" "यहाँ दिए गए उत्पादन किसी भी विशिष्ट बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं है , यह उत्पाद सिर्फ और सिर्फ एक पौष्टिक पूरक के रूप में काम करती है !" These products are not intended to diagnose,treat,cure or prevent any diseases.

Sep 29, 2010

स्वस्थ्य मानसिकता सुन्दर विचार !

कार्यालय की व्यस्तता के वजह से आज मैं काफी दिनों के बाद आपके सामने आ रहा हूँ | मस्तिष्क में एक साथ कई विचारों का टकराव चल रहा है | एक तरफ ज्वलंत विषय जैसे राष्ट्रमंडल खेल तो दूसरी और जम्मू कश्मीर की समस्या | और भी कई ऐसे विचार मन में उभर के आ रहा है परन्तु सबसे खुसी की बात यह है की दुनिया भर की थुक्क्म पैजार और घोटाले पर घोटाले की खुलासे के बाद अंततः राष्ट्र की गौरव राष्ट्र मंडल खेल की शुरुआत होने जा रही है | राहत की बात यह भी है की हामारे यहाँ करीब करीब दुनिया के सारे खिलाड़ी आ रहे है, जो की पहले मना कर दिए थे |

इन सब के लिए जिम्मेदार रहा अपने ही देश की मिडिया, जिन्होंने सम्पूर्ण संसार में अपने देश का नाम पर जी भर के कीचड़ उछाला | राष्ट्र मंडल खेल से सम्बंधित अगर कोई खबर कहीं छपी है तो भ्रष्टाचार, बैमानी,दुर्घटना, बदहाल सड़के,पुल इत्यादि | पर क्या इतने पड़े पैमाने पर जो आयोजन है इसमें कोई अच्छाईयां भी होगी या नहीं ?

लेकिन कहीं भी मिडिया ने उसे सुर्खियाँ में नहीं लाया | तो क्या मिडिया की दायित्व सिर्फ गलत और भ्रष्ट बातें ही आम लोगों में परोसने का है | देश की अच्छी तस्वीर भी है और हम अपने देश पर गर्व करते है, राष्ट्रमंडल खेल का सिर्फ हिस्सा ही नहीं बल्कि दुनिया को दिखा देंगे की इस तरह के आयोजन को सही और स्वस्थ्य तरीके से सम्पन्न कराने के लिए देश बिल्कुल समर्थ है |


खैर ये तो रहा स्वस्थ्य मानसिकता वाली बाते जो हमेशा लोगों में होनी ही चाहिए | साकारत्मक सोच से आप को सही मार्गदर्शन मिलती है | नाकारात्मक सोच लोगों में पेशानियाँ,बीमारियाँ जैसे मानसिक रोगी, रक्तचाप,ह्रदय रोग पैदा करती है | क्यूँ नहीं हम हमेशा एक अच्छी सोच के साथ दिनों की शुरुआत करें ,ताकि दिन का अंत भी खुशहाल एवं सुखद हो |

आज के प्रतिस्पर्धात्मक व तीव्र गति के आधुनिक जीवन शैली में "स्वस्थ्य ही धन है", जैसे शब्द का कोई मायने नहीं रह गया है | जीवन का आपाधापी भागमभाग, विकृत आहार विहार और पाश्चात शैली इत्यादि में लोगों को समय तालिका ही बिगार दिया है | आजकल तो लोग जागने के समय पर सोते है और सोने के समय पर जागते है | इससे क्या स्वस्थ्य मानसिक का विकाश संभव है ? कदापि नहीं , अगर ताउम्र हम स्वस्थ्य जीवन जीना चाहते है, तो हमें अपने जीवन शैली में सुधर लाना चाहिए |


इन्हीं सबके कारण आज कल आमतौर पर लोगों में गंभीर माने जाने वाले रोग का संक्रमण हो रहे है | छोटे उम्र में चश्मा, बालों में सफेदी,मधुमेह, घुटनों में दर्द आदि देखा गया है | बच्चों में भी आजकल तनाव का माहौल है |इसके कई कारण है , इसके लेकिन आज के मुख्य कारण है अकेला परिवार जहाँ दिन भर बच्चे अकेले घर में रहते है उनके माता-पिता काम पर चले जाते है | फिर अपने आप को अकेला महशुस कर बच्चे धीरे-धीरे तनाव में रहने लगते है | और बाद में कई समस्या बच्चों को बिमारी के रूप में घेर लेती है |

दिनचर्या में आप आजके सबसे प्रसिद्द आयुर्वेदिक औषधि एलो वेरा का जूस का नियमित सेवन करें और अपने बच्चों को बिट्स न पिचेज जरुर दें और देखें फर्क सिर्फ कुछ ही महीनो में बच्चे की सारी समस्या स्वतः समूल नष्ट हो जायेंगे | बच्चों के लिए खासकर अमृत है बिट्स न पिचेज |
इस उत्पाद के सेवन से बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकाश होंगे और मंद बुद्धि बच्चों लिए तो ये मस्तिस्क का खुराक जैसा काम करेगा यानि सर्वश्रेष्ट उत्पाद है | इस उत्पाद का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है | अतः अपने घर में एलो वेरा जूस और बिट्स न पिचेज लाये और घर को स्वस्थ्य बनाए |


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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

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