" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Aug 3, 2010

आँवला शरीर के लिए अमृत तुल्य |


चिक्तिसा परामर्श हेतु हमसे संपर्क करने वालो में सर्वाधिक संख्या उन रोगियों की होती है जो उदर रोगों से पीड़ित होते है - जैसे अपच,भूख न लगना, गैस, एसिडिटी और सबसे मुख्य रोग कब्ज़ | अनियमित दिनचर्या और अनुचित आहार-विहार के अलावा मानसिक तनाव, नाना प्रकार के कारणवश होने वाली चिंता का सीधा प्रभाव नींद और पाचन संस्थान पर पड़ता है और व्यक्ति अनिद्रा तथा अपच का शिकार हो जाता है और इस स्थिति का निश्चित परिणाम होता है कब्ज़ होना | कब्ज़ कई व्याधियों की जड़ होती है जिसमे बवासीर, वात प्रकोप, एसिडिटी, गैस और जोड़ों का दर्द आदि व्याधियां कब्ज़ के ही देन होती है |

तो आज मैं चर्चा करने जा रहे है जिसमे सारे रोगों को दूर करने की शक्ति है,जो की ठंढी प्रकृति का है तथा इसकी विशेषता यह है की सूखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते | इसे आप हरा या सुखा किसी भी रूप में खाकर इसके सामान गुण का लाभ उठा सकते है | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ आयुर्वेद में मशहूर बनौषधि जिसका नाम है " आँवला"

संस्कृत में आँवले को अमरफल, आदिफल, आमलकी , धात्री फल आदि नामों से पहचाना जाता है | लेतीं नाम :- एम्ब्लिका ओफिसिनेलिस( Emblica officinalis )

आँवला सर्दी की ऋतू में ताजा मिलता है | नवम्बर से मार्च तक अवाला ताजा मिलता रहता है | जनवरी-फ़रवरी में आवला अपने पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है |

जो आंवला आकर में बड़ा होता हो, गुदे में रेशा नहीं हो, बेदाग और हलकी-सी लाली लिए हुए हो, वह आँवला सबसे उत्तम होता है | वैसे सर्दियों में ही इसका मुरब्बा, अचार, जैम आदि बनाए |


आँवले में विटामिन- सी ( "C") पाया जाता है | एक आँवले में विटामिन- सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है | इसलिए यह शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति में महत्वपूर्ण है | विटामिन-सी की गोलियों की अपेक्षा आँवले का विटामिन-सी सरलता से पच जाता है |

आँवले में पाए जाने वाले कार्बोहायड्रेटस में मुख्य है रेशेदार 'पेक्टिन' | यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है | यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है |यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है |


आँवले में ५८ मि .ग्रा. कैलोरी, ०.५ मि .ग्रा. प्रोटीन, ५० मि .ग्रा. कैल्सियम, १.२ मि .ग्रा. लोहा, ९ मि .ग्रा. विटामिन , ०.०३ मि .ग्रा. थायोमिन, ०.०१ मि .ग्रा. रिबोफ्लोविन, ०.२ मि .ग्रा. नियासिन, ६०० मि .ग्रा. विटामिन-सी |

आँवले के गुद्दे में जल ८१.२ प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट १४.१ प्रतिश, खनिज लवण ०.7 प्रतिशत, रेशा ३.४ प्रतिशत, वसा ०.१ प्रतिशत और फास्फोरस ०.०२ प्रतिशत होता है | आँवले में कई विटामिन होते है , जिनमे प्रमुख है - विटामिन -सी, यानि स्कार्बिक एसिड | आँवले में गेलिक एसिड, टैनिन और आल्ब्युमिन भी मौजूद होते है |


कब्ज़ में आँवला रात को एक चम्मच पिसा हुआ पानी या दूध के साथ लेने से सुबह शौच साफ़ आता है , कब्ज़ नहीं रहती | इससे आंते और पेट हलकी और साफ़ रहता है |

आंतरिक शक्ति बढ़ने वाली औषधियों का प्रधान घटक आँवला ही है | आँवले में एक रसायन होता है, जिसका नाम सकसीनिक अम्ल है | सकसीनिक अम्ल बुढ़ापे को रोकता है और इसमें पुनः यौवन प्रदान करने की शक्ति भी होती है | इसमें विद्यमान विभिन्न रसायन बीमार और जीर्ण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में अपना अच्छा योगदान देते है |


आँवले के नियमित सेवन से नेत्रज्योति और स्मरणशक्ति बढती है | यह गर्भवती महिला के लिए हितकर है | इससे ह्रदय की बेचैनी, धड़कन, मेदा, रक्तचाप,दाद आदि में लाभदायक है |

मधुमेह के रोगीओं के लिए :- सूखे आँवले और जामुन की गुठली समान मात्रा में पिस ले | इसकी दो चम्मच नित्य प्रातः भूखे पेट पानी के साथ फंकी लें | मधुमेह में निश्चित तौर पर फायद होगा | मधुमेह रोगीओं के लिए आँवले का ताजा रस लाभप्रद होता है | इसके सेवन से रक्त में शक्कर बनाना कम हो जाता है | आँवला पाउडर १ चम्मच दो बार पानी या दूध के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है |

वैसे तो आंवले शरीर के सम्बंधित अधिकांश रोगों से लड़ने में कारगर है , परन्तु मैं यहाँ कुछ रोग जो वर्तमान में ज्यादा लोग ग्रसित है उसके बारे में बताते है :-

उच्च रक्तचाप :- आँवले में सोडियम को कम करने की क्षमता होती है | इसलिए रक्तचाप के रोगी के लिए आँवले का उपयोग लाभदायक है | यह रक्त बढाने और साफ़ करने में सहायक है तथा इससे शरीर को आवश्यक रेशा मिलता है |

ह्रदय एवं मस्तिस्क की निर्बलता :- आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का रस ३५ ग्राम पानी में मिलकर पी लें, फिर आधा भ्जोजन करें | इस पारकर २१ दिन सेवन करने से ह्रदय एवं मस्तिस्क की दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है | स्मरण-शक्ति बढती है |

कोलेस्ट्रोल , ह्रदय रोग से बचाव :- एक चम्मच आँवले की फंकी नित्य लेने से ह्रदय रोग होने से बचाव होता है | कच्चे हरे आँवले का रस चौथाई कप, अध कप पानी, स्वादानुसार मिश्री मिलकर पीते रहने से कोलेस्ट्रोल कम होकर सामान्य हो जाता है , जिससे ह्रदय रोग से बचाव होता है |

सुन्दर संतान :- नित्य एक आँवले का मुरब्बा गर्भावस्था में सेवन करते रहने से मान स्वस्थ्य रहती हुई सुन्दर, गौरवर्ण संतान को जन्म देगी |

नेत्र-ज्योतिवर्धक :- एक कांच का गिलास पानी से भरकर नित्य रात को उसमे एक चम्मच पिसा हुआ आँवला दल दें | प्रातः बिना हिलाए आधा पानी छानकर उससे नेत्रों को धोये तथा बचा हुआ आधा पानी आँवले सहित पियें | इस तरह लगातार चार महीने सेवन करने से नेत्र ज्योति बढ़ जाएगी |

हस्त-मैथुन :- हस्त-मैथुन से धातु पतली हो गई हो तो , सबसे पहले मेरा युवकों को सलाह है की हस्त-मैथुन की आदते छोड़ दें | इस तरह से लोग अक्सरहा शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार की दुर्बलता का शिकार हो जाते है फिर निम् हाकिम के चक्कर में फंसते जाते है | इसलिए ऐसी कोई परेशानी हो तो आप सही चिकित्सक के पास जाए और उचित परामर्श लें | यहाँ आप आँवले तथा हल्दी को समान मात्रा में पीसकर , घी डालकर सकें और भुने | सिकने के बाद इसमें दोनों के वजन के बराबर पीसी हुई मिश्री मिला ले | एक चाय की चम्मच भरकर सुबह-शाम गर्म दूध से फंकी ले तो धातु दुर्बलता दूर होगा |

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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

3 comments

अजय कुमार झा August 4, 2010 at 6:40 PM

राम जी,
बहुत ही ज्ञानवर्धक पोस्ट लगी । एलोवेरा के बारे में उपयोगी जानकारी मिली हमेशा की तरह । एक बात तो बताईये , इसके जूस का स्वाद कैसा होता है ?बस यूं ही पूछा , सोचा खरीदने से पहले एक बार आप से पूछ लें

Rambabu Singh August 4, 2010 at 11:13 PM

कई तरह से स्वाद में उपलब्ध है | एक जो शुद्ध एलो वेरा जेल है उसका स्वाद कच्चे मौसम्मी की तरह है बाकि जिसमे कुछ और तरह के स्वास्थ्य वर्धक फल के रस का मिश्रण है वो मीठा है | कुल मिलकर स्वाद बहुत ही अच्छा है |

Asha August 6, 2010 at 7:06 AM

बहुत महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आभार |
आशा

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