" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

May 8, 2011

नपुंसकता - ( समाधान एलोवेरा उत्पाद से )



नपुंसकता की समस्या आधुनिक युग में तेजी से वृद्धि हो रही है | इसका अर्थ है व्यक्ति सामान्य यौन सम्बन्ध नहीं बना पाना ,अगर बनाता भी है तो इतने अल्प समय के लिए की वह सम्भोग सम्पन्न नहीं कर सकता | समय से पहले स्खलन या स्खलन में असमर्थता भी इसके लक्ष्ण है | ऐसे पुरुष संतान उत्पति करने लायक नहीं होते है | यदि दम्पति संतान हीन हो तो, पति- पत्नी दोनों का ही जांच होना आवश्यक है | जिससे समस्या का पता लगने पर सही निदान किया जा सके | अक्सर संतान न होने का दोषारोपण ज्यादातर महिला पर ही लगाया जाता है, जबकि यह धारणा बिलकुल बेबुनियाद है इसके लिए पुरुष भी बराबर रूप से जिम्मेदार हो सकते है |

शोधों से पता चला है की लगभग 10 प्रतिशत दम्पति निःसंतान होते है | इनमे से तक़रीबन 50 प्रतिशत महिलाएं और 40 प्रतिशत पुरुष भी जिम्मेदार होते है | 10 प्रतिशत दोनों ही जिम्मेदार होते है | प्रत्येक दम्पति की चाहत देर सवेर संतान की होती है और इच्छा होती है उनके घर भी बच्चों की किलकारियों से गुंजायमान हो जाये | यदि संतान की चाहत रहने पर भी संतान नहीं हो तो वे दुखी व परेशान रहने लगते है | प्रन्तुं एक दुसरे पर दोषारोपण करने से कुछ समाधान नहीं निकलता है | उचित चिकित्सक से परामर्श लेकर जाँच परिक्षण के बाद इलाज करना चाहिए |

अक्सर लोग इस कारण ओझा, तांत्रिक व बाबाओं के चक्कर में पर जाते है जिससे निराशा के अलावा कुछ नहीं हाथ आता है | जबकि उचित इलाज से संतानहीन दम्पति के घर भी खुशियाँ आ सकती है | इसके समाधान से पहले आइये इसके कारण पर रौशनी डाल लेते है |

पिछले दशक में पुरुषों के प्रजनन क्षमता की प्रक्रिया के बारे में जानकारी में तेजी से विकाश हुआ है | आइये जानते है - पुरुषों में नपुंसकता के प्रमुख कारण :-
पुरुषों में नपुंसकता के कारण अनेक प्रकार के रोग भी हो सकते है | अन्तः-स्त्रावी ग्रन्थि से हार्मोन स्त्राव में बदलाव के कारण नपुंसकता हो सकती है | शरीर के स्वस्थ्य रखने, सामान्य प्रक्रियाओं और वीर्य एवं शुक्राणु की सामान्य संरचना और उनकी कार्यक्षमता के लिए अनेक प्रकार के हार्मोन का योगदान होता है |
पिट्यूटरी , थायराइड, एड्रिनल ग्रन्थि के हार्मोन स्त्राव में असंतुलन व मधुमेह रोगीओं, पुरुषत्व हार्मोन ( टेस्टस्टेरान ) के कम स्त्राव के कारण नापुन्क्सकता हो सकती है |

शुक्राशय पेट के अन्दर ही शुक्राणु का निर्माण ( टेस्टीज ) होता है और जन्म से कुछ समय पूर्व या एक वर्ष की आयु के लगभग यह पेट से निचे उतरता है | शुक्राणु के निर्मान के लिए कम तापमान की जरुरत होती है इसलिए यह अंडकोष में मौजूद होता है | वीर्य में शुक्राणु का का अंश लगभग 10 प्रतिशत होता है | शुक्राणु में फिर सहायक प्रजनन ग्रन्थि-प्रोस्टेट, सेमाइनल वेसिकल, कपूर ग्रन्थि के स्त्राव मिलकर वीर्य का निर्माण करते है | इन सहायक ग्रन्थि का स्वरूप और इसके स्त्राव का सामान्य होना भी जरुरी है, क्योंकि यह स्त्राव शुक्राणुओं को सक्रीय रखता है , पोषक तत्व प्रदान करता है , अन्डो के मिलन में सहायक सिद्ध होता है |

वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या तक़रीबन 10 से 20 करोड़ प्रति मिली. होती है | शुक्राणु की वीर्य में विशिष्ट चाल होती है | यदि वीर्य की संख्या सामान्य नहीं है तो भी नपुंसकता आ सकती है | वैसे तो वर्त्तमान में सेक्स के प्रति अरुचि और इसीसे बढ़ते नपुंसकता में जीवन शैली ही सबसे प्रमुख कारणों में से एक है | तनाव ग्रस्त जीवन- थकान, हताश, निराश , किसी अन्य कार्य में ध्यान , घबराहट या मनोवैज्ञानिक सदमा इत्यादि किसी न किसी रूप से व्यक्ति परेशान रहता है | सेक्स जीवन सबसे सुखद अनुभूति में से एक है | स्वस्थ्य जीवन के लिए सेक्स लाइफ स्वस्थ्य होना आवश्यक है | मानसिक परेशानी हो या शारीरिक परेशानी सेक्स जीवन अगर सुखी है तो बहुत कुछ अपने आप स्वस्थ्य हो जाता है |

आज के जीवन शैली का असर यह होता है की शरीर में फ्री रेडिकल का उत्पाद बहुत तेजी से होता है | यदि इनकी मात्रा शरीर में या शुक्राणुओं में बढ़ जाती है तो शुक्राणु क्षतिग्रस्त होने से नपुंसकता आ सकती है | फ्री रेडिकल की मात्रा को शरीर में नियंत्रित करने के लिए अनेक प्रक्रियाएं मौजूद होती है | इनको एंटी-ओक्सिडेंट कहा जाता है | इस प्रकार भोजन में अनेक एंटी-ओक्सिडेंट मौजूद होते है जैसे की विटामिन-'इ ',खनिज लावन इत्यादि | स्वस्थ्य जीवन के लिए फ्री रेडिकल और एंटी-ओक्सिडेंट में संतुलन होना चाहिए | एंटी-ओक्सिडेंट एंजायम की कमी के कारण शुक्राणु कमजोर हो जाते है |

आयुर्वेदिक उपचार व एंटी-ओक्सिडेंट औषधियों के द्वारा नपुंसक पुरुष को स्वस्थ्य किया जाता है |
जिस प्रकार मनुष्य में वीर्य होता है उसी प्रकार वृक्षों में भी उपस्थिति मिलती है | यह वीर्य 'गोंद' के रूप में होता है | जैसे- छुहारे का गोंद, कीकर का गोंद ,बरगद का गोंद इत्यादि | इनका प्रयोग कर शुक्राणु निर्माण एवं उनकी सक्रियता को बढाई जा सकती है | छुहारे का गोंद 10 ग्राम लेकर रात को पानी में भिंगोकर सुबह औटाये हुए गर्म मीठे दूध में मिलकर लगातार 40 दिनों तक सेवन से शुक्राणुओं का निर्माण, सबलता व सक्रियता बढ़ेगी |

कुछ उत्पाद निचे दिए जा रहे है जिसके मदद से शारीरिक शक्ति पुनः पा सकते है :-
1 Aoevera Gel
2Royal Jelly
3 Gin-Chia
4. Pomestin Power
5. Ginkgo Plus

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1 comments

जाट देवता (संदीप पवाँर) May 14, 2011 at 9:32 AM

मैं भी इन्हे आजमा चुका हू। व आगे लोगो को भी इसके फ़ायदे बता रहा हूँ।

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