थ्य और संतुष्टि दोनों के लिए जरुरी है

 

वैसे फोरेवर लिविंग प्रोडक्ट के पास और भी कई प्रमाणीकरण है जो सिद्ध करता है की वो बास्तव में दुनिया का बेहतरीन एलो वेरा उत्पादक कंपनी है |


जैसे की:- इस्लामिक सोसाइटी ऑफ़ कैलिफोर्निया --------------इस्लाम में अल्कोहल और चर्बी प्रतिबंधित है  |
              उत्पादों का परीक्षण जानवरों पर नहीं किया जाता है -------- यह जानवर को भी दिया जा सकता है | और उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा |
              कोशेर रेटिंग ----------  इसका मतलब यह होता है की यह बिलकुल खाने योग्य और  स्वास्थ्य प्रद है |
              एफ एल पी इंडिया आइ डी एस ए ( इडियन डाइरेक्ट सेलिंग एसोसिएसन ) का गौरवशाली सदस्य है | आज के समय में इंडिया में करीब १७००० कंपनी               इस  तरह से काम करती है पर इनमे से सिर्फ १७ कंपनी ही है जिनके पास ये प्रमाणीकरण मिला हुआ है |

आप अपने बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर परिणाम  के लिए एलो जेल उच्च क्वालिटी का ही खरीदें |

Mar 20, 2010

साकारत्मक सोच जीवन के लिए शक्ति-वर्धक औषधि |



हमारी सोच का सीधा असर हमारे भौतिक शरीर पर पड़ता है | अपनी सोच को बदल डालिए आपका भाग्य ही बदल जाएगा | आरोग्य के साथ -साथ समृधि भी आपके द्वार पर दस्तक देगी | मन के माध्यम से आप अपने दृष्टिकोण को बदल सकते है तथा दृष्टिकोण के द्वारा जीवन की परिस्थितियों में परिवर्तन किया जा सकता है | इस प्रकार मन की शक्ति का उपयोग कर जीवन में अपेक्षित परिवर्तन संभव है | मन द्वारा हम सभी प्रकार के ब्याधियों का उपचार कर सकते है |



टी.बी. के रोगाणु तो हर जगह मौजूद है लेकिन सभी उनसे प्रभावित क्यूँ नहीं होते ? मतलब साफ़ है की हमारा मन ही है जो इन रोगाणुओं को आमंत्रित करता है | मन ही शारीर की रोगों से रक्षा करने वाली प्रणाली को सुदृढ़ करता है तथा मन ही इस प्रणाली को कमजोर बनाता है | क्यूंकि बीमारियों का उदगम मन है इसलिए यदि मन मान ले कि हम स्वस्थ्य है ,अमुक बिमारी से पिडित्त नहीं है तो बिमारी स्वतः ठीक हो जाएगी | लेकिन ये मन है कि मानता नहीं |इसीलिए आप अपने मन को मनाइए और रोग को दूर भगाइए |


जो ब्यक्ति हमेशा मन से परेशान रहता है अथवा जिसमे आत्मविश्वास की कमी होती है या जो सदैव राग-द्वेशादी नकारात्मक मनोभावों से ग्रस्त रहता है उसको विभिन्न प्रकार के रोग जकड लेते है | नकारात्मक सोच अथवा मनोदशा की अवस्था में हमारे शरीर की अंतःस्त्रावी ग्रंथियों से जिन हारमोंस का उत्सर्जन होता है उनका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है | यही अनुपयोगी हार्मोंस या घातक रासायन ही हमारे जोड़ों में जमा होकर शरीर के विभिन्न अंगों की गति को प्रभावित करते है |


मन के द्वारा हम सभी प्रकार के शारीरिक ब्याधियों का उपचार कर सकते है चाहे वे नयी हों अथवा पुरानी | सिरदर्द,पेट दर्द ,बदन दर्द,थकान सुस्ती, चोट जैसे सामान्य बीमारियों से लेकर मधुमेह, उच्च तथा निम्न रक्तचाप, ट्यूमर व कैंसर जैसी खतरनाक कहे जाने वाली बीमारियों का नियंत्रण अथवा इलाज भी मन के द्वारा ही संभव है | एलर्जी तथा त्वचा संबंधी कई रोगों का स्थायी उपचार यदि संभव है तो वह केवल मन के द्वारा ही हो सकता है|


---------------------- एक मित्र के यहाँ गया तो देखा कि उनके घर में तोड़-फोड़ चल रही थी | पूछने पर पता चला कि उनकी पत्नी के घुटने में दर्द रहता है अतः पुराने शौचालय को तोड़कर उसके स्थान पर पाश्चात्य शैली का शौचालय बनबाया जा रहा है ताकि शौच जाने में असुविधा या कष्ट ना हो |


" पर क्या शौचालय बदलवाने की जगह घुटनों को नहीं बदलवाया जा सकता ?" मैंने मित्र से मजाक किया | मित्र संजीदा होकर बोले--- " तुम्हे तो हमेशा मजाक ही सूझता है | क्या घुटने बदलवाना इतना आसान है ?"घुटने बदलवाना अत्यंत मुश्किल और कष्टप्रद है लेकिन क्या मात्र शौचालय बदलवाना ही एक मात्र उपचार है ? क्या इस ब्याधि का अन्य कोई कष्टरहित व सरल उपचार नहीं ?


वास्तव में घुटने बदलवाना या शौचालय बदलवाना घुटनों के दर्द का सम्पूर्ण उपचार नहीं | यह मात्र बाह्य परिवर्तन या उपचार है स्थायी उपचार नहीं | किसी भी ब्याधि अथवा समस्या का सम्पूर्ण उपचार है आतंरिक परिवर्तन और वो संभव है मनोभावों में परिवर्तन द्वारा | जहां तक घुटनों अथवा जोड़ों में दर्द का संबंध है इसके कई कारण हो सकते है | लेकिन इसका प्रमुख कारण ब्यक्ति की नकारात्मक सोच अथवा मनोदशा या भावधारा भी है |


जोड़ों के दर्द के लिए घुटने बदलवाने की अब कोई जरुरत नहीं होगी | मैंने एक बार पहले भी जोड़ों के दर्द से आजादी कैसे पाए ,वो लिख चूका हूँ |
उस लेख में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है कृपया उस लेख को एक बार अवस्य अवलोकन करें | ताकि आप आस-पास में ऐसे ब्यक्ति जो इस कष्टदायक रोग से पीड़ित हों तो उसका वो लाभ उठा सके |
जोड़ों के दर्द ( Arthritis )से पायें सदा के लिए आजादी |

Mar 18, 2010

बच्चे है अनमोल रतन ,इनके लिए हम करें प्रयत्न |

ज्यादातर माता-पिता आजकल अपने बच्चों के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकाश को लेकर चिंतित रहते है | कुछ तो डॉक्टर तक शिकायत लेकर पहुँच जाते की उनके बच्चे कुछ खाते ही नहीं | बढ़ते बच्चो के बारे में उनकी ये शिकायत तर्क संगत भी है | पर अपनी पसंद की खान- पान थोपने से बेहतर होगा, वो अपने बच्चों में देखें की किस तरह के खान-पान में रुची रखता है |  जिद और स्वास्थ्य सम्बंधित गलत धारणाओं के कारण बच्चों को ऐसे खाना खिलाना चाहते है , जिन्हें वो खाना नहीं पसंद करते है |

दरअसल बढ़ते बच्चों को ऐसी खुराक दी जानी चाहिए , जिससे उनके शरीर का सही विकाश हो सके | वयस्कों एवं बच्चों के भोजन में बहूत ज्यादा अंतर है |वयस्क जो भोजन करते है उससे उसका शारीरिक विकाश नहीं होता है,बल्कि उन्हें उनसे एनर्जी मिलती है तथा उनकी शारीरिक क्रियाएं सुचारू रूप से चलने में सहायता मिलती है | जबकि बच्चों का मामला ठीक बिपरीत उन्हें तो शारीरिक विकाश के लिए जरूरी है | बच्चों के खाद्य पदार्थ में एनर्जी तथा शरीर के प्रत्येक टिश्यु को बढाने के लिए आवश्यक एनर्जी प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए

बढ़ते बच्चों के आहार में प्रोटीन ,वसा व कार्बोहैड्रेटस युक्त खाद्य पदार्थ से कैलोरीज  मिलती है | यदि साथ में विटामिन व खनिज पदार्थ युक्त खाद्य पदार्थों को मिला दिया जाए तो बच्चों के लिए सम्पूर्ण आहार बन जाता है |जरूरी बात ध्यान रखने योग्य यह है की बच्चे ने क्या खाया ना की कितना खाया |

बच्चे की प्रथम और सर्वश्रेष्ठ खुराक है प्यार | बच्चे प्रेम और ममता के लिए लालायित होती है | वो चाहे माता से चिपककर दूध पिने वाले बच्चे हो या स्कूल से लौटकर माँ से मनपसंद भोजन की मांग करने वाला बच्चा,खाना से ज्यादा प्यार की  अपेक्षा  रखता  है |

इम्यून सिस्टम ,शारीरिक विकाश तथा शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत के लिए प्रोटीन्स महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है , जो अमीनो असिड के द्वारा निर्मित होता है |शरीर में मौजूद  कोशिकाओं के विकाश और उनकी मरम्मत  के लिए 24 प्रकार  के एमिनो  एसिड  की जरूरत  होती है | जो की 9 में  से  8 बच्चों में मौजूद नहीं होते है |जो की अपने आप  में बहूत बड़ी कमी है | ऐसे में बच्चों में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दिया जाए ,  जैसे की अंडा,दूध,दूध से तैयार सामान ,ताजे फलों, सब्जियों और सर्वश्रेष्ट पोष्टिक पूरक जिसका नाम है Forever Aloe Bits N Piches( बढ़ते बच्चों के लिए वरदान  है )

 

बढ़ते शरीर के लिए एसेंसियल फैटी एसिड की जरूरत होती है , जो वसा   से प्राप्त होता   है | विटामीन 'ए' 'डी 'इ' तथा क वसा में घुलकर ही शरीर में एनर्जी  उत्पन्न करते है |वसा कई प्रकार के खाद्य पदार्थ में पाया जाता है जैसे मांस , दूध,दही,अंडे,सब्जियां,गिरीदार फल,नारियल ,और वनस्पति तेल तथा ( Forever Bits N Piches )

 

शरीर  के  कुल  एनर्जी  का 50% की आपूर्ति कार्बोहाइड्रेट द्वारा की जाती है | कार्बोहाइड्रेट आनाज,फल,सब्जियां ,फलियों में अधिक मात्र में पाया जाता है |

 

बच्चों के मानसिक विकाश के लिए कैल्सियम,आयरन,जिंक,आयोडीन,पोटाशियम जैसे खनिज के साथ कई तरह के विटामिन का समावेश बेहद जरूरी होता  है |

 

आयरन शरीर व दिमाग में ओक्सिजन की आपूर्ति करता   है | मांस ,मछली  ,अंडा  दाल

गहरे हल्का रंग की पत्तियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है |

हमारे देश में अधिकांस बच्चों के शरीर  में इसी के कमी के वजह से खून की कमी हो जाती है

 

The National Referral Centre for Lead Poisoning in India के मुताविक यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है की देश के मैट्रो शहर में रहने वाले 12 साल के आधे से ज्यादा बच्चों  के शरीर  में लेड की मात्रा  हानिकारक  स्तर  पर  पहुँच  चुकी  है |( NRCLPI ) की शोध के बाद रिपोर्ट में बताया गया है की देश के  50% बच्चों के खून में लेड या सीसे का लेवल 10ug/dl यानि की 10 माइक्रोग्राम पर डेसीलीटर के आम लेवल से ज्यादा है | 14% बच्चों के खून में लेड या सीसे का लेवल 20ug/dl यानि की २० माइक्रोग्राम पर डेसीलीटर के आम लेवल से ज्यादा है | गौरतलब है की खून में लेड की ज्यादा मौजूदगी से बच्चों का प्रतिभा को प्रभावित करेगा , मतलब आईक्यू  कम हो जाता है | जो की हमारे देश के भविष्य के लिए बिलकुल ठीक नहीं है | पता चला है की स्कुल में पीले रंग का पैन्ट में मौजूद लेड के संपर्क में आने के बाद इससे ज्यादा प्रभावित होते है |  इस तरह से हमें हमारे समाज और देश के प्रति दायित्व बनता है की इसके  बारे  में लोगों  को जागरूक  बनाए  और शरीर में लेड से होने   वाले दुष्प्रभाव  के बारे  में जानकारी  दे .|

Mar 16, 2010

Aloe Vera Gel is the King of Herbs .


Today , we all know about Aloe Vera Gel specially in wellness industries . The amazing power of Aloe Gel ,in fact is nothing available in the market , which can within miles of our much talked about and generously well-consumed. Aloe Gel is often called the "miracle plant" natural healer, in India over the century it has gained popularity and is known by many names like Korphad, Kumari ,Ghee kunwar, Gwar Patha , Ghrit Kumari etc .


Aloe Vera is a plant of many surprises. in modern times, it is being rediscovered. Now , however, it has undergone more serious and in depth investigations , including laboratory analysis and controlled clinical tests that assure the effectiveness of its curative properties.


There are over 300 types of Aloe plant , but it is the Aloe Barbadensis Miller plant which has been of most use to mankind because of the nutritional and medicinal properties .


Aloe leaf contains over 75 nutritional components and 200 other compounds , including 20 minerals , 18 amino acids and 12 vitamins.
Aloe Vera Gel contains the 8 essential Amino Acids that the human body need but cannot manufacture .


Even Alexander - the great conquered the island of Socotra ( in Yemen ) in order to have the Aloe for his "fighting" army .From the times of Cleopatra to the more recent Mahatma Gandhi , have all sampled the godness of this Aloe Vera , also known as " Nature silent healer"


This marvelous gel cannot be exposed to the element for more than 3to4 hours since it tends to oxidize easily , thus losing some of its nutritional and medicinal properties. This makes it necessary to subject it to a stabilization process , or refrigeration to neutralize the undesirable effects of oxygenation .

Our Aloe Gel is not boiled. Boiling is very cheaper and faster . Excessive heat destroys the active ingredients. We use only sub pasteurization temperature ( known as cool processing ) to ensure enzyme activity is preserved. Cool processing locks in the nutrients immediately after great time.

A product of our patented aloe stabilization process,our gel works to maintain a healthy digestive system and a naturally high energy level .

This is the first product to receive certification by the International Aloe Science Council .

Taken daily,either alone or mixed with any other fruit juice , it is one of the best nutritional supplement .



एलोवेरा के कोई भी स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद के लिए admin@aloe-veragel.com पर संपर्क करें और ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

Mar 12, 2010

रोजाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ?

रोजाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ?
............ ... ........... .....थोड़ा पिज्जा कैसा रहेगा ?


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नहीं ??? ओके ......... पास्ता ?
नहीं ?? .. इसके बारे में क्या सोचते हैं ?



आज ये खाने का भी मन नहीं ? ... ओके .. क्या इस मेक्सिकन खाने को आजमायें ?

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बर्गर्सस्स्स्सस्स्स्स ? ???????
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दुबारा नहीं ? कोई समस्या नहीं .... हमारे पास कुछ और भी विकल्प हैं........
ह्म्म्मम्म्म्म ... चाइनीज ????? ??




ओके .. हमें भारतीय खाना देखना चाहिए ....... J ? दक्षिण भारतीय व्यंजन ना ??? उत्तर भारतीय ?

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जंक फ़ूड का मन है ?

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हमारे पास अनगिनत विकल्प हैं ..... .. टिफिन ?

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मांसाहार ?
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ज्यादा मात्रा ?

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या केवल पके हुए मुर्गे के कुछ टुकड़े ?
आप इनमें से कुछ भी ले सकते हैं ... या इन सब में से थोड़ा- थोड़ा ले सकते हैं ...
अब शेष बची मेल के लिए परेशान मत होओ....
मगर ॥ इन लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है ...

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इन्हें तो बस थोड़ा सा खाना चाहिए ताकि ये जिन्दा रह सकें ..........

इनके बारे में अगली बार तब सोचना जब आप किसीकेफेटेरिया या होटल में यह कह करखाना फैंक रहे होंगेकि यह स्वाद नहीं है !!

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इनके बारे में अगली बार सोचना जब आप यह कह रहेहों ... यहाँ की रोटी इतनी सख्त है कि खायी ही नहींजाती......


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कृपया खाने के अपव्यय को रोकिये
अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी / समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप
1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे
कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससेउन बच्चों का पेट भर सकता है


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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

Mar 11, 2010

Parkinson ( कम्पवात ) में अचूक है घृत कुमारी ( Aloe vera gel )


कार्यालय के काम में ब्यस्त चल रहा था | थोडा बक्त मिला तो सोचा क्यूँ नहीं कुछ लिखा जाए |
अब सोचने लगा की आखिर कहाँ से शुरू किया जाए ? कई बाते एक साथ मस्तिष्क पटल पर उभर कर आया |
फिर सोचा चलो आज मस्तिष्क के सम्बंधित कार्य क्षेत्र पर ही कुछ लिखा जाए |

क्या आपने कभी सोचा है ,अपने सोचने की क्षमता के बारे में |
बचपन की कोई मजेदार या पीड़ादायी घटना ,कई वर्षों बाद भी आपको एक एक करके याद होना |
आखिर कैसे ? कुछ देर के लिए सोचें , कुछ देर के लिए पढ़ना बंद करें और अपने घर की खिड़की के पास जाकर बाहर का नज़ारा देखें |
कितनी अद्भुत और खुबसूरत ,रंगीन है यह दुनिया |
यह सब आप कैसे देख पाते है ? तो यह समझ ले की यह इश्वर की अनुपम और सर्वश्रेष्ठ रचना है जिसका नाम है " मस्तिष्क " |


दिमाग हमारा सबसे मूल्यवान अंग है ,क्योंकि अगर यह अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य न करें तो आप सिर्फ एक जीती जागती हुई लाश बनाकर रह जाएंगे |
हमारी भावनाएं ,विचार,सोचने ,याद करने,देखने,सुनने समझने और बाहरी दुनिया से संपर्क स्थापित करने की सारी क्षमता इसी पर निर्भर करती है |
सोचने का तरिका विकृत हो जाने पर सामान्य परिस्थितियाँ भी प्रतिकूल दिखायी देती है और उनसे डरा , घबराया हुआ ब्यक्ति अपना संतुलन खो बैठता है |
झाडी का भुत बन जाना ,रस्सी का साँप दिखाई पढ़ना ,भ्रम की प्रतिक्रया को प्रत्यक्ष कर देता है | मनुष्य हर परिस्थिति में गुजारा कर सकने योग्य मन लेकर जन्मा है |


शारीर की तुलना में मस्तिष्क का मूल्य हजारों गुना अधिक है |
इसी तरह से शारीरिक रोगों की तुलना में मानसिक रोगों द्वारा अधिक क्षति होती है |
मस्तिष्क स्वास्थ्य हो तो मनुष्य अनेक मानसिक पुरुषार्थ कर सकता है ,किन्तु मस्तिष्क विकृत हो जाए तो शारीर के पूर्ण स्वस्थ होने पर भी सब कुछ निरर्थक बन जाएगा |


कुछ दशक पूर्व हमारे देश में लोग 40-45 के बाद ही अपने आप को बुढ़ा मान बैठते थे |
पर 55 के बाद तो लोगों के जुवान पर एक ही बात होती थी अब बुढ़ापे का शरीर है |
समय से पूर्व बुढ़ाने की प्रबृति रहन-सहन का स्तर स्वास्थ्यप्रद न होना तथा चिकित्सा सुबिधाओं के आभाव की वजह से पनपी |


लेकिन वर्तमान में रहन-सहन के स्तर में कुछ सुधार हुआ |
लेकिन इन सबके बाबजूद लोगों के जिदगी अभी भी सुखी नहीं कहा जा सकता है भले ही जीवन स्तर सुधर गया हो पर नकली मिलावटी तथा प्रक्रिया वाले बंद डिब्बा का खाना, दोषपूर्ण दिनचर्या से जीवन तो सुधरी है पर स्वास्थ्य रह पाना बहूत ही कठिन हो गया है |


आज युवा वर्ग भी रोगों के घेरे में फंसे हुए है |
प्रौढ़ा अवस्था और वृद्धा अवस्था में तो शरीर मानो " रोगों का घर " ही बन जाता |
वृद्धा अवस्था में वैसे तो कई रोग पीड़ा दायक बनाने को तैयार रहते है जिसमे से एक रोग है जिसका नाम है " पार्किन्सन" यानि की " कम्पवात "|


"oxidative stress" के कारण स्नायु तंत्र ,और मस्तिष्क दोनों को होने वाली क्षति के कारण ही अल्जाइमर डिमैन्टिया ,पार्किन्सन,इत्यादि जैसी दिमागी बीमारियाँ होती है |

बिशेष कारणों के वजह से मस्तिष्क और स्नायु तंत्र को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी ज्यादा होता है :--
1. मस्तिष्क आकार की तुलना में ,अन्य अंगों से छोटा होने के बाबजूद इसमें ऑक्सीजन का संचार ज्यादा होता है | फलस्वरूप, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी ज्यादा होता है |
2. स्नायु ( Nurves ) में सन्देश को आगे बढाने के लिए बहूत ही तीब्र रासायनिक प्रक्रिया होती है ,इससे बहूत ज्यादा फ्री रेडिकल पैदा होता है |
3. हमारा केन्द्रीय नर्वस सिस्टम ( स्नायु तंत्र ) ,करोड़ों, ऐसी कोशिकाओं से बना है जिन्हें बदला नहीं जा सकता है | अर्थात मरने के बाद उन कोशिकाओं का स्थान कोई और नहीं ले सकता |
4. मस्तिष्क और स्नायुतंत्र में तुलनात्मक रूप से कम एंटी ओक्सिडेंट की मात्रा होती है |
5. हमारा मस्तिष्क और स्नायु तंत्र बहूत कुछ,आधुनिक विद्युत् तंत्र की तरह कार्य करती है | पूरी तंत्र में कहीं भी छोटी सी समस्या किसी अंग विशेष को एकदम ध्वस्त कर सकती है |

इसके लक्षण है ------- झुका हुआ शरीर,बदन में एईठन ,धीरे धीरे कदम संभाल के रखना,बुरी तरह से कांपते हाथ,लाचार बेजान देखकर पार्किन्सन बिमारी की भयावता का एहसास होता है |
बैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि पार्किन्सन का मूल कारण भी फ्री रेदिकाल्स से होने वाला oxidetive स्ट्रेस ही है | दिमाग के एक विशेष भाग के 80 प्रतिशत cell को बेकार कर देते है | जिससे दिमाग अपनी पूरी क्षमता से कार्य नहीं कर पाता है |


प्रारंभिक अवस्था में पता चलने से बहूत से रोगी प्राकृतिक पूरक को अपनाकर इस बिमारी को बढ़ने से रोका |
इसमें विटामिन इ और विटामिन सी की भारी मात्रा में देने से मरीजों को बहूत फायदा हुआ |
इस तरह से आप आज एलो वेरा जेल और साथ में पूरक पोषक लेकर इस बिमारी को अपने शारीर में आने से रोक सकते है |

जैसे 1 . Aloe vera gel 2. Royal Gelly 3. Absorbent C 4. Ginchia 5. Garlic Thyme etc.

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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

Mar 7, 2010

ग्वार पाठा /घृत कुमारी (Aloe Vera Gel ) से करें जीवन का कायाकल्प |



चाहे आप एक ब्यस्त माँ-बाप हो या होनहार-परिश्रमी विद्यार्थी या हो ऊँचे स्तर के पदाधिकारी
आपको अपनी शरीर की ऊर्जा का स्तर आदर्श रखना होता है
ताकि ऐसा न हो जब आप को ऊर्जा की अत्यधिक जरूरत हो तभी आप उसे खो बैठे |
मानव शरीर के अन्दर ही ऊर्जा बनाने और बचाने की प्रणाली मौजूद होती है |
मसलन हम सोते है,खाते है,ब्यायाम करते है ,पीते है ,ये सब ऊर्जा पाने के लिए |


पर जल्दी जल्दी थकान का अनुभव करने का मतलब है की शरीर के अन्दर कुछ भयंकर कमी है जिसका पता लगाना बहूत ही महत्वपूर्ण है | अधिकांश लोगों द्वारा अपने आहार में सेहत की जगह स्वाद को ज्यादा महत्व देना युवावस्था के तुरंत बाद ही उनके शरीर पर भारी पड़ने लगता है |
40 साल के बाद ही विभिन्न प्रकार के बीमारियों का उभरना इस तथ्य की ओर ध्यान खिचता है की ब्यक्ति विशेष ने स्वास्थ्य रहने के नियमों का समय के साथ इमानदारी से पालन नहीं किया है |
स्वास्थ्य का सीधा सा गणित है की हम जैसा और जो कुछ भी खायेंगे उसका परिणाम शरीर को भुगतना ही पडेगा |
यदि अपवाद स्वरुप अनुवांशिक कारणों को छोड़ दिया जाये तो जावानी का खाया, बुढापा में रंग दिखाता है |
हम में से कई लोग खुद को कैफीन,टैनिन,अल्कोहल का लती बना लेते है |
इससे हमें उत्तेजना मिलती है और हम सक्रीय हो जाते है ,बिना यह चिंता किए की इससे हमारे शरीर पर व नींद लेने व ऊर्जा बचाने पर क्या असर पडेगा ? और यदि जवानी आपके पिज्जा---------वर्गर---------------और प्रक्रिया वाले भोजन के स्वाद में मस्त रहें तो बुढ़ापा बदरंग होगा ही ,इसमें संदेह कहाँ है ?


ऐसी आदतें सेहत विरोधी है , यह शरीर में ऊर्जा का स्तर गिरा देती है |
फिर शरीर और ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा की मांग करता है |
यदि आपने जवानी के समय में स्वाद के कारण अनाप-शनाप भोजन करके पांच हाथ के शरीर के वजाय दो इंच जीभ की ओर ज्यादा ध्यान दिया है --- जिसके कारण आप अस्वस्थ्य महसूस कर रहे है और कायाकल्प करना चाहते है |


तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है |
अगर आप में दृढ शक्ति है ,यदि आप गलती महसूस करके भूल सुधारने के लिए तैयार है |
केवल आपको भोजनचर्या में सुधार लाना होगा और ऐसे पौष्टिक पूरक को शामिल करना होगा जिससे उम्र बढ़ने पर गठिया, मोटापा, पीठ में दर्द, मस्तिस्क में शिथिलता, मोतियाबिंद व ह्रदय रोग पीछे न लगें और बुढापा कराहते हुए न बीते और जीवन के अंतिम दिनों में भी बहूत तकलीफ ना हो |

कुछ ऐसे ही सुझाव इस रचना में हम रखने जा रहे है जिससे की वृधावस्था सुख से बीते और युवा के समान ही हम इस संसार से विदा ले सकें |
बढती उम्र में भी आप स्वास्थ्य और जवान रह सकते है बस आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत है ---------

विटामिन - इ ---- नवयुवक में रोग के प्रतिरोध करने की क्षमता सबसे अधिक रहती है पर जैसे-जैसे उम्र बढती है यह क्षमता कम होती जाती है |
विटामिन -इ विशेषकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में सहायक होते है |
वृद्ध लोगों को यदि इस विटामिन की पर्याप्त मात्र मे दे दी जाए तो उनकी प्रतिरोधक शक्ति नवयुवक के सामान हो जाएगी |
विटामिन- बी 6 --- शोधों के द्वारा ज्ञात हुआ है की बढ़ी हुई उम्र में विटामिन बी 6 की कमी से प्रतिरोधक क्षमता में तेजी से गिरावट आ जाती है
और यदि इसकी समुचित मात्रा दिया जाये तो न केवल प्रतिरोधक शक्ति में गिरावट कम होगी बल्कि बढ़ोतरी होती रहेगी |

अनाक्सिकारक पदार्थ --------- कोशिकाओं में भारी मात्रा में तहस-नहस होते रहना ही बुढापे की ओर अग्रसर होने का एक मात्र कारण है |
भाग्यवश प्रकृति में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ विद्यमान है जो की अनियंत्रित ऑक्सीकरण का विरोध करते है |
और जो शारीर में free redical ( मुक्त अभिकारक ) के द्वारा सजीव कोशिकाओं को भारी मात्रा में क्षतिग्रस्त होना भी बुढापे के संकेत है |
इनमे सबसे शक्तिशाली अनाक्सिकारक पदार्थ विटामिन - इ है |
विटा कैरोटिन जो हरे सब्जियां, पपीता,पीले फल इत्यादि में होता है जो विटामिन ए का प्रतिरूप है |


विटामिन- सी ----- तीसरा मुख्य पदार्थ है जो एस्कारविक अम्ल है जो रसदार फल जैसे निम्बू, मौसमी , संतरा ,अमरुद ,सब्जी जैसे हरे मिर्च ,आंवला , बंद गोभी में पाया जाता है यदि हम इस पदार्थ को लेते है तो कोशिकाओं की क्षतिग्रस्तता रुकी रहेगी और बुढापे देर से आयेगा |

इस कारण यह उचित होगा की 40 -42 वर्ष की आयु के बाद से ही इन खाद्य पदार्थ का अधिकाधिक मात्रा में लेना शुरू कर दें ताकि बुढापे की कगार पर पहुँचने से पूर्व हमारी प्रतिरोधक प्रणाली चुस्त-दुरुस्त रहें |

प्रस्तुत रचना में आहार में छुपे गुणों को आपके समक्ष रखकर यह बताने की चेष्टा की जा रही है की सर्व सुलभ खाद्य पदार्थ भी सेहत को बुढापे तक बरकरार रख सकते है ,और शारीर को बुढ़ाने की क्रिया को धीमा करके द्रिघायु प्रदान कर सकते है |
साथ ही शारीर के अन्दर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती देकर रोगों से दूर रख सकते है |


एलो वेरा जेल जिसका उपयोग मनुष्य हजारों साल पहले से करता आ रहा है |
इसके गुण के बारे में रामायण,महाभारत ,बाइबल ,चरक संहिता,और भी कई ग्रंथों में लिखा हुआ है |
सिकंदर महान ने एक पूरी युद्ध इस पौधों के लिए सुमात्रा द्वीप पर लड़ा था
जिससे वो अपने घायल सैनिक का इलाज किया करते थे |

एलो पौधे को संस्कृत में " कुमारी " कहते है , जिसका अर्थ है कुवांरी या युवती |
यह सावित करता है की इस पौधे में बुढापा प्रतिरोधी तत्व है जिनके उपयोग करने से मनुष्य लम्बे समय तक अन्दुरुनी और बाहरी तौर पर जवान बना रह सकता है | आयुर्वेद में इस के उपयोगों का वर्णन 4000 वर्ष पहले हुआ था |
भारत के बिभिन्न भागों में इसके भिन्न-भिन्न नाम है ----जैसे कोरफेड , कलामांडा , चित्रकुमारी , घृतकुमारी , गृहकन्या , ग्वारपाठा , कारगंधक , लालेसरा , कुमार पट्टू इत्यादि |
अपने बहूत से फायदों के वजह से लोग एलो को चमत्कारी पौधा कहा जाता है |
आज के युग में यह जेल मानव जाती के लिए अमृत के सामान है | वर्तमान समय में धरती पर तमाम उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ पूरकों में से एलो जेल को एक माना जाता है |


एलो जेल में 18 एमिनो एसिड ,12 विटामिन (विटामिन ए , बी -1 , बी -3 , बी -5 , बी -6 , बी-12 , सी , इ , के और कोलाइन तथा फॉलिक एसिड ) और 20 खनिज पाए जाते है | इसके आलावा भी कई अन्य अनजाने यौगिक है जो शारीर के लिए उपयुक्त है | प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण यह जैविक रूप से शारीर के लिए एकदम ठीक है ,इसका कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है
और इसके सेवन से कोई इसका आदी नहीं होता | संक्षेप में , एलो जेल इस धरती का चमत्कार है |


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ताऊ .इन