" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Jun 15, 2010

किडनी ( गुर्दा ) सुरक्षित रखें एलो वेरा जेल से |


सतेन्दर सिंह राँची निवासी पेशे से स्वास्थ्य विभाग में कुष्ठ रोग के डॉक्टर है | मेरी मुलाकात सर्वप्रथम अंतरजाल के माध्यम से हुआ | उन्होंने सारे खर्च राँची आने-जाने का दिया | मैंने अपने कार्यालय से छुट्टी ली और उनसे मुलाकात के लिए निकल पड़े | अगले दिन ही सुबह-सुबह उनके यहाँ पहुँच गया |

बातचित से पता चला की उनका दोनों किडनी ख़राब हो चुकी है | जाँच में अपनी पत्नी की किडनी ( गुर्दा )मैच नहीं हो पाई | फ़िलहाल उनकी जिन्दगी डाइलिसिस के सहारे चल रही है, लेकिन महंगी प्रक्रिया होने के कारण उसकी सारी जमा पूंजी लगभग समाप्त हो चुकी है | उनके ऊपर पुरे परिवार की जिम्मेदारी है | एक जवान बेटी का अभी हाथ पीले करना बाकी है |
मौत का खौफ, परिवार के प्रति अपना कर्तव्य और आर्थिक संकट की वजह से कई बार वो रात भर रोते हुए ही गुजार देता है |


उपचार महंगा होने के कारण यह बीमारी बेलगाम होती जा रही है | देश की 90 प्रतिशत लोग इसका खर्च नहीं उठा सकती | सरकारी अनुमानों के अनुसार सालाना लगभग दो लाख लोगों की किडनी ( गुर्दा ) फेल होने के शिकायत होती है जबकि लाखों अन्य किडनी की बीमारी से ग्रस्त हो जाते है |

विशषज्ञों का कहना है की लोगों को डायबिटिज और हाई ब्लड प्रेशर के कारण (सी के डी) "क्रानिक किडनी डिजीज" की आशंका बढ़ जाती है | पिछले दो दशको में किडनी फेल के मामले बढे है क्यूंकि लोग तेजी से डायबिटिज के शिकार हो रहे है | दिल्ली व आस-पास के इलाके में कराये गए सर्वेक्षण में पाया गया है की प्रति 10 हजार लोगों में से आठ किडनी डिजीज के शिकार है | इस लिहाज से देश के करीब 78 लाख से ज्यादा आबादी इस बिमारी से ग्रस्त मानी जा सकती है |

"नेफ्रोलोजी डाइलिसिस ट्रांसप्लांटेसन" पत्रिका में प्रकाशित इस सर्वेक्षण के अनुसार डायबिटिज के शिकार 41 फीसदी, हायपरटेन्सन 22 फीसदी, क्रानिक ग्लोमेरू नेफ्राईटिस के शिकार 16 फीसदी लोगों को किडनी डिजीज का खतरा है |

जब किडनी शरीर के प्रोटीन, नाइट्रोजन, एसिड आदि को नहीं छान पाता है और जल का संतुलन नहीं कर पाता है तो शरीर में गंदगी इकट्ठी होती चली जाती है, जो किडनी ( गुर्दा ) फेल होने की निशानी है | इसके फलस्वरूप शरीर में सूजन उत्पन्न होना शुरू हो जाता है | व्यक्ति को बचाने के लिए डायलिसिस का सहारा लेना पड़ता है |



डायलिसिस एक महंगी प्रक्रिया है | किडनी ख़राब व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम दो या तिन बार डायलिसिस करानी होती है | इस पुरे प्रक्रिया पर महीने में तक़रीबन 15 से 25 हजार तक का खर्च आ जाता है | डायलिसिस मशीने भी विदेशों से आयत किया जाता है, जबतक इसका निर्माण भारतीय कम्पनियाँ शुरू नहीं करेगी, तबतक इलाज सस्ता होना मुश्किल है | इसके लिए हमारे देश की सरकार को प्रयास करने के जरुरत है ताकि अपने ही देश की कम्पनियाँ डायलिसिस के उपकरण का निर्माण कर सके |

जापान जैसे देश में डायलिसिस की प्रक्रिया अपने देश के अपेक्षा सस्ती है , बल्कि लोग वहां प्रतिदिन डायलिसिस कराते है |अधिक और गुणवतापूर्ण डायलिसिस से व्यक्ति की उम्र बढ़ जाती है | डायलिसिस पर रहने वाला व्यक्ति 5 से लेकर 25 वर्ष तक जीवित रह सकता है | भारत में जिस तरह से किडनी की बीमारी बढ़ रही है और प्रत्यारोपण के लिए डोनर नहीं मिल रहा है , उसे देखते हुए डायलिसिस को लोकप्रिय बनाने की जरुरत है |

किडनी ( गुर्दा ) को ख़राब होने से बचाएं :-
चिकित्सक के अनुसार किडनी या गुर्दा ख़राब होने की मुख्य वजह है मोटापा, मधुमेह और हायपरटेन्सन है | यदि मधुमेह और हायपरटेन्सन पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो किडनी को काफी क्षति पहुंचाते है |
जिन लोगों के परिवार में मोटापा, मधुमेह और हायपरटेन्सन का इतिहास रहा हो उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए | इसके अलावा सेल्फ मेडिकेसन अर्थात बेवजह दर्द निवारक गोलियां खाने की वजह से भी किडनी ख़राब होता है |

अतः इससे बचने का एक मात्र उपाय है- एलोवेरा जेल और कुछ पौष्टिक पूरक , अगर नियमित रूप से व्यक्ति सेवन करें तो मोटापा, मधुमेह और हायपरटेन्सन पर नियंत्रित रख सकते है | इसके सम्बन्ध कई बार मैं चर्चा कर चूका हूँ की एलोवेरा आज के प्रदूषित वातावरण के लिए नितान्त जरुरी है | शरीर के लिए यह एक महत्वपूर्ण खुराक है जिससे व्यक्ति किसी भी प्रकार के असाध्य रोग पर विजय प्राप्त कर सकते है |

जैसा की आज डॉक्टर सतेन्दर जी रांची वाले कर रहे है और वो डायलिसिस भी करा रहे है पर सप्ताह में एक बार जबकि पहले वो तीन बार से भी ज्यादा करा रहे थे |

यह बात प्रत्येक व्यक्ति को गांठ बांध लेनी चाहिए की शरीर के दो महत्वपूर्ण और जिन्दगी के आधार अंग है किडनी और ह्रदय | लिहाजा किडनी और ह्रदय के प्रति सदैव जागरूक रहना चाहिए |

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"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक |
अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

3 comments

Ratan Singh Shekhawat June 16, 2010 at 7:53 AM

रांची अकेले अकेले ही हो आये हमें तो बताया ही नहीं हम भी मिल आते डाक्टर साहब से :(

खैर डाक्टर साहब एलोवेरा रस पीकर जल्द स्वस्थ हो यही कामना है |

Udan Tashtari June 16, 2010 at 7:54 AM

हम नियमित सेवन कर रहे हैं...

निर्मला कपिला June 27, 2010 at 8:32 AM

ाच्छी जानकारी है धन्यवाद।

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