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Apr 9, 2010

जड़ी-बूटी ( अलसी/तीसी दिव्य शक्ति से भरपूर )-भाग 2



इससे पहले के लेख में मैंने आपको अलसी के गुण से अबगत कराया है | आज आपको इसके औषधीय गुण के बारे में चर्चा करेंगे | चुकी किसी भी वनस्पति में अगर गुणों की भंडार हो तो उसके उपयोग से रोग से पीड़ितों को लाभ मिलेगा | ऐसी कई बीमारियाँ है जो अपने आप में लाइलाज कहा जा सकता है पर आप इसके उपयोग से निश्चित तौर पर आपका फायदा मिलेगा |

कमर तथा जोड़ों का दर्द ------------------- अलसी ( तीसी ) के तेल में सोइठ का चूर्ण तथा नमक मिलाकर गर्म करके मालिश करने से कमर तथा पीठ दर्द दूर हो सकता है | अथवा अलसी के तेल को सिद्ध करके रख ले ,जरुरत पड़ने पर इसका प्रयोग करें | सिद्ध करने की विधि इस प्रकार है :- २५० ग्राम तीसी के तेल में १५ ग्राम शोंठ चूर्ण व १५ ग्राम नमक डालकर धीमी आग पर पकाई | जब धुँआ उठने लगे तो इसे उतार कर शीशी में बंद करके रख ले | इसीस तेल का मालिश से पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द ,मसल्स में दर्द,करना |

पीसी हुई अलसी में इसबगोल मिलकर लेप लगाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है |
सिरदर्द------------- पीसी हुई अलसी को ठंढे पानी में मिलकर उसका लेप बनाकर सर के ऊपर लगाने से दर्द से रहत मिलती है |

कान दर्द -------------- अलसी ( तीसी ) के काढ़े को छानकर उसमे प्याज का रस मिलाकर कान में डालने पर कान दर्द में आराम होता है |

आँख के लाल होने पर
-------------- पीसी हुई तीसी को आँखों के कोरों पर लगाने से लालिमा से छुटकारा मिलता है |

श्वास और दमा -------- इस परिस्थिति में ५ ग्राम अलसी को ५० मिली लीटर पानी में उबालकर उस पानी को सुबह-शाम दो बार ले | इस कार्य को करने के लिए तीसी और पानी को रात्रि में फुलाने के बाद उस जल को सुबह उबल कर सेवन करना चाहिए | इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को ३ ग्राम तीसी लेकर इसे २५० ग्राम जल में अच्छी तरह उबल ले | पुनः इस जल को एक घंटे तक ढककर रखने के बाद शहद मिलकर सेवन करें, या सुखी खांसी व दम के लिए अत्यंत उपयोगी है |

सर्दी-जुकाम -------- भुनी तीसी के चूर्ण को शहद के साथ लेने से जुकाम में लाभ होता है ,साफ की हुई तीसी को कढाई में भुने | जब तीसी का सुगंध आने लगे तक इसे आग से उतार कर सूक्ष्म चूर्ण बना ले और फिर उसमे अलसी के बराबर मिश्री मिलाये |मिश्री और तीसी के इस मिश्रण १०-१५ ग्राम की मात्र को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ ले , यह सर्दी जुकाम ,कफ में फायदेमंद होगा |

वातजनित रोगों में तीसी ------ यह अत्यंत उपयोगी औषधि है , इसके लिए ५० ग्राम तीसी को कडाही में भुन ले,फिर इसे चूर्ण करें ,इसमें ५० ग्राम मिश्री मिलाए,फिर १० ग्राम लाल मिर्च मिलकर इसकी ३ से ६ ग्राम की गोली तैयार करें , इसकी एक छोटी गोली बच्चे को अवाम बड़ी गोली व्यस्क को सुबह दे, इससे कफ और वातरोग में रहत मिलती है ,इस गोली को लेने के एक घंटे तक पानी का सेवन नहीं करना चाहिए |

सुजाक ------------- शुद्ध तीसी का ४ से ६ बूंद तेल नियमित सुबह-शाम शिशन पर मवाद साफकर लगाने से गिनोरिया ( सुजाक) ठीक हो जाता है |

मूत्र विकार ----------------- मुलेठी और तीसी की समान मात्रा लेकर उसे पीसकर चूर्ण बना ले,इस चूर्ण की ४० से ५० ग्राम मात्रा १ लीटर पानी में उबले ,फिर इसे अछि तरह ठंढा कर,इसे छानकर बोतल में सुरक्षित रख ले,इस जल की २३ से ३० ग्राम मात्रा तिन-तिन घंटे के अन्तराल पर सेवन करें, इससे पेशाब सम्बंधित जलन,दर्द,मवाद,रक्त आदि की शिकायत ठीक हो जाएगी |


वीर्य रोग ------- इसमें तीसी को कलि मिर्च और शहद के साथ सेवन करने से पुरुषों में वीर्य और शुक्रानुजनित विकार दूर हो जाते है |

जलने पर-------- शुद्ध तीसी के तेल के साथ चुने के पानी को लेकर इसे अच्छी तरह से फेंटे,यह सफ़ेद मलहम की तरह हो जायेगा ,इसे जली हुई जगह पर दिन में दो बार लगाए, इससे जलन और दर्द से निजत मिलेगी |

गांठ और ट्यूमर ---------- तीसी व हल्दी के चूर्ण को पानी या दूध में मिलकर सुगमता से पका कर लेप बना ले ,इस गर्म लेप को पान के पते पर रखकर बांधे,इससे गांठ और ट्यूमर या गांठ वाली जगह पर रखकर बांधे, यह क्रिया दिन में ४-५ बार करते रहे ,इससे गांठ और ट्यूमर के दर्द और जलन से छुटकारा मिलेगा, यह मवाद नहीं बनने देगा |

ऐसा लगता है की एलोवेरा जेल और इसके पौष्टिक पूरक अगर नियमित कोई ब्यक्ति सेवन करें तो उन्हें ऐसी वैसी कोई भी बीमारियाँ कभी नहीं हो सकता |और साथ में अलसी जैसे महानतम जड़ी-बूटी वाली औषधि | यह मानव जाती के लिए इस धरती पर वरदान स्वरुप है | आहार और दिनचर्या को ठीक कर मनुष्य जीवन पर्यंत सुखी रह सकता है |

सावधानी ---------- तीसी के बीज में विषैला ग्लुकोसाइड पाया जाता है ,अतः अधिक मात्रा में इसे पशुओं को खिलाना खतरनाक है |
कच्ची तीसी का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए ,क्योंकि इसमें पायी जाने वाली हाइड्रोजन साइनाईट विषाक्त प्रभाव डालती है |



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ताऊ .इन

1 comments

Yogesh November 13, 2011 at 8:30 PM

तीसी के बीज में विषैला ग्लुकोसाइड पाया जाता है ,अतः अधिक मात्रा में इसे पशुओं को खिलाना खतरनाक है |
कच्ची तीसी का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए ,क्योंकि इसमें पायी जाने वाली हाइड्रोजन साइनाईट विषाक्त प्रभाव डालती है |

----------- kachchi alsi se kya matlab hai... roti me milakar ya ..boil karke to kitni bhi alsi le sakte hai na... matlak koi nuksan to nahi karegi

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