" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Oct 14, 2010

आर्थराइटिस ( जोड़ों के दर्द ) में दिव्य औषधि है एलोवेरा !

विगत तिन दिन पहले यानि 12 अक्टूबर वर्ल्ड आर्थराइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है | आर्थराइटिस के नाम से मन में जोड़ों के दर्द के बारे में खौफनाक ख्याल उभरने लगते है | एक पुरानी कहावत के अनुसार आप दो चीजों पर पूरा भरोसा कर सकते है, ये आना लगभग तय है मतलब अवश्य आएँगी | एक जन्म और मृत्यु | पर वर्तमान मानसिक पटल पर एक और चीज चित्रित हो रही है जिन्हें अवश्य जोड़ देनी चाहिए जिसका नाम है "आर्थराइटिस" |

वर्तमान में छोटे उम्र यहाँ तक की बच्चों में यह बिमारी बड़े पैमाने पर अपना पैठ बना लिया है | जबकि कुछ दशक पहले यह सिर्फ 50 के बाद ही जोड़ों में दर्द की शिकायत मिला करता था | परन्तु अब तो यह 25 -30 साल में जैसे आम हो गया है |

एक सर्वे के अनुसार हमारे यहाँ भारत में हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी आयु वर्ग में आर्थराइटिस से पीड़ित है | और ऐसे में इस की भयावहता को लेकर चिंता करना की कहीं मैं भी इसका शिकार न बन जाऊं और आशंकित हो भी क्यूँ न? क्यूंकि सर्वे तो साफ़ साफ़ बता रहा है की हर पांच में से एक व्यक्ति पीड़ित हो सकता है |



सुबह उठने पर जोड़ों में दर्द, हलकी सुजन और अकड़न वर्तमान में यह सबसे ज्यादा मरीजों में पाई जाती है | इसका शिकार कोई भी हो सकता है, वो स्त्री हो या पुरुष , शरीर के किसी भी जोड़े में हो सकती है, यहाँ तक की गर्दन और कमर के निचले हिस्से में भी | यह बिमारी बढ़ जाने से काफी असहनीय तकलीफ , दर्द और यहाँ तक की विकलांग भी बना सकता है |

आर्थराइटिस आमतौर पर जोड़ों के कार्टिलेज के क्षय की बिमारी है | पर यह जोड़ की उपरी सतह और हड्डी के अंदर भी असर दाल सकती है | इस बिमारी से कार्टिलेज घिसने लगता है और हड्डी पद दबाव पड़ने लगता है | हड्डी पर अतिरिक्त दबाव के कारण हड्डी का घनत्व बढ़ने लगती है |

अपने कभी सुना होगा की उसने घुटना बदलवाया है क्यूंकि उसकी हड्डी पर हड्डी आ गई है | इसी को वैज्ञनिक भाषा में जोड़ो में कार्टिलेज का एकदम खत्म हो गई है ऐसा माना जाता है | यह बिमारी आमतौर पर वजन उठाने वाले जोड़ों,घुटने और कुल्हे के जोड़ों में ज्यादा होती है और वजन बढ़ने , ज्यादा काम करने, चोट लगने के कारण बढती जाती है |


आर्थराइटिस का पारंपरिक उपचार :-
रोगीओं को आमतौर पर डाक्टर एस्प्रिन और बिना स्टीरियोइड की एंटी इन्फ्लेमेट्री दवाएं दे दी जाती है | ये दवाएं जोड़ों के दर्द और सुजन से तो कुछ देर के लिए राहत दिला देती है परन्तु इनके गंभीर दुष्परिणाम होते है |

पेट का अल्सर, और पाचन तंत्र में रक्त-स्त्राव इसी के दुष्प्रभाव का परिणाम है | सबसे बड़ी सम्स्य यह है की ये दवाएं सिर्फ कुछ समय के लिए दर्द कम करती है और बिमारी के मूल कारण को बिलकुल असर नहीं करती |


एलोवेरा और उसके कुछ विश्वसनीय उत्पाद है, जो जोड़ों के दर्द से बिलकुल छुटकारा दिला सकता है , जो की निचे दी जा रही है :-
1 . एलोवेरा जेल
2 . पोमेस्टीन पॉवर
3 . फोरेवर फ्रीडम
4 . गार्लिक थाइम
5 . हीट लोसन और एम्.एस.एम्जेल :- सुजन वाले स्थान पर दोनों को मिलाकर मालिश करना चाहिए |

अतः आर्थराइटिस दिवस के अवसर पर आइयें हम सब मिलकर इस खौफनाक रोगों से डटकर मुकाबला करें |
आहार विहार और नियमित घुटनों का व्यायाम करने से इस रोग से उत्पन्न दर्द को कम किया जा सकता है | परन्तु उपरोक्त उत्पाद के नियमित चार से छः महीने तक सेवन से इससे पूरी तरह से छुटकारा पाया जा सकता है |


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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

8 comments

काजल कुमार Kajal Kumar October 14, 2010 at 3:54 AM

एलोवेरा के प्रयोग पर कुछ ज़्यादा जानकारी की अपेक्षा थी, लेख में.

Udan Tashtari October 14, 2010 at 6:21 AM

आजमाया हुआ है, बहुत फायदा हुआ!! आभार जानकारी आपने बाँटी.

Ratan Singh Shekhawat October 14, 2010 at 6:33 AM

अच्छी जानकारी

नरेश सिह राठौड़ October 14, 2010 at 6:53 AM

गाँवों में तो यह पीढीयो से काम में ले रहे है | जानकारे हेतु आभार

Rambabu Singh October 14, 2010 at 10:51 AM

काजल कुमार जी , आप लिंक पर चटका लगाकर एलो वेरा सम्बंधित पूरी जानकारी हासिल कर सकते है !!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ October 14, 2010 at 2:59 PM

ये तो सचमुच बडे काम की चीज है। आभार।
................
वर्धा सम्मेलन: कुछ खट्टा, कुछ मीठा।
….अब आप अल्पना जी से विज्ञान समाचार सुनिए।

महेन्द्र मिश्र October 14, 2010 at 3:41 PM

एलोवेरा का करीब दो सालों से मैं भी उपयोग कर रहा हूँ .... बढ़िया जानकारी दी है जो सभी के लिए उपयोगी है .... आभार

काजल कुमार Kajal Kumar October 14, 2010 at 10:03 PM

Rambabu Singh जी धन्यवाद.

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