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Sep 30, 2010

कायाकल्प का विकल्प प्राकृतिक चिकित्सा !

रूप और सौन्दर्य दोनों ही मानव के अभीष्ट है | जिनकी ओर मनुष्य स्वाभावतः आकर्षित होता है, मुग्ध होता है | किन्तु उन सब साधनों व बातों से अनभिग्य रहता है की जो उसके रूप सौन्दर्य को स्थायित्व देते है, उसकी काया सदा जवान बनाए रखते है, सही मायने में वे साधन जो उनका कायाकल्प करते है | बढती हुई उम्र को वृद्धावस्था को पुनः यौवन की ओर ले जाते है |

यदि वर्तमान युग की बात करे, तो युवक-युवतियां दोनों ही अपने सौन्दर्य व अपनी काया को सुन्दर कोमल-सुदृढ़ बनाए रखने में प्रयासरत तो है लेकिन मात्र कोस्मेटिक के सहारे जिसका कुछ ही समय बाद दुष्प्रभाव उजागर होने लगता है |कोस्मेटिक से सौन्दर्य प्राप्त करना कोई स्थायी विकल्प नहीं है हाँ, यह हमारे रूप लावण्य, त्वचा, बालों, आँखों इत्यादि को कुरूप बनाने का तो जरुर स्थायी विकल्प हो सकता है |


कायकल्प का मतलब सिर्फ बाहरी तौर पर नवीन बनाना नहीं है बल्कि इसका आशय है तन और मन को बहार से और अन्दर से पुर्णतः स्वस्थ्य-सुदृढ़ और सुन्दर बनाना | अपने अन्दर बढती उम्र के अनुसार उत्पन्न होती कमजोरी को, थकावट, आलस्य, रोग-विकार, आदि कई रोगों को नष्ट कर अपनी बढती उम्र को वहीँ विराम देकर पुनः नवीनता की ओर अग्रसर करना |

अतः अपने सौन्दर्य व कायाकल्प की देखरेख में आपके संतुलित सात्विक आहार-विहार से लेकर शारीरिक व्यायाम आवश्यक है और इन सबके लिए अत्यधिक आवाश्यक है आपका प्रकृति से जुड़ना |


क्यूंकि हमारा शरीर प्रकृति से मिलकर बना है, अग्नि, वायु,मिटटी,आकाश,पानी अतः हमारी देखभाल भी इन्ही पंचतत्वों के उत्पन्न पदार्थों से ही संभव है, न ही कोस्मेटिक व कैमिकल्स डालकर बनाए गए क्रीम,लोशन और जेल इत्यादि से |

शारीरिक सौन्दर्य व आंतरिक सौन्दर्य यानि ( उदर,यकृत,किडनी,आँतों, ह्रदय की स्वस्थ्यता ) को लम्बे समय तक कायम व सुचारू रखने के लिए आवश्यक है- संतुलित एवं पौष्टिक आहार | कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनो से प्राप्त सौन्दर्य कृत्रिम ही रहता है स्थायी नहीं |


कायकल्प में आहार की भूमिका :- भोजन में कार्बोहाईड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, शर्करा और खनिज लवण आदि पोषक तत्वों का समावेश शारीरिक सौन्दर्य के लिए आवश्यक है | शारीरिक -मानसिक स्वास्थ्य सौन्दर्य को द्रिघकाल तक स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए संतुलित आहार का सेवन बहुत आवश्यक है | संतुलित एवं सात्विक और संयमित भोजन का नियमित सेवन और सकारात्म्ल सोच, शारीरिक स्वास्थ्य एवं सौन्दर्य के लिए प्रार्थमिक आवश्यकता है |

शरीर में आवश्यक जल, रक्त तथा अन्य पोषक तत्वों की मात्र बनाए रखने के लिए भोजन में फल-सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए |


प्राकृतिक चिकित्सा में दूषित तत्वों को शरीर से निष्कासित किया जाता है,प्राकृतिक चिकित्सा में किसी औषधि का सेवन नहीं कराया जाता, फल, जूस व सब्जियां के माध्यम से पाचन क्रिया को तीव्र की जा सकती है, जिससे मॉल विसर्जन नियमित रूप से होता रहता है | इस प्रकार शरीर विभिन्न रोगों से मुक्त रहता है |

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अरे.. दगाबाज थारी बतियाँ कह दूंगी !

1 comments

Ratan Singh Shekhawat October 1, 2010 at 6:59 AM

बढ़िया स्वास्थ्य वर्धक जानकारी

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