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Apr 6, 2010

Aloe Vera (एलोवेरा व घृतकुमारी की औषधीय महता )


आज का युग विकाश युग है | जहाँ आबादी निरंतर घनी से घनी होती जा रही है | जहाँ जंगल हुआ करते थे आज वहां बहुमंजिला इमारत ,एवम खुबसूरत व्यव्शायिक केंद्र बन गया है | पहले शुद्ध हवा एवम जल मिला करता था पर आज हमारी खुद की कर्मों के वजह से दूषित हवा तथा जल हमें पुरूस्कार स्वरुप मिल रहा है |


दरअसल वर्तमान में होने वाला विकास पेड़-पौधों के विनाश की कीमत पर है | किसी ज़माने में अनेक प्रकार के दिव्य वनस्पतियाँ भारत में यहाँ-वहां कदम-कदम पर बिखरी पड़ी थी ,वहां आज वे सभी लुप्त है | और जो हमारे आसपास है तो उनकी दिव्यता की जानकारी नहीं है |


अमृत का नाम सुनते है मस्तिस्क में एक ऐसी काल्पनिक दृश्य उभर कर आती है जो जरा सी बूंद भर और मृत्यु को दूर कर व्यक्ति को अक्षय यौवन और अमरता प्रदान करने की क्षमता रखता है |एक ऐसा पेय पदार्थ जो मनुष्य को ओजस्वी ,तेजस्वी बना दे | उनमे इतनी रोग निवारण क्षमता बढ़ा दे कि बड़े से बड़े रोग भी उनके सामने घुटने टेक सके |


वे व्याधियां जो स्वाभाविक रूप से सभी को सताती है ,उनमे बुढ़ापा प्रथम है | वृधावस्था में सभी इन्द्रियों का कार्य क्षमता घट जाता है , इसका निराकरण करने के लिए औषधियां है ,अगर मनुष्य इस औषधि का प्रयोग अपने जीवन में करें तो पुनः वो सब कुछ प्राप्त कर सकता है जिससे बढ़ते उम्र में भी शारीरिक और मानसिक रूप से सदा युवा नजर आयेंगे |

अमृत कि चाह सभी को रही , चाहे सुर हो, असुर हों अथवा नर हों | देवासुर संग्राम के बारे में सभी जानते है | यह संग्राम ही "अमृत" पर अधिकार के लिए हुआ था | दरअसल अमृत का अविष्कार इसलिए किया गया था कि इसका प्रयोग करें तथा जरा और व्याधि से मुक्त होकर जियें | लेकिन यह देव मात्र का पेय बन गया है | यह इतना प्रसिद्ध है कि आज तक हम सब चाहते है कि काश | हमें भी अमृत का एक बूँद ही मिल जाये,लेकिन दुर्भाग्य | समय के फेरबदल में अमृत का प्रयोग कालकवलित हो गया |

हमारे बिच एक ऐसा औषधि है जो इस धरती पर अमृत सामान है | यह वो पौधा है जो आज विश्व के प्रत्येक भाग में पाए जाते है | और जिसके उपयोग से 220 प्रकार के बिमारियों में लाभ होता है | जिसका नाम है Aloevera , घ्रित्कुमारी,ग्वारपाठा, कुमारी,क्वारगंदल ,घी ग्वार इत्यादि | एलोवेरा में चमत्कारी गुण के कारण ही आज के युग का अमृत माना जाता है |




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"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक | Gyan Darpan ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

1 comments

Ratan Singh Shekhawat April 6, 2010 at 7:00 AM

अति उत्तम जानकारी | हमने तो इस अमृत का नियमित सेवन शुरू कर रखा है जी |

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