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Dec 30, 2012

आत्ममंथन :- एक और महाभारत ( अंतर्मन )

आज की घटना से सम्पूर्ण राष्ट्र शर्मशार हो गई है ! वहशी व दरिन्दे लोगों की हरकत ने देश को कलंकित कर दिया ! आखिर इस तरह के रेप की घटना बार-बार क्यों होती है ? क्या कोई इसके गहराई तक जाने का प्रयास किया ? रेप घृणित कार्य का ही पर्याय है ! आखिर इतने बेख़ौफ़ होकर ये लोग मौज मस्ती के नाम पर किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती कुकर्म कर डालते है !

क्या है मानसिकता ?कौन है ऐसे लोग? क्या वो अपने ही समाज के लोग है या वो दूसरी दुनिया से आये हुए है ? है कोई जबाब ? कोई जबाब नहीं है ? जबाब होता तो इस तरह की घटना पुनरावृति कभी नहीं होती परन्तुं यहाँ बारम्बार हो रही है और होती रहेगी !

आखिर रेप करने वाले का किसीने क्या उखाड़ लिया ? पिछले साल तक़रीबन 600 से ज्यादा लोग रेप केस में पकडे गए थे ,लम्बे समय तक केस चलता रहा और बाद में सबके सब बड़ी हो गए ! कुछ केस थोडा संगीन था तो उसे हमारे ही देश की प्रथम राष्ट्रपति प्रतिभा जी ने जीवन दान दे दिया !

आजतक किसी भी रेपिस्ट को सजा मिली है जो कोई ऐसे अपराध करने के लिए एक दफा सोचने पर मजबूर हो ! उनके जहन में डर हो , की रेप करना एक अपराध है ऐसा करने से उन्हें सजा भी मिल सकती है ! इतिहास में आजतक किसी भी रेपिस्ट को कठोर सजा नहीं मिली है और यही विडंबना है इस देश की जहाँ अपराधी खुलेआम मौज मस्ती करते है ! उन्हें मालुम है उनका कानून कुछ भी नहीं कर सकता है !

कहाँ है कानून ? कहाँ है प्रशाशन ? क्या ये सब वर्तमान में ध्रितराष्ट्र की भूमिका में है ? अरे कुछ शर्म करो ! अंधे और गूंगे बनकर बैठे क्या सोच रहे हो ? और कौन सी बड़ी घटना को आमंत्रित करने की सोच रहे हो ? सरकार सचमुच में अंधी है , उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपनी फ़िक्र है , भांड में जाय प्रजा, उन्हें तो राजनैतिक लाभ हो तो फटा-फटा कदम उठा लेते है अन्यथा वो अंधे बने बैठे रहते है ! ध्रितराष्ट्र तो वास्तव में जन्मजात अँधा था परन्तु आजकी सरकार तो गांधारी बनी बैठी है उसने अपने आँखों पे काली डाल रखी है ! कुछ भी उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है !

आज हम सब इसके लिए जिम्मेदार है ! अपने देश में शर्म आ रही है की ऐसे लोगों को हमने संसद में बिठा रखा है ! ऐसे सम्बेदन हीन व्यक्ति हमारा प्रतिनिधत्व कर रहा है !अपनी आँखों पर से काली पट्टी को खोलो और जागो , सोचो देश किस ओर जा रही है ? बचाओ अपने देश को, देश की आबरू को , जो चंद मनचले लोग अपनी जायदाद समझते है ! वो कानून को अपनी रखैल से ज्यादा कतई नहीं समझते !

कौन है जिम्मेदार ? क्यों नहीं देश में सख्त कानून बन सकते ? अरे जब कानून बनाई गई थी तब शायद इस तरह के बात से वो लोग अनभिग्य थे ! क्या मालूम था की अपने देश में भी राक्षसों का समूह बसेंगे और भेडिओं के तरह हमारी माँ ,बहन,बहु ,बेटी की आबरू को सरेआम तारतार करेंगे ! शायद वो ख्वाब में भी ऐसी सोच नहीं लाये होंगे , कारण वो युग था जब स्त्री के लिए सम्मान, इज्जत दी जाती थी, उन्हें शक्ति स्वरुप मानते थे ! आज युग बदल गया है, लोग अपने घर के बहु ,बेटी, माँ,बहन को नहीं छोड़ते तो अनजान स्त्री के साथ कैसा वर्ताव कर सकते है यह घटना आपके सामने है !

आज सम्पूर्ण राष्ट्र , छोटे शहर से लेकर बड़े शहर तक लोग प्रदर्शन कर रहे है ! क्या वो सिर्फ अपने लिए मांग रहे है ? क्या उन्हें इसके बारे में खुद ठोस कदम नहीं उठानी चाहिए ? जब सार देश इन्साफ की गुहार लगा रहे है तो सरकार क्यों नहीं समझने का प्रयास करते है ! गुनाहगारों के लिए सख्त कानून का प्रावधान क्यों नहीं करते ?

क्यों डरते है सख्त कानून बनाने से ? सिर्फ समाचार चैनल पर बड़ी बड़ी बाते करने से कुछ नहीं होगा, वक्त आ गया है कुछ सोचो , इस लचर व बीमार कानून व्यवस्था को बदल दो ! जो खुद ही बीमार हो वो किसी मर्ज का भला कैसे इलाज हो सकता है ?

मत सोचो मानवाधिकार के बारे में , उन्होंने तो और हमारे देश की कानून व्यवस्था को बदल के रख डाला है ! मानवाधिकार के लोग जिसमे खासतौर पर महिला पुर्वाग्रस्त रोगी जैसे ही होती है ! वो सिर्फ गुनाहगारो को कैसे बचाया जाए ? उन्हें तो अपने देश की मान,सम्मान से ज्यादा आतंकबादी व रेपिस्ट ज्यादा अच्छे लगते है ! अब तो देश हर तबके के लोग, बच्चे,बूढ़े जबान सिर्फ सख्त कानून व्यवस्था की मांग कर रहे है ! तो सरकार के तरफ से क्या देरी हो रही है ! अबकी बारी सरकार को झुकना ही होगा !

अंत में मैं बस इतना कहना चाहूँगा की सरकार को ऐसे क्षण में कानून में परिवर्तन लाकर , रेपिस्ट को जल्द से जल्द व कड़ी से कड़ी सजा दे देनी चाहिए ताकि आने वाले लोग इस तरह के घृणित कार्य करने के लिए वो हजार दफा सोचे !

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2 comments

Ratan singh shekhawat December 30, 2012 at 7:16 AM

इसके लिए पूरी व्यवस्था जिम्मेदार है|
टी वी पर अश्लीलता, अश्लील पहनावा, लड़के लड़कियों का खुलापन
पारिवारिक माहौल और सबसे बड़ा कारण सयुंक्त परिवारों का टूटना
परिवारों के टूटने से रिश्तों में अपनत्व की कमी
न्यूक्लियर परिवारों में एकांकी जीवन
ऐसे बहुत से कारण है जो बलात्कार जैसे अपराध के बढ़ने के कारण है|

Arti Singh December 30, 2012 at 8:21 AM

बिलकुल सच , ये सब तो कारण है , जो आजके समाज का सबसे बड़ा सच है पर हमें इस बीमारी का निवारण चाहिए ! ये समाज एकांकी परिवार है और इसके पीछे भी कई कारण है जो लोगों को मजबूर करती है एकांकी जीवन जीने को , लोगों को रोजी रोटी के लिए अपने प्रदेश , घर को छोड़कर शहर की ओर आना होता है जहाँ से वो अपनी जीविका के लिए धन उपार्जन करते है !

लेकिन लोगो में कानून नाम का कोई चीज भी है , नहीं मालूम, जो जी में आये वो कर लेते है और उसका कोई कानून कुछ नहीं करता , फिर उसका हौसला बुलंद हो जाता है, पहले छोटे-छोटे बारदात को अंजाम देते फिर इस तरह का बारदात करते जिससे सम्पूर्ण राष्ट्र को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है ! कारण उसे पहले अगर रोका होता जो इस तरह के बड़े हादसे नहीं होता !!!

पर एक और सच यह है की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशाशन की होती है और उन्हें इसके लिए ही हमारे जेब से पैसा दिए जाते है ! परन्तु क्या सही मायने में वो हमारे रक्षक है , क्या हम उन लोगों के हाथ सुरक्षित है ? ये सोचने का विषय है !

लचर व पंगु कानून व्यवस्था , जिन्हें खुद जीने के लिए ओक्सिजन की जरुरत है वो क्या किसी के बारे में सोच सकती है ? हमें छोडो हमारे हाल पर पहले इस व्यवस्था व इसे जुड़े हुए लोगों को बदलने की जरुरत है ! ये बदल जाए तो पुनः देश व हमारे हालात बदल जायेगा !

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