" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Feb 5, 2010

एलोवेरा (फ.ल.पी ) एक संजीवनी है असाध्य रोगों के लिए |



यह घटना कोई डेढ़ साल पहले की है ,मेरे ख्याल से वो जून 2008 का महीना था | कार्यालय के काम से मैं अपने एक मित्र के साथ बाज़ार जा रहे थे | रास्ते में मेरे एक परिचित मिला जो जमशेदपुर से आये हुए थे | उनके साथ मेरी बातचीत होने लगी और जब पता चला तो मैं सन्न रह गया |

कुछ देर की वार्तालाप के उपरान्त उनकी आँखे भर आई | दरअसल वो एक जवान पुत्र के पिता थे जिनका उम्र लगभग 24 साल था | अपने पुत्र के भविष्य को लेकर वो बहूत ज्यादा हताश और निराश थे क्यूंकि उनको मौथ केंसर था | चुकी कुछ समय पहले ही उनका ओपरेसन हुआ था और फिर कई बार रेडिएसन और कीमोथेरेपी भी हो चुका था | वो भी दिल्ली में अपनी पहचान बना चुकी जो अस्पताल है जिनका नाम है बत्रा हॉस्पिटल |

पर हालात में परिवर्तन के वजाय अत्यधिक चिंताजनक और परेशानियाँ अपितु पहले से कहीं बहुत ज्यादा महसूस करने लगे थे | जब मैंने उनकी थडथडात्ती जुवान और आँखों में छलकती हुई आंसू देखा तो मेरी भी आंखे नाम हो गई आखिर हो भी क्यूँ नहीं क्यूंकि वो कार्यरत थे जमशेदपुर ,पर निवाश स्थान उनका था दरभंगा | रिहाइश उनका मेरा ज्यादा दूर नहीं था सो मैंने कहा श्रीमान जी आप चिंता ना करें |

हमारे कम्पनी के पास कुछ ऐसा उत्पाद है जो इस तरह के असाध्य रोग पर अचूक और बहूत तीब्र गति से काम करती है | मैं उनके साथ उनके निवाश स्थान पर गया | मरीज को देखा और मैंने सोचा की इस स्तर पर जिसको केंसर का चौथा स्तर कहते है और जहां इतने बड़े हॉस्पिटल में देख-रेख चल रहा है , भला मैं क्या कर सकूंगा |

चुकी हालात ज्यादा ही चिंताजनक था |मरीज के मुह बिलकुल अबरुद्ध था | पानी पिने में भी वो असहज महसूस करते थे , खाने के नाम से सिर्फ तरल पदार्थ मतलब जूस ही जैसे तैसे उनको चम्मच के द्वारा दिया जाता था | पर मेरे मन में एक दृढ विश्वाश और आंतरिक शक्ति था जो बता रहा था आगे बढ़ो और अपना उत्पाद दो |

मरीज को रेडियो और केमोथेरेपी से बिलकुल शरीर झुरझुर कर दिया था | चेहरा और बाल बिलकुल जला दिया था वो अजीबो गरीब परिस्थिति में था लेकिन एक बात जो महत्वपूर्ण था वह की वो जूस वगैरह पी रहा था |

फिर हमने अपने और भी सदस्य मिलकर इस मरीज के बारे में अध्यन किया फिर अपना उपचार शुरू कर दिया | शुरू के कुछ दिन में कोई खास फर्क नहीं पड़ा पर उम्मीद की किरण मेरे अंदर जाग गई क्युकी उत्पाद से उनके शरीर में कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ा | ठीक एक महीने बाद मरीज के हालात में एक थोड़ी बहूत सुधार नजर आने लगा | मरीज के मुह खुलने लगा और जूस के साथ वो दलिया भी लेने लगा |

यह देखकर ऐसा लगा की हमने आधी जंग जीत गए और देखते ही देखते कोई पाँच महीने बाद वो ब्यक्ति पूरी तरह से तंदुरुस्त हो गए | जब आखिरी बार दिल्ली आया था और AIIMS में जाँच करबाया तो उनके शरीर में इस बिमारी का कोई भी लक्षण नहीं पाया गया जिससे उनके परिवार में खुशियों की लहर छा गई |

जहां तक मेरा प्रश्न है तो मैं शुक्रगुजार हूँ फ.ल.पी के प्रोडक्ट का जिन्होंने मेरे होसले को और भी बुलंदियों पर पहुंचाया | इस तरह से मुझे लगा की मेरी जिन्दगी सार्थक हो गई ,वरना कहाँ ऐसा अवसर मिलता की आप किसी ब्यक्ति के काम आए | अंत में यही कहना चाहूँगा की फ.ल.पी. के उत्पाद एक संजीवनी की तरह काम करती है और ये चमत्कार से कम नहीं है |


उपचार में जो हमने मरीज को दिया था वो निम्नलिखित है :-
1. Aloe Vera Gel
2. Bee Propolis
3. Garlic Thyme
4. Fields Of Green
5. Pomestin Power
6. Lycium Plus
7. Royal Gelly
8. Aloevera gelly cream :- वास्तविक में यह उत्पाद चेहरे में पिम्पल, काला धब्बा ,और फेस सफाई के लिए होता है , पर हम इसे पेट में अल्सर और केंसर के मरीज को खिलाते भी है ताकि पेट के आंतरिक सुजन को जल्द से जल्द ठीक कर सकें | यहाँ के हरेक उत्पाद प्राकृतिक है , किसी भी उत्पाद का कोई दुस्प्रभाव नहीं है , यह एक तरह से साइलेंट हिलर का काम करता है जबकि बाजार का दवाई साइलेंट किलर का | चुकी 40% दवाई आजकल नकली है | इस लिए आप एलो वेरा और अगर फ.ल.पी का हो तो किसी भी प्रकार के रोग से लड़ सकते है |

एलोवेरा के कोई भी स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद 30 % छूट पर खरीदने के लिए admin@aloe-veragel.com पर संपर्क करें और ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

3 comments

Udan Tashtari February 5, 2010 at 5:41 AM

अच्छा लगा जानकार!

Ratan Singh Shekhawat February 5, 2010 at 7:44 AM

ख़ुशी हुई जानकर कि आपने एक व्यक्ति को असाध्य रोग से मुक्त करा दिया |

भारतीय नागरिक - Indian Citizen February 5, 2010 at 9:30 AM

प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक लेख.

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