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Jan 20, 2010

मदिरा समाज और संस्कार दोनों के लिए अभिशाप है |

कलीनतंवें क्राफ्ट ने शराब के विषय में लिखा है , " मैं आग हूँ,मैं भष्म करती हूँ और नाश करती हूँ,
मैं रोग हूँ और असाध्य हूँ,
मैं चिंता हूँ,राजाओं की चमकीली पोशाक, सजीली रानियों के रेशमी वस्त्र, धनिकों की सम्पति मेरी भूख मिटाया करते है,
मेरा नशा जब भयंकर ऊँचाई पर पहुँचता है तब में थोड़ी देर के लिए सुलगती हूँ |
अचानक मेरी ज्वाला धधक उठती है और सर्वस्व को भस्म करना शुरू कर देती हूँ, यहाँ तक की कुछ भी नहीं छोडती |
मैं अग्नि का समुद्र हूँ, कोइ जिह्वा मुझसे प्यास नहीं बुझा सकती |
मैं वो अग्नि हूँ जो कभी जल से शांत नहीं होती "|

सभी विद्वानों की आम धारणा है कि मद्यपान से बल घटता है ,पुरषार्थ कम होता है, शरीर में रोग प्रवेश करते है, आयु कम हो जाती है, शराब मांस को गला डालती है , इससे दिमाग ख़राब हो जाता है , बुद्धी नष्ट हो जातीहै|
शराब पाचनशक्ति को नष्ट करने वाली,सनक और दीवानापन लानेवाली, ह्रदय ,गुर्दा आमाशय और रक्त स्नायुओं को भीतर ही भीतर घुलानेवाली,अस्वाभाबिक रीति से रोगाणुओं को शरीर में पहुंचाने वाली है, जिससे शरीर के अवयब और ज्ञानतन्तु विकारग्रस्त हो जाते है| निमोनिया , स्वास, क्षय, शोष आदि संक्रामक रोग उत्पन्न होने लगते है |

मस्तिष्क शरीर का ऐसा अंग है, जहाँ ह्रदय, फेफड़े,ज्ञानतन्तु और रीढ़ की संचालक शक्ति स्थिर है,इसलिए जिस ब्यक्ति का मस्तिस्क ठीक तरह से काम नहीं करता, उसे लोग पागल कहते है, इस्वर ने मस्तिस्क को शरीर में इसीलिये सबसे उच्च स्थान दिया है,क्योंकि वह ज्ञान केंद्र और समस्त शरीर का पथ प्रदर्शक है, मदिरा कंठ से उतारते ही ज्ञान तंतुओं द्वारा मस्तिस्क पर प्रभाव डालती है| बस दस मिनट बाद ही वह उनमे हलचल उत्पन्न कर देती है और वह ब्यक्ति संज्ञाहीन होने लगताहै|

इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि मदिरा मस्तिष्क को दूषित कर देती है| खूब उत्तेजित होने पर वह मस्तिष्क में गर्मी,ह्रदय मैं ब्याकुलता और शरीर में भारीपन अनुभव करता है, उसका मस्तिष्क क्रियाहीन और ज्ञान तंतु दूषित हो जाते है |
कहाँ तक गिनाया जाए शराब के दुष्परिणामों को ?यह गृहस्थ सुख की नाशक , स्त्रियों पर भीषण चोट और अत्याचार कराने वाली, निर्दोष बच्चों को पटक पटक कर प्राण निकलवा देने वाली,धन दौलत और मान प्रतिष्ठा को नष्ट कर देती है| पाशविक प्रबृति उत्पन्न करने वाली इस मदिरा से बचकर रहने में ही हम सब का कल्याण है |
अगर कोई ब्यक्ति मद्यपान जैसे ब्यसन से छुटकारा पाना चाहें तो उनके लिए हमारे पास दुनिया का नंबर एक Stabilized Aloevera Gel और साथ में कुछ बेहतरीन Food supplement है , अगर तीन से छे महीना तक उपयोग करें ,और साथ में खुद में इक्षाशक्ति पैदा करें, तो उनको निश्चित ही एक दिन वो इस तरह के मद्यपान और भी किसी प्रकार के ब्यसन से अपने आपको आजाद करा सकता है |


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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

2 comments

रंजना January 21, 2010 at 2:51 PM

Sahi kaha....

Ratan Singh Shekhawat January 21, 2010 at 6:09 PM

सीख तो आपने बहुत बढ़िया दी है | आभार |

विजय माल्या का क्या होगा ?

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