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Jun 8, 2010

शाकाहार व एलो वेरा जेल से शरीर को रखें स्वस्थ्य |


भोजन शरीर की एक ऐसी आवश्यकता है जिसके द्वारा शरीर को प्रयाप्त पोषण मिलता है और व्यक्ति अपनी आयु को सुखपूर्वक भोग करता है | पहले के समस्त आहार शरीर, आयु एवं मौसम की अनुकूलता की ध्यान में रखते हुए लिये जाते थे , परिणामस्वरूप व्यक्ति स्वस्थ्य रहता था | अच्छी निद्रा लेता था और लम्बी आयु भोगता था |

कालांतर में शरीरिक क्षमता, समय तथा मौसम के बारे में चेतना विलुप्त होने लगी और मुँह का स्वाद बढ़ता गया | इसका परिणाम यह निकला की कब, कैसे, क्या और कितना खाना चाहिए, इसके बारे में सोच-विचार बंद हो गया | जब चाहा और मनचाहा खाना खाने की प्रवृति बढ़ने लगी तो परिणाम यह निकला की व्यक्ति का स्वास्थ्य ख़राब होने लगा | विभिन्न प्रकार के रोग पनपने लगे और मानव जीवन इसी दुश्चक्र में फंसता चला गया |

W.H.O ने मांसाहार से होने वाली 160 बिमारियों की सूचि तैयार की है | इन बिमारियों में मिर्गी की बीमारी प्रमुख है | यह बीमारी मस्तिस्क में रिबिपासोलियम नामक कीड़े से होती है , यह कीड़ा सूअर का मांस खाने से हो जाता है | इसी प्रकार जो जानवर गन्दा पानी-भोजन ग्रहण करते है, उनके शरीर में अनेक कीटाणु होते है | ऐसे जानवरों को खाने से मनुष्य के शरीर में अनेक रोग हो जाते है | शाकाहार मांसाहार की अपेक्षा काफी सस्ता और पौष्टिक आहार है जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है यानि आर्थिक दृष्टिकोण से भी शाकाहार अच्छा है |

नैतिकता और अध्यात्मिक दृष्टि की कसौटी पर यदि कोई भोजन खरा उतरता है तो वह शाकाहार ही है क्यूंकि मांसाहारी व्यक्ति जिन पशु-पक्षियों को अधिकतर अपना भोजन बनाता है वे पशु-पक्षी खुद ही घास-फल आदि खाकर शाकाहार से ही अपना पेट भरते है |
अतः मांसाहारी मनुष्य शाकाहारी पशु-पक्षियों को अपना भोजन बनाता है और साथ में हिंसा का भागी भी बनता है | मांसाहार छोड़ देने से कई प्रकार के बिमारियों से भी बचा जा सकता है और मूक असहाय पशु-पक्षियों पर होने वाली हिंसा को भी खत्म किया जा सकता है |

वैज्ञानिक मतानुसार मांसाहार परोक्ष रूप से जलवायु परिवर्तन और ग्रीन हाउस गैसों उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है | जलवायु परिवर्तन के क्षत्र में काम कर रहे संगठन का कहना है की मांसाहार के अधिक प्रचालन से वातावरण में कार्बनडाई औक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है |

शाकाहार ग्लोबल वार्मिंग को के बढ़ते खतरे को कम करने में सहायक है | शाकाहार या हरी सब्जियों व फलों के लिए अधिक कृषि उत्पादन होगा तो वातावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है | भूमि की उर्वरा शक्ति पेड़ों और जानवरों पर निर्भर करती है | हमें पशु-पक्षी और पेड़-पौधों दोनों का ही संरक्षण करना चाहिए न की उनका भक्षण | नहीं तो एक दिन ये पृथ्वी वीरान हो जायेगी और मनुष्य मांसाहार और शाकाहार दोनों से ही वंचित हो जायेगा |

जो व्यक्ति मांसाहार को शारीरिक शक्ति और बुद्धि कौशल के विकाश के लिए आवश्यक मानते है , वह सच्चाई और वैज्ञानिक अनुसंधानों से भलीभांति परिचित नहीं है , क्यूंकि वैज्ञानिको ने भी शक्ति को मापने के लिये शेर-चिता जैसे पशु को शक्ति मापन का साधन नहीं माना , अपितु शाकाहारी घोड़े को ही शक्ति का माप प्रकट करने के लिये चयन किया | इसी कारण वैज्ञानिक होर्स पॉवर ( Horse Power ) में ही शक्ति मापन का कार्य करते है |

सच्चाई को स्वीकार करें तो शाकाहार प्रकृति का मानव जाती के लिये सर्वोत्तम उपहार है | मनुष्य को शारीरिक शक्ति और विवेक देने के साथ ही प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाने के अद्भुत क्षमता उत्पन्न करता है |
प्रक्रति प्रदत ऐसे आहार से धरती भरी हुई है जिसके उपयोग से मनुष्य जीवन पर्यन्त शारीरिक व मानसिक रूप खुशहाल रह सकता है |
एक ऐसा ही पौधा है एलोवेरा जो वास्तविक में आज के वातावरण में स्वस्थ्य रहने के लिये नितांत आवश्यक है |"एक कहावत है पहला सुख निरोगी काया , बनी रहे यौबन की माया" |

एलो वेरा जूस आज के प्रदूषित वातावरण में स्वस्थ्य रहने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को लेना ही चाहिए, जिससे के आपके शरीर आने वाले किसी भी प्रकार के रोग से आराम से मुकाबला कर सकता है |

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"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

1 comments

Ratan Singh Shekhawat June 10, 2010 at 7:21 AM

बढ़िया जानकारी

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