" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Aug 17, 2010

एलोवेरा ( ग्वारपाठा,घ्रित्कुमारी) पियें -खुशहाल जीवन जियें

आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ्य व सेहतमंद किस तरह से रहा जा सकता है ? कैसे रखे अपने आपको चुस्त और दुरुस्त ?

जबकि आज हम सब एक मानव मशीन की तरह दिन-रात काम में व्यस्त रहते है | दिन में आराम की बात छोडिये यहाँ रात को भी करबटें बदलते बीत जाते है | मानसिक परेशानी का ऐसा सबब है की रात बगैर नींद की गोली से आराम करना कुछ लोगों के लिए मुश्किल हो जाती है | आखिर क्या है यह ? और क्यूँ बेचैन है ?

इन सबका कारण है मनुष्य भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए शारीरिक सुख दाव पर लगाए हुए है | जबकि आज के समय में हम सब में आर्थिक रूप से बहुत कुछ पा लिया है परन्तु शारीरिक कीमत को भी चुकाना पड़ा है | दूसरी सबसे अहम् बात है समय के आभाव, जो की सबसे बड़ी समस्या है | लोगों को अपने खाने-पिने का भी समय दे पाना मुश्किल हो रहा है | इसी वजह से आज फास्ट फ़ूड कम्पनी खूब फल - फुल रही है |

इन सभी समस्या के पीछे हमारी विकृत आहार ही है | डिब्बा बंद खाना व जंक फ़ूड , जिसे परिरक्षित करने के लिए बहुत ही हानिकारक रासायन मिलाया जाता है | एक ऐसा रसायन जो अगर कुते खा ले तो वो भी चंद मिनटों में ढेर हो जाये यानि मौत भी हो सकती है | जिसे हमलोग बड़े चाव से खाते रहते है |


जरा सोंचे क्या होगा जब इस तरह से रासायन हमारे शरीर में प्रवेश करेगा ? नुक्सान के अलावा कुछ नहीं कर सकता है | वर्तमान समय में ज्यादातर लोग पेट के परेशानी से ग्रस्त है जैसे कब्ज़ , गैस, अल्सर ,बवासीर इत्यादि ,ये सभी के सभी गलत खान-पान के नतीजा है |
अगर एक बार पेट की परेशानी शुरू हुई तो मेडिकल साइंस में इसके इलाज ढूंढ़ते रह जाओगे | ढूंढते रह जाओगे, मतलब जिन्दगी भर दवाइयां खाते रहो परन्तु पूरी तरह से काबू नहीं कर पायेंगे | फिर शुरू होगी कुछ असाध्य रोग जैसे मधुमेह, रक्तचाप, ह्रदय रोग , गठिया इत्यादि ये सब के सब पेट की बिमारी कब्ज़ , गैस की देन है |


अतः हमें अपने आहार में परिवर्तन करना चाहिए | खाना में भरपूर मात्र में पौष्टिक तत्व हो, फाइबर युक्त हो, जिससे आपके पेट में कब्ज़ नहीं बनेगा और आप हमेश तरोताजा महसूस करेंगे |

एक और वनौषधि जो पेट के किसी भी प्रकार के रोग से लड़ने के लिए रामवाण है | कितना भी पुराना से पुराना कब्ज़ व गैस की परेशानी हो , आप उससे छुटकारा पा सकते है |

जी हाँ एक बार फिर से मैं बात करने जा रहा हूँ विश्व प्रसिद्ध व मनुष्य शरीर के लिए अमृत तुल्य " स्थिरीकरण एलो वेरा जेल " अपने जीवन के दैनिक आहार में शामिल करें और बहुत सारे बिमारी चाहे वो पेट की हो , त्वचा की , बाल की, या शरीर के किसी भी अंग की ,उसमे बहुत ज्यादा लाभ मिल सकता है |

शुद्ध और तजा एलो जेल जो ऍफ़.एल.पी
प्राकृतिक रूप से परिरक्षित कर जूस 4 साल के बाद भी एक ताजा पते के जूस के बराबर पौष्टिक मिलेगा |
दुनिया में शुद्ध एलो वेरा के सबसे बड़े उत्पादक होने के बाबजूद उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है गुणवता को कायम रखना | अपने स्वस्थ्य व सेहत के लिए लाखो लोग जिन उत्पादों पर निर्भर करते है, उनका उत्पादन करने व गुणवता और शुद्धता के सर्वोच्च मनको पर खरे उतरना सबसे बड़ी चुनौती है और ये बखूबी बड़ी ही जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है |


इन सबके वाबजूद , ऍफ़.एल.पी एलो जेल को कई तरह की प्रतिष्ठा दिलाई है | इस उद्योग में प्रतिष्ठित इंटरनेसनल एलो साइंस काउन्सिल , सिल औफ़ अप्रूवल पाने वाली यह पहली कंपनी थी |

शुद्धता का यह अति सम्मानीय सबूत इस बात की आश्वासन है की हर उत्पाद में डाले गए शुद्ध एलो की गुणवता और मात्र किसी भी तरह से दुसरे दर्जे की नहीं है | इसके आलावा , ऍफ़. एल.पी के एलो वेरा पेय पदार्थों को अन्तराष्ट्रीय स्वीकृति और उत्कृष्टता के प्रमाण के तौर पर इंटरनेसनल कोशेर और इस्लामिक सिल्स औफ़ अप्रूवल मिली हुई है |

अतः हमारी कंपनी ऍफ़.एल.पी , दुनिया के 9 .5 मिलियन से भी अधिक वितरक को उच्च गुणवता वाले एलो वेरा आधारित स्वास्थ्य और सौन्दर्य उत्पाद प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित करते है |

हमें गर्व है की हमारे उत्पादों ने पूरी दुनिया के 145 से भी अधिक देशों के लाखों लोगों को लाभान्वित किया है और ऐसे ही गुणवता व उत्कृष्टता के लक्ष्य को जारी रखने का वादा करते है |

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Aug 14, 2010

अनेकता में एकता की पहचान है भारत

कल 15 अगस्त यानि हमारा स्वाधीनता दिवस | भारत स्वतंत्रता दिवस की 63 वीं वर्षगाँठ कल मनाने जा रही है | स्वत्रता दिवस को हमलोग राष्ट्रीय पर्व के रूप में मानते है | हम भारत वासियों के लिए यह आजादी एक सदी से भी ज्यादा दमनकारी शासन के बाद अगस्त 1947 में हासिल हुई | तो स्वाभाविक ही हमारे लिए बहुत बड़ा त्यौहार है और इसे हम सब मिलकर जश्न की तरह मानते है | हमारा मन तो अभी से भी हर्षोल्लास में विचरण करने लगा है | कल सुबह सबेरे ही राष्ट्र गान के साथ हमारे देश के प्रधान मंत्री लालकिला के प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे | उसके बाद वो देश को संबोधित भी करेंगे |

हमारे राष्ट्रध्वज के तीनो ही रंग हम सब के लिए प्रेरणा के प्रतिक है | स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर तिरंगे के रंगों के जरिये दर्शाया जाता है , हमारे लोकतंत्र, न्याय और खुशहाली का | प्रगति पथ पर हमारा देश सदा अग्रसर रहे यही हमारी शुभकामाएं होगी |

वो एक स्लोगन जो अकसर टेलीविजन और समाचार पात्र में देखने व सुनने को मिल जाता है " प्राउड टू बी इंडियन " | खुद को भारतीय होने में गर्वान्वित होनी चाहिए | भला हो भी क्यूँ न ? परन्तु इसमें क्या खास बात है, अपने देश में रहने वाले के दृष्टिकोण से वो देश उनके लिए महान है और होनी भी चाहिए |

परन्तु खास बात यह है की अपना देश भारत ही पूरी दुनिया में अकेली देश है जहाँ विविधताओं में एकता है | धर्म , क्षेत्र, भाषा, जाती और संस्कार आदि के सन्दर्भों में हमारे देश में जो विविधता नजर आती है, शायद ही किसी और देश में देखने को मिले | इन्हीं विविधताओं के वजह से हमारा देश अनेकता में एकता के जनक के रूप में जाना जाता है |

भौगोलिक दृष्टिकोण से भी हमारे देश में उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक में इतने परिवर्तन है की कहीं पहाड़ , तो कहीं पठाड, तो कहीं रेतीली तो कहीं जमीनी, यहाँ तक की एक प्रान्त से दुसरे प्रान्त तक पहुँचते ही मौसम भी बदल जाती है जैसे कहीं बहुत ज्यादा गर्मी है, तो कहीं बहुत ज्यादा ठंढ ,तो कहीं बरसात तो कहीं सूखाग्रस्त | अतः जमीनी विविधताओं के कारण भारत में मौसम सम्बन्धी अंतर भी दुसरे देशों से अलग बनाते है |

मौसम की इस विविधता के कारण मनुष्य के शारीरिक बनावट में भी काफी अंतर होता है | ऊँचे-ऊँचे पहाड़ पर रहने वाले लोग अकसर छोटे कद-काठी के होते है ,तो ज्यादा गर्मी झेलने वाले पूर्व और दक्षिण क्षेत्र के लोगों का रंग काला होता है तो ठन्डे प्रदेश के लोग लम्बे और ज्यादा गेहुआ यानि गोरे-गोरे होते है |


मौसम के आधार पर पहनावा भी एक प्रान्त से दूसरी प्रान्त का अलग नजर आता है | अगर पंजाब और जम्मू कश्मीर के तरफ जाए तो वहां के औरते शलवार और कमीज व पुरुष पठानी सूट पहनते है वहीँ मध्य उतर दक्षिण भारतीय महिला साड़ी को ज्यादा तबज्जो देती है और पुरुष धोती व कुर्ता को ज्यादा पसंद करते है |

पहनावे के बाद अब खान-पान को ही लीजिये तो इसमें भी बहुत तरह के व्यंजन है जो प्रान्त के अनुरूप बताना बड़ा ही मुश्किल है | दुनिया के जितने प्रकार के व्यंजन बनते होंगे इससे कहीं ज्यादा प्रकार के व्यंजन अकेले हमारे यहाँ बनते है | हमारे देश के अनोखी बात यह है की यहाँ के हर एक प्रान्त का खाना वहां के जाती धर्म और भौगोलिक संरचना से जुड़ा हुआ है |

हमारे देश की एक और अनोखी बात है की अपने-अपने धर्मो के अनुरूप पूजा अनुष्ठान करते है कोई कभी भी अपनी मान्यताओं या रिवाजों को अन्य पर थोपने की कोशिस नहीं करते है | भारत में दुनिया के तमाम धर्म,जाती के मानने वाले लोग यहाँ के नागरिक के रूप में रह रहें है |


संयुक्त राष्ट्र के सूचि में अबतक 5036 भाषा की मान्यता है जिसमे 4 हजार से भी ज्यादा अपने देश भारत में अकेले बोली जाती है | इससे बड़ा गवाही और क्या हो सकता है - भाषा, रंग-रूप, आहार- विचार , व्यवहार हर मामले में हम दुनिया से अलग है , जो हमें औरों से हटकर नजर आती है और यही विविद्ता हमारे भारतीय होने की निशानी है |

हमारे देश ही एक मात्र ऐसा देश है जहाँ प्रेम को परमात्मा के तुल्य माना जाता है | एक तरफ चमत्कारों को अंजाम देने वाला ताकतवर देवता हमारे आराध्य है तो दूसरी ओर प्रेम क्रीडा करने वाले कन्हैया को अपना भगवन माना है |


इसे हमारे देश की महानता ही कहेंगे जहाँ मंदिर और मस्जिद आस-पास बनाए जाते है और जहाँ ईद में हिन्दू सेवैयाँ खाते है ,तो होली में मुसलमान भाई गुजिया | अतः जो व्यक्ति ऐसे मौसम, माहौल और लोकतंत्र में रहता है जो अनेकता में एकता है , उन्हें दुनिया की किसी भी कोने के अपने आप को स्थापित करने में कठिनाई नहीं होगी | और वो स्वतः ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ कहलाने योग्य बन सकता है |

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Aug 11, 2010

मिट्टी के औषधीय गुण


मिट्टी आसानी से हरेक जगह उपलब्ध हो जाती है इसीलिए उसे उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है | परन्तु मिट्टी के एक टुकड़े को यदि प्रयोगशाला में जाँच कराया जाय तो उसमे अनेकों प्रकार के क्षार , विटामिन्स, खनिज, धातु, रासायन रत्न, रस आदि निकालेंगे |

क्या आपने कभी अनुभव किया है मिट्टी में एक बहुत ही खास गुण होता है |
शरीर के जिस भाग में गीली मिट्टी के लेप लगाकर बांधा जाय तो उस अंग विशेष का विषैला अंश खींचकर मिट्टी में चला जाता है | मिट्टी के अंदर विश्हरण शक्ति होता है | रोगुक्त अंग पर गीली मिट्टी के बाँधने के कुछ देर पश्चात् खोला जाय तो मिट्टी में मनुष्य के शरीर का विष बहुत अधिक मात्रा में मिलेगा |

औषधियां कहाँ से आती है? जबाब होगा पृथ्वी , मतलब सारे के सारे औषधियां के भंडार होता पृथ्वी | अतः जो तत्व औषधियों में है, उनके परमाणु पहले से ही मिट्टी में उपस्थित रहते है | मिट्टी के उपयोग द्वारा स्वस्थ्य सुधारने में हमें बहुत सहायक साबित हो सकती है इसके लाभ से बंचित न रहे, और निर्दोष,पवित्र भूमि पर पैदल यानि नंगे पाँव चलना चाहिए |


हरियाली , हरी भरी छोटी-छोटी घास पर नंगे पाँव टहलना शरीरी के लिए बहुत ही ज्यादा अच्छा होता है | जमीन पर सोने के लिए मुलायम बिस्तर लगाया जाय तो बहुत ही अच्छा है , यदि ऐसा नहीं हो सकेगा तो चारपाई जमीन से बिलकुल करीब हो ताकि मिट्टी से निकलने वाली वाष्प अधिक मात्रा में मिलता है |


सैम्पू और साबुन से स्नान करने का प्रचलन फैशन के इस दौर में बढा है | वैसे मिट्टी का प्रयोग साबुन के अपेक्षा हजार दर्जे अच्छा है | साबुन में मौजूद कास्टिक सोडा त्वचा में खुश्की पैदा करता है जबकि मिट्टी में यह बात नहीं है ,वह मैल को दूर करती है , त्वचा को कोमल , ताजा, चमकीली एवं प्रफुल्लित कर देती है | शरीर पर मिट्टी लगाकर स्नान करना एक अच्छा उबटन माना जाता है |

दिनों में उठने वाली घमौरियां और फुंसियाँ इससे दूर हो सकती है | सिर के बालों को मुल्तानी मिट्टी से धोने का रिवाज अभी तक मौजूद है | इससे मैल दूर होता है,काले बाल, मुलायम, मजबूत और चिकने रहते है तथा मस्तिस्क में बड़ी तरावट पहुँचती है |

साफ़ स्थान की मिट्टी चिकित्सा कार्य में उपयोग किया जाता है | खासकर चिकनी मिट्टी सर्वोत्तम माना गया है | इसकी पट्टी प्रायः हर बीमारी में फायदा करती है | ऐसा भ्रम न मन में पालें की इससे ठंढ लग जाएगी | यह अनेक परिक्षण के बाद गलत साबित हुआ है |


अन्दुरुनी भाग के विकार में जहाँ दबा का असर ठीक तरह से नहीं पहुंचा सके, वहां मिट्टी के उपचार से अच्छे परिणाम की उम्मीद की जा सकती है | इससे आप गुर्दे की खराबी,मूत्राशय रोग,पेट के भीतरी फोड़े,गर्भाशय सम्बंधित विकार,मासिक धर्म की अनियमितता व पेडू की सुजन,दिल की धड़कन के तीव्र होना या अति मंद हो जाना,फेफड़ो का क्षय रोग,जिगर व लीवर की सुजन व दर्द आदि शरीर के अधिक भीतर भाग में होने वाले रोगों में, उदर या छाती पर मिट्टी की पट्टी बांधने से भीतरी विष धीरे-धीरे खिंच जाता है और वे प्राण घातक रोग अच्छे हो जाते है |

पेट दर्द,कब्ज़, आँतों का दाह, पेचिश, जलोदर आदि के लिए पेट पर मिट्टी का लेप लगाकर बांधने से बहुत फायदेमंद साबित होता है | फुंसी, फोड़ा,जख्म, गाँठ, गिल्टी, नासूर, सुजन, खुजली, दाद, दर्द आदि के लिए उस स्थान पर मिट्टी बंधनी चाहिए जहाँ तकलीफ हो | मसूढ़ों के दर्द में गाल के ऊपर आस-पास मिट्टी बांधनी चाहिए |


जहरीले जानवर के काटे हुए स्थान पर मिट्टी की टिकिया या लेप तुरंत फायदा पहुंचाती है | बर्र, बिच्छु, ततैया,मधुमक्खी, कनखजूरा, चूहा,मेढक,छिपकली , मकड़ी,कुता, बन्दर आदि के काट लेने पर उस स्थान पर मिट्टी की टिकिया बांध देनी चाहिए, दर्द शीघ्र बंद हो जाएगा और जहर नहीं चढ़ने पायेगा |


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Aug 10, 2010

Forever Lean™


चलिए आज आपके साथ हम चर्चा करते है वर्तमान समय की ज्वलंत समस्या " मोटापा" जी हाँ ज्यादातर लोगों की परेशानी है बढ़ते वजन | तो किस तरह से आप अपने वजन को नियंत्रण में रख सकते है | फॉर एवर लिविंग प्रोडक्ट्स ने एक नया उत्पाद शामिल किया है जो आपके वेट को नियंत्रण में रख सकता है | जिसका नाम है "फॉरएवर लीन" |
"फॉरएवर लीन" दो ऐसी क्रांतिकारी सामग्रियों को इकठ्ठा करती है , जो शरीर को वसा और कार्बोहायड्रेट से कैलोरीज का शोषण कर वजन घटाने में मदद कर सकती है |

इन सामग्रियों में से सबसे पहली बहुत अनूठी,वसा सोखने वाला फाइबर है, जिसे कैक्टस के पौधे, ओपेन्शिया फिकस-इंडिका से निकाला जाता है , इसे इंडियन फिग, नेपाल या प्रिकली पेयर के नाम से भी जाना जाता है | शोधों से पता चला है की इस अनूठे फाइबर में पौधों के अन्य प्रकारों की तुलना में वसा को जोड़ने की अत्यधिक क्षमता है |


फॉरएवर लीन का दूसरा अनूठा घटक है फेसोलस बल्गारिस पौधे से खास तौर पर निकला गया प्रोटीन, इस पौधे को ह्वाईट किडनी बिन्स के नाम सभी जाना जाता है | यह प्रोटीन स्टार्च को शर्करा में बदलने वाली एंजाइम क्रिया को अस्थायी रूप से रोककर शरीर द्वारा छोटी अंत में शर्करा के शोषण को धीमा करने का काम करता है |

ये दोनों नए क्रन्तिकारी घटक मिलकर आपकी शरीर की वसा एवं कार्ब की शोषण प्रक्रिया को धीमा कर आपको अपने आदर्श वजन के लक्ष्य को पाने में मददगार हो सकते है |


फॉरएवर लीन में क्रोमियम ट्रायक्लोराइड है | क्रोमियम बहुत ही महत्वपूर्ण ट्रेस मिनरल बन जाता है जो जी. टी. ऍफ़. ( ग्लूकोज टालरेंस फैक्टर ) का सह घटक की तरह काम करके रक्त में शर्करा को नियंत्रित करने की शरीर की कुदरती क्षमता में मदद करता है | यह खास तौर पर सामान्य चयापचय के लिए महत्वपूर्ण है |

इस पूरक का अधिकतम प्रभाव पाने के लिए, यह याद रखना जरुरी है कि आपको अपने वजन के लक्ष्य को पाने और बरक़रार रखने के लिए अपने समग्र वजन नियंत्रण कार्यक्रम में पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम को शामिल करना पड़ेगा |

OTHER INGREDIENTS :-
Geletin, Water, Microcrystalline Cellulose, Stearic Acid, Croscarmellose Sodium, and Silicon Dioxide.


इस कैप्सूल को भोजन या नाश्ता करने से तुरंत पहले एक दिन में चार कैप्सूल तक पानी के साथ लें | एक डिब्बा में 120 कैप्सूल होते है |

> यह न्यूट्री-लीन वेट मनेजमेंट का अभिन्न अंग है |
> क्लीन 9 और न्यूट्री-लीन के अन्य घटकों के साथ मिलकर सम्पूर्ण कार्यक्रम के रूप में लिए जाने पर बेहतरीन नतीजे देती है |
> वसा और कार्बोहाईड्रेट्स कि कैलोरीज के शोषण को रोकने में मदद करती है |
> शर्करा कि कैलोरीज के शोषण को अस्थायी रूप से रोकती है |
> क्रोमियम शरीर को सामान्य चयापचय से रक्त शर्करा नियंत्रित करने में मदद करता है |
Forever Living Products - Forever Lean™
PRODUCT CODE# 289 CC 0.195 MRP 2118.67

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Aug 9, 2010

स्वस्थ्य आहार सेहत की पहचान


वर्तमान समय में लोगों की व्यसत्ता के कारण सभी जंक फ़ूड कंपनियों की मौज हो रही है | कुछ तो लोगों की मज़बूरी और कुछ जीभ के स्वाद के कारण फास्ट फ़ूड जैसे बर्गर , पिज्जा, चिप्स, तली-भुनी चीजों, चाकलेट,पेस्ट्री-केक, और कोल्ड ड्रिंक में अपनी रूचि बढ़ाने लगे है | पर क्या शरीर के लिए ये भोजन स्वस्थ यानि हितकर है ? बिलकुल नहीं ! यह हमारे शरीर में बिभिन्न प्रकार के समस्या पैदा करते है | सही कारण है लोगों की तनावपूर्ण जिन्दगी ओर उचित खान-पान के आभाव |

स्वस्थ्य शरीर के लिए हमें स्वस्थ्यप्रद आहार की जरुरत होती है | स्वस्थ्य शरीर पर ही चेहरे की खूबसूरती निर्भर करती है | सिर्फ सौन्दर्य प्रसाधनों से ही शरीर सुन्दर नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए सबसे जरुरी है आहार में पौष्टिकता का होना | संतुलित भोजन न केवल आपकी सेहत के लिए लाभप्रद है , बल्कि यह आपकी त्वचा के लिए भी फायदेमंद है |

वैसे तो त्वचा को नुकसान पहुँचाने कई कारण होते है | पर अधिकांश परिस्थितियों में अस्वस्थ त्वचा के लिए उचित खान पान ही उतरदायी होता है | भोजन की अनियमितता तथा पौष्टिकता की कमी का सीधा प्रभाव हमारी त्वचा पर पड़ता है जो लोग फल ,हरी सब्जियां प्रचुर मात्रा में लेते है उनकी त्वचा जवान ओर चमकदार रहती है | अतः स्वस्थ्य त्वचा पाने के लिए संतुलित व ताजे भोजन को अपनी आदत में शामिल करना जरुरी है |

खाने में रेशेदार चीजों को अपने भोजन में शामिल करें | ये रेशे अंकुरित अनाज , सब्जियों, फलों में काफी प्रचुर मात्र में होते है | उनसे पाचन क्रिया ठीक रहती है | शरीर के लिए जरुरत विटामिन्स व खनिजों भी फलों व सब्जियों में अधिकांशतः मिल जाता है | विटामिन्स और हमारे शरीर के बिच बहुत ही गहरा सम्बन्ध है | सभी विटामिन्स का हमारी त्वचा व सौन्दर्य पर प्रभाव पड़ता है |


विटामिन्स ए से त्वचा चमकदार व खिली खिली रहती है | नाख़ून ,बाल,हड्डियों और दन्त मजबूत होते है | मुहांसे से बचाव रहता है | यह दूध,क्रीम,दही,मक्खन,पनीर,अंडा,मछली,मुर्गी के गोश्त,पीले फलों और हरी पतेदार सब्जियों से कैरोटिन के रूप में प्राप्त किया जा सकता है | शरीर के लिए ओक्सिजन का होना जरुरी है , ठीक उसी प्रकार से त्वचा के लिए विटामिनस का होना जरुरी है |



विटामिन्स बी के सेवन से त्वचा स्वस्थ्य रहती है | बालों का झाड़ना रुक सकता है | आँखें स्वस्थ्य रहती है | यह हरी पतेदार सब्जियों, चाबल, आंटा, अंडा, मछली,दूध, दही,केले आदि से प्राप्त किया जा सकता है |
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विटामिन सी की कमी से असमय झुर्रियों का सामना करना पड़ता है | इससे बचने के लिए साइट्रस फलों का सेवन बेहतर होता है जैसे संतरा,मौसमी,निम्बू,आंवले का सेवन बेहतर होता है | इसके अलावा सेब, पपीता,अन्नानास,टमाटर,अंगूर, शकरकंद, शलजम,गाजर आदि इस विटामिन्स के अच्छे स्त्रोत है |



उम्र बढ़ने के साथ-साथ विटामिन इ की आवश्यकता होता है ऐसा त्वचा विशेषज्ञों का मानना है | यह त्वचा की चमक बरक़रार रखते है | इसकी कमी से त्वचा प्राकृतिक चमक खो कर झुर्रीदार, धब्बेदार हो जाती है | अतः अपने खाने में मूंगफली, काजू, बादाम, खजूर, नारियल पानी आदि अवश्य शामिल करें |


आपके शरीर के लिए पारम्परिक भोजन प्रणाली ही उचित है | उसमे ज्यादा बदलाव की जरुरत नहीं है | खाने में ज्यादा साबुत आनाज ,ताजे फल,मौसमी फल,सब्जियां जो हमारे शरीर की जरुरत को ज्यादा बेहतर तरीके से पूरा करते है | रोजाना ४५ मिनट का व्यायाम करें | तनाव मुक्त रहे और भरपूर नींद साथ में बेहतर जरुरी है |


पानी त्वचा के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधि है |
यह न केवल आपको ताजगी देता है,बल्कि त्वचा को आभा भी प्रदान करता है इसलिए अधिक से अधिक पानी पियें | पानी का अहम् काम शरीर से विषैले तत्वों को बहार निकलना है | पानी शरीर में उर्जा का संचार करता है | आज के जीवनशैली के लिहाज से पानी का महत्व और अधिक बढ़ जाता है |

खाना खाने से पहले कितना भी पानी पी सकते है | खासतौर पर वजन काम करने में जुटे लोगों के लिए यह फायदेमंद होता है | खाना खाने से पहले पानी पिने से भूख कम लगती है | खाने के बाद अगले ४५ मिनट तक पानी न पिने की कोशिस करें |

एक महत्वपूर्ण जानकारी जो शरीर से विश्हरण के लिए जरुरी है वो है एलोवेरा , नित्य सेवन करें और जिन्दगी भर सुखी व निरोग रहें | सुबह खली पेट ६० ml तक पिए और पेट के बीमारी जैसे गैस,कब्ज़ से लेकर बिभिन्न प्रक्रार के असाध्य रोग से मुक्ति पायें | यह मानव जाती के लिए अमृत तुल्य है |
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Aug 7, 2010

वेट मैनेजमेंट से बढ़ते वजन पर अंकुश लगाये !


मोटापा यानि की बढ़ते वजन की समस्या वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या है | विकृत जीवनशैली व डिब्बा बंद खान-पान का ज्यदा स्वाद लेना , अधिक मात्रा में खाते रहना, हर वक्त कुछ न कुछ खाते रहना , दिन भर बैठे-बैठे काम करना, शारीरिक श्रम कम करना,व्यायाम न करना,आलसी प्रवृति का होना, दिन में सोना,ज्यदा तेलिय आहार का सेवन करना,मांसाहार तथा अंडा का सेवन करना, वंशानुगत प्रभाव, व हार्मोनल असंतुलन आदि कारणों से शरीर में चर्बी बढ़ने को मोटापा कहते है | एक बार मोटापा आ जाय दो दूर करना कठिन हो जाता है इस तरह मोटापा सौन्दर्य के साथ-साथ सेहत का भी दुश्मन है |

तो आइये आज हम आपके साथ चर्चा करते है वेट मैनेजमेंट की महत्व के बारे में :-
आज, पहले से कई गुना ज्यादा लोग अपने वजन और स्वस्थ जीवनशैली जीने के प्रति जागरूक हो गए है , वेट मैनेजमेंट का मतलब है अपने शरीर के वजन को स्वस्थ्य स्तर में रखना, जब वजन को नियंत्रण करने की बात है, तब नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार महत्वपूर्ण है, वेट मैनेजमेंट योजना इस पर निर्भर करती है की आपका वजन स्वस्थ्य स्तर से ज्यादा हा या कम !

आदर्श वेट मैनेजमेंट के लिए सुझाव :- अपने वजन का सफलतापूर्वक प्रबंधन के लिए, इस बुनियादी दिशानिर्देशों का पालन करें :-
> पौष्टिक, संतुलन आहार अपने जीवन शैली में आपनाए !
> अपना मनचाहा वजन बनाए रखने के लिए अपने आहार को अपनी शारीरिक गतिविधि के साथ संतुलन करें !
> जीवनशैली में स्थायी तौर पर बदलाव को प्रोत्साहन देने के लिए अपने खाने की आदतों को धीरे-धीरे ठीक करें !
> शराब पिने से बचना चाहिए , चुकी वजन बढ़ाने में बहुत ही सक्रीय भूमिका निभाती है !
> अपने व्यस्त कार्यक्रम और भागमभाग वाली जीवनशैली के साथ सही सेहत बनाए रखना बहुत ही मुश्किल काम है ! कुछ लोग आज के तेजी से भागते जीवन में आहार का पालन कर पाना नामुमकिन काम मानते है !
> तो आप किसे आदर्श आहार मानेगे? इसका स्वाद बढ़िया होना चाहिए, पालन करने में आसन होना चाहिए, शक्ति के स्तर बढाने वाला होना चाहिए और उससे आपका वजन पर जरुर नियंत्रण होना चाहिए यानि घटना चाहिए !

आपके के लिए अच्छी खबर यह है की फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स ने कठोर और अनुशासित आहार कार्यक्रम को बनाने और पालन करने में शामिल सभी काम अपने जिम्मे ले लिए है | हम आपको वेट मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स का रेंज पर आगे विस्तृत जानकारी देंगे जो आपके वेट मैनेजमेंट लक्ष्य हासिल करने में सहायक होगा !

ये कार्यक्रम इस धारणा पर आधारित है की आप कितना खाते है, इस बात से फर्क नहीं पड़ता बल्कि इस बात से फर्क पड़ता है की आप क्या खाते है? कार्यक्रम के दिशानिर्देशों का पालन करें और आपके शरीर को उर्जा उत्पन्न करने, विकास को बढ़ावा देने, आपके शरीर की हर प्रणाली के स्वस्थ्य विकास और उचित कार्यों के लिए आवश्यक सभी कार्बोहायड्रेट, विटामिन्स, खनिज पदार्थ और प्रोटीन मिलेंगे !

यदि आप फिट रहना चाहते है या यदि आपने अपना आदर्श वजन हासिल करना चाहते है या संतुलित मांस-पेशियाँ बनाना चाहते है तो वेट मैनेजमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले ! इस कार्यक्रम में स्वस्थ्य, पौष्टिकता से भरपूर आहार का स्त्रोत शामिल होता है जिससे आपको वजन घटाने में मदद मिल सकती है !

हमारे वेट मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स में एलो वेरा जेलस, फॉरएवर गर्सिनिया प्लस, फॉरएवर लाईट शेक्स और फॉरएवर लीन का समावेश है ! हमारे कार्यक्रम को और भी आसान बनाने के लिए , हमने अपने बेहतरीन वेट मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स को अपने कुछ पौष्टिक पूरकों के साथ कोम्बो पैक्स कर दिया है, इसका पालन करने के निर्देश भी आसान है जो आपको आपके आदर्श वजन की ओर ले जायेंगे !
अगले अंश में हम इसे सम्बंधित एक-एक करके सारे उत्पाद के बारे में चर्चा करेंगे तब तक पढ़ते रहिये और अगर, कोई किन्तु-परन्तु मन में हो तो आप जरुर बात करें |

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Aug 3, 2010

आँवला शरीर के लिए अमृत तुल्य |


चिक्तिसा परामर्श हेतु हमसे संपर्क करने वालो में सर्वाधिक संख्या उन रोगियों की होती है जो उदर रोगों से पीड़ित होते है - जैसे अपच,भूख न लगना, गैस, एसिडिटी और सबसे मुख्य रोग कब्ज़ | अनियमित दिनचर्या और अनुचित आहार-विहार के अलावा मानसिक तनाव, नाना प्रकार के कारणवश होने वाली चिंता का सीधा प्रभाव नींद और पाचन संस्थान पर पड़ता है और व्यक्ति अनिद्रा तथा अपच का शिकार हो जाता है और इस स्थिति का निश्चित परिणाम होता है कब्ज़ होना | कब्ज़ कई व्याधियों की जड़ होती है जिसमे बवासीर, वात प्रकोप, एसिडिटी, गैस और जोड़ों का दर्द आदि व्याधियां कब्ज़ के ही देन होती है |

तो आज मैं चर्चा करने जा रहे है जिसमे सारे रोगों को दूर करने की शक्ति है,जो की ठंढी प्रकृति का है तथा इसकी विशेषता यह है की सूखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते | इसे आप हरा या सुखा किसी भी रूप में खाकर इसके सामान गुण का लाभ उठा सकते है | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ आयुर्वेद में मशहूर बनौषधि जिसका नाम है " आँवला"

संस्कृत में आँवले को अमरफल, आदिफल, आमलकी , धात्री फल आदि नामों से पहचाना जाता है | लेतीं नाम :- एम्ब्लिका ओफिसिनेलिस( Emblica officinalis )

आँवला सर्दी की ऋतू में ताजा मिलता है | नवम्बर से मार्च तक अवाला ताजा मिलता रहता है | जनवरी-फ़रवरी में आवला अपने पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है |

जो आंवला आकर में बड़ा होता हो, गुदे में रेशा नहीं हो, बेदाग और हलकी-सी लाली लिए हुए हो, वह आँवला सबसे उत्तम होता है | वैसे सर्दियों में ही इसका मुरब्बा, अचार, जैम आदि बनाए |


आँवले में विटामिन- सी ( "C") पाया जाता है | एक आँवले में विटामिन- सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है | इसलिए यह शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति में महत्वपूर्ण है | विटामिन-सी की गोलियों की अपेक्षा आँवले का विटामिन-सी सरलता से पच जाता है |

आँवले में पाए जाने वाले कार्बोहायड्रेटस में मुख्य है रेशेदार 'पेक्टिन' | यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है | यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है |यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है |


आँवले में ५८ मि .ग्रा. कैलोरी, ०.५ मि .ग्रा. प्रोटीन, ५० मि .ग्रा. कैल्सियम, १.२ मि .ग्रा. लोहा, ९ मि .ग्रा. विटामिन , ०.०३ मि .ग्रा. थायोमिन, ०.०१ मि .ग्रा. रिबोफ्लोविन, ०.२ मि .ग्रा. नियासिन, ६०० मि .ग्रा. विटामिन-सी |

आँवले के गुद्दे में जल ८१.२ प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट १४.१ प्रतिश, खनिज लवण ०.7 प्रतिशत, रेशा ३.४ प्रतिशत, वसा ०.१ प्रतिशत और फास्फोरस ०.०२ प्रतिशत होता है | आँवले में कई विटामिन होते है , जिनमे प्रमुख है - विटामिन -सी, यानि स्कार्बिक एसिड | आँवले में गेलिक एसिड, टैनिन और आल्ब्युमिन भी मौजूद होते है |


कब्ज़ में आँवला रात को एक चम्मच पिसा हुआ पानी या दूध के साथ लेने से सुबह शौच साफ़ आता है , कब्ज़ नहीं रहती | इससे आंते और पेट हलकी और साफ़ रहता है |

आंतरिक शक्ति बढ़ने वाली औषधियों का प्रधान घटक आँवला ही है | आँवले में एक रसायन होता है, जिसका नाम सकसीनिक अम्ल है | सकसीनिक अम्ल बुढ़ापे को रोकता है और इसमें पुनः यौवन प्रदान करने की शक्ति भी होती है | इसमें विद्यमान विभिन्न रसायन बीमार और जीर्ण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में अपना अच्छा योगदान देते है |


आँवले के नियमित सेवन से नेत्रज्योति और स्मरणशक्ति बढती है | यह गर्भवती महिला के लिए हितकर है | इससे ह्रदय की बेचैनी, धड़कन, मेदा, रक्तचाप,दाद आदि में लाभदायक है |

मधुमेह के रोगीओं के लिए :- सूखे आँवले और जामुन की गुठली समान मात्रा में पिस ले | इसकी दो चम्मच नित्य प्रातः भूखे पेट पानी के साथ फंकी लें | मधुमेह में निश्चित तौर पर फायद होगा | मधुमेह रोगीओं के लिए आँवले का ताजा रस लाभप्रद होता है | इसके सेवन से रक्त में शक्कर बनाना कम हो जाता है | आँवला पाउडर १ चम्मच दो बार पानी या दूध के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है |

वैसे तो आंवले शरीर के सम्बंधित अधिकांश रोगों से लड़ने में कारगर है , परन्तु मैं यहाँ कुछ रोग जो वर्तमान में ज्यादा लोग ग्रसित है उसके बारे में बताते है :-

उच्च रक्तचाप :- आँवले में सोडियम को कम करने की क्षमता होती है | इसलिए रक्तचाप के रोगी के लिए आँवले का उपयोग लाभदायक है | यह रक्त बढाने और साफ़ करने में सहायक है तथा इससे शरीर को आवश्यक रेशा मिलता है |

ह्रदय एवं मस्तिस्क की निर्बलता :- आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का रस ३५ ग्राम पानी में मिलकर पी लें, फिर आधा भ्जोजन करें | इस पारकर २१ दिन सेवन करने से ह्रदय एवं मस्तिस्क की दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है | स्मरण-शक्ति बढती है |

कोलेस्ट्रोल , ह्रदय रोग से बचाव :- एक चम्मच आँवले की फंकी नित्य लेने से ह्रदय रोग होने से बचाव होता है | कच्चे हरे आँवले का रस चौथाई कप, अध कप पानी, स्वादानुसार मिश्री मिलकर पीते रहने से कोलेस्ट्रोल कम होकर सामान्य हो जाता है , जिससे ह्रदय रोग से बचाव होता है |

सुन्दर संतान :- नित्य एक आँवले का मुरब्बा गर्भावस्था में सेवन करते रहने से मान स्वस्थ्य रहती हुई सुन्दर, गौरवर्ण संतान को जन्म देगी |

नेत्र-ज्योतिवर्धक :- एक कांच का गिलास पानी से भरकर नित्य रात को उसमे एक चम्मच पिसा हुआ आँवला दल दें | प्रातः बिना हिलाए आधा पानी छानकर उससे नेत्रों को धोये तथा बचा हुआ आधा पानी आँवले सहित पियें | इस तरह लगातार चार महीने सेवन करने से नेत्र ज्योति बढ़ जाएगी |

हस्त-मैथुन :- हस्त-मैथुन से धातु पतली हो गई हो तो , सबसे पहले मेरा युवकों को सलाह है की हस्त-मैथुन की आदते छोड़ दें | इस तरह से लोग अक्सरहा शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार की दुर्बलता का शिकार हो जाते है फिर निम् हाकिम के चक्कर में फंसते जाते है | इसलिए ऐसी कोई परेशानी हो तो आप सही चिकित्सक के पास जाए और उचित परामर्श लें | यहाँ आप आँवले तथा हल्दी को समान मात्रा में पीसकर , घी डालकर सकें और भुने | सिकने के बाद इसमें दोनों के वजन के बराबर पीसी हुई मिश्री मिला ले | एक चाय की चम्मच भरकर सुबह-शाम गर्म दूध से फंकी ले तो धातु दुर्बलता दूर होगा |

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रोगहर पौधा एलो वेरा का एक झलक


प्रातः कालीन व्यायाम के पश्चात् शारीरिक स्फूर्ति और तरो-ताजगी के साथ सोचा कुछ देर अंतरजाल पर भी बिताया जाय |फिर सोचने लगे की आज कौन से विषय पर चर्चा की जाय ? अचानक मानस पटल पर एलो पौधा के बारे में चित्रित होना शुरू हो गया , चुकी यह पौधा है ही इतना अद्भुत की इसके बारे में जितना चर्चा किया जाय कम ही लगता है |

इस महान बनौषधि के बारे में 5000 सालों से दुनिया के जाने माने पवित्र ग्रन्थ में भी उधृत है | "रोगहर एलोवेरा" के नाम प्रसिद्द पौधों की कथाएँ कई शताब्दियों से पीढ़ी दर पीढ़ी बताई जा रही है | इतिहास का शायद यही एक मात्र पौधा, है जिसके बारे में सबसे ज्यादा चर्चा की गई है लेकिन जिसे सबसे कम समझा गया है | प्राचीन ग्रीक्स,रोमन्स,बेबिलोनियंस,भारतीय और चाइनीज ने एलो वेरा को औषधीय पौधे की तरह इस्तेमाल किया है |

एलोवेरा के कुदरती रोगहर औषधीय के कारण लोग इसे भिन्न-भिन्न प्रकार के नाम से बुलाते है | कुछ लोग इसे डॉक्टर प्लांट , कुछ इसे भुत भागो पौधा , चमत्कारी और कुछ इसे घर का वैद्य भी कहते है | अब आप सोच रहे होंगे की ये भुत भागो से क्या मतलब है? दरअसल इस पौधे की खाशियत है की अगर आप इसे अपने घर के आस पास गमले में ,दरबाजे पर,या अपने बेड रूम में लगाया हुआ है तो इससे आप बाहरी प्रदुषण से सुरक्षित रहेंगे | चुकी एलो पौधा अपने जीविका के लिए वातावरण में उपस्थित पदार्थ को ग्रहण करता है | मान लीजिये आपके आस पास प्रदुषण है तो वो सबके सब एलो पौधा अपने पतों के अन्दर खीच लेता है, फलस्वरूप आपके घर बिलकुल प्रदुषण रहित रहेगा |

वैसे एलोवेरा के उपयोग के सबूत सबसे पहले प्राचीन इजिप्शियनों से मिला है | यहाँ तक की सिकंदर महान की सेना ने यमन में सोकोट्रा टापू पर कब्जा के लिए एक लड़ाई भी लड़ी थी जहाँ एलो पौधों से अपने लड़ाकू सैनिक के घाव को ठीक करता था | क्लेयोपेट्रा से लेकर महात्मा गाँधी तक कई लोगों ने इस बनौषधि एलो पौधा को अपने जीवनी में लिखा है | इसे कुदरत का "साइलेंट हीलर" कहा जाता है |

कुछ महान लोगों ने अपने तरह से कई और भी नाम दिए है जैसे :-(Potted physician, Wand of Heaven, Wonder Plant, Heaven's Blessing and Plant of Life. )


कई शताब्दियों पहले एलो वेरा के बारे में लोगों की सिमित समझ और सिमित पहुँच को बहुत पीछे छोड़ आज, इसने काफी लम्बा सफ़र तय कर लिया है | वर्तमान में इसके उपयोगों और लाभों के बारे में ज्यादा जागरूक है और इसे अनेक पौष्टिक और रोगहर गुणों के लिए उपयोग करते है |

आज का कुदरती औषधीय पौधों में एलो सर्वोच्च स्थान पर रखा गया है | एलो पती में २० मिनरल्स, १८ अमीनो एसिड्स और १२ विटामिन्स सहित ७५ पोषक घटक और २०० अन्य तत्व है | एलोवेरा के अंदुरीनी जेल में ८ आवश्यक एमिनो एसिड होते है जिनकी जरुरत इंसान को होती है लेकिन शरीर उसे बना नहीं सकता है |


ऍफ़ एल पी का १००% स्टेबलाईजड एलो वेरा जेल दुनिया में उपलब्ध सबसे बेहतरीन है क्योंकि हम खेतों से लेकर कारखानों तक, अनुसन्धान से लेकर विकाश तक, पैकिंग तक और परिवहन एवं वितरण तक सब कुछ नियंत्रित करते है और इस तरह से इसके पोषक के संरक्षण और सर्वश्रेष्ठ गुण के मानक बरक़रार रखते के पुष्टि करते है |

ऍफ़ एल पी में हम सुनिश्चित करते है की हम आप तक हमेशा बेहतरीन और शुद्धतम एलो वेरा- १००% स्टेबलाईजड एलो वेरा जेल प्रदान करें |

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Aug 1, 2010

कैंसर का घरेलु उपचार अलसी और पनीर से -3


आज मैं आपसे बहुत ही अहम् भाग के बारे में चर्चा करने जा रहा हूँ , की किस तरह का परहेज हमें खाने पिने में शामिल करनी चाहिए ? आइये बात करते है बुद्विज उपचार के अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु :-
1.डॉ० योहाना कीमोथेरैपी, रेडियोथेरैपी,वनस्पति घी,ट्रांस फाइट, मक्खन, घी, चीनी,मिसरी,गुड़,रिफाइंड तेल,सोयाबीन व सोयाबीन से निर्मित दूध आदि, प्रिजर्वेटिव,कीटनाशक,रसायन,सिंथेटिक,कपड़ों,मच्छड मारने के स्प्रे ,बाजारमें उपलब्ध खुले व पेकेट बंद खाद्य पदार्थ, अंडा, मांस, मछली,मुर्गा, मैदा अदि से पूर्ण परहेज करने की सलाह देती थी |

2.इस उपचार में यह बहुत आवश्यक है कि प्रयोग में आने वाले सभी खाद्य पदार्थ ताजा, जैविक और इलेक्ट्रोन युक्त हों| बचे हुए व्यंजन फेंक दे |

3.अलसी को जब आवश्यकता हो तभी पिसे | पीसकर रखने से ये ख़राब हो जाती है तेल को तापमान (४२ डिग्री सेल्सियस पर ख़राब हो जाती है ) , प्रकाश व ओक्सीजन से बचाएं | यानि आप इसे गहरे रंग के पात्र में भरकर डीप फ्रिज में रखें |

4.दिन में कम से कम तिन बार हरी या हर्बल चाय लें |

5.इस उपचार में धुप का बहुत महत्व है थोड़ी देर धुप में बैठना है या भ्रमण करना है जिससे आपको विटामिन डी प्राप्त होता है | सूर्य से उर्या मिलेगी |

6.प्राणायाम, ध्यान व जितना संभव हो हल्का फुल्का व्यायाम या योग करना है |

7.घर का वातावरण तनाव मुक्त,खुशनुमा,प्रेममय,आध्यात्मिक व सकारात्मक रहना चाहिए | आप मधुर संगीत सुने, खूब हँसे,खेलें-कूदें, क्रोध न करें |

8.पानी स्वच्छ व फ़िल्टर किया हुआ पियें |

9.अपने दांतों कि पूरी देखभाल करें | दांतों को इन्फेक्सन से बचाना है |

10.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उपचार को जैसा ऊपर विस्तार से बताया गया है वैसे ही लेना है अन्यथा फायदा नहीं होता है |

इसके साथ ही कुछ और भी परहेज है जो निचे दिया जा रहा है :-
चीनी, गुड़ या मिसरी, अंडा,मुर्गा,मांसाहार,मछली, तली हुई चीजें, बेकरी खाद्य, घी, मक्खन, वनस्पति, वसा पूर्ण या आंशिक रिफाइंड तेल,चिप्स व कुरकुरे, नमकीन, पिज्जा, बर्गर ( जंक व फास्ट फ़ूड), बसी भोज्य पदार्थ, सोफ्ट ड्रिंक्स,शराब, मच्छड के स्प्रे, धुम्रपान, तम्बाकू, सिंथेटिक कपडे, फोम के गद्दे, क्रोध, मानसिक तनाव, रेडियोथेरैपी , टीवी,मोबाइल,कीमोथेरैपी आदि |

आप सोच रहे होंगे कि डॉ० योहाना की उपचार पद्धति असरदायक व चमत्कारी है तो यह इतनी प्रचलित क्यूँ नहीं है ? यह वास्तव में इंसानी लालच की पराकाष्ठ है | दरअसल डॉ० योहाना के पास अमेरिका व अन्य देशों के डाक्टर मिलने आते थे, उनके उपचार की प्रसंशा करते थे और उनके उपचार से व्यावसायिक लाभ उठाने हेतु आर्थिक सौदेबाजी की बात करते थे जो उन्हें बिलकुल पसंद नहीं |


जरा ठहरिये और सोचिये अगर कैंसर के सारे रोगी अलसी के तेल और पनीर से ही ठीक होने लगते तो कैंसर की महंगी दवाइयों व रेडियोथेरैपी उपकरण बनाने वाली बहुराष्ट्रिय कंपनियों का कितना बड़ा आर्थिक नुकसान होता |

इसलिए उन्होंने किसी भी हद तक जाकर डॉ० योहाना के उपचार को कभी भी आम आदमी तक नहीं पहुँचने दिया | मेडिकल पाठ्यक्रम में उनके उपचार को कभी भी शामिल नहीं होने दिया | उनके सामने शर्त रखी गई थी की नोबेल पुरस्कार लेना है तो कीमोथेरैपी व रेडियोथेरैपी को भी अपने इलाज में शामिल करों, जो डॉ० योहाना को कभी भी मंजूर नहीं था |
यह हम पृथ्वीवासियों का दुर्भाग्य है की हमारे शरीर के लिए घातक व बीमारियाँ पैदा करने वाले वनस्पति घी के निर्माता पाल सेबेटियर और विक्टर ग्रिग्नार्ड को 1912 में नोबेल पुरस्कार दे दिया गया और कैंसर जैसी बीमारी के इलाज की खोज करने वाली डॉ० योहाना नोबेल पुरस्कार से बंचित रह गई |

क्या कैंसर के उन करोड़ों रोगियों, जो इस उपचार से ठीक हो सकते थे, कि आत्माएं इन लालची बहु राष्ट्रिय कंपनियों को कभी क्षमा कर पाएंगी?

लेकिन आज हमारे पास यह जानकारी है और हम इसे कैंसर के हर रोगी तक पहुँचाने का संकल्प लेते है | डॉ० योहाना का उपचार श्री कृष्ण भगवन का वह सुदर्शन चक्र है जिससे किसी भी कैंसर का बच पाना मुश्किल है |
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